राजनीति
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को ब्लैकमेल करने की कोशिश में 5 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने की कोशिश के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “इस मामले में नोएडा के चार और दिल्ली के सिरसपुर के एक व्यक्ति सहित पांच लोगों को रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।”
केंद्रीय मंत्री के निजी सहायक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें कुछ अज्ञात लोगों की फोन कॉल आई हैं और पैसे की मांग की जा रही है।
पुलिस ने अभी तक इस बारे में विवरण प्रस्तुत नहीं किया है कि उन्होंने आखिरकार मंत्री टेनी को ब्लैकमेल करने का प्रयास क्यों किया।
राष्ट्रीय समाचार
सीजेपी प्रोटेस्ट में घायल एसीपी विवेक भगत का मेडिकल बुलेटिन जारी, शरीर पर कई चोटों की पुष्टि

जंतर-मंतर के पास सीजेपी प्रोटेस्ट में घायल कनॉट प्लेस के एसीपी विवेक भगत को इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल लाया गया। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल अपडेट के अनुसार, एसीपी भगत के शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने आगे का इलाज एम्स, नई दिल्ली में कराने की इच्छा जताई, जिसके बाद उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय जांच पूरी होने पर अनुरोध के आधार पर छुट्टी दे दी गई।
आरएमएल अस्पताल के अनुसार, जांच के दौरान एसीपी विवेक भगत के दोनों हाथों और पैरों के अलावा कंधे पर कई चोटों के निशान पाए गए। इसके साथ ही उनके सिर के पीछे पारिएटो-ऑक्सिपिटल हिस्से में सूजन भी मिली। उन्होंने डॉक्टरों को बताया कि घटना के बाद कान से खून निकला था और उन्हें उल्टी भी हुई थी।
अस्पताल ने बताया कि एसीपी भगत का सर्जरी विभाग की मेडिकल टीम ने परीक्षण किया और उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। चिकित्सकीय जांच पूरी होने के बाद उन्होंने अपनी इच्छा के अनुसार आगे का इलाज एम्स में कराने का फैसला किया। इसके बाद अस्पताल ने उन्हें अनुरोध पर डिस्चार्ज कर दिया।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि जंतर-मंतर के पास हुई प्रोटेसेट में 118 से अधिक पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पथराव और हिंसा में 20 से अधिक पुलिस वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए।
घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस इस मामले को लेकर अलग अलग थानों में एफआईआर दर्ज की है। वहीं घायल पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सीजेपी का प्रदर्शन अब भी जारी है और वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
राजनीति
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने को लेकर पीएम मोदी के पोस्ट पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया, प्रियंका बोलीं-सिस्टम से भरोसा टूटा

पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए गए ‘एक्स’ पोस्ट पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्षी नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “ये तो वैसी ही बात है कि बच्चों का कुछ और कहना है और आप (पीएम) कुछ और कह रहे हैं। नेताओं के नेतृत्व दिखाने का समय आ गया है, वे नेतृत्व दिखाएं। बच्चों की बातें सुनें। बच्चों की स्पष्ट मांगें हैं कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और जिन्होंने मारा-पीटा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इनको पहले बच्चों की मांगों की माननी चाहिए। बच्चों का सिस्टम में भरोसा टूट गया है।”
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि अगर सिस्टम द्वारा कोई समाधान किया जाएगा तो बच्चे इसको स्वीकार नहीं करेंगे। अगर प्रधानमंत्री को समाधान करना है तो बच्चों की मांगें सुनें और पूरी करें, तभी समाधान निकल पाएगा।
पेपर लीक में शामिल लोगों को कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के ‘एक्स’ पोस्ट पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “आजकल कोई भी उनकी बातों पर यकीन नहीं करता। उनकी बातों का भरोसा पहले ही खत्म हो चुका है। सबसे पहले, उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाना होगा। फिर उन्हें छात्रों से बात करनी होगी।”
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री किस क्रांति की बात कर रहे थे। क्या उस ‘एक्स’ पोस्ट से उन छात्रों की मांगें पूरी होंगी जिन पर लाठीचार्ज हुआ, जो घायल हुए और जो इतने लंबे समय से जंतर-मंतर पर बैठे हैं? क्या बल प्रयोग से घायल हुए छात्रों की आंखों का दर्द ठीक हो पाएगा? संसद सत्र शुरू होने पर, अगर प्रधानमंत्री युवाओं को कोई संदेश देना चाहते थे, तो उन्हें खुद सदन में आकर उनसे बात करनी चाहिए थी।”
जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, “आखिरकार, इतने दिनों बाद सरकार की नींद खुली है। 22 दिनों तक जब छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, तब सरकार बहरी और खामोश क्यों बनी रही? छात्रों ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे अपनी मांगें रखने के लिए संसद आएंगे। इस आंदोलन को बढ़ने देने में सरकार की बड़ी भूमिका रही है और अब वह दमनकारी रवैया अपना रही है।”
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा, “अभी तक सिर्फ ‘एक्स’ पोस्ट ही आया है, कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भविष्य में यह या वह करेंगे, यह सब तो बस बातें हैं। लोग अब कार्रवाई चाहते हैं। वे जानना चाहते हैं कि आपने इसके जवाब में क्या किया है। न तो कोई इस्तीफा हुआ है, न ही लाठीचार्ज पर कोई अफसोस जताया गया है, और न ही राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है।”
महाराष्ट्र
नीट प्रोटेस्ट पर दिविजा फडणवीस की अपील-प्रदर्शनकारी शिक्षा सुधार का करें समर्थन, राजनीति का नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा फडणवीस ने नीट और शिक्षा सुधारों को लेकर देशभर में चल रहे प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करने, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या उसकी विचारधारा का बिना सोचे-समझे समर्थन न करने की अपील की।
दिविजा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उनसे कई बार इन प्रदर्शनों पर अपनी राय देने के लिए कहा गया। ऐसे में उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर हिंसा और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, दोनों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने लिखा कि लोग शिक्षा सुधारों की मांग का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन जिस राजनीतिक दल या विचारधारा के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है, उसका आंख मूंदकर समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना जरूरी है।
दिविजा फडणवीस ने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत विपक्ष का उद्देश्य देश के हित में काम करना होना चाहिए। विपक्ष को सरकार को बेहतर फैसले लेने में मदद करनी चाहिए, न कि केवल सत्ता पक्ष को बदनाम कर उसका विरोध करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने लिखा कि सिर्फ इसलिए किसी आंदोलन का हिस्सा न बनें, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। किसी भी विचारधारा के प्रभाव में आए बिना सोच-समझकर फैसला लें।
दिविजा ने कहा कि जब तक आंदोलन छात्रों के हित, शिक्षा सुधार, नीट, पेपर लीक और एनटीए से जुड़े मुद्दों तक सीमित रहता है, तब तक यह उचित है। लेकिन जैसे ही आंदोलन धर्म या इन मुद्दों से बाहर के विषयों की ओर मुड़ता है, उसके इरादे बदल जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
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