अंतरराष्ट्रीय समाचार
बाइडन को भारतीय-अमेरिकी का जबरदस्त समर्थन, हैरिस के आने से बढ़ा उत्साह
एक नए सर्वे में पता चला है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन को भारतीय-अमेरिकी समुदाय का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। वहीं, पार्टी की उपराष्ट्रपति पद की भारतीय मूल की उम्मीदवार कमला हैरिस ने चुनाव के मद्देनजर जोश और उत्साह बढ़ा दिया है।
अमेरिका में 3 नवंबर को चुनाव है।
गुरुवार को जारी सर्वेक्षण में बताया गया है कि पंजीकृत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं में से 72 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने बाइडन-हैरिस के समर्थन में मतदान करने की योजना बनाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को महज 22 प्रतिशत का समर्थन हासिल है।
2016 पोस्ट-इलेक्शन नेशनल एशियन-अमेरिकन सर्वे के अनुसार, 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिलरी क्लिंटन को मिले 77 प्रतिशत समर्थन के मुकाबले बाइडन को मिल रहे समर्थन में पांच प्रतिशत की कमी देखने को मिल रही है। वहीं, पिछले चुनाव में 16 प्रतिशत की तुलना में ट्रंप के समर्थकों में छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कार्नेगी द्वारा प्रकाशित विश्लेषण वाले पेपर के अनुसार, नए सर्वेक्षण से पता चलता है कि ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच घनिष्ठ संबंध रिपब्लिकन की ओर भारतीय अमेरिकी मतदाताओं को रिझाने में खास कामयाब नहीं रही है।
विश्लेषण में कहा गया कि उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के तौर पर हैरिस का चयन से ‘वोटों की संख्या में बदलाव’ कुछ खास नहीं होगा लेकिन इसने डेमोक्रेट्स के अंदर उत्साह जरूर पैदा किया है।
‘इंडियन अमेरिकन एटीट्यूड्स सर्वे'(आईएएएस) का आयोजन पिछले महीने पोलिंग ऑर्गनाइजेशन यूजीओवी और कानेर्गी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी और अध्ययन से जुड़े पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी में किया गया था।
आईएएएस पोल ने पिछले महीने जारी एशियन अमेरिकन वोटर सर्वे (एएवीएस) में 65 प्रतिशत की तुलना में बाइडन को सात प्रतिशत अधिक समर्थन दिखाया और ट्रंप को एएवीएस में दर्शाए 28 प्रतिशत के मुकाबले 6 प्रतिशत कम समर्थन दर्शाया।
आईएएएस पोल के कानेर्गी विश्लेषण ने कहा कि इसने और एएवीएस दोनों ने दिखाया कि 54 प्रतिशत एशियाई भारतीयों को डेमोक्रेट समर्थक के रूप में पहचाना जाता है, जबकि 57 प्रतिशत इसके सदस्यों के रूप में पंजीकृत हैं, और 16 प्रतिशत रिपब्लिकन के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनमें से 13 प्रतिशत पार्टी सदस्य के रूप में पंजीकृत हैं।
39 प्रतिशत से अधिक भारतीय-अमेरिकियों ने बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी भारत-अमेरिका संबंधों पर बेहतर काम करती है, जबकि 18 प्रतिशत ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी बेहतर है।
विश्लेषण में कहा गया है कि यह डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए उनकी मूल प्राथमिकताओं को अच्छी तरह से दर्शा सकता है।
इसने कहा कि 21 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने कोविड -19 महामारी प्रभावित अर्थव्यवस्था को शीर्ष मुद्दे के रूप में चुना और स्वास्थ्य संबंधी समस्या 20 प्रतिशत के लिए मुख्य मुद्दा है।
विश्लेषण जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देवेश कपूर, कानेर्गी के दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव, पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी की पीएचडी छात्रा सुमित्रा बद्रीनाथन ने लिखा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मेलोनी ने ‘मित्र’ प्रधानमंत्री मोदी को दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और सफलता की कामना की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री को ‘मित्र’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने लिखा, “मैं ‘अपने मित्र’ पीएम नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देती हूं।”
उनके अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा संपन्न और सफल बने रहने की कामना करते हुए उन्होंने भारत और इटली के बीच गहरी दोस्ती और आपसी सहयोग को आगे भी मजबूत करते रहने की भी बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देने वालों का तांता लगा है। अमेरिका से लेकर अफ्रीकी देश अपनी शुभकामनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंचा रहे हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खास संदेश के साथ जन्मदिन की बधाई दी। इसमें उन्होंने भारत-रूस की साझेदारी को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की और ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मिले सम्मान के लिए आभार जताया।
क्रेमलिन ने संदेश का कुछ हिस्सा साझा किया है। पीएम को सम्मानित शख्स बताते हुए लिखा, “आप (पीएम मोदी) अपने देशवासियों और वैश्विक स्तर पर बहुत अधिक सम्मानित शख्स हैं। भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में आपके व्यक्तिगत योगदान को जितना भी सराहा जाए, कम है।”
रूसी राष्ट्रपति ने हाल ही में दिल्ली में हुई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर) के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी। इसका जिक्र भी संदेश में है। भारत में मिली मेहमाननवाजी की प्रशंसा करते हुए आगे लिखा,” पिछले सप्ताह नई दिल्ली की मेरी यात्रा के दौरान मुझे और रूसी प्रतिनिधिमंडल को मिले गर्मजोशी भरे और स्नेहपूर्ण स्वागत और मेहमाननवाजी के लिए मैं अपना आभार व्यक्त करना चाहता हूं।”
वहीं इजरायली राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि आपके कौशल ने भारत को दुनिया के दमदार देश के तौर पर स्थापित कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
गाजा में इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त बहुमंजिला इमारत गिरी, 11 बच्चों समेत 21 लोगों की मौत

पश्चिमी गाजा शहर में एक रिहायशी इमारत गिरने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों में 11 बच्चे और 6 महिलाएं शामिल हैं। इस हादसे में 25 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता महमूद बासल ने बताया कि ‘अल-सादा’ नाम की छह मंजिला इमारत बुधवार तड़के ढह गई। यह इमारत पहले इजरायली बमबारी में क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। यह इमारत निकट पूर्व में फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुख्यालय के पास स्थित थी। इस इमारत में लगभग 100 विस्थापित लोग रह रहे थे।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बासल ने कहा कि बचाव टीमों ने 16 घंटे तक चले अभियान के दौरान 45 लोगों को सुरक्षित निकाला और 21 शव बरामद किए। उन्होंने बताया कि 35 अन्य लोग खुद ही निकलने में सफल रहे।
इमारत के मलबे के बाहर दर्जनों शोकाकुल परिजन इकट्ठा हुए। कई लोग अपने हाथों से ही मलबा हटाकर अपने प्रियजनों को खोजने की कोशिश करते दिखाई दिए। 54 वर्षीय लुआय अल-अजला ने इस हादसे में अपने परिवार के लगभग 10 लोगों को खो दिया।
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनों और उपकरणों को लाने पर इजरायल की पाबंदियों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
गाजा में हमास की ओर से संचालित मीडिया कार्यालय ने एक बयान में कहा कि पूरे गाजा पट्टी में 8,500 से अधिक लापता लोग अब भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं। बयान के अनुसार, भारी मशीनरी और बचाव उपकरणों की कमी के कारण उन्हें निकालना मुश्किल हो रहा है। कार्यालय ने हजारों क्षतिग्रस्त इमारतों को टाइम बम जैसा खतरा बताया।
महमूद बासल ने चेतावनी दी कि सर्दियों के करीब आने के साथ 2,000 से अधिक रिहायशी इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और युद्धविराम की गारंटी देने वाले देशों से अपील की कि बचाव उपकरणों को गाजा में आने की अनुमति दिलाई जाए।ऐसा न होने पर ‘कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।’
यह इमारत ऐसे समय में गिरी है जब युद्धविराम के उल्लंघन की घटनाएं जारी हैं। अक्टूबर 2025 में लागू हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, हमास और इजरायल के बीच चल रही बातचीत में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मक्का के पास ड्रोन हमले पर भारत ने जताई गहरी चिंता, क्षेत्र में जल्द शांति बहाली की उम्मीद

भारत ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर बुधवार को गहरी चिंता जताते हुए क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में जारी बयान में कहा कि मक्का के पास हुई यह घटना शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए विशेष रूप से चिंताजनक है।
उन्होंने कहा, “मक्का के पास हुए ड्रोन हमले पर हमें गहरी चिंता है। भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हमलों और नागरिकों के जीवन तथा बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली हर कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है। मक्का के पास हुई यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि दुनिया भर के मुसलमानों के लिए इस शहर का अत्यंत पवित्र महत्व है।”
जायसवाल ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होगी।
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस घटना के बाद आया है, जब सऊदी अरब की रॉयल एयर डिफेंस फोर्स ने मंगलवार शाम मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले हूती विद्रोहियों द्वारा दागे गए एक ड्रोन को मार गिराया।
यमन में वैध सरकार की बहाली के लिए गठित गठबंधन के आधिकारिक प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी ने बताया कि मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्स ने मक्का के दक्षिणी क्षेत्र में इस ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया।
अल-मालिकी ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने की यह दूसरी कोशिश है। इससे पहले 27 जुलाई 2017 को बैलिस्टिक मिसाइल से भी ऐसा प्रयास किया गया था। उन्होंने इसे “आतंकी और शर्मनाक कृत्य” बताते हुए कहा कि यह दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने और उमराह यात्रियों में दहशत फैलाने की कोशिश थी।
उन्होंने कहा कि दो पवित्र मस्जिदों और उमराह यात्रियों की सुरक्षा “रेड लाइन” है और गठबंधन बल हूती मिलिशिया की ऐसी गतिविधियों के खिलाफ आवश्यक और कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
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