खेल
ओलम्पिक की तैयारी के लिए अमेरिका जाएंगे मुक्केबाज विकास
ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई कर चुके मुक्केबाज विकास कृष्ण 2021 टोक्यो ओलम्पिक के लिए बनाई गई टारगेट पोडियम स्कीम (टॉप्स) के माध्यम से पेशेवर ट्रेनिंग के लिए अमेरिका रवाना होने के लिए तैयार हैं।
विकास को बस अब भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक संदीप प्रधान से मंजूरी मिलने का इंतजार है।
विकास ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उनके प्रस्ताव को टॉप्स के सीईओ राजेश राजगोपालन से मंजूरी मिल गई है।
69 किलोग्राम भारवर्ग के इस मुक्केबाज ने कहा, “अब मुझे साई के महानिदेशक से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। जैसे ही वह इसे मंजूरी दे देते हैं तो मैं कुछ दिनों में चला जाऊंगा। संभवत: आज या कल, मुझे पता चल जाएगा।”
विकास से जब पूछा गया कि उनकी ट्रेनिंग कितने दिनों की होगी, इस पर विकास ने कहा, “मैं वहां तीन महीनों के लिए जाऊंगा। मेरा लक्ष्य ओलम्पिक पदक में स्वर्ण पदक जीतना है और इसके लिए मैं अपने जीवन को खतरे में भी डाल सकता हूं। विमान सेवा शुरू हो गई है और मैं पूरी सुरक्षा के साथ सफर करूंगा। मैं किसी होटल में क्वारंटीन में समय बिताने के बजाए अपनी ट्रेनिंग पर फोकस करना पसंद करूंगा।”
विकास ने हालांकि अमेरिका में ट्रेनिंग की जगह बताने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “आपको इसके बारे में बाद में पता चलेगा। पहले मुझे वहां जाने की मंजूरी मिलने दीजिए। मैं पहले न्यू यार्क में ट्रेनिंग करता था लेकिन इस बार वेन्यू बदल गया है। मैं अपने प्रोमोटर्स से चर्चा कर रहा हूं। वह मुझे ट्रेनिंग में मदद करेंगे और कुछ पेशेवर मुकाबले भी करवाएंगे क्योंकि अब तो अमेरिका में पेशेवर मुक्केबाजी शुरू हो गई है। मैं वहां अकेले जा रहा हूं, मेरे साथ मेरे परिवार का कोई सदस्य नहीं जा रहा।”
उनसे जब पूछा गया कि क्या भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) को उनके प्लान के बारे में जानकारी है तो विकास ने कहा, “महासंघ काफी समर्थन दे रही है और वह मेरे ओलम्पिक स्वर्ण पदक जीतने के सपने को हासिल करने में मेरी मदद कर रही है।”
एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता विकास अगले साल अपना तीसरा ओलम्पिक खेलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान युद्ध पर घिरे ट्रंप, यूएस डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल

वाशिंगटन, 24 मार्च : अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और संघर्ष के लंबे खिंचने के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने सीनेट में कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” चक शूमर ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल रहे हैं।
चक शूमर ने व्हाइट हाउस के बयानों को भी विरोधाभासी बताया। उन्होंने कहा, “यह क्या हो रहा है? यह कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं है। या तो वह भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।”
उन्होंने इस युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत करीब 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है।
चक शूमर ने सीनेट में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए रिपब्लिकन नेताओं से हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमें जवाबदेही चाहिए, पारदर्शिता चाहिए, और सबसे जरूरी एक स्पष्ट रणनीति और अंत का रास्ता भी चाहिए।”
इसी तरह, सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा, “अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। न इसका विस्तार हो और न ही जमीनी सैनिक भेजे जाएं।”
ग्रेग लैंड्समैन के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता को लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अब और गहराई से शामिल होना अमेरिका को बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंसा सकता है।
सीनेटर पीटर वेल्च ने भी सरकार के रुख की आलोचना की और युद्ध के लिए मांगे गए 200 अरब डॉलर के फंड का विरोध किया। उन्होंने कहा, “हमारा देश इस पीढ़ी के सबसे बड़े युद्ध में गहराई तक उतर चुका है, लेकिन अब तक सीनेट में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।”
पीटर वेल्च ने इसके आर्थिक असर पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पूरे देश में पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे एक आम अमेरिकी परिवार को सालाना करीब 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त 1,000 डॉलर का बोझ पड़ सकता है।
वहीं, सीनेटर सारा जैकब्स ने इस पूरे मामले को अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा, “यह शायद अमेरिकी विदेश नीति की सबसे बड़ी चूकों में से एक है।” सारा जैकब्स ने यह भी कहा कि सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान से तनातनी के बीच ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर की बात

वॉशिंगटन, 24 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध से उपजी चिंताओं के बीच पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करता नजर आ रहा है। वह अमेरिका के संदेशों को ईरान पहुंचा रहा है और ईरान के जवाबों से अवगत करा रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर से फोन पर बात की।
व्हाइट हाउस के मुताबिक चर्चा का मुख्य विषय ईरान युद्ध था। हालांकि इस बातचीत को संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों ने और ज्यादा बताने से इनकार कर दिया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लिविट ने पहले कहा था कि ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चा है और अमेरिका मीडिया के जरिए कोई वार्ता नहीं करेगा।
सूत्रों के अनुसार, मुनीर ने ट्रंप से बातचीत की और पाकिस्तान ने खुद को अमेरिकी और ईरानी वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता की संभावित जगह के रूप में पेश किया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की। एक्स पोस्ट के जरिए उन्होंने ईद-उल-फितर और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और ईरान के लोगों के साथ अपनी सहानुभूति जताई।
शरीफ ने कहा कि दोनों पक्षों ने खाड़ी क्षेत्र की गंभीर स्थिति पर चर्चा की और तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की जरूरत पर सहमति जताई। उन्होंने इस्लामी दुनिया में एकता और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में पाकिस्तान की भूमिका पर भी जोर दिया।
इस बीच सोमवार को ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बेहतर और सार्थक बातचीत के बाद उन्होंने हमले को पांच दिनों तक टालने की घोषणा की थी, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता का ट्रंप के फैसले से सीधा संबंध है या नहीं। ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ मित्र देशों के माध्यम से संदेश मिले हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कूटनीतिक प्रयास अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह से संरचित वार्ता नहीं माना जा सकता।
राजनीति
बिहार में जो भी नई सरकार बनेगी, वह नीतीश के मार्गदर्शन में ही चलेगी: चिराग पासवान

पटना, 23 मार्च : बिहार में चल रहे नए मुख्यमंत्री के नामों की चर्चा के बीच केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने सोमवार को साफ कर दिया कि गठबंधन में इसे लेकर चर्चा चल रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी नई सरकार बनेगी, वह नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में जरूर चलेगी।
पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने ‘सम्राट मॉडल’ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि होम डिपार्टमेंट के मंत्री के तौर पर वे अच्छा काम कर रहे हैं और आगे उनकी क्या भूमिका सरकार में होगी, यह कहना अभी मुश्किल है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आगे कहा कि हम लोगों के बीच सरकार बनाए जाने पर बातचीत जारी है और लगभग सहमति बन गई है। बहुत जल्द सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी, इसकी घोषणा कर दी जाएगी।
उन्होंने जदयू के लोगों द्वारा जदयू के मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कहा, “गठबंधन के भीतर सभी चीजों को लेकर बातचीत चल रही है। समय की बात है। मुझे लगता है कि बहुत जल्द इसकी औपचारिक घोषणा भी कर दी जाएगी। कौन मुख्यमंत्री होगा, किस दल से होगा, इन तमाम विषयों को लेकर गठबंधन के पांचों दलों के बीच चर्चा ही नहीं, मोटा-मोटी सहमति भी बन चुकी है।”
उन्होंने ईरान और अमेरिका युद्ध को लेकर कहा कि यह विदेश नीति का मामला है। ऐसे में हमारी सरकार की कोशिश है कि इस हमले का प्रभाव हमारे देश के लोगों पर कम पड़े। सरकार इसे लेकर मुस्तैदी से जुटी हुई है।
दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं। इसके बाद वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे। बिहार में उनके जाने के साथ किसी अन्य के नेतृत्व में एनडीए की नई सरकार बनेगी। ऐसे में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कई नामों पर चर्चा है।
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