राजनीति
शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा उलझन में
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा के भीतर ही उलझन बढ़ गई है क्योंकि मंत्रियों के संभावित नामों से लेकर विभागों के वितरण को लेकर असहजता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री दो दिन दिल्ली में रहे और तमाम बड़े नेताओं से उनकी चर्चाएं भी हुई, मगर संगठन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है। राज्य में शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बने तीन माह का वक्त गुजर गया है और अब तक सिर्फ पांच मंत्रियों को ही मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सका है। मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार की कोशिशें अरसे से चल रही हैं और यह प्रक्रिया अंतिम दौर में है मगर नामों और विभागों को लेकर शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही अंदर खाने खींचतान बढ़ गई।
भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में कम से कम छह से सात मंत्री अपनी पसंद के चाहते हैं, वहीं भाजपा सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए तत्कालीन 22 विधायकों में से 10 को मंत्री बनाना चाहती है। इनमें से दो गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट पहले ही मंत्री बन चुके हैं, वहीं अन्य नामों में से सिंधिया एंदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग को अपने कोटे से मंत्री बनाने को सहमत नहीं है। सिंधिया पूर्व मंत्री इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रभु राम चौधरी, महेंद्र सिंह सिसोदिया के अलावा राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, रणवीर जाटव और ओ पी एस भदौरिया को मंत्री बनवाना चाहते हैं।
वहीं दल बदल कराते समय शिवराज सिंह चौहान ने बिसाहूलाल सिंह के अलावा हरदीप सिंह डंग को मंत्री बनाने का भरोसा दिलाया था तो दूसरी ओर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा लगातार एंदल सिंह कंसाना की पैरवी करते आ रहे हैं। इन तीनों को मंत्री बनाने का दवाब है। इतना ही नहीं सिंधिया गृह, परिवहन और आबकारी में से एक विभाग इसके अलावा महिला बाल विकास, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जनसंपर्क और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को अपने कोटे के संभावित मंत्रियों को दिलाना चाहते हैं। सिंधिया ने अपनी राय से सोमवार को मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री चौहान को अवगत भी करा दिया है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सिंधिया कोटे से दो मंत्री बन चुके हैं वहीं सात मंत्री और बनवाना चाहते हैं इसके अलावा तीन सदस्य अन्य ऐसे हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा आए हैं, इस तरह कुल मिलाकर कांग्रेस छोड़कर आए 12 सदस्यों को मंत्रिमंडल में स्थान देने का दबाव है। इन स्थितियों में भाजपा के हिस्से के मंत्रियों की संख्या कम हो सकती है। भाजपा के लिए समस्या का कारण यह है कि पार्टी में वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों की संख्या बहुत ज्यादा है। इस द्वंद्व के चलते मंत्रिमंडल का विस्तार आगे बढ़ जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए।
शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार न हो पाने पर प्रदेश कांग्रेस ने तंज कसा है। पार्टी के ट्विटर हैंडिल पर कहा गया है मप्र में फिर टला मंत्रिमंडल विस्तार।
राजनीतिक विष्लेषक रवींद्र व्यास का कहना है, “मंत्रिमंडल का विस्तार भाजपा और शिवराज के लिए एक तरफ कुआं और दूसरी ओर खाई बना हुआ है। जो नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं उन्हें संतुष्ट तो करना ही होगा, इस स्थिति में भाजपा में असंतुष्टों के बढ़ने का खतरा बना हुआ है।”
मुख्यमंत्री चौहान दो दिन तक दिल्ली में रहे, मंगलवार की सुबह भोपाल लौट आए हैं। दिल्ली प्रवास के दौरान चौहान की मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनकी पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा हाल ही में भाजपा में आए नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात हुई। उसके बाद भी अभी तक सूची को अंतिम रुप नहीं दिया जा सका है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
उत्तर कोरिया इस महीने यूएन जनरल असेंबली में उप मंत्री भेज सकता है

इस साल की संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली की जनरल डिबेट 22-26 सितंबर और 28 सितंबर को होने वाली है। उत्तर कोरिया न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में एक उप मंत्री स्तर का अधिकारी भेज सकता है। असेंबली में उप विदेश मंत्री किम सोन-ग्योंग भाषण दे सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सचिवालय द्वारा अपडेट की गई वक्ताओं की सूची के अनुसार, उत्तर कोरिया के एक उप मंत्री स्तर के अधिकारी 28 सितंबर को यूएन मुख्यालय में देश का प्रतिनिधित्व करने और भाषण देने वाले हैं। यह 81वीं यूएन जनरल असेंबली के उच्च-स्तर का आखिरी दिन है।
योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उत्तर कोरिया में कई उप विदेश मंत्री हैं, लेकिन किम, जो अंतरराष्ट्रीय संस्थान प्रभारी हैं, पिछले साल की तरह इसमें शामिल हो सकते हैं।
पिछले साल, किम ने सात साल में पहली बार जनरल असेंबली में उत्तर कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
2019 से 2024 तक, प्योंगयांग ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच 2019 हनोई बैठक के असफल रहने के बाद जनरल असेंबली में किसी उच्च स्तर के अधिकारी को नहीं भेजा। इसके बजाय, यूएन में उत्तर कोरिया के राजदूत किम सोंग ने जनरल असेंबली में भाषण दिया। इस साल यूएन में उत्तर कोरिया क्या संदेश देगा, इस पर ध्यान रहने की उम्मीद है, क्योंकि ट्रंप ने इस साल उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से मिलने की इच्छा जताई है।
संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली, संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक है, जो इसके मुख्य विचार-विमर्श, नीति बनाने और प्रतिनिधि अंग के तौर पर काम करता है। अभी यह अपने 80वें सेशन में है। इसकी शक्ति, बनावट, काम और प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय आईवी में बताए गए हैं।
महाराष्ट्र
मुंबई में दही-हांडी उत्सव को लेकर महिलाओं में उत्साह, बोलीं- हर साल रहता है इस दिन का इंतजार

मुंबई के श्री साई दत्ता मित्र मंडल की ओर से में दही-हांडी उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। इस उत्सव में महिला श्रद्धालु शामिल होती हैं। महिलाएं दही-हांडी फोड़ने के लिए काफी उत्सुक हैं।
आईएएनएस से बातचीत में एक महिला ने कहा कि हम लोग आज श्री साई दत्ता मित्र मंडल की हांडी फोड़ने आए हैं। बीते छह वर्षों से हम लोग हांडी फोड़ते आए हैं। इसको लेकर हम लोग काफी उत्सुक हैं। हांडी उत्सव खत्म होने के बाद ही हम लोगों को इस दिन का इंतजार रहता है।
महिला ने कहा कि अब लड़के और लड़कियों में कोई अंतर नहीं रह गया है, ऐसे में जो लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए बड़े पैमाने पर लोग सपोर्ट कर रहे हैं, जो लोग ऐसा नहीं कर रहे हैं। उनको भी घर की लड़कियों को आगे बढ़ाना चाहिए। अगर एक लड़की को कुछ करना पसंद है तो उसका समर्थन और हर चीज के लिए मनोबल बढ़ाना चाहिए। महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। इस क्षेत्र में हम लोग कम योगदान नहीं दे रहे हैं। दही-हांडी उत्सव में हिस्सा लेने आईं एक और महिला ने कहा कि हम लोग यहां हर वर्ष आते हैं और खूब आनंद लेते हैं।
बीते दिन मुंबई में बड़े उल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाई गई। मुंबई गोवर्धन इकोविलेज के डायरेक्टर गौरंगा दास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “इस्कॉन चौपाटी का श्री श्री राधा गोपीनाथ मंदिर पिछले 40 साल से जन्माष्टमी मना रहा है। दक्षिण मुंबई एक बहुत अहम इलाका है और हर साल जन्माष्टमी के दौरान कम से कम दो लाख भक्त दर्शन के लिए मंदिर आते हैं।”
गौरंग दास ने कहा, “कहा जाता है कि कलियुग में सबसे बड़ी आध्यात्मिक साधना ‘हरि नाम संकीर्तन’ है, यानी भगवान के पवित्र नाम का जाप करना। जब कोई हमें एक गिलास पानी भी देता है, तो हम तुरंत ‘थैंक यू’ कहते हैं।” भगवान हमको वायु, जल और अन्न दे रहे हैं। इतना सब कुछ पाने के बाद मानव समाज क्या उनको धन्यवाद नहीं दे सकता। हम महामंत्र के जप को धन्यवाद देने की पद्धति कहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल बाढ़: मृतकों की संख्या 1,300 के पार

नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,300 के पार पहुंच गई है। हर गुजरते दिन के साथ अलग-अलग जिलों में शव बरामद किए जा रहे हैं।
नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार ग्यारहवें दिन तक (शनिवार सुबह 8 बजे तक) 1,344 शव बरामद किए जा चुके हैं।
मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि 4,886 लोग (जिनमें 606 विदेशी भी शामिल हैं) अभी भी लापता हैं। इस बाढ़ ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा दिया और मध्य नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी कॉरिडोर के आस-पास लोगों की जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाया।
माना जा रहा है कि लापता लोगों में से बड़ी संख्या उन लोगों की है जो इन दो नदी कॉरिडोर पर बने 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे हुए हैं; वहां बचाव कार्य जारी है।
शुक्रवार को रसुवा जिले में 60 एमडब्ल्यू के अपर त्रिशूली 3ए प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बचाया गया। नेपाल सरकार ने कहा कि लापता लोगों को खोजने के लिए बचाव कार्य जारी है, साथ ही शवों को निकालने, उनकी पहचान करने और राहत कार्यों में भी टीम सदस्य जुटे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने बाढ़ पीड़ित इलाकों में खोज और बचाव अभियान तेज कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि अब तक 8,962 लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 1,552 विदेशी शामिल हैं।
बरामद शवों की पहचान करने की कोशिशें भी तेज कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, 1,260 मृतकों और मृतकों के 1,012 रिश्तेदारों से डीएनए सैंपल लिए गए हैं, जिससे कुल सैंपल की संख्या 2,272 हो गई है।
नेपाल पुलिस ने खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए 7,912 कर्मियों को तैनात किया है। पुलिस के 65 कर्मी इस आपदा का शिकार हुए हैं, जबकि 25 अभी भी लापता हैं।
बाढ़ ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के आस-पास के बुनियादी ढांचे और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बचाव और राहत कार्य पूरा होने के बाद नेपाल इनके पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग कर रहा है।
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