अंतरराष्ट्रीय समाचार
मेलानिया ने ‘ट्रंप 2.0’ के लिए बुलंद की आवाज
रात के दौरान खुले और साफ आसमान के नीचे डोनाल्ड ट्रंप के लिए आई भीड़ को संबोधित करते हुए प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने रिपब्लिकन नेशनल कन्वेंशन की दूसरी रात को ट्रंप के लिए जमकर आवाज बुलंद की। आगामी नवंबर में होने वाले चुनाव में अपने पति के दूसरे कार्यकाल को एक और मौका देने को लेकर उन्होंने ‘उन असाधारण लोगों’ से अपील कि जिन्होंने राजनीति में कभी न आए एक व्यवसायी को मौका दिया था।
मेलानिया ने अपने 28 मिनट के भाषण के दौरान कहा, “वह कोई परंपरागत राजनेता नहीं हैं। वह सिर्फ शब्दों का सहारा नहीं लेते हैं, बल्कि वह कार्रवाई की मांग करते हैं, और उन्हें परिणाम भी मिलते हैं। और यह ऐसी विशेषता है जिसकी मैंने हमेशा से सराहना की है।”
ऑलिव ग्रीन स्कर्ट-सूट पहने मेलानिया ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन से भाषण दिया। हालांकि इस गार्डन के विकल्प को लेकर कई रिपब्लिकन ट्रंप के खिलाफ हो गए और उनकी कड़ी ओलचना भी की।
लिंकन प्रोजेक्ट ने ट्वीट में कहा, “व्हाइट हाउस में संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला राजनीतिक भाषण दे रही हैं, एक ऐसा स्थान जो पीपल्स हाउस है। यह हमारे देश के लिए वास्तव में दुखद क्षण हैं।”
वहीं एनबीसी के एक प्राइम टाइम एंकर ने कहा, “वे कोई राजा नहीं हैं, न ही यह उनकी संपत्ति है! यह बार्बी के सपनों का घर नहीं है, यह अमेरिकन पीपल्स हाउस है।”
टेलीप्रॉम्प्टर से पढ़ने के साथ ही अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभवों को मिलाकर मेलानिया ने प्रथम महिला के ‘अनुभवों’ को साझा किया और उन लोगों के बारे में कहा जो ‘असाधारण परिस्थितियों’ से लड़ रहे हैं और जिनके विचारों से वह हर दिन काफी प्रभावित होती हैं।
मेलानिया ट्रंप जिस रात को अपना भाषण दे रही थी, उस रात राष्ट्रपति की बेटी टिफनी ट्रंप और बेटे एरिक ट्रंप भी उपस्थित हुए थे। हालांकि उन सभी के भाषण में कोरोनावायरस से मृत 178,000 से अधिक अमेरिकियों का उल्लेख नहीं हुआ।
मेलानिया ट्रंप बीते 24 घंटों में मात्र एक ऐसी वक्ता थी, जिन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए सहानुभूति व्यक्त की और महामारी के घातक पहलू पर भी बात की। ताज्जुब की बात तो यह थी कि रोज गार्डन के इस कार्यक्रम में मात्र गिने चुने लोगों ने मास्क पहन रखा था।
मेलानिया ट्रंप ने मतदाताओं से वादा करते हुए कहा, “डोनाल्ड तब तक आराम नहीं करेंगे, जब तक कि वह इस महामारी से प्रभावित सभी लोगों की मदद नहीं कर लेते।”
मीडिया की चकाचौंध से कई महीनों तक दूर रहने के बाद प्रथम महिला ने कन्वेंशन स्टेज पर कदम रखा। उन्होंने साल 2016 के अपने कन्वेंशन भाषण के दौरान की गईं गलतियों का ध्यान रखते हुए भाषण दिया।
अमेरिका के इतिहास में मेलानिया ट्रंप दूसरी विदेशी मूल (विदेश में जन्मी) की प्रथम महिला हैं। वह स्लोवेनिया की मूल निवासी और ट्रंप की तीसरी पत्नी हैं। इस दंपति का एक बेटा है, बैरोन। डोनाल्ड ट्रंप से शादी करने के एक साल बाद साल 2006 में मेलानिया अमेरिकी नागरिक बन गईं।
मेलानिया का यह भाषण तब आया है, जब उनके पति ने भारत सहित पांच देशों के पांच नवनिर्मित अमेरिकियों के समूह के साथ एक क्यूरेटेड समीकरण का प्रदर्शन किया, जिसे ट्रंप के आलोचक ‘दुखद’ राजनीतिक स्टंट कह रहे हैं।
एंटी-बुलिंग अभियान का नेतृत्व करने वाली प्रथम महिला ने अपने पति के लिए कहा, “मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि हमें, मेरे पति के राष्ट्रपति बनने की और आगामी चार वर्षों के लिए कमांडर बनने की आवश्यकता है। वह वही व्यक्ति हैं, जो हमारे देश के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। हम सभी जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप चीजों के बारे में अपनी भावना को लेकर कोई रहस्य नहीं रखते हैं। हमे एक नागरिक के तौर पर अपने राष्ट्रपति से जो चाहिए वह है पूरी ईमानदारी। आप भले ही इसे पसंद करते हैं या नहीं, लेकिन आप हमेशा जानते हैं कि वह क्या सोच रहे हैं।”
वहीं नीलसन कंपनी की शुरुआती रिपोटरें से पता चलता है कि ओपनिंग नाइट के अंतिम घंटे को टॉप छह टेलीविजन नेटवर्क पर 1.58 करोड़ लोगों द्वारा देखा गया। वहीं पिछले सप्ताह डेमोक्रेट्स के लिए ऑपनिंग नाइट के लिए यह संख्या 1.87 करोड़ थी, जो करीब 30 लाख अधिक है।
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भारत के दो नगीने नीरजा और स्मित: जान पर खेलकर इंसानियत को जिंदा रखा, अपने-पराए का भेद मिटाया

नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता विमान जब अचानक संकट में घिरता है तो दिमाग काम करना बंद कर देता है। यात्रियों के पास सोचने के लिए बहुत कम समय होता है। ऐसे वक्त में विमान के पायलट और चालक दल का एक फैसला सैकड़ों जिंदगियों का भविष्य तय कर सकता है। स्मित मच्छार और नीरजा भनोट दो ऐसे ही नाम हैं जिन्होंने जान पर खेलकर दुनिया को इंसानियत का पाठ पढ़ाया। ये नहीं देखा कि लोग अपने हैं या पराए! याद रखा तो सिर्फ कर्तव्य और मानव सेवा का मर्म। 1986 की नीरजा भनोट के शौर्य से लेकर 2026 में कैप्टन स्मित मच्छार की जांबाजी तक, दो पीढ़ियों के ये दो नाम भारत के इकबाल में चार चांद लगाते हैं।
शुरुआत भनोट से! 5 सितंबर 1986 को पैन एम की फ्लाइट 73 कराची एयरपोर्ट पर आतंकवादियों ने हाईजैक कर ली थी। विमान में सैकड़ों यात्री सवार थे और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। उस समय विमान की वरिष्ठ फ्लाइट पर्सर नीरजा भनोट ने असाधारण साहस का उदाहरण पेश किया।
कॉकपिट क्रू के विमान से निकल जाने के बाद यात्रियों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी नीरजा और उनके सहयोगियों पर आ गई थी। नीरजा ने आतंकवादियों की मांग के अनुसार यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठा किए, लेकिन अमेरिकी नागरिकों की पहचान छिपाने के लिए कई पासपोर्ट अलग कर दिए। जब हालात बिगड़े और विमान के अंदर गोलीबारी शुरू हुई तो उन्होंने यात्रियों को आपातकालीन निकास की ओर जाने में मदद की।
इस दौरान नीरजा ने बच्चों और दूसरे यात्रियों को बचाने की कोशिश की। वह खुद आतंकवादियों की गोली का शिकार हुईं और उनकी मौत हो गई। भारत सरकार ने उनके साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया। अपने-पराए का भेद मिटा अदम्य साहस दिखाने वाली नीरजा को पाकिस्तान ने भी सम्मानित किया। उन्हें मरणोपरांत ‘तमगा-ए-इंसानियत’ से नवाजा गया।
समय बदला, जमाना बदला लेकिन अगर कुछ नहीं मिला तो भारतीयों के हर परिस्थिति में कुछ कर गुजरने का जज्बा। करीब चार दशक बाद विमानन जगत में एक और ऐसी घटना घटी, जिसमें एक भारतीय पायलट ने जान पर खेलकर 174 लोगों की जिंदगियां बचाने में अहम योगदान दिया।
भारत के सीने पर 30 सितंबर 2026 का दिन खुरच कर लिख दिया गया है। इसी दिन फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ान के दौरान कॉकपिट में एक गंभीर हिंसक वारदात हुई। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर साथी पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी नहीं भूली।
बाद में यात्रियों की मदद से बड़ा विमान हादसा टाल दिया गया। घटना के बाद विमान का रुख बदला गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। स्मित को अस्पताल ले जाया गया और उनकी स्थिति स्थिर बताई गई।
नीरजा और स्मित की घटनाओं में करीब 40 साल का अंतर है। परिस्थितियां भी बिल्कुल अलग थीं। नीरजा के सामने हथियारबंद अपहरणकर्ता थे, जबकि स्मित का दुश्मन उनका साथी पायलट ही था। लेकिन दोनों घटनाओं में एक बात समान रही: ‘संकट की घड़ी में दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और अपना कर्तव्य।’
नीरजा की कहानी बलिदान की कहानी बन गई। वह यात्रियों को बचाते हुए खुद अपनी जिंदगी हार गईं। स्मित की कहानी में भी खतरा उतना ही वास्तविक था, लेकिन वह विमान को सुरक्षित उतारने और यात्रियों की जान बचाने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंच सके।इन घटनाओं की खासियत यह भी है कि इनमें बहादुरी किसी युद्धक्षेत्र में नहीं दिखाई गई। एक विमान के भीतर, सीमित जगह और संकटकाल में लिए गए त्वरित निर्णयों ने इन भारतीयों को यादगार बना दिया।
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इजरायली फ्लाइट सऊदी एयरपोर्ट पर हुई लैंड, हाईजैकिंग की आशंका से तेल अवीव का इनकार

इजरायल ने बुधवार को 150 से ज्यादा यात्रियो को लेकर दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाइट के सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड होने का ऐलान किया। इससे पहले आशंका जताई गई थी कि प्लेन को हाइजैक कर लिया गया है।
इजरायली सुरक्षा सूत्रों के हवाले से द टाइम्स ऑफ इजरायल ने बताया कि पायलटों के बीच हुई बहस के परिणामस्वरूप विमान को “गैर-कानूनी दखल” और एक सामान्य इमरजेंसी सिग्नल जारी करना पड़ा था। सेना का कहना है कि आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने इस घटना पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
इन अधिकारियों में इजरायली वायु सेना के प्रमुख मेजर जनरल ओमर टिशलर, ऑपरेशन्स डायरेक्टरेट के प्रमुख मेजर जनरल इत्जिक कोहेन और इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट के प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बाइंडर शामिल थे। दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाइट ने उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही इमरजेंसी का सिग्नल दिया था। विमान ने ट्रांसपोंडर पर 7700 कोड इस्तेमाल किया। इसका मतलब होता है कि विमान में किसी तरह की इमरजेंसी है।
कुछ फ्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइटों पर थोड़ी देर के लिए 7500 कोड भी नजर आया। आमतौर पर यह कोड विमान के हाइजैक होने पर इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस कोड के इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि नहीं की गई है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, फ्लाईदुबई की फ्लाइट ने शुरू में 7700 का “स्क्वॉक कोड” भेजा, जो एक इंटरनेशनल इमरजेंसी सिग्नल है।
इसके कुछ समय बाद, उसने 7500 कोड भेजा, जिसका मतलब हाईजैकिंग या गैर-कानूनी दखल होता है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इजरायली वायु सेना ने तुरंत फाइटर जेट्स को प्लेन की ओर भेजा था।
इजरायल का एयरस्पेस भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था, और बाद में सऊदी अरब में विमान के उतरने के बाद उसे फिर से खोल दिया गया।
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बांग्लादेश: अवामी लीग ने बीएनपी सरकार पर हिंसा और राजनीतिक बदले की भावना बढ़ाने का लगाया आरोप

बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) सरकार के कार्यकाल में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। पार्टी ने हत्या, बलात्कार, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों के जबरन गायब किए जाने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया है।
अवामी लीग ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर आरोप लगाया कि वह कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध को तरजीह दे रहे हैं। हालात बिगड़ने के बावजूद वह एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने का दावा करते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की।
अवामी लीग के अनुसार, इस साल फरवरी से सितंबर के बीच, यानी सिर्फ सात महीनों में हिंसा के 21,756 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों में 1,789 हत्या और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ हिंसा के 11,165 मामले शामिल थे, जबकि पुलिस पर हमले के भी 317 मामले सामने आए।
पार्टी ने आगे कहा कि जनवरी से अगस्त के बीच रेप के 339 मामले सामने आए, जिनमें 114 गैंग रेप के मामले थे। 41 मामलों में पीड़िताओं की रेप के बाद हत्या कर दी गई। पार्टी ने जून में भीड़ की हिंसा में 31 लोगों की मौत और अगस्त में 28 और लोगों की मौत का भी जिक्र किया।
ढाका की संस्था ‘ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी’ (एचआरएसएस) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अवामी लीग ने कहा कि इस साल जनवरी से जून के बीच हुई 830 राजनीतिक हिंसा की घटनाओं में 56 लोगों की मौत हुई और 5,246 लोग घायल हुए। अल्पसंख्यक समुदायों के 44 लोग मारे गए, जबकि 383 पत्रकारों को उत्पीड़न या हमलों का सामना करना पड़ा। सिर्फ अगस्त में ही नदियों, नहरों और जंगलों से 87 अज्ञात शव बरामद किए गए।
अवामी लीग ने कहा, “ऐसे हालात में, गृह मंत्री की सबसे बड़ी चिंता तथाकथित अवामी लीग सहयोगियों को पकड़ने पर इनाम देने की है। यह ऐसा है, जैसे खून से सने युद्ध के मैदान में गुलाब बांटे जा रहे हों। मंत्री पुलिस इंटेलिजेंस की डींगें तो मारते हैं, लेकिन पुलिस कस्टडी में मौतें, लोगों का जबरन गायब होना और जेलों में 58 लोगों की मौतें उनके हिसाब-किताब का हिस्सा नहीं लगतीं।”
पार्टी ने आगे कहा, “2001 से 2006 तक बीएनपी-जमात सरकार के दौरान बांग्लादेश में राजनीतिक हत्याएं, लोगों का जबरन गायब होना, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और भ्रष्टाचार शामिल थे। इन्हें इतिहास के पन्नों से आसानी से मिटाया नहीं जा सकता। सत्ता में वापसी के बाद बीएनपी ने महज सात महीनों में ही यह दिखा दिया है कि वह शासन करने के लिए नहीं, बल्कि बदला लेने के लिए लौटी है।”
पार्टी ने सवाल उठाया कि राजनीतिक दिवालियापन किस हद तक बढ़ सकता है कि कोई सरकार उसी राजनीतिक पार्टी को पूरी तरह खत्म करने का इरादा जाहिर करे, जिसके नेतृत्व में बांग्लादेश बना था।
पार्टी ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना प्राथमिकता है।”
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