खेल
कोहली सभी प्रारूपों में विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज : जुनैद
पाकिस्तान के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जुनैद खान ने भारतीय कप्तान विराट कोहली की जमकर तारीफ की है और उन्हें सभी प्रारूपों में विश्व का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बताया है। जुनैद ने कहा कि कोहली की निरंतरता उन्हें बाबर आजम, स्टीव स्मिथ, केन विलियम्सन से आगे रखती है।
जुनैद ने क्रिकइनजीआईएफ के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि कोहली तीनों प्रारूपों में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं। अगर आप किसी से पूछेंगे तो वह कहेंगें कि बाबर आजम, जोए रूट, केन विलियम्सन, स्टीव स्मिथ इस समय विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं लेकिन इन सभी से ऊपर कोहली हैं क्योंकि वह तीनों प्रारूपों में ही शानदार रहे हैं।
2012 में भारत में हुई वनडे सीरीज में जुनैद ने कोहली को तीन बार आउट किया था।
इस पर उन्होंने कहा, “उस दौरे से पहले मैं फैसलाबाद में क्रिकेट खेल रहा था। मैं एक दिन में 35-40 ओवर फेंक रहा था जिससे मुझे सीरीज के लिए जरूरी लय मिल गई थी। मैं उस सीरीज से वनडे में वापसी कर रहा था। भारत जाने से पहले मैं सोच रहा था कि यह मेरे लिए वापसी का एक मात्र मौका है।”
उन्होंने कहा, “मैं टेस्ट टीम में स्थायी था लेकिन मुझे वनडे में वापसी करनी थी। दूसरी बात यह थी कि मैं जानता था कि वापसी के लिए मुझे भारत के खिलाफ विकेट लेने होंगे।”
जुनैद ने कहा, “मैंने पहली गेंद उन्हें फेंकी वो वाइड थी। अगली गेंद पर वो बीट हो गए। मैंने सोचा कि वह कोई आम बल्लेबाज है। इसके बाद मुझे लय मिली।”
उन्होंने कहा, “विराट ने सीरीज से पहले मुझसे कहा था कि यह भारतीय पिचे हैं और यहां गेंद ज्यादा स्विंग या सीम नहीं होती मैंने कहा था कि देखते हैं क्योंकि मैं अच्छी खासी लय में था।”
जुनैद ने पाकिस्तान के लिए 22 टेस्ट, 76 वनडे और नौ टी-20 मैच खेले हैं जिनमें क्रमश: 71, 110 और नौ विकेट लिए हैं।
राजनीति
राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, विरासत की प्रक्रिया जारी रहती है : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

OM MODI
दिल्ली, 18 मार्च : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता है। पीएम मोदी ने निवर्तमान सांसदों के योगदान को सराहा।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह एक ऐसा अवसर है जो हर दो साल में एक बार इस सदन में हमें भावुक क्षणों में सराबोर कर देता है। सदन में कई विषयों पर चर्चा होती है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व होता है, लेकिन जब ऐसा अवसर आता है, तो हम अपने उन सहयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं जो एक विशेष उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कुछ सहकर्मी यहां से विदाई लेकर लौट रहे हैं, कुछ यहां से अपने अनुभव का लाभ उठाकर सामाजिक जीवन में योगदान देने जा रहे हैं। जो लोग जा रहे हैं लेकिन वापस नहीं लौटेंगे, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि राजनीति में कभी विराम नहीं लगता।”
सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन, जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है कि हमारे ये साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। आज यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर सामाजिक जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं हैं, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे उपसभापति हरिवंश सदन से विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला। वे बहुत ही मृदुभाषी हैं और सदन को चलाने में सबका विश्वास जीतने का इन्होंने निरंतर प्रयास किया है।”
पीएम ने कहा कि इस सदन में से हर 2 साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है। लेकिन यह ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको 4 साल से यहां बैठे साथियों से कुछ न कुछ सीखने का अवसर मिलता है। इसलिए एक प्रकार से यहां की विरासत एक प्रक्रिया रहती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “छह साल तक यहां रहने का अवसर न केवल नीति-निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय जीवन में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक अमूल्य अनुभव भी है जो जीवन को समृद्ध बनाता है। जब सम्मानित सांसद अपने विचारों, समझ और क्षमताओं के साथ यहां आते हैं, तो उनके जाने तक, अनुभव की शक्ति से ये गुण कई गुना बढ़ जाते हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे अठावले जा रहे हैं, लेकिन वे अपने हास्य और बुद्धिमत्ता से लोगों का मनोरंजन करते रहेंगे; हमें इस बात का पूरा भरोसा है। हर दो साल में इस सदन में एक भव्य विदाई समारोह होता है। लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि नए सदस्य आते ही उन सहकर्मियों से कुछ सीखने का मौका पाते हैं जो चार साल के अनुभव के साथ यहां लंबे समय से बैठे हैं। एक तरह से, यहां की विरासत एक सतत प्रक्रिया के रूप में जारी रहती है।”
प्रधानमंंत्री ने कहा, “मैं जरूर कहूंगा कि देवगौड़ा, खड़गे, शरद पवार ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन की आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में गई है और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों को इनसे सीखना चाहिए कि समर्पित भाव से सदन में आना, यथासंभव योगदान करना और जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह समर्पित कैसे रहा जा सकता है। मैं उनके योगदान की भूरि-भूरि सराहना करूंगा।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता, उसे ये बात अच्छी तरह समझ आ गई है : ट्रंप

trump
वॉशिंगटन, 18 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इसलिए की, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सेंट पैट्रिक डे के मौके पर कहा, “ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता, और अब उसे यह बात अच्छी तरह समझ आ गई है।”
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने यह कदम तब उठाया, जब उसे लगा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया है। ट्रंप ने कहा, “हमें लगा कि बहुत बुरे इरादे रखने वाले लोगों को रोकना जरूरी है। हम उन्हें परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते।”
ट्रंप ने इस कार्रवाई को हाल ही में उठाया गया एक मजबूत कदम बताया। उन्होंने कहा, “पिछले दो हफ्तों में हमने एक अहम कदम उठाया है और अब हम तय समय से आगे चल रहे हैं।”
उन्होंने दावा किया कि इस हमले से ईरान के नौसेना, वायुसेना, वायु रक्षा प्रणाली, रडार और नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा, “हमने उनकी नौसेना, वायुसेना, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम, रडार और उनके नेताओं को खत्म कर दिया।”
ट्रंप ने रणनीतिक बमवर्षक विमानों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अगर हमने बी-2 बमवर्षक नहीं भेजे होते, तो वे सफल हो जाते। हम ऐसा नहीं होने दे सकते थे।”
ट्रंप ने इस ऑपरेशन को प्रभावी बताया, लेकिन इसे जश्न मनाने लायक नहीं, बल्कि जरूरी बताया। उन्होंने कहा, “सैन्य नजरिए से यह शानदार रहा है, लेकिन अफ़सोस की बात है कि यह कुछ ऐसा था जिसे करना ही था।” उन्होंने कहा, “हम इसे खुशी-खुशी नहीं करते।”
ट्रंप ने अमेरिकी सेना की तारीफ करते हुए कहा, “हमारी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, और अब लोग इसे देख रहे हैं। मैं हमारे सैनिकों को अपना सम्मान और धन्यवाद देता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई के बाद ईरान की स्थिति बदल गई है। ट्रंप ने कहा, “हमने उन्हें पूरी तरह झटका दे दिया है।”
ये बयान उस समय आए, जब अमेरिका और आयरलैंड के संबंधों पर एक औपचारिक कार्यक्रम चल रहा था। ट्रंप ने कहा, “मैं पूरा दिन आयरिश नेताओं के साथ रहा, जबकि मुझे ईरान के मुद्दे पर भी ध्यान देना चाहिए था।”
इस कार्यक्रम में मौजूद आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकेल मार्टिन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर सीधे कुछ नहीं कहा। हालांकि, उन्होंने शांति और बातचीत पर जोर दिया।
मार्टिन ने कहा, “संवाद, बातचीत और तनाव कम करना ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।” उन्होंने मध्य पूर्व और यूक्रेन में शांति की जरूरत भी बताई।
उन्होंने कहा, “दुनिया में संघर्षों के कारण बहुत लोग जान गंवा रहे हैं, इसलिए हमें बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रयास करने होंगे।”
ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका के लिए ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना एक बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है, भले ही यह बात एक औपचारिक कार्यक्रम के दौरान कही गई हो।
अंतरराष्ट्रीय
भारत ने अहमदिया लोगों पर अत्याचार के मामले में पाकिस्तान के इस्लामोफोबिया को उजागर किया

संयुक्त राष्ट्र, 17 मार्च : भारत ने अहमदिया मुसलमानों पर जानलेवा जुल्म में पाकिस्तान के अपने इस्लामोफोबिया को सामने ला दिया है। वहीं, इस्लामाबाद के प्रतिनिधि ने लगभग मान लिया है कि उनका देश अहमदिया मुसलमानों के साथ जुल्म कर रहा है।
बिना पाकिस्तान का नाम लिए और उसे ‘हमारा पश्चिमी पड़ोसी’ बताते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा, ”यह सोचना जरूरी है कि अहमदिया समुदाय पर हो रहे अत्याचार, बेबस अफगानों की बड़े पैमाने पर वापसी (या जबरन निर्वासन) और रमजान के पवित्र महीने में की गई हवाई बमबारी को आखिर क्या कहा जाए?
भारत ने इस्लामोफोबिया से लड़ने के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर जनरल असेंबली में पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने बयान में एक इशारा किया ताकि इस्लामाबाद को यह मानने की जरूरत न पड़े कि उस पर आरोप लगाया गया है, जबकि बयान से यह साफ हो गया।
भले ही उनके देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था, फिर भी पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने अपनी प्रतिक्रिया में इन आरोपों का खंडन भी नहीं किया। उन्होंने यह कहा कि भारत इस्लामोफोबिया पर जनरल असेंबली की बैठक का राजनीतिकरण कर रहा है।
पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने अहमदिया लोगों पर हो रहे जुल्म को लगभग मान लिया।
अहमदिया समुदाय को लेकर पाकिस्तान के संविधान में 1974 के एक बदलाव में इस्लामी कट्टरपंथ की नीति अपनाई गई। इसके तहत अहमदिया लोगों को ‘गैर-मुस्लिम’ घोषित किया गया और उनके खिलाफ जुल्म को सरकारी नीति बना दिया गया। उनकी धार्मिक मस्जिदों पर अक्सर होने वाले हमलों के अलावा, ईशनिंदा विरोधी कानूनों की वजह से उन्हें मौत की सजा हो सकती है।
पाकिस्तान का नाम लिए बिना, हरीश ने साफ तौर पर कहा कि भारत के बारे में उसका प्रोपेगेंडा सिर्फ इस्लामाबाद की ‘आतंकवादी सोच को दिखाता है, जिसे इस देश ने अपनी शुरुआत से ही बनाए रखा है।
उन्होंने कहा, ”असली मुद्दा यही है। किसी भी दूसरे देश की तुलना में भारत सबसे ज्यादा धर्मों (हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म) की जन्मभूमि होने के नाते सर्व धर्म समभाव की सोच को मानता है, जो सभी धर्मों के लिए बराबर सम्मान की बात कहता है और भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को प्रेरित करता है।
उन्होंने कहा, “भारत धर्म के नाम पर हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करता है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले से ही एक ऐसी घोषणा मौजूद है, जो सभी धर्मों के खिलाफ घृणा की स्पष्ट रूप से निंदा करती है, तो संयुक्त राष्ट्र का केवल इस्लामोफोबिया पर विशेष जोर देना उचित है या नहीं।
पी. हरीश 1981 में अपनाए गए सभी तरह की असहिष्णुता और धर्म या विश्वास के आधार पर भेदभाव को खत्म करने की घोषणा का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “1981 की घोषणा हमारे विचार में एक बहुत ही संतुलित और टिकाऊ साधन है, जो बिना किसी को विशेषाधिकार दिए सभी धार्मिक अनुयायियों के अधिकारों को सुरक्षित रखता है।
उन्होंने कहा, ”मैं इस बात पर जोर देता हूं कि यूएन के लिए यह जरूरी है कि वह धार्मिक पहचान को हथियार बनाने और छोटे राजनीतिक मकसदों को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल करने के बढ़ते व्यापार और खतरों पर ध्यान दे। भारत का पश्चिमी पड़ोसी अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने का एक बेहतरीन उदाहरण है।
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