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Thursday,14-May-2026
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कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल को योगी ने दी मंजूरी, लखनऊ और गोरखपुर में होगा परीक्षण

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Yogi-Adityanath

कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में कोवैक्सीन का मानव परीक्षण लखनऊ और गोरखपुर में किये जाने की इजाजत मुख्यमंत्री योगी ने दे दी है। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल उत्तर प्रदेश के इन दो शहरों में करने को लेकर मंजूरी दी गई है। इसके लिए संजय गांधी पीजीआई के निदेशक डॉ. आर.के. धीमन को लखनऊ का नोडल अधिकारी और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. गणेश कुमार को गोरखपुर का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह लोग भारत बॉयोटेक के वैज्ञानिक नोडल अधिकारियों के सहयोग से वैक्सीन का क्लीनकल ट्रायल करेंगे।

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने इसका आदेश जारी कर दिया है। कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए वैक्सीन बनायी जा रही है। कोवैक्सीन की क्षमता व सुरक्षा का पता लगाने के लिए यह ट्रायल होगा। मानव पर होने वाला यह तीसरे चरण का प्रयोग संवेदनशील होता है। कंपनी इस महीने के अंत या फि र अक्टूबर के पहले सप्ताह में तीसरे चरण का ट्रायल शुरू कर सकती है।

भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) व राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआइवी) के साथ मिलकर यह पहला स्वदेशी टीका कोवैक्सीन तैयार कर रहा है। फि लहाल दो चरण के ट्रायल किए जा चुके हैं। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि तीसरे चरण का ट्रायल यूपी में लखनऊ व गोरखपुर में करने को मंजूरी दी गई है। इसमें इन दो संस्थानों के साथ-साथ और लोगों पर भी इसका परीक्षा किया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन के तीसरे चरण में देखा जाता है कि लोगों की बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हुई है या नहीं। इसका कोई दुष्परिणाम तो नहीं हो रहा है। टीका कोवैक्सीन के ट्रायल के तहत कोरोना के फ्रंट लाइन वर्कर व अन्य अलग-अलग उम्र के लोगों को टीका लगाया जाता है। टीका लगाने से पहले एंटीबाडी चेक की जाती है, अगर एंटीबाडी शून्य है तो टीका लगाया जाता है। फि र दोबारा खून के नमूने की जांच होती है, अगर एंटीबाडी बन रही है तो टीका काम कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दो और भारतीय गंतव्य वाले एलपीजी जहाजों ने पार किया हॉर्मुज स्ट्रेट

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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दो और भारतीय गंतव्य वाले एलपीजी जहाजों ने हॉर्मुज स्ट्रेट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। यह जानकारी रिपोर्ट्स में दी गई।

लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) जहाज सिमी हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान अपने ट्रांसपोंडर को कुछ समय तक बंद रखने के बाद गुरुवार को ओमान की खाड़ी में देखा गया।

अन्य एलपीजी जहाज एनवी सनशाइन ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान कुछ ऐसा ही किया।

यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका में तनाव बना हुआ है और हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की रुवैस रिफाइनरी से एलपीजी से लदा एनवी सनशाइन जहाज को आखिरी बार भारत के मंगलौर की ओर जाते हुए देखा गया था।

इसी बीच, सिमी कतर के रस लाफान बंदरगाह से गुजरात के कांडला तक ईंधन ले रहा है।

इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंस ने कहा था कि ईरान के साथ युद्धविराम “लाइफ सपोर्ट” पर हैं, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है और कई मुद्दों जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम रोकने और हॉर्मुज स्ट्रेट के कंट्रोल जैसे मुद्दों को लेकर विवाद बना हुआ है।

इससे अलावा ट्रंप ने हाल ही में ईरान की ओर से भेजे गए शांति प्रस्ताव को अस्वीकार्य बता दिया था।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ईरान द्वारा अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से प्रस्तुत प्रतिक्रिया की समीक्षा की है और प्रस्ताव पर असंतोष व्यक्त किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने ताजा अमेरिकी शांति पहल पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान के माध्यम से दी है, जो तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल, एलएनजी और ईंधन की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा भारत भी आता है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

यूएस की कंपनियों के लिए चीन में और भी बड़े मौके होंगे: शी जिनपिंग

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी ऐतिहासिक मीटिंग के दौरान अमेरिकी अधिकारियों से भी मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए और भी बड़े मौके होंगे।

ट्रंप के साथ टेस्ला के मालिक एलन मस्क, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और एप्पल के टिम कुक समेत कई अमेरिकी बिजनेस लीडर्स बीजिंग गए हैं।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने कहा, “चीन के खुलने का दरवाजा और भी बड़ा होता जाएगा। चीन, अमेरिका के साथ आपसी फायदे वाले सहयोग को मजबूत करने का स्वागत करता है। मेरा मानना ​​है कि चीन में अमेरिकी कंपनियों के लिए और भी बड़े मौके होंगे।”

अमेरिकी सीईओ के समूह में एयरोस्पेस से लेकर टेक और बैंकिंग तक की इंडस्ट्री शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के डेलिगेशन में एप्पल के सीईओ टिम कुक और टेस्ला और स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क के साथ-साथ ब्लैकरॉक, ब्लैकस्टोन, बोइंग, कारगिल, सिटी, सिस्को, कोहेरेंट, जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) एयरोस्पेस, गोल्डमैन सैक्स, इलुमिना, मास्टरकार्ड, मेटा, माइक्रोन, क्वालकॉम और वीजा के सीनियर एग्जीक्यूटिव शामिल हैं।

व्हाइट हाउस की लिस्ट में शामिल एग्जीक्यूटिव के तौर पर ब्लैकरॉक के लैरी फिंक, ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन, बोइंग की केली ऑर्टबर्ग, कारगिल के ब्रायन साइक्स, सिटी की जेन फ्रेजर, सिस्को के चक रॉबिंस, कोहेरेंट के जिम एंडरसन, जीई एयरोस्पेस के एच. लॉरेंस कल्प, गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन, इलुमिना के जैकब थायसेन, मास्टरकार्ड के माइकल मिबैक, मेटा की डिना पॉवेल मैककॉर्मिक, माइक्रोन के संजय मेहरोत्रा, क्वालकॉम के क्रिस्टियानो अमोन और वीजी के रयान मैकइनर्नी शामिल हैं।

जिनपिंग के साथ बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने शी से कहा, “हमने दुनिया के टॉप 30 लोगों से पूछा। उनमें से हर एक ने हां कहा और मुझे कंपनी में दूसरे या तीसरे नंबर के लोग नहीं चाहिए थे। मुझे सिर्फ टॉप वाले चाहिए थे। और वे आज यहां आपको और चीन को सम्मान देने आए हैं और वे व्यापार करने के लिए उत्सुक हैं।”

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राष्ट्रीय समाचार

भविष्य के युद्धों की तैयारी: सेना और नौसेना के बीच हुआ अहम समझौता

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देश की सुरक्षा को और मजबूती देने के लिए भारतीय सेना व भारतीय नौसेना ने ‘मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन ऑन अफिलिएशन’ को मंजूरी दी है। गुरुवार 14 मई को दोनों सेनाओं के बीच ‘संबद्धता समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य थलसेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त कार्यप्रणाली को बढ़ावा देना है। भविष्य के बदलते युद्ध स्वरूप को देखते हुए आर्मी और नौसेना के बीच हुआ यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है।

सैन्य बलों के अनुसार यह समझौता भारतीय सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता, एकीकरण और बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसका उद्देश्य भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप आधुनिक, एकीकृत और बहु-आयामी सैन्य क्षमता विकसित करना है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि देश की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।

गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तीनों सेनाओं के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला था। सेना, नौसेना और वायुसेना के समन्वित प्रयासों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को उल्लेखनीय सफलता दिलाई। इस अभियान ने यह साबित किया कि भविष्य के सैन्य ऑपरेशन में संयुक्त और बहु-आयामी सैन्य संचालन कितने महत्वपूर्ण होंगे। इस समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना और भारतीय नौसेना की विभिन्न संरचनाओं, रेजीमेंटों, संस्थानों, प्रतिष्ठानों और युद्धपोतों के बीच संस्थागत सहयोग को औपचारिक रूप देना है।

इसके माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाने, परिचालन समन्वय मजबूत करने और दीर्घकालिक पेशेवर संबंध विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। समझौते के तहत आर्मी और नौसेना के अधिकारियों तथा जवानों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचालन प्रणाली, प्रशिक्षण व्यवस्था और जिम्मेदारियों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त गतिविधियों, पेशेवर आदान-प्रदान, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और परिचयात्मक दौरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

इससे विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग विकसित होगा। गुरुवार को हुए इस समझौता ज्ञापन पर भारतीय सेना की ओर से एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक और भारतीय नौसेना की ओर से चीफ ऑफ पर्सोनल वाइस एडमिरल गुरचरण सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ और नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन भी मौजूद रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई मौकों पर कह चुके हैं कि वर्तमान समय में सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल बना हुआ है और तेजी से बदल रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल देश की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के समुद्री और आर्थिक हितों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। भारतीय नौसेना देश के समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने और निर्बाध व्यापार संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वहीं, भारतीय सेना भारतीय उपमहाद्वीप की रक्षा, स्थिरता और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी निभाती है। भविष्य के सैन्य अभियानों में तेजी से निर्णय लेने, अलग-अलग क्षेत्रों में समन्वय स्थापित करने और साझा संचालन क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। इसी कारण सेना और नौसेना के बीच मजबूत तालमेल और निर्बाध सहयोग को आवश्यक माना जा रहा है।

समझौता ज्ञापन भविष्य में भारतीय सेना और भारतीय नौसेना के बीच और अधिक अंतर-सेवा संबद्धताओं का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। साथ ही, यह संबद्ध गतिविधियों के संचालन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश उपलब्ध कराएगा, ताकि दोनों सेनाओं के बीच सहयोग को संस्थागत रूप से और मजबूत बनाया जा सके।

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