राजनीति
पीएम केयर्स फंड को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि पीएम-केयर्स फंड की धनराशि को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) में स्थानांतरित करने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति स्वेच्छा से एनडीआरएफ में योगदान कर सकते हैं। जस्टिस अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एम. आर. शाह की खंडपीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पीएम केयर्स फंड के पूरे पैसे को एनडीआरएफ में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि कोविड-19 महामारी के लिए नई राष्ट्रीय आपदा राहत योजना बनाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी राहत के न्यूनतम मानक पर्याप्त थे।
पीठ ने कहा कि नागरिकों और कॉरपोरेट्स के लिए एनडीआरएफ में धनराशि जमा करने में कोई बाधा नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पीएम केयर्स फंड और एनडीआरएफ पूरी तरह से अलग है।
शीर्ष अदालत ने 17 जून को एक जनहित याचिका को लेकर केंद्र को नोटिस जारी किया था। इस याचिका में पीएम केयर्स फंड के पैसे को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी।
सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने दावा किया था कि कोविड -19 महामारी की पृष्ठभूमि में एनडीआरएफ का उपयोग अधिकारियों द्वारा नहीं किया जा रहा है, और पीएम केयर्स फंड की स्थापना आपदा प्रबंधन अधिनियम के दायरे से बाहर है।
पीठ ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि केंद्र को कोविड -19 के लिए एक नई राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी चाहिए।
राजनीति
‘लद्दाख के लोग काफी दुखी हैं’, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर साझा किया वीडियो

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से दिल्ली के लद्दाख भवन में आने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की गई। उनकी ओर से एक्स पर पोस्ट में लिखा गया, “मैं आज गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के लिए दिल्ली के लद्दाख भवन में रहूंगा, लेकिन…।” इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए वीडियो में सोनम वांगचुक ने कहा, “आज लद्दाख के साथ गृह मंत्रालय की होने वाली बातचीत को लेकर कई लोगों ने मुझसे पूछा है। पहले तो यही बताना है कि 15 अक्टूबर को लेह में जो बातचीत की गई थी, वह विफल रही थी। उस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला क्योंकि केंद्र सरकार अपने वादों से पीछे हट गई। उसके बाद उन लोगों की ओर से कहा गया था कि 22 अक्टूबर को दिल्ली में फिर से बातचीत की जाएगी।”
सोनम वांगचुक ने कहा, “बातचीत के हिसाब से ही मैंने अपनी टिकट कराई थी और दिल्ली में कुछ और बैठकें रखीं। हालांकि अभी बताया जा रहा है कि शायद बातचीत आज भी नहीं होगी। एक बार फिर वे अपने वादों से पीछे हट रहे हैं। ऐसे में मैं दिल्ली पहुंच रहा हूं।”
उन्होंने कहा, “मैं लद्दाख भवन आउंगा और लद्दाख के लोगों की व्यथा बताने के लिए पत्रकारों से मुलाकात करूंगा। उम्मीद कर रहा हूं कि वे भी जल्द ही बातचीत करेंगे। मुझे बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि वे हर वादे से पीछे हट रहे हैं। चाहे छठें शेड्यूल का सबसे पहले का वादा या फिर लद्दाख में बनने वाली विधानसभा का हो।” सोनम वांगचुक ने कहा, “यहां के लोग काफी दुखी हैं।”
बता दें कि 10 अक्टूबर को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है।
राजनीति
इंस्टाग्राम पर सोनिया गांधी का डेब्यू, अपनी किताब ‘बिलॉन्गिंग’ की दिखाई झलक

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर डेब्यू किया और अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ का पहला लुक शेयर किया। यह किताब 10 नवंबर को जारी होने वाली है।
सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा, “हेलो एवरीवन, मैं आप सभी के साथ यह पल साझा करते हुए वास्तव में आभारी हूं, ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक। यह प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की जगह खोजने की कहानी है। मैं इसे आप सभी के साथ साझा करने के लिए उत्सुक हूं।”
सोनिया गांधी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दिख रहा है कि जब प्रकाशक किताब की हार्डबाउंड कॉपियां लेकर पहुंचे, तो सोनिया गांधी ने कहा, “आप बहुत भारी वजन उठा रही हैं।” इसके बाद उन्हें किताब की पहली कॉपी और मिठाई का डिब्बा दिया गया। वीडियो में सोनिया गांधी मुस्कुराते हुए किताब के साथ पोज देती नजर आईं जबकि आसपास मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उन्हें बधाई दी।
किताब को पलटते हुए और सोनिया गांधी ने कहा, “बहुत सारी तस्वीरें हैं, प्रियंका।” इसके बाद उन्होंने किताब अपनी बेटी को दिखाई। एक अन्य फ्रेम में प्रियंका गांधी अपनी मां को मिठाई खिलाती हुई नजर आईं और दोनों गले मिलते हुए दिखाई दीं।
खास बात यह है कि सोनिया गांधी ने इस पोस्ट में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स इंडिया के साथ कोलैब किया है। इस खबर को लिखे जाने तक वीडियो की रीच 10 लाख से अधिक तक पहुंच गई है।
‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ सोनिया गांधी की निजी जिंदगी पर आधारित है, जिसमें उन्होंने प्यार, कर्तव्य, नुकसान और अपनेपन की तलाश की कहानी को साझा किया है। यह पहली बार है जब सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के इतने निजी पहलुओं को किताब के जरिए लोगों के सामने रखने का फैसला किया है।
इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाते ही सोनिया गांधी चर्चा में आ गई हैं। उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। कांग्रेस समर्थकों और आम लोगों में उनकी किताब को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश: मूर्ति विसर्जन जुलूस पर हाईटेंशन लाइन गिरने से दो की मौत, 10 से ज्यादा घायल

मध्य प्रदेश के जबलपुर के मझौली थाना क्षेत्र में मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से कम से कम दो लोगों की मौत हो गई जबकि 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए।
पुलिस के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और 10 से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह हादसा मंगलवार देर रात मझौली थाना क्षेत्र में हुआ। एक समूह मूर्ति विसर्जन के लिए सिविल लाइंस पथ से नरिली तालाब की ओर जा रहा था। इस जुलूस में 50 से अधिक लोग शामिल थे।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, रास्ते से हटाने के लिए 440 वोल्ट के नीचे लटक रहे एक तार को ऊपर उठाया गया, जो ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन लाइन के संपर्क में आ गया। इसके बाद तार टूटकर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर गिर गया, जिससे वहां मौजूद लोग करंट की चपेट में आ गए।
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान 22 वर्षीय विकास राजपूत और 23 वर्षीय प्रिंस चौहान के रूप में हुई है। वे ट्रैक्टर पर बैठे थे और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गंभीर रूप से घायल होने वालों में मयंक राजपूत, विक्की रायकवार, मनीष राजपूत और आयुष रायकवार शामिल हैं। उन्हें पहले मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया लेकिन हालत गंभीर होने के चलते जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। हादसे की सूचना मिलने पर मझौली थाना प्रभारी पूर्वा चौरसिया अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं।
घायलों को 108 एंबुलेंस सेवा की मदद से जबलपुर भेजा गया। पुलिस घटना से जुड़े हालात की जांच कर रही है। इस बीच, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि घायलों को मझौली स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बाद उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिली। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में वहां कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था और डॉक्टर लगभग 30 मिनट बाद पहुंचे।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि जुलूस से पहले पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजन समिति के सदस्यों के बीच हुई एक बैठक में नीचे लटक रही बिजली लाइनों का मुद्दा उठाया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिजली विभाग से तारों को ठीक से सुरक्षित करने के लिए कहा गया था लेकिन समय रहते कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया। पुलिस जांच के बारे में और जानकारी तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई का अभी इंतजार है।
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