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Tuesday,06-October-2026
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अगले हफ्ते कच्चे तेल, अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और बढ़ती बॉन्ड यील्ड समेत इन कारकों पर रहेगी बाजार की नजर

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भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह वैश्विक घटनाक्रमों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़े और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, जिसके चलते बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है।

शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ, हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान हासिल की गई अधिकांश बढ़त बाजार के बंद होने तक कायम नहीं रह सकी। सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 76,515.43 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन सत्र के दौरान हुई हलचल के कारण प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर से नीचे फिसल गए।

इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशकों की रुचि चुनिंदा शेयरों तक सीमित रही।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अगले सप्ताह बाजार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हो सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के बाद इस सप्ताह तेल की कीमतों में लगभग 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति अभी भी बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

ऊर्जा बाजार में बढ़ते जोखिमों को देखते हुए प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान सिटी ने भी अपने अनुमानों में संशोधन किए हैं। संस्था ने तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 86 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जिसका कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य संचालन में अपेक्षा से अधिक समय लगने की आशंका है।

विश्लेषकों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, कंपनियों की लागत में वृद्धि हो सकती है और चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल आपूर्ति बहाल होने से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।

दूसरा बड़ा कारक वैश्विक बॉन्ड यील्ड है। दुनिया भर में बॉन्ड बाजार में बिकवाली के चलते कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में प्रतिफल कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। बढ़ती तेल कीमतों से मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं, जिसके कारण निवेशक सख्त मौद्रिक नीति की संभावना पर विचार कर रहे हैं।

बढ़ती बॉन्ड यील्ड का असर शेयर बाजारों पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ता है। साथ ही सरकारों और कंपनियों के लिए उधारी की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ सकता है।

अमेरिका से आए हालिया रोजगार आंकड़ों ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.62 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से लगभग तीन गुना अधिक हैं। श्रम भागीदारी दर बढ़कर 61.6 प्रतिशत हो गई, जबकि बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रही।

मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना फिर से बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रख सकता है या बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से तेल कीमतों, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों, वैश्विक बॉन्ड बाजार और विदेशी निवेश प्रवाह से तय होगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और तेल कीमतों में नरमी आती है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि तेल और बॉन्ड यील्ड दोनों ऊंचे बने रहते हैं तो निवेशकों की सतर्कता बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर, घरेलू आर्थिक बुनियाद मजबूत होने के बावजूद वैश्विक परिस्थितियां अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख दिशा-निर्धारक बनी रहेंगी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना बेहद जरूरी, घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम: सऊदी अरामको सीईओ

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सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा।

नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।

अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक भी बने रह सकते हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, को प्रभावित किया था। इसके चलते तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है। वहीं सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है।

इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है।

इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं।

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संचार साथी पोर्टल पर विजिट्स 30 करोड़ के पार; 5,000 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मिली मदद

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संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से कुल विजिट्स की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है और इससे 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदिग्ध साइबर-फ्रॉड से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिली है। यह जानकारी संचार मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इससे 14 लाख से ज्यादा खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद करने में भी मदद मिली है। साथ ही, इसने अपने नाम पर मौजूद मोबाइल कनेक्शन के बारे में जानने के लिए नागरिकों के 4 करोड़ से ज्यादा अनुरोधों का समाधान किया गया।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) की ओर से विकसित किया गया यह पोर्टल हर मोबाइल यूजर को आसान और इस्तेमाल में सरल टूल देता है, जिनसे वे संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट कर सकते हैं, यह जान सकते हैं कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं, खोए या चोरी हुए हैंडसेट को ब्लॉक कर सकते हैं, और हैंडसेट खरीदने से पहले यह पता कर सकते हैं कि वह असली है या नहीं।

मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल पर हर विजिट नागरिक की सुरक्षा करती है और उनके द्वारा रिपोर्ट किया गया हर संदिग्ध कम्युनिकेशन कई अन्य लोगों की सुरक्षा करता है। ‘संचार साथी’ पर नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी को ऐसी काम की जानकारी में बदला जाता है, जिससे डीओटी, बैंकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को धोखेबाजों को उनके अगले शिकार तक पहुंचने से पहले ही रोकने में मदद मिलती है। इस तरह, ‘संचार साथी’ का इस्तेमाल करने वाला हर नागरिक एक साइबर वॉरियर और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक ढाल के तौर पर काम करता है।

संचार साथी पोर्टल को आसान और यूजर-फ्रेंडली सर्विस प्रोसेस के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें पब्लिक डैशबोर्ड और टेलीकॉम सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और जिम्मेदार डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में व्यापक जानकारी शामिल है। अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध संचार साथी मोबाइल ऐप नागरिकों को ये सभी सेवाएं उनकी अपनी भाषा में और मोबाइल पर इस्तेमाल करने की सुविधा के साथ देता है।

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विमान से सफर करना होगा महंगा, इंडिगो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ाएगा फ्यूल चार्ज

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देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने सोमवार को ऐलान किया कि वह एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में वृद्धि के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज में इजाफा करने जा रही है।

एयरलाइन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह बढ़ोतरी मंगलवार से बुक होने वाली उसकी सभी उड़ानों पर लागू होगी।

एयरलाइन ने कहा, “ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाल ही में महीने-दर-महीने कीमतों में 14 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी के कारण एटीएफ की लागत पिछले एक दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) एयरलाइन की ऑपरेटिंग लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर एयरलाइंस की लागत संरचना और नेटवर्क इकोनॉमिक्स पर पड़ने की उम्मीद है, जिसमें इंडिगो भी शामिल है।”

एयरलाइन ने बताया कि घरेलू मार्ग पर 500 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 375 रुपए, 501 से 1,000 किलोमीटर तक की उड़ानों के लिए 600 रुपए, 1,001 से 1,500 किलोमीटर की उड़ानों के लिए 900 रुपए, 1,501 से 2,000 किलोमीटर की उड़ानों के लिए 1,150 रुपए और 2,000 किलोमीटर से ज्यादा की उड़ानों के लिए 1,300 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा।

वहीं, इंटरनेशनल रूट पर, सार्क क्षेत्र के अंदर 500 किलोमीटर तक की दूरी वाली उड़ानों पर 1,000 रुपए और 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाली उड़ानों पर 3,000 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा। साउथ-ईस्ट एशिया, जीसीसी, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ व ईस्ट एशिया जाने वाली उड़ानों पर 5,500 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा, जबकि अफ्रीका और यूरोप जाने वाली उड़ानों पर 6,000 रुपए का फ्यूल चार्ज लगेगा।

कंपनी ने कहा, “ईंधन की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए ईंधन शुल्क में काफी ज्यादा बढ़ोतरी की जरूरत है, लेकिन ग्राहकों पर असर कम करने के लिए इंडिगो ने एक संतुलित और अपेक्षाकृत मामूली बदलाव किया है।”

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बीते 3 महीने में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे एयरलाइन के लिए परिचालन काफी महंगा हो गया है।

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