राजनीति
जापानी इंसेफेलाइटिस खत्म होने की कगार पर: योगी
पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) ने कई सालों तक सैकड़ों लोगों की जान ली। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अब यह बीमारी पूरी तरह खत्म होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पिछले 40 साल से कहर बरपा रही इंसेफेलाइटिस को अगले दो सालों में पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
गोरखपुर की अपनी हालिया यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि राज्य के पूर्वी हिस्से में इंसेफेलाइटिस की मृत्यु दर 2016 के बाद 95 प्रतिशत तक गिर गई है।
उन्होंने कहा, “इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई अब अंतिम चरण में है। दो साल में इसे इस क्षेत्र से खत्म कर दिया जाएगा। हम कोविड -19 के खिलाफ भी ऐसी ही लड़ाई लड़ेंगे।”
उन्होंने गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज और देवरिया के इंसेफेलाइटिस के पिछले चार सालों के आंकड़े पेश किए, जिनमें मामलों की संख्या और मृत्यु दर में भारी गिरावट देखी गई।
गौरतलब है कि अगस्त 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन दिनों में 60 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके पीछे कथित तौर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति में व्यवधान होने के कारण बताया गया था और इसे लेकर बड़े पैमाने पर विवाद हुआ था। इसके बाद से ही योगी ने इस क्षेत्र में स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाया, जिससे एन्सेफलाइटिस मामलों की संख्या में भारी कमी आई है।
महाराष्ट्र
मुंबई : अंधेरी इलाके में फुटपाथ पर बनी 9 अवैध दुकानों को हटाया गया, नगर निगम ने कार्रवाई की।

मुंबई; मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘के-वेस्ट’ डिपार्टमेंट ने कल (18 जून, 2026) अंधेरी इलाके में फुटपाथ पर दुकानें और शेड बनाकर पैदल चलने वालों की आवाजाही में रुकावट डाल रही 9 बिना इजाज़त वाली दुकानों को हटा दिया।
यह ऑपरेशन डिप्टी कमिश्नर (ज़ोन 4) डॉ. भाग्य श्री कापसे के गाइडेंस और असिस्टेंट कमिश्नर (के-वेस्ट डिवीज़न) चक्रपाणि आले की लीडरशिप में चलाया गया।
इसके तहत अंधेरी में फन रिपब्लिक रोड पर एक दुकान हटाई गई। जबकि एक बिना इजाज़त वाली दुकान के खिलाफ एक्शन लिया गया।
वीरा देसाई मार्ग पर चलाए गए ऑपरेशन में 8 बिना इजाज़त वाली दुकानों को हटा दिया गया। इसके अलावा, गैर-कानूनी तरीके से बनाए गए शेड और सीढ़ियों को तोड़ दिया गया। इस ऑपरेशन की वजह से इलाके के फुटपाथ साफ हो गए हैं और पैदल चलने वालों के लिए चलना आसान हो जाएगा।
अम्बोली पुलिस स्टेशन के वेस्ट एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीज़न के तहत काम करने वाले कंजर्वेशन, बिल्डिंग और फैक्ट्री, लाइसेंसिंग और पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अलग-अलग प्लांट की मदद से यह ऑपरेशन किया। उस समय अंबोली पुलिस स्टेशन ने काफी सुरक्षा तैनात की थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बराक ओबामा ने प्रेसिडेंशियल सेंटर का किया उद्घाटन, अमेरिकी लोकतांत्रिक आदर्शों पर दिया जोर

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शिकागो में ओबामा प्रेसिडेंशियल सेंटर के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना उनकी कड़ी आलोचना की।
यूएस प्रेसिडेंशियल सेंटर एक ऐसा कॉम्प्लेक्स होता है जो किसी पूर्व प्रेसिडेंट की विरासत को समर्पित होता है। इसमें आम तौर पर एक संग्रहालय, पढ़ाई की जगह, सार्वजनिक कार्यक्रम और प्रेसिडेंशियल रिकॉर्ड का एक अभिलेखागार होता है। ज्यादातर अमेरिकी राष्ट्रपति के पास एक प्रेसिडेंशियल सेंटर होता है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इतिहास का जिक्र करते हुए ओबामा ने अमेरिका के उस आदर्श को रेखांकित किया, जिसमें “न कोई राजा होगा, न कोई सामंत, न कोई बंधुआ प्रजा और न ही कोई अधीन नागरिक।” यह टिप्पणी हाल के महीनों में देशभर में आयोजित ‘नो किंग’ प्रदर्शनों और मार्चों की प्रतिध्वनि मानी जा रही है।
उन्होंने मिनेसोटा राज्य के मिनियापोलिस में रहने वाले निवासियों की सराहना करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप की आव्रजन नीति की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि लोगों ने बेहद ठंडे मौसम में भी अपने पड़ोसियों की मदद करने के लिए अपने जोखिम पर खड़े होकर एकजुटता दिखाई और कभी-कभी अजनबियों की भी सहायता की, क्योंकि वे जानते थे कि यही सही काम है।
ओबामा ने उम्मीद जताई कि नया सेंटर इस बात को साबित करेगा कि हमारी लोकतांत्रिक हकीकत कितनी कीमती है।
ओबामा पहली बार 1985 में 23 साल की उम्र में एक कम्युनिटी ऑर्गेनाइजर के तौर पर शिकागो आए थे। अपने भाषण में, उन्होंने बताया कि कैसे वह अपनी पत्नी मिशेल ओबामा से मिले, अपना परिवार शुरू किया और प्रेसिडेंशियल सेंटर से कम दूरी पर ही अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत की।
मिशेल ओबामा शिकागो के दक्षिणी क्षेत्र में पली-बढ़ीं और वहीं अपने करियर की शुरुआती की। उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने भी पति की सकारात्मक सोच, काबिलियत, काम करने के तरीके, हिम्मत और कामयाबियों की सराहना की।
मिशेल ओबामा ने कहा कि किसी को भी यह तय करने का हक नहीं है कि कौन अधिक अमेरिकी है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, जो बाइडेन और उनकी पत्नियां इस समारोह में शामिल हुए। इसके अलावा, समारोह में हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को आमंत्रित नहीं किया गया था। ओबामा प्रेसिडेंशियल सेंटर शुक्रवार को आम लोगों के लिए खुलेगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ पहुंचा गुजरात, तीन माह बाद होर्मुज से निकला जहाज

अमेरिका और ईरान में हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है और जहाजों की आवाजाही भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इस बीच एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ होर्मुज स्ट्रेट को पार करके गुजरात के दाहेज पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। तीन महीने से ज्यादा के इंतजार के बाद, इसने 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का कार्गो पहुंचाया है।
जहाज के ट्रैकिंग डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक यह जहाज बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच खाड़ी इलाके में खड़ा था। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह शुक्रवार सुबह करीब 7:32 बजे दाहेज टर्मिनल पर पहुंचा।
एलएनजी कार्गो को कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल पर लोड किया गया। टैंकर 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी ले जा रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक संवेदनशील समय के दौरान भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए एक बड़ी डिलीवरी है।
जहाज दिशा को शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम के तहत चलाया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के लिए किराए पर लिया गया है। जहाज का होर्मुज स्ट्रेट से सफल ट्रांजिट ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे दुनिया भर के मुख्य शिपिंग लेन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सूत्रों ने बताया कि टैंकर अपनी यात्रा पूरी करने से पहले तीन महीने से ज्यादा समय तक खाड़ी क्षेत्र में रहा था। तेल और गैस शिपमेंट के लिए दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक, होर्मुज स्ट्रेट से इसका सुरक्षित गुजरना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना गया है।
भरूच में दाहेज एलएनजी टर्मिनल भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस इंपोर्ट हब है और देश के नेचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता है।
दिशा के आने से एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने और इंडस्ट्रियल और घरेलू खपत के लिए स्थिर ऊर्जा सप्लाई को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव के बीच एलएनजी कैरियर के सुरक्षित आने से भारत के ऊर्जा क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स को राहत मिली है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक जरूरी रास्ता बना हुआ है और इस इलाके में कोई भी रुकावट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन पर प्रभाव डाल सकती है।
इस यात्रा का सफलतापूर्वक पूरा होना भारत में बिना रुकावट ऊर्जा इम्पोर्ट के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व को दिखाता है।
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