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Thursday,17-September-2026
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कोरोना काल में कैशलेस होता चीन

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चीन पेपर मनी (कागज के पैसे) का उपयोग करने वाला दुनिया में पहला देश था, आज वही चीन मोबाइल पेमेंट प्लेटफार्मों की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से अब पेपर मनी का उपयोग बंद करने की तरफ बढ़ रहा है। मौजूदा समय में, चीन दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल पेमेंट बाजार बना हुआ है। अधिकांश चीनी उपभोक्ता नकद की बजाए अपने स्मार्टफोन से रोजाना खर्च का भुगतान करते हैं। दरअसल, जब से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ है तब से चीनी लोग कैशलेस पेमेंट पर ज्यादा जोर देने लगे हैं। पेमेंट एंड क्लियरिंग एसोसिएशन ऑफ चाइना ने 28 फरवरी, 2020 को एक पहल जारी की, जिसमें लोगों को कोरोना के संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए मोबाइल भुगतान, ऑनलाइन भुगतान और बारकोड भुगतान का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

जानकारों की मानें तो किसी भी वायरस के फैलने में कैश की सबसे बड़ी भूमिका होती है। बाजार के चलन में जो नोट या सिक्के रहते हैं वो अलग-अलग हाथों में जाते हैं। ये तय नहीं होता कि कैश किन हाथों में गया है। ऐसे में वायरस से संक्रमित होने का खतरा बना रहता है।

अभी सुरक्षा के लिहाज से अधिक लोग कैश से शिफ्ट हो गए हैं और डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। देखा जाए तो ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स के तेजी से विकास ने चीन में डिजिटल पेमेंट के लिए एक अच्छा वातावरण तैयार किया है। एआई तकनीक, फेस-स्कैनिंग पेमेंट आदि ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम से चीन के लिए यह संभव हो पाया है कि वह दुनिया में पेपर मनी का उपयोग बंद करने वाला सबसे पहला देश बन जाएगा।

चीनी लोग अब अपने लेन-देन में आमतौर पर डिजिटल पेमेंट प्रणाली का ही उपयोग करते हैं। चीन में जहां भी जाएं, वहां हर जगह मोबाइल पेमेंट को स्वीकार किया जाता है। चाहे आप किसी भी रेस्तरां, दुकान, अस्पताल, सिनेमाघर, पर्यटन स्थल जाते हैं, वहां ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा होती है। यहां तक कि टैक्सी, बस आदि में भी मोबाइल से पेमेंट की जा सकती है।

लोग अपने साथ मोबाइल फोन रखते हैं और फोन से ही भुगतान करते हैं। चीन में इस तरह की पेमेंट व्यवस्था बेहद सफल है। यहां मोबाइल पेमेंट मार्केट जोरदार ढंग से विकास कर रहा है। पिछले कुछ समय से चीन में एटीएम कार्ड से कैश निकालने की आदतों में काफी कमी आयी है। मोबाइल पेमेंट के लगातार चलन से लोगों ने एटीएम या बैंक से पैसा निकालना काफी हद तक बंद कर दिया है।

इस कोरोना काल में देश के लोगों में मोबाइल पेमेंट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। माना जा रहा है कि साल 2020 में इस तरह के लेनदेन की मात्रा 777.5 ट्रिलियन युआन तक पहुंच जाएगी, जो वार्षिक आधार पर 31.8 प्रतिशत बढ़ जाएगा। आमतौर पर लोग बिना कैश और कार्ड के शॉपिंग करते हैं। उन्हें सिर्फ मोबाइल की जरूरत होती है। यहां तक कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले किसान भी अब रोजमर्रा की चीजों को खरीदने के लिए अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह भी है कि चीन में इंटरनेट की सुविधा गांवों तक पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल पेमेंट के साथ काफी सहूलियत जुड़ी हुई है। छोटे और मझौले उद्योगों को इसका खास फायदा मिलता है। यह लेनदेन की रफ्तार बढ़ाता है और इसमें जटिलताएं कम होती हैं। व्यापार की संभावनाएं देखकर कई इंटरनेट फाइनेंस कंपनियों ने विदेशी बाजार में हाथ आजमाना शुरू कर दिया है।

अगर आप चीन में मोबाइल से जुड़े हैं तो इंटरनेट के बगैर भी लेन-देन कर सकते हैं। मोबाइल वॉलेट से आप अपने फोन को रिचार्ज भी कर सकते हैं। जबकि इससे बिलों का पेमेंट किया जा सकता है। दरअसल, यह काम प्री-पेड फोन को रिचार्ज करने की तरह है। जिस तरह आप बैंक या एटीएम से पैसा निकालकर अपने वॉलेट में रखते हैं, उसी तरह से मोबाइल वॉलेट में पैसा भरने के लिए आपको वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर के पास पैसा जमा करना पड़ता है। जिसका इस्तेमाल मोबाइल सेवाओं के अलावा खरीदारी करने, बिलों के भुगतान करने, रेलवे टिकट बुक कराने और पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है।

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व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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व्यापार

भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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व्यापार

बोफा ने भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ाया भरोसा, दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 तक पहुंचने का लगाया अनुमान

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बोफा यानी बैंक ऑफ अमेरिका (बीओएफए) सिक्योरिटीज ने लगभग दो वर्षों तक सतर्क रुख अपनाने के बाद भारतीय शेयर बाजारों को लेकर अपना दृष्टिकोण सकारात्मक कर लिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 12 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

अपनी नवीनतम रणनीति रिपोर्ट में बीओएफए ने कहा कि वह अगस्त 2024 से भारतीय शेयरों को लेकर सतर्क था और उसने आठ प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, जो बाजार में अस्थिरता बनाए रख सकते थे। हालांकि अब इन आठ में से पांच जोखिम या तो सामने आ चुके हैं या फिर बाजार पहले ही उन्हें अपने मूल्यांकन में शामिल कर चुका है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने अब भारतीय इक्विटी बाजारों पर अधिक सकारात्मक रुख अपनाया है।

बोफा के अनुसार, शेष तीन जोखिमों के कारण उसके नकारात्मक परिदृश्य में निफ्टी 50 में लगभग 7 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि उसके आधारभूत अनुमान में निफ्टी दिसंबर 2026 तक 26,200 के स्तर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बचे हुए जोखिम अक्टूबर 2026 तक अपने चरम पर पहुंच सकते हैं। इसके बाद नवंबर से बाजार में टिकाऊ सुधार की संभावना बन सकती है।

ब्रोकरेज फर्म ने पहले जिन प्रमुख जोखिमों की पहचान की थी, उनमें कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भी शामिल था। ब्रोकरेज का चौथी तिमाही 2026 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 81 डॉलर प्रति बैरल है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले सात महीनों में कच्चे तेल की कीमतें सात बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से वापस नीचे आई हैं।

रुपया भी पहले चिंता का विषय था, हालांकि बीओएफए का कहना है कि हाल में आए लगभग 136 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह से भारतीय मुद्रा को समर्थन मिलना चाहिए और उसने रुपये को लेकर मजबूती का दृष्टिकोण बनाए रखा है।

कमजोर मानसून को भी जोखिमों में शामिल किया गया था। वर्तमान में वर्षा की कमी 13 प्रतिशत है, जो बीओएफए के पहले से अनुमानित 15 प्रतिशत के सबसे खराब परिदृश्य के काफी करीब है।

ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि एल्यूमीनियम और तांबे की कीमतों में अब अधिक तेजी की संभावना सीमित है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर बीओएफए के अर्थशास्त्री का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दिसंबर 2026 तक नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है, जबकि स्वैप बाजार फिलहाल करीब 45 आधार अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं।

बोफा ने जिन तीन प्रमुख जोखिमों को अभी भी बरकरार बताया है, उनमें पहला प्राथमिक बाजार में बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने की गतिविधियां हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर से दिसंबर के बीच लगभग 30 अरब डॉलर के नए इश्यू आ सकते हैं और अक्टूबर में इनकी रफ्तार सबसे अधिक रहने की संभावना है।

दूसरा जोखिम अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी का है। बीओएफए का अनुमान है कि फेड कुल 75 आधार अंक तक दरें बढ़ा सकता है, जबकि बाजार फिलहाल लगभग 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी को मूल्यांकन में शामिल कर रहे हैं।

तीसरा और दीर्घकालिक जोखिम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ा है। बीओएफए ने कहा कि एआई-आधारित बदलावों का भारत में रोजगार बाजार पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है और निवेशकों को इस विषय पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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