खेल
एआईएफएफ ने संशोधित सीजन, ट्रांसफर विंडो तारीखों की घोषणा की
अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय फुटबाल का 2020-21 सीजन इस साल एक अगस्त से 31 मई 2021 तक होगा। वहीं इसकी ट्रांसफर विंडो एक अगस्त से 20 अक्टूबर तक खुली रहेगी। एआईएफएफ ने सभी सदस्य संघों को भेजे गए सकरुलर में कहा, ” आपको यह बताते हुए हमें खुशी हो रही है कि फीफा ने एआईएफएफ की संशोधित सीजन की तारीखों और 2020-21 के लिए पंजीकरण अवधि (ट्रांसफर विंडो) को अपनी मंजूरी दे दी है।”
आमतौर पर भारतीय फुटबाल की ट्रांसफर विंडो नौ जून से 31 अगस्त के बीच खुली रहती है। भारतीय फुटबाल के मौजूदा सीजन को आई-लीग की समाप्ति के साथ ही कोरोनावायरस महामारी के कारण खत्म कर दिया गया था।
भारत में पिछला फुटबाल मैच एटीके और चेन्नइयन एफसी के बीच इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का फाइनल खेला गया था, जोकि खाली स्टेडियम में खेला गया था।
दूसरी ट्रांसफर विंडो एक जनवरी 2021 से 31 जनवरी 2021 तक की होगी जबकि एमेच्योर खिलाड़ियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया एक अगस्त से 31 मई 2021 तक होगी।
राजनीति
बंगाल चुनाव 2026: भाजपा ने जारी की 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों पर उतारा

कोलकाता, 16 मार्च : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में 144 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इस लिस्ट में भाजपा के कई दिग्गज नेताओं को टिकट दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों से मैदान में उतारा गया है।
बता दें कि भाजपा की पहली लिस्ट में बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर और नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया गया है। पिछले चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में सीएम ममता बनर्जी को करीब 2000 वोटों के अंतर से हराया था।
वहीं, अग्निमित्रा पॉल को आसनसोल दक्षिण से टिकट दिया गया है। कूचबिहार उत्तर (अजा) से सुकुमार रॉय, सीतलकुची (अजा) से सावित्री बर्मन और दिनहाटा से अजय रॉय को उम्मीदवार बनाया गया है।
इसके साथ ही, तूफानगंज से मालती रावा रॉय, कुमारग्राम (अजजा) से मनोज कुमार ओरांव, कालचिनी (अजजा) से विशाल लामा, माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी (अजा) से आनंदमय बर्मन, सिलीगुड़ी से डॉ. शंकर घोष, फांसीदेवा (अजजा) से दुर्गा मुर्मू, गोलपोखर से सरजीत बिस्वास और चाकुलिया से मनोज जैन को मैदान में उतारा गया है।
पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में 12 मार्च को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई थी।
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए थे।
इस बैठक में केंद्रीय चुनाव समिति ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न उम्मीदवारों के नाम पर अपनी स्वीकृति दी थी।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे। 23 अप्रैल को पहले चरण के चुनाव में 152 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण के चुनाव में 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। इसके साथ ही, चार मई को चुनाव के परिणाम घोषित किए जाएंगे।
राष्ट्रीय
मुंबई: डीआरडीओ के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुरुलकर की जमानत पर फैसला सुरक्षित

law
मुंबई, 16 मार्च : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुरुलकर की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत में मामले को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई, जिसके बाद कोर्ट ने आदेश बाद में सुनाने का निर्णय लिया।
दरअसल, डॉ. प्रदीप कुरुलकर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप है। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने मई 2023 में उन्हें गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़ी एक महिला एजेंट के संपर्क में आकर देश की रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की। जांच के मुताबिक, कुरुलकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए एक महिला के संपर्क में आए थे। बताया गया कि वह महिला खुद को डिफेंस रिसर्च में रुचि रखने वाली बताती थी, लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि उसका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से हो सकता है।
एटीएस के अनुसार, बातचीत के दौरान कुरुलकर ने भारत के कई संवेदनशील रक्षा प्रोजेक्ट्स से जुड़ी जानकारी साझा की। इनमें मिसाइल और रक्षा प्रणालियों से संबंधित तकनीकी जानकारियां भी शामिल होने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि बातचीत में कई बार बेहद गोपनीय विषयों पर चर्चा हुई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है।
सुनवाई के दौरान एटीएस ने अदालत में कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला है। एजेंसी का कहना है कि कुरुलकर जिस पद पर कार्यरत थे, वहां से उन्हें कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं तक पहुंच थी। एटीएस ने यह भी दलील दी कि जांच अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई है और कई डिजिटल सबूतों की जांच जारी है। ऐसे में आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। वहीं, कुरुलकर की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि बातचीत में ऐसी कोई जानकारी साझा नहीं की गई जो आधिकारिक रूप से गोपनीय श्रेणी में आती हो।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कुरुलकर लंबे समय तक देश के रक्षा अनुसंधान से जुड़े रहे हैं और उनका पूरा करियर बेदाग रहा है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया है।
अंतरराष्ट्रीय
मिडिल ईस्ट संकट और अफगानिस्तान युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमराई, बचत उपायों की उम्मीद नहीं

नई दिल्ली, 16 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए संकट से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ है। सऊदी अरब के साथ समझौते की वजह से युद्ध में शामिल होने या न होने को लेकर पाकिस्तान के सामने कई मुश्किलें हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर इस्लामाबाद की हालत बदतर होती जा रही है। मिडिल ईस्ट का संकट ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है।
अफगानिस्तान से युद्ध और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के साथ लगातार लड़ाई ने इसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ये लड़ाइयां पाकिस्तान को न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर, बल्कि आर्थिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। पाकिस्तान के लिए हालात इतने खराब हैं कि उसे अपनी बची-खुची अर्थव्यवस्था को भी बचाना होगा। इस्लामाबाद ने अब अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं और कई मोर्चों पर कई कटौतियों की घोषणा की है।
केंद्रीय और प्रांतीय सरकारी विभागों में सरकारी गाड़ियों को 60 फीसदी तक सड़क से दूर रखने का फैसला किया गया है। सरकारी ऑफिस में ग्रेड-20 के अधिकारी जो 3,00,000 रुपए से ज्यादा कमाते हैं, उनसे अपनी मर्जी से दो दिन की सैलरी छोड़ने को कहा गया है। हालांकि, यह स्वास्थ्य और शिक्षा सेक्टर के लोगों पर लागू नहीं होता है।
सरकार ने प्रांतीय और केंद्रीय सदन के सदस्यों को दो महीने के लिए सैलरी और अलाउंस में 25 फीसदी की कटौती करने का भी निर्देश दिया है। पाकिस्तान सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है, वह है सरकारी गाड़ियों के लिए पेट्रोलियम प्रोविजन को 50 फीसदी कम करना।
कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट और सलाहकारों को दो महीने तक अपनी पूरी सैलरी नहीं लेनी होगी। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20 फीसदी की कटौती की जाएगी। अधिकारियों को अब बिजनेस क्लास में यात्रा नहीं करनी होगी।
विदेश यात्रा के दौरान सभी अधिकारियों को सिर्फ इकॉनमी क्लास में यात्रा करनी होगी। मंत्री, सांसद और अधिकारी सिर्फ जरूरी विदेश यात्राएं ही कर सकते हैं। सरकारी ऑफिसों के लिए नए टिकाऊ सामान की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आईटी खरीद के लिए जांच के बाद सीमित खरीद को छूट दी गई है। सरकारी डिपार्टमेंट में अब सभी मीटिंग वर्चुअल होंगी।
यह फैसला यात्रा और रहने की लागत दोनों को कम करने के लिए लिया गया है। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर मौजूदा रोक जून 2026 तक जारी रहेगी। बैंकिंग सेक्टर और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को छोड़कर, सभी सरकारी ऑफिस हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।
सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से पहले उनकी पहले से जांच और मंजूरी लेनी होगी। पाकिस्तान सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के लिए भी ऐसी ही गाइडलाइंस जारी करने की सलाह दी है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है।
पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि देश गले तक कर्ज में डूबा हुआ है। अगर मिडिल-ईस्ट में संकट लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान ने खर्च कम करने के लिए जो भी कदम उठाए हैं, उनसे कोई मदद नहीं मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक संकट रहने से न सिर्फ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, बल्कि यह पूरी तरह से गिर जाएगी। आम तौर पर ईद के दौरान बिजनेस में कुछ बढ़ोतरी होती है।
इन सभी रुकावटों ने रिटेल एक्टिविटी को धीमा कर दिया है और लोग सिर्फ जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं, और पहले की तरह इसी समय में ज्यादा खर्च नहीं कर रहे हैं। पाकिस्तान में कई लोग 6 मार्च को तेल की कीमतें 20 फीसदी बढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। तेल की जमाखोरी रोकने के लिए लिया गया यह फैसला उल्टा पड़ गया है क्योंकि इससे लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
इससे कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था का 23 फीसदी हिस्सा है। लोगों को आने-जाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से टैक्सी और रिक्शा से सफर करना बहुत महंगा हो गया है। इस फैसले का फूड डिलीवरी राइडर्स पर भी बड़ा असर पड़ा है।
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