राजनीति
सरकारी पैनल राजीव गांधी फाउंडेशन की जांच करेगी
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा कानूनी प्रावधानों के विभिन्न उल्लंघनों की जांच के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि समिति धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), आयकर अधिनियम और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) जैसे प्रावधानों के उल्लंघन के मामले में इन फाउंडेशन की जांच करेगी।
अधिकारी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय का एक विशेष निदेशक समिति का प्रमुख होगा।
राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना 21 जून 1991 को हुई थी। यह फाउंडेशन कई मुद्दों पर काम करता है, जिसमें साक्षरता, स्वास्थ्य, विकलांगता, वंचितों के सशक्तीकरण, आजीविका और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन शामिल हैं। इसका वर्तमान फोकस क्षेत्र शिक्षा, विकलांगता और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हैं।
कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बोर्ड के सदस्य हैं।
हाल ही में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा कांग्रेस और गांधी परिवार को निशाना बनाते हुए दावा किया गया है कि चीन ने राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदा दिया था, जिसके बाद केंद्र ने अब यह कदम उठाया है।
महाराष्ट्र
मुंबई: गोवांडी फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश… 12 सदस्य गिरफ्तार, इस ग्रुप ने हेल्थ स्कीम के नाम पर दूसरे राज्यों में भी की है ठगी, मुंबई पुलिस का दावा

मुंबई: मुंबई पुलिस ने एक साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ करने का दावा किया है जो हेल्थकेयर पॉलिसी के नाम पर लोगों को ठग रहा था। मुंबई पुलिस ने गैंग के 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। शिकायतकर्ता ने गोविंद पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे एचडीएफसी एगो हेल्थ पॉलिसी ऑफिस से पॉलिसी और बोनस क्लेम के नाम पर फोन कॉल आए थे और क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के जरिए 3 लाख रुपये से ज्यादा की रकम निकाली गई थी। पुलिस ने 26 जून को इस मामले में केस दर्ज किया और जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस ने साइबर फ्रॉड के अड्डे, तीन फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो गोविंद में चल रहे थे और हेल्थ स्कीम के जरिए लोगों को ठग रहे थे। इस कॉल सेंटर पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया और 21 कंप्यूटर, 5 लैपटॉप, 15 मोबाइल, 3 राउटर, ऑनलाइन खरीदे गए 15 सिम कार्ड जब्त किए। 05 ग्राम सोना बरामद किया गया। ये आरोपी इंश्योरेंस के नाम पर दूसरे राज्यों में भी फ्रॉड कर चुके हैं। यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी और ज़ोन 1 के डीसीपी समीर शेख ने किया।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रोजगार में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की होगी जरूरत: रिपोर्ट

भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फिलिस्तीन के समर्थन में भारत ने दोहराई प्रतिबद्धता, दो राष्ट्र समाधान और यूएन में सदस्यता का किया समर्थन

ब्रुसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप (पीडीजी) की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना लगातार समर्थन दोहराया। साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की सदस्यता का भी समर्थन किया।
विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एंड ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह मीटिंग यूरोपीय कमीशन और फिलिस्तीन अथॉरिटी ने मिलकर स्थानीय समयानुसार सोमवार को आयोजित की थी। मीटिंग में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, फिलिस्तीन और दूसरे जरूरी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और वित्तीय संस्थानों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों का विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी के समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के लिए भारत की निरंतर विकासात्मक सहायता, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और मानवीय मदद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास परियोजनाएं फिलिस्तीन की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जाती हैं और उनका मुख्य फोकस स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर है।
सचिव ने कहा कि भारत इस समय फिलिस्तीन में स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण से जुड़े कई प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की।
ब्रुसेल्स प्रवास के दौरान सचिव ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) की सलाहकार आयोग की आने वाली अध्यक्षता की ओर से आयोजित एक बैठक में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एजेंसी और फिलिस्तीन में उसके मानवीय प्रयासों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत फिलिस्तीन के लोगों की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने में ठोस योगदान देने वाला एक प्रतिबद्ध साझेदार बना हुआ है।”
पिछले महीने भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने विश्वास जताया था कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का मजबूत समर्थक है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अब्दुल्ला अबू शावेश ने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि भारत दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का मजबूती से समर्थन करता है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावों पर भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों के पक्ष में मतदान करता रहा है। इसके साथ ही भारत जमीनी स्तर पर भी शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है और फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाएं लागू कर चुका है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक बेहद महत्वपूर्ण पहल जल्द शुरू होने वाली है। भारत फिलिस्तीन, खासकर वेस्ट बैंक में एक अस्पताल के निर्माण की अहम परियोजना पर काम शुरू करने जा रहा है।”
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