खेल
चोट के कारण 2020 का बचा हुआ सीजन नहीं खेल पाएंगे फेडरर
स्विट्जरलैंड के स्टार टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर ने बताया है कि वह दाएं घुटने में सर्जरी के कारण 2020 का बाकी बचा हुआ सीजन नहीं खेल पाएंगे। टेनिस स्टार ने बुधवार को इस बात की जानकारी दी।
ट्वीट करते हुए फेडरर ने बताया कि वह 2021 की शुरुआत में वापसी कर सकते हैं।
फेडरर ने एक बयान में कहा, “मेरे प्रिय प्रशंसकों, मुझे उम्मीद है कि आप लोग सुरक्षित होंगे। कुछ सप्ताह पहले, मुझे अपने रीहैब की शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई थी। मुझे अपने दाएं घुटने की सर्जरी करानी पड़ी।”
20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता ने बताया, “अब, 2017 के सीजन की तरह चीजें हो रही हैं। मैं अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर के साथ खेलने के लिए जरूरी समय ले रहा हूं। मैं अपने प्रशंसकों को मिस करूंगा लेकिन मैं आपसे 2021 सीजन की शुरुआत में मिलने के लिए तैयार रहूंगा।”
पूर्व विश्व नंबर-1 खिलाड़ी ने इस साल आस्ट्रेलिया ओपन में अपना आखिरी मैच खेला था जहां वे सेमीफाइनल में सर्बिया के नोवाक जोकोविक से हार गए थे।
1998 में पदार्पण करने के बाद फेडरर पहली बार इतने लंबे अरसे के लिए कोर्ट से दूर रहेंगे।
खेल
बुमराह के बाएं घुटने में तकलीफ, श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट से बाहर रह सकते हैं बाहर

भारत-श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से दो मुकाबलों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी, जिससे भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के बाहर होने की आशंका है, क्योंकि उनके बाएं घुटने में तकलीफ है।
जसप्रीत बुमराह 16 जुलाई को इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच में फील्डिंग के दौरान अपना बायां घुटना चोटिल करवा बैठे थे, जिसमें सूजन आने के कारण वह इंग्लैंड के विरुद्ध 19 जुलाई को सीरीज का निर्णायक मैच नहीं खेल सके थे।
रविवार को एक सूत्र ने ‘आईएएनएस’ को बताया, “जिस दिन कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि बुमराह ने श्रीलंका दौरे के लिए फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है, असलियत यह थी कि उन्होंने उस समय तक गेंदबाजी शुरू ही नहीं की थी। इस हफ्ते बेंगलुरु में बीसीसीआई सीईओ में रहने के दौरान उन्होंने एक भी गेंद नहीं फेंकी। मेडिकल टीम को लगा कि उन्हें ठीक होने के लिए और समय चाहिए, क्योंकि अगर बुमराह तुरंत खेलने लगते हैं तो घुटने की चोट और बढ़ सकती है। उनका पूरी तरह ठीक होना प्राथमिकता है और इसका मतलब है कि उनके श्रीलंका दौरे से बाहर रहने की आशंका है।”
शुरुआत में बुमराह को शुभमन गिल की कप्तानी वाली टेस्ट टीम में शामिल किया गया था, लेकिन यह उनके फिटनेस क्लीयरेंस पर निर्भर था। अब, अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली सीनियर चयन समिति के किसी दूसरे खिलाड़ी को टीम में शामिल करने की उम्मीद है। बुमराह की जगह टीम में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर के सीम-बॉलिंग ऑलराउंडर आकिब नबी सबसे आगे चल रहे हैं, जिन्होंने साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के लिए रणजी ट्रॉफी में 60 विकेट लिए थे।
बुमराह के अलावा, भारत के तेज गेंदबाजी विभाग में मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार शामिल हैं। भारतीय टेस्ट टीम के 4 अगस्त को श्रीलंका पहुंचने की उम्मीद है।
भारतीय टीम कोलंबो के एनसीसी में 7 से 9 अगस्त तक तीन दिन के प्रैक्टिस मैच में हिस्सा लेगी, जिसके बाद उसे 15 अगस्त से गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच खेलना है। दूसरा टेस्ट मैच 23 से 27 अगस्त के बीच सिंहालीज स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा।
खेल
सीडब्ल्यूजी 2026: एक दिन में 16 मेडल जीतकर भारत ने लगाई मेडल टैली में लंबी छलांग, टॉप पर काबिज ऑस्ट्रेलिया

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 10वां दिन ऐतिहासिक रहा। देश ने बॉक्सिंग में 10 मेडल समेत कुल 16 मेडल अपने नाम किए। एथलीटों के दमदार प्रदर्शन के बूते भारत ने मेडल टैली में भी लंबी छलांग लगाई है।
भारत अब 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ मेडल टैली में चौथे नंबर पर आ गया है। भारत के कुल मेडल की संख्या अब 39 हो गई है और देश ने छह पायदान की छलांग लगाई है। ऑस्ट्रेलिया 10वें दिन भी अपनी बादशाहत को बरकरार रखने में सफल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पास 61 गोल्ड, 38 सिल्वर और 50 ब्रॉन्ज मेडल हैं।
इंग्लैंड 25 गोल्ड, 40 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज मेडल लेकर कुल 99 मेडल के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, कनाडा 18 गोल्ड समेत 57 मेडल जीतकर तीसरे नंबर पर काबिज है। भारत के शानदार प्रदर्शन के कारण मेजबान स्कॉटलैंड अब पांचवें नंबर पर खिसक गया है। स्कॉटलैंड के 12 गोल्ड, 8 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज मेडल हैं। वहीं, नाइजीरिया 10 गोल्ड समेत कुल 21 मेडल जीतकर छठे नंबर पर मौजूद है। वेल्स 8 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज मेडल लेकर सातवें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड 8 गोल्ड के साथ कुल 27 मेडल जीतकर आठवें नंबर पर मौजूद है।
10वें दिन भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन लाजवाब रहा। खासतौर पर भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार खेल दिखाते हुए कुल 10 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 7 गोल्ड शामिल रहे। पुरुष कैटेगरी में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि महिला कैटेगरी में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने ‘गोल्डन पंच’ लगाया। वहीं, जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। वहीं, ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वहीं, शॉट पुट में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। सोमन राणा ने गोल्ड, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।
खेल
‘बस खुद पर विश्वास रखा’, ‘गोल्डन पंच’ लगाने पर बोले मुक्केबाज अंकुश पंघाल

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 10वें दिन भारतीय मुक्केबाजों का जलवा रहा। इस खेल से देश की झोली में कुल 10 मेडल आए, जिसमें 7 गोल्ड मेडल शामिल रहे। गोल्ड जीतने वाले मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कहा कि उन्होंने फाइनल मैच के दौरान खुद पर विश्वास रखा, जिसका फायदा उन्हें मिला।
अंकुश ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा, “गोल्ड मेडल जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है, हालांकि पहले बाउट में 0-5 से पीछे हो गया था, तो दबाव आ गया था कि कैसे भी करके बाउट लेनी है। बस खुद के ऊपर विश्वास रखा और सब हो गया। परिवार से बात हुई थी और सभी काफी खुश है। मैं अपना यह मेडल परिवार और अपने कोच को समर्पित करना चाहता हूं। यहां जीतकर आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और एशियन गेम्स में और भी अच्छा करूंगा।”
महिला मुक्केबाज लवलीना को फाइनल में हार का सामना करना पड़ा और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। उन्होंने ‘आईएएनएस’ को बताया, “थोड़ी निराशा जरूर है। मैंने गोल्ड मेडल जीतने की पूरी कोशिश की, लेकिन मैं सिल्वर मेडल से भी खुश हूं, क्योंकि हमारी टीम ने गेम्स में जबरदस्त प्रदर्शन किया। मुझे अपनी टीम के प्रदर्शन की ज्यादा खुशी है। यह मेरा कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला मेडल है, तो इसकी भी मुझे काफी खुशी है। देश के लिए गोल्ड ला पाती तो और अच्छा होता। मैं एशियन गेम्स के लिए तैयारी करूंगी और वहां गोल्ड जीतने का प्रयास करूंगी।” लवलीना ने अपना यह मेडल असम में बाढ़ पीड़ित लोगों को समर्पित किया।
90 प्लस कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीतने वाले नरेंदर ने कहा, “मैंने अपना बेस्ट प्रदर्शन किया। यह साउथ का मुक्केबाज था और हम जो प्लानिंग करके आए थे उसमें थोड़ी कसर रह गई। यह मुक्केबाज भागकर ज्यादा खेल रहा था, जिसके कारण उसको पकड़ना मुश्किल हो रहा था। इस मैच को हारने की कमी मैं एशियन गेम्स में पूरी करूंगा।”
गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले मुक्केबाज सचिन सिवाच ने बताया कि दो राउंड में पीछे होने के बाद उनके पास कोई चारा नहीं था और इसी कारण वह आगे बढ़कर विपक्षी मुक्केबाज पर अटैक कर रहे थे। उन्होंने बताया, “पहले दो राउंड में 2-3 से हार गया था और मेरे पास सिर्फ आखिरी राउंड का चांस था। आगे बढ़ने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था, तो इसी वजह से मैं आगे बढ़कर मार रहा था। मुझे विश्वास था कि मैं जीत सकता हूं और वैसा ही हुआ।”
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