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Monday,03-August-2026
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उत्तर प्रदेश उपचुनाव में सहानुभूति कार्ड का होगा लिटमस टेस्ट

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Uttar-Pradesh-By-elections

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की सात सीटों के लिए उपचुनाव हो रहे हैं। इसमें चार सीटों पर किसी ना किसी विधायक के निधन के कारण चुनाव हो रहा है। चुनावी बयार में सहानुभूति काफी महत्व रखती है।उपचुनावों में सहानुभूति का मुद्दा कितना प्रमुख है, इसका लिटमस टेस्ट होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम में बल्लेबाज रह चुके चेतन चौहान अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से 2017 में विधायक चुने गए थे। क्रिकेट से संन्यास लेकर वह राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। चौहान योगी सरकार में सैनिक कल्याण, होम गार्ड, पीआरडी, नागरिक सुरक्षा विभाग के मंत्री थे। उनका बीते दिनों कोरोना संक्रमण से निधन हो गया था। इस सीट पर उनकी पत्नी संगीता चौहान को भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा है। चौहान जनता के बीच में खासे लोकप्रिय रहे हैं। वह सांसद भी रह चुके थे। इस कारण उनका जनता से काफी जुड़ाव रहा है। उनकी पत्नी के साथ चेतन की सहानुभूति और पार्टी की ताकत है। यह उन्हें कितना सफल बनाएगी, यह तो चुनाव परिणाम बताएंगे।

बुलंदशहर से विधायक रहे वीरेन्द्र सिरोही का प्रदेश की राजनीति में अच्छा रसूख था। सिरोही सामान्य से शिखर पर पहुंचे थे। भाजपा और बसपा के गठबंधन से बनी सरकार में मायावती के मुख्यमंत्री कार्यकाल में वीरेंद्र सिंह सिरोही राजस्व मंत्री बने। उनके निधन से खाली हुई सीट पर उनकी पत्नी ऊषा सिरोही को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

चेतन और सिरोही के प्रति जनता के लगाव का उपचुनाव में इम्तिहान होना है। हलांकि भाजपा ने इसके ठीक उलट घाटमपुर सीट पर कैबिनेट मंत्री रहीं कमलरानी वरूण की जगह परिवार से बाहर के व्यक्ति को टिकट दिया है। ऐसे ही भाजपा ने देवरिया की सदर सीट पर दिवंगत जन्मेजय सिंह के बेटे अजय सिंह को टिकट नहीं दिया। वह बागी होकर निर्दलीय अपने पिता की सहानुभूति के बदौलत मैदान में कूदे हैं।

इसके अलावा जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी से विधायक रहे पारसनाथ यादव के निधन से रिक्त होने के कारण चुनाव हो रहा है। यहां से वह कई बार चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा लहर में 2017 में भी वह बाजी मार गये थे। सपा ने यहां उनके बेटे लकी को उम्मीदवार बनाया है। उनको अपने पिता की विरासत का कितना लाभ मिलेगा। भाजपा को कैसे परास्त कर पाएंगे। यह तो आने वाले नतीजे ही बता पाएंगे।

कभी-कभी सहानुभूति बेअसर भी रहती है। इसका उदाहरण बिजनौर जिले की नूरपुर सीट पर देखने को मिल चुका है। भाजपा विधायक लोकेन्द्र की निधन से खाली हुई इस सीट पर भाजपा ने उनकी पत्नी को टिकट दिया था। लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सकी थी। यहां से सपा के नईमुल हसन विजय हुए थे।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि उपचुनाव में सभी पार्टियों ने साहनुभूति कार्ड जरूर खेला है। अमरोहा के नौगांवा में चेतन चैहान, बुलंदशहर से वीरेन्द्र सिरोही और मल्हनी विधानसभा से पारस नाथ यादव इन तीनों सीटों पर नेताओं की बड़ी छवि थी। इन लोगों का अपने क्षेत्र की जनता से जुड़ाव रहा है। सहानुभूति चुनाव में काम करती है। इसका उदाहरण कानपुर देहात की सिंकदरा सीट पर मथुरा पाल के बेटे अजीत को सहानुभूति के कारण ही जीत मिली थी। पार्टी ने इसी बात का ख्याल रख कर टिकट पर दांव लगाया है। उन्होंने बताया कि ऐसे चुनावों में सहानुभूति फैक्टर जरूर काम करती है।

राष्ट्रीय समाचार

भारतीय शेयर बाजार कच्चे तेल में नरमी से उछला; सेंसेक्स 79,000 के करीब

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भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ खुला। इस दौरान सेंसेक्स 788.70 अंक या 1.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,883.34 और निफ्टी 189.10 अंक या 0.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,572.70 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार का नेतृत्व मेटल और एफएमसीजी शेयर कर रहे थे। इस कारण सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी टॉप गेनर्स थे। निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑयल एंड गैस में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था।

गिरने वाले सूचकांकों में निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 274 अंक या 0.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,181 औक निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 164 अंक या 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,513 पर था।

सेंसेक्स पैक में इंडिगो, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, इन्फोसिस, इटरनल, एलएंडटी, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, बीईएल, एचयूएल, पावर ग्रिड, ट्रेंट, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचसीएल टेक गेनर्स थे। सन फार्मा, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल लूजर्स थे।

शेयर बाजार में तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान पर हमले रोकने का ऐलान किया है। इससे कच्चे तेल में भी बड़ी कमी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 83.66 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80.02 डॉलर प्रति बैरल पर था।

ज्यादातर एशियाई बाजारों में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंधाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.53 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक करीब एक प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए शांति समझौते (एमओयू) पर कायम रहने के लिए मजबूर करना चाहिए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि एमओयू पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों के बीच एक राय है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि उनका मानना ​​है कि यह एमओयू भविष्य में ईरान के विदेशी संबंधों का केंद्र बिंदु होगा।

उन्होंने कहा, “हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।”

इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान हर दुश्मन की धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है। उन्होंने इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिए जाने को खारिज कर दिया।

अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।”

यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए हमले टालने की बात कहने के बाद आया।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आतंक, ताकत और शक्ति के उस स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखा गया।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला टाल दिया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का हवाला दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।

इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्ते के अंत में हमले शुरू कर सकते हैं।

18 जून को, ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि, उनके बीच हाल ही में हुए तनाव के कारण बातचीत का नतीजा अधर में लटका हुआ है।

अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए थे और इनका मकसद कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

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राजनीति

चार दिन का सत्र औपचारिकता न बने, जनहित के मुद्दों पर हो गंभीर चर्चा : मायावती

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उत्तर प्रदेश विधानमंडल के सोमवार से शुरू हो रहे चार दिवसीय मानसून सत्र को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने उम्मीद जताई है कि सदन की कार्यवाही जनहित और जनकल्याण के मुद्दों पर केंद्रित रहेगी।

उन्होंने कहा कि यह सत्र संकीर्ण दलगत राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए, बल्कि प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर चर्चा का मंच बनना चाहिए।

बसपा मुखिया मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश विधानमण्डल का मानसून सत्र आज दिनांक 3 अगस्त से शुरू हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल मिलाकर चार कार्य दिवस वाले इस सत्र में अगले दिन दिनांक 4 अगस्त को सरकारी खर्चे सम्बंधी अनुपूरक बजट राज्य सरकार विधानसभा में पेश करेगी।

उन्होंने कहा कि हालांकि यह सत्र अति-अल्पकालीन है, फिर भी लोगों की यही अपेक्षा है कि यूपी विधानमंडल का यह सत्र, संसद के वर्तमान सत्र की तरह ही, देश व जनहित, जनकल्याण एवं जव्लन्त जन समस्याओं के प्रति समर्पित होने के बजाय, संकीर्ण दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप व हंगामा आदि की पूरी तरह से भेंट ना चढ़ जाए।

मायावती ने कहा कि वैसे इस अल्पकालीन सत्र को लेकर लोगों की यह चिंता भी स्वाभाविक ही है कि अफसरशाही (ब्यूरोक्रेसी) को संविधान के शपथ के प्रति जवाबदेह एवं जनहित, जनकल्याण को लेकर उत्तरदायी बनाए रखने के लिए जरूरी है कि विधायिका का संवैधानिक प्रभाव किसी भी प्रकार से कम ना होने पाए।

उन्होंने कहा कि इसके लिए यूपी के विधानमंडल का लगातार घटते सत्र के साथ-साथ विधानसभा का इतना संक्षिप्त सत्र क्या अपना वास्तविक उद्देश्य हासिल कर पायेगा या फिर केवल औपचारिकता ही रह जायेगी?

बसपा प्रमुख ने कहा कि देश के संविधान व यहां लोकतंत्र की मजबूती तथा अफसरशाही पर लगाम के लिए विधायिका की मजबूती अति-महत्वपूर्ण और इसके लिए सरकार व विपक्ष दोनों का गंभीर संसदीय आचरण जरूरी है।

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