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सेंसेक्स 400 अंक टूटा, निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट
कोरोनावायरस के गहराते प्रकोप के चलते विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों से सोमवार को फिर घरेलू शेयर बाजार में शुरूआती कारोबार में भारी गिरावट आई। सेंसेक्स 400 अंक टूटकर 33400 के नीचे चला गया और निफ्टी भी 100 अंकों की गिरावट के साथ 9900 के नीचे लुढ़क गया। सुबह 9.40 बजे सेंसेक्स पिछले सत्र से 377.45 अंकों यानी 1.12 फीसदी की गिरावट के साथ 33,403.44 पर कारोबार कर रहा था और निफ्टी भी 95.15 अंकों यानी 0.95 फीसदी की गिरावट के साथ 9877.75 पर कारोबार कर रहा था।
एशियाई बाजारों में सोमवार को आई गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा।
कारोबार के आरंभ में बंबई स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सत्र से 110.34 अंकों की गिरावट के साथ 33,670.55 पर खुला और 33,381.17 तक लुढ़का।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 53.55 अंकों की गिरावट के साथ 9919.35 पर खुला और 9862.50 तक लुढ़का।
बाजार के जानकार बताते हैं कि भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में कोरोनावायरस का प्रकोप गहराता जा रहा है, जिसके कारण शेयर बाजार में अनिश्चितता के माहौल बना है।
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भारतीय शेयर बाजार में छाई लाली, सेंसेक्स 1,200 अंक तक टूटा; जानिए इस बड़ी गिरावट के मुख्य कारण

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मुंबई : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी50 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ खुले।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1,200 अंक यानी 1.6 प्रतिशत टूटकर 72,326.54 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 350 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 22,453 के इंट्रा-डे लो पर आ गया। इस दौरान, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इस तेज गिरावट के चलते कुछ ही घंटों में निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 422.04 लाख करोड़ रुपए (शुक्रवार) से घटकर 416.06 लाख करोड़ रुपए रह गया (दोपहर 12.30 बजे तक)।
बाजार में इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध है, जो एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर गया है। इस युद्ध के खत्म होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला बढ़ाया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है।
दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी 85-90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है; ऐसे में महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है।
तीसरा कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 28.1 के पार पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है। आमतौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है।
चौथा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में 27 तारीख तक भारतीय बाजार से 1.23 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं। इससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है।
पांचवां कारण एफएंडओ (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी है। 30 मार्च को मार्च सीरीज के कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारणों के चलते फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कीमती धातुओं पर दबाव, सोना 0.50 प्रतिशत से ज्यादा फिसला

मुंबई : अमेरिका-ईरान संघर्ष के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही कमोडिटी बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बावजूद निवेशकों की धारणा कमजोर पड़ती नजर आई, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बना।
सोमवार सुबह करीब 10.43 बजे एमसीएक्स पर अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 0.68 प्रतिशत यानी 982 रुपए गिरकर 1,43,300 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 0.34 प्रतिशत यानी 767 रुपए की तेजी के साथ 2,28,721 रुपए प्रति किलो पर ट्रेड करते हुए नजर आई। हालांकि शुरुआती कारोबार में सिल्वर में भी गिरावट दर्ज की गई।
इससे पहले शुक्रवार को भी सोने और चांदी में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, जहां गोल्ड 1,44,401 रुपए प्रति 10 ग्राम और सिल्वर 2,27,750 रुपए प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था।
वैश्विक बाजारों में भी सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई है, जिससे पिछले सप्ताह की बढ़त लगभग खत्म हो गई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियों और अमेरिकी सैन्य तैनाती में बढ़ोतरी के बावजूद निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) से कुछ हद तक हटता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में करीब 1.7 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
कमोडिटी एक्सचेंज (कॉमेक्स) में भी सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा। सोमवार को सोना 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 4,447.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, हालांकि निचले स्तरों पर खरीदारी के चलते इसमें कुछ सुधार हुआ और कीमतें फिर से 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास पहुंच गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई की आशंकाओं ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। इसके अलावा, अमेरिका के फेडरल रिजर्व समेत अन्य केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने या बढ़ाने की संभावना भी सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
बता दें कि युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में 15 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने का आकर्षण इस दौरान कमजोर पड़ा है और यह शेयर बाजार की चाल के साथ तालमेल बिठाता नजर आया है।
वहीं, केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीद में भी बदलाव देखने को मिला है। पिछले कुछ वर्षों में जहां सोने की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण केंद्रीय बैंकों की खरीद रही, वहीं हालिया घटनाक्रम में तुर्की जैसे देशों ने अपने सोने के भंडार को बेचना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि तुर्की ने युद्ध के शुरुआती दो हफ्तों में करीब 60 टन सोना, जिसकी कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक है, बेच दिया।
इसके अलावा, कई देश जो सोने के बड़े खरीदार हैं, वे ऊर्जा आयातक भी हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से उनके पास सोना खरीदने के लिए डॉलर की उपलब्धता कम हो जाती है, जिसका असर मांग पर पड़ता है।
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कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में 1 प्रतिशत की गिरावट

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मुंबई, 30 मार्च : अमेरिकी-ईरान युद्ध के पांचवें सप्ताह में प्रवेश करने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और महंगाई की चिंताओं के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में खुला।
इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,018 अंक यानी 1.4 प्रतिशत गिरकर 72,565.22 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 270 अंक या 1.2 प्रतिशत गिरकर 22,549.65 पर खुला।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.30 बजे के करीब) सेंसेक्स 794.87 अंक (1.08 प्रतिशत) गिरकर 72,788.35 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी50 228.75 (1.00 प्रतिशत) अंकों की गिरावट के साथ 22,590.85 पर ट्रेड कर रहा था।
व्यापक बाजारों में निफ्टी मिडकैप 1.26 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 1.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
वहीं सेक्टर के हिसाब से देखें तो, निफ्टी बैंक (2.05 प्रतिशत की गिरावट) और निफ्टी पीएसयू बैंक (1.62 प्रतिशत की गिरावट) सबसे ज्यादा गिरावट वाले सेक्टर रहे। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो (0.72 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी एफएमसीजी (0.14 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी आईटी (0.35 प्रतिशत की गिरावट) और निफ्टी फार्मा (0.85 प्रतिशत की गिरावट) भी गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए।
जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.62 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 1.41 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया में 0.41 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली।
निफ्टी50 में कोटक बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, मैक्स हेल्थ, भारती एयरटेल और एसबीआई के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए, जबकि हिंडाल्को, कोल इंडिया, बीईएल, ओएनजीसी, पावरग्रिड, एचयूएल और अदाणी इंटरप्राइजेज के शेयरों में उछाल दर्ज की गई।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मंदी का संकेत देने वाली कैंडलस्टिक का बनना बाजार में लगातार कमजोरी और नकारात्मक भावना को दर्शाता है। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 22,450-22,500 के दायरे में देखा जा रहा है, जबकि रेजिस्टेंस 22,950-23,000 के बीच है।
विश्लेषकों ने निवेशकों को अनुशासित और चयनात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी और कहा कि वे अल्पकालिक तेजी का पीछा करने के बजाय महत्वपूर्ण गिरावट के दौरान मौलिक रूप से मजबूत शेयरों पर ध्यान दें।
एक विश्लेषक ने कहा, “नई लॉन्ग पोजीशन पर विचार तभी किया जाना चाहिए जब निफ्टी निर्णायक रूप से 24,000 के स्तर को तोड़कर ऊपर उठ जाए और उसे बनाए रखे, जो बेहतर सेंटिमेंट का संकेत देगा और अधिक स्थिर रिकवरी का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
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