राजनीति
हंगामे के बीच 18वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेते समय राहुल गांधी ने पीएम मोदी को संविधान की प्रति दिखाई
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संविधान की प्रतियां दिखाईं, जब वह अपनी सीट से उठे और सोमवार को शुरू हुए 18वीं लोकसभा के पहले सत्र में शपथ लेने के लिए मंच की ओर जाने लगे।
घटना के वीडियो में संसद में दोनों पक्षों के हंगामे के बीच राहुल को पीएम मोदी को संविधान की प्रति दिखाते हुए देखा जा सकता है।जब वह संसद के अंदर अपने कार्यों के बारे में मीडिया से बात करते हुए घर से बाहर निकल रहे थे, तो राहुल ने कहा, “संविधान पर पीएम मोदी और अमित शाह का हमला स्वीकार्य नहीं है; हम ऐसा नहीं होने देंगे. इसीलिए हमने शपथ लेते समय संविधान को हाथ में लिया…हमारा संदेश दिया जा रहा है।”इसके अलावा घटना के तुरंत बाद कांग्रेस पार्टी ने अपने एक्स हैंडल से लिखा, ”भारत गठबंधन अपनी जान की कीमत पर भी संविधान की रक्षा करेगा।”
पीएम मोदी समेत सभी नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के साथ 18वीं लोकसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू हो गया। यह ऐतिहासिक सत्र आजादी के बाद पहली बार नए संसद भवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने इस सत्र के महत्व पर जोर देते हुए नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा, “आज हमारे लोकतंत्र के लिए गौरव का दिन है। यह चुनाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि आजादी के बाद दूसरी बार किसी सरकार को लगातार तीसरी बार काम करने का जनादेश दिया गया है।”
आम चुनावों के महत्व और पैमाने को रेखांकित करते हुए, मोदी ने कहा, “दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव शानदार और शानदार तरीके से आयोजित किया गया। यह तीसरा कार्यकाल हमारी पार्टी के इरादों, नीतियों और जनता के प्रति योगदान की लोगों की मान्यता और स्वीकार्यता को दर्शाता है।” मैं इस अवसर के लिए देश का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”
प्रधानमंत्री ने 18वीं लोकसभा में युवाओं के बढ़े प्रतिनिधित्व की भी सराहना की और इसे ”खुशी की बात” बताया।
पीएम मोदी ने एक जिम्मेदार विपक्ष का भी आह्वान किया और उनसे लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखते हुए आम नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने का आग्रह किया।
देश की जनता को रचनात्मक विपक्ष की उम्मीद: पीएम मोदी
उन्होंने विपक्ष से देश के नागरिकों की अपेक्षाओं को पूरा करने और लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा, “देश के लोग रचनात्मक विपक्ष की उम्मीद करते हैं। वे नाटक या उपद्रव या नारे नहीं बल्कि सार चाहते हैं।”
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि सांसद इन अपेक्षाओं को पूरा करने की आकांक्षा रखेंगे।”
भारतीय विरासत में संख्या 18 के प्रतीकात्मक महत्व पर विचार करते हुए, मोदी ने कर्तव्य और करुणा के महत्व पर जोर देते हुए, भगवद गीता के 18 अध्यायों और 18 पुराणों और उपपुराणों के साथ समानताएं व्यक्त कीं और कहा कि यह 18वीं लोकसभा “एक रास्ता है” ‘अमृत काल’.”
प्रधानमंत्री ने शासन में सर्वसम्मति के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्र की समग्र सेवा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “पिछले दशक में हमने हमेशा एक परंपरा लागू करने की कोशिश की है कि बहुमत को सरकार चलानी चाहिए। हालांकि, देश को चलाने के लिए आम सहमति सबसे महत्वपूर्ण है।”3
पीएम मोदी ने कहा, ”हमारा लक्ष्य हमेशा मां भारती की सेवा करना रहेगा।”
प्रधान मंत्री ने कहा, “हमारा लक्ष्य हमेशा मां भारती की सेवा करना और देश के संविधान की पवित्रता को बनाए रखते हुए सर्वसम्मति से 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना होगा।”
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर चर्चा करते हुए, प्रधान मंत्री ने इसे “भारत के लोकतंत्र में काला अध्याय” कहा और राष्ट्र से लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का संकल्प लेने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने कहा कि 25 जून को भारतीय लोकतंत्र पर लगे दाग के 50 साल पूरे हो रहे हैं और नई पीढ़ी को याद रखना चाहिए कि “संविधान को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था, लोकतंत्र को कुचल दिया गया था।”
18वीं लोकसभा का गठन 19 अप्रैल से 1 जून, 2024 तक सात चरणों में हुए आम चुनावों के बाद हुआ। 4 जून को घोषित नतीजों में भाजपा ने सबसे अधिक 240 सीटें हासिल कीं, उसके बाद कांग्रेस ने 99 सीटें हासिल कीं।
पूर्ण बहुमत से कम होने के बावजूद, भाजपा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत गठबंधन के माध्यम से सरकार बनाई, जो पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल है।
महाराष्ट्र
नीट प्रोटेस्ट पर दिविजा फडणवीस की अपील-प्रदर्शनकारी शिक्षा सुधार का करें समर्थन, राजनीति का नहीं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बेटी दिविजा फडणवीस ने नीट और शिक्षा सुधारों को लेकर देशभर में चल रहे प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए लोगों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का समर्थन करने, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल या उसकी विचारधारा का बिना सोचे-समझे समर्थन न करने की अपील की।
दिविजा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उनसे कई बार इन प्रदर्शनों पर अपनी राय देने के लिए कहा गया। ऐसे में उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर हिंसा और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हिंसा, दोनों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने लिखा कि लोग शिक्षा सुधारों की मांग का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन जिस राजनीतिक दल या विचारधारा के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है, उसका आंख मूंदकर समर्थन नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का समर्थन करने से पहले उसके वास्तविक उद्देश्य को समझना जरूरी है।
दिविजा फडणवीस ने लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत विपक्ष का उद्देश्य देश के हित में काम करना होना चाहिए। विपक्ष को सरकार को बेहतर फैसले लेने में मदद करनी चाहिए, न कि केवल सत्ता पक्ष को बदनाम कर उसका विरोध करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स को लेकर भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने लिखा कि सिर्फ इसलिए किसी आंदोलन का हिस्सा न बनें, क्योंकि वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। किसी भी विचारधारा के प्रभाव में आए बिना सोच-समझकर फैसला लें।
दिविजा ने कहा कि जब तक आंदोलन छात्रों के हित, शिक्षा सुधार, नीट, पेपर लीक और एनटीए से जुड़े मुद्दों तक सीमित रहता है, तब तक यह उचित है। लेकिन जैसे ही आंदोलन धर्म या इन मुद्दों से बाहर के विषयों की ओर मुड़ता है, उसके इरादे बदल जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
504 करोड़ रुपए के सरकारी धन गबन मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, चंडीगढ़-लुधियाना में छापेमारी

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन गबन मामले में कार्रवाई करते हुए गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं।
सीबीआई के अनुसार, कुल पांच स्थानों पर तलाशी ली गई। इनमें गबन की गई राशि के लाभार्थियों के घर और कारोबारी प्रतिष्ठान, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना तथा जांच से जुड़े निजी संस्थानों के परिसर शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम सबूत मिले हैं। इनमें डिजिटल स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। अब इन दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की बारीकी से जांच और विश्लेषण किया जा रहा है।
सीबीआई ने बताया कि यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था। राज्य सरकार के अनुरोध पर बाद में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।
जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के करीब 504 करोड़ रुपए सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के जरिए निकालकर शेल कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर भेज दिया गया।
इस मामले में अब तक सीबीआई 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन सरकारी कर्मचारी, दो कंपनियां और छह व्यक्ति शामिल हैं।
सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े दो अन्य मामलों की जांच की। जिनमें पहला मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और नगर निगम चंडीगढ़ से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (सीआरईएसटी) से संबंधित है।
इन दोनों मामलों में भी सीबीआई पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। सीएससीएल मामले में पांच बैंक अधिकारियों, एक सीएससीएल अधिकारी और एक निजी व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। वहीं सीआरईएसटी मामले में पांच बैंक अधिकारी, दो सीआरईएसटी अधिकारी, चार निजी व्यक्ति और दो कंपनियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया है।
सीबीआई ने कहा कि वह इस पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही गबन किए गए सार्वजनिक धन की पूरी शृंखला का पता लगाकर अपराध से अर्जित राशि को ट्रेस करने की दिशा में जांच लगातार जारी रहेगी।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हुई छात्रा को वेंटिलेटर से हटाया गया: आरएमएल अस्पताल

आरएमएल अस्पताल की ओर से बुधवार को बताया गया कि राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना में गंभीर रूप से घायल हुई 21 वर्षीय महिला का डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज चल रहा था। उसकी हालत में काफी सुधार होने के बाद उसे वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया है।
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि मरीज को सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया है।
बयान में कहा गया, “उन्हें सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और अब वह खुद से सांस ले रही हैं। वह होश में हैं और निर्देशों का सही जवाब दे रही हैं। उनके दिमाग और रीढ़ की हड्डी का एमआरआई नॉर्मल है।
अस्पताल के अनुसार, उनकी हालत में उत्साहजनक सुधार के बाद वेंटिलेटर सपोर्ट हटाने का फैसला लिया गया।
बयान में कहा गया कि इलाज शुरू होने के बाद से उनकी क्लिनिकल हालत में लगातार सुधार हो रहा है और इलाज करने वाली टीम की कड़ी निगरानी में उन्हें पूरी मेडिकल देखभाल मिल रही है।
अस्पताल ने कहा कि महिला को जरूरी इलाज और लगातार निगरानी दी जा रही है।
यह महिला सोमवार को जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गई थी। खबरों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान बैरिकेड से टकराने से उन्हें चोटें आईं।
जंतर-मंतर से संसद तक सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान अफरातफरी मच गई।
प्रदर्शनकारियों ने नीट-यूजी पेपर लीक विवाद समेत परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि झड़प के दौरान 118 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने यह भी बताया कि 20 से ज्यादा पुलिस गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।
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