राजनीति
बीजेपी के नामदार नहीं कामदार वाले फॉर्मूले से मिला जफर इस्लाम को राज्यसभा का टिकट
उत्तर प्रदेश में अमर सिंह के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए यूं तो बीजेपी में कई हाईप्रोफाइल चेहरे दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने सैय्यद जफर इस्लाम पर दांव खेलकर सबको चौंका दिया। पार्टी के दूसरे प्रवक्ताओं और नेताओं से अपेक्षाकृत कम चर्चित जफर इस्लाम को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर बीजेपी अपने काडर को बड़ा संदेश देने जा रही है। ये संदेश है कि पार्टी को नामदार नहीं कामदार चाहिए। यानी सुर्खियों में रहने की जगह पार्टी के लिए ठोस काम करने वालों को ही तवज्जो मिलेगी। राज्यसभा सदस्य बनते ही बीजेपी के पास तीन मुस्लिम सांसद हो जाएंगे। फिलहाल, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 की एक रैली में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ‘नामदार बनाम कामदार’ का नारा दिया था। बेशक नारे का इस्तेमाल विपक्ष पर निशाना साधने के लिए किया गया था, लेकिन संदेश पार्टी के नेताओं के लिए भी छिपा था। संदेश ये था कि सुर्खियों में रहने से ज्यादा जरूरी है, पार्टी के लिए खामोशी से काम करना।”
पार्टी नेता ने आगे कहा, ” किसी ने सोचा भी नहीं था कि पार्टी के लो-प्रोफाइल चेहरे जफर इस्लाम ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे कांग्रेस के बड़े नेता को भाजपा में लाने में सफल होंगे। एक प्रवक्ता, अगर मध्य प्रदेश में पार्टी की सरकार बनाने में अहम योगदान देता है तो फिर उसे इनाम तो मिलना ही चाहिए।”
उत्तर प्रदेश में भाजपा विधायकों के संख्या बल को देखते हुए अमर सिंह के निधन से खाली हुई सीट से जफर इस्लाम का राज्यसभा के लिए चुना जाना तय माना जा रहा है। उनका कार्यकाल 2022 तक होगा।
जफर इस्लाम के जरिए एक तीर से बीजेपी कई निशाने साधने की कोशिश में है। जफर के रूप में मुस्लिम वर्ग में बीजेपी एक और प्रभावी नेता तैयार करने की कोशिश में है। भाजपा के पास फिलहाल, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर और पूर्व केंद्रीय मंत्री शहनवाज हुसैन ही ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें लोग जानते हैं। मी टू कैंपेन के चलते मंत्री पद छोड़ने के बाद से एमजे अकबर की पहले जैसी राजनीतिक सक्रियता नहीं दिख रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे में मुस्लिम समाज के पढ़े-लिखे चेहरे जफर इस्लाम को राज्यसभा सदस्य बनाकर और प्रभावी चेहरे के तौर पर राजनीति में स्थापित करने की तैयारी है।
कई बड़े दावेदारों के बावजूद सैय्यद जफर इस्लाम को यूपी से राज्यसभा भेजने के पीछे ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी में लाने का इनाम माना जा रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के कारण ही कमलनाथ सरकार गिरी और जिससे शिवराज सिंह चौहान की फिर से मध्य प्रदेश में सरकार बन सकी। कहा जा रहा है कि पार्टी ने जफर इस्लाम की मेहनत को जिस तरह से राज्यसभा टिकट का इनाम दिया है, उससे पार्टी के जमीनी काडर में एक सकारात्मक संदेश गया है कि लामबंदी नहीं बल्कि काम करने पर पुरस्कार मिलना तय है।
पृष्ठभूमि की बात करें तो जफर इस्लाम प्रोफेशनल बैंकर हैं। मूलत: झारखंड के रहने वाले जफर इस्लाम डॉइच बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं। करीब सात साल से वो भाजपा में हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में काम कर चुके हैं। उन्हें पार्टी संगठन में प्रवक्ता की जिम्मेदारी है। वो एयर इंडिया बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक भी हैं। अमर सिंह के निधन से खाली हुई उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीट पर 11 सितंबर को चुनाव होना है।
राजनीति
ममता बनर्जी का आचरण शर्मनाक और असंवैधानिक, लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार किया: रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली, 9 जनवरी: कोलकाता में आई-पैक कार्यालय पर ईडी की रेड के बाद सियासी बवाल जारी है। इसी बीच शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने प्रेसवार्ता कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। सीएम ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “आजाद भारत के बंगाल में जो हुआ, वो आज तक नहीं हुआ। एक निजी प्रॉपर्टी में, जहां ईडी की ओर से मनी लॉन्ड्रिंग पर कार्रवाई चल रही थी, वहां एक मौजूदा मुख्यमंत्री चली जाएं और ईडी के लोगों को धमकाएं और पेपर छीनकर चली जाएं। कोयले की स्मगलिंग और हवाला ट्रांजैक्शन को लेकर ईडी कार्रवाई कर रही है, जिसके तहत कई जगह रेड हुई। प्रतीक जैन की कंसल्टेंसी फर्म को लेकर शिकायत आई कि यहां से करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है।”
उन्होंने कहा कि ये हम नहीं कह रहे हैं, ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है, जो उनकी वेबसाइट पर मौजूद है। ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल का हाल बेहाल हो गया है। आपको मालूम है कि बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट है, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं।
रविशंकर ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि ये रेड न तो ममता बनर्जी के घर पर थी, न उनके दफ्तर में, न ही टीएमसी के दफ्तर में और न ही टीएमसी के किसी नेता या मंत्री के घर पर थी। ये रेड एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिसके यहां करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत आई थी। ऐसे में ममता बनर्जी अपने पुलिस अधिकारियों के साथ जाती हैं और ईडी के लोगों को धमकाया जाता है। ममता बनर्जी उनसे बहस करती हैं और पेपर छीन कर चली जाती हैं। उनका आचरण न केवल अमर्यादित और शर्मनाक है, बल्कि उन्होंने इससे संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।
उन्होंने पूछा, “मुख्यमंत्री ममता, आपको इतनी घबराहट क्यों है? आप 14 साल से मुख्यमंत्री रही हैं, केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी हैं और गवर्नेंस समझती हैं। आपने सारे नियमों, कानूनों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करके वहां जाना जरूरी समझा, तो वहां कुछ ऐसा संदिग्ध था जिसे निकालना आवश्यक था।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ममता ने कॉन्ट्रैक्ट लिया हुआ है कि बंगाल में कोई जांच नहीं होने देंगी? बंगाल के भ्रष्टाचार में किसी भी सीबीआई और ईडी की जांच नहीं होने देंगी, क्योंकि हर जगह उनके सिस्टम के पांव फैले हुए हैं। हम इसकी कड़ी भर्त्सना करते हैं।
राजनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में 5 साल बाद न शिंदे रहेंगे न अजित पवार: असदुद्दीन ओवैसी

धुले, 9 जनवरी: महाराष्ट्र के धुले में आयोजित एक जनसभा में एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस पर तल्ख टिप्पणी की और पार्टी द्वारा लगाए गए उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी-टीम’ कहा गया। ओवैसी ने कहा कि ऐसे आरोप सच्चाई से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं।
अपने भाषण में ओवैसी ने मुंबई ट्रेन ब्लास्ट का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई ट्रेन धमाकों में 185 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी और इस मामले में 11 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया। ये सभी 11 लोग करीब 19 साल तक जेल में बंद रहे।
उन्होंने कहा, “जरा सोचिए, अगर आप यहां बैठे हों और अचानक आपको फोन आए कि तुरंत आ जाइए। अब उन 11 लोगों के बारे में सोचिए, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 19 साल सलाखों के पीछे गुजार दिए।”
ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा, अजित पवार अपने ही चाचा शरद पवार के सामने खड़े नहीं हो सके तो जो लोग आंख बंद करके उनका पीछा कर रहे हैं, उनका क्या होगा?”
असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि आने वाले पांच साल बाद जब फिर से चुनाव होंगे, तब न तो एकनाथ शिंदे रहेंगे और न ही अजित पवार। उस वक्त असदुद्दीन ओवैसी की जमात रहेगी।
एआईएमआईएम प्रमुख ने संसद में अपने एक पुराने कदम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने संसद में खड़े होकर कहा था कि कुछ कानून बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान के खिलाफ हैं और उन्होंने उस कानून की प्रति फाड़कर संसद के फर्श पर फेंक दी थी। ओवैसी ने सवाल किया, ‘क्या अजित पवार ऐसा कर सकते थे?’
ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ही जनता की आवाज को मजबूती से आगे ले जा सकती है।
राजनीति
भाजपा का एआईएमआईएम और कांग्रेस के साथ गठबंधन पाखंड का शर्मनाक प्रदर्शन: शिवसेना (यूबीटी)

मुंबई, 9 जनवरी: महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में चल रही चुनावी सरगर्मियों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोला है और उस पर सत्ता के लिए अपनी मूल विचारधारा छोड़ने का आरोप लगाया है।
पार्टी ने एआईएमआईएम और कांग्रेस पार्टी के साथ स्थानीय गठबंधनों के खुलासे के बाद महाराष्ट्र में भाजपा की हालिया राजनीतिक चालों को “पाखंड का शर्मनाक प्रदर्शन” बताया।
ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, “भाजपा की मौजूदा मानसिकता किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहने और विपक्ष में बैठने से बचने की है, क्योंकि उसके पास कोई मूल विचारधारा नहीं है; उनका हिंदुत्व स्वार्थी राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक दिखावा है। सत्ता के बिना, भाजपा का टिकना मुश्किल होगा। यही वजह है कि वे ओवैसी की पार्टी के साथ साझेदारी करने को तैयार हैं। सत्ता के लिए, भाजपा ने पहले “अजान” और फिर “निकाह” किया, यहां तक कि “खतना” भी करवाया, लेकिन “काजी” (जज/मौलवी) ने इतनी ज़ोर से दुआएं पढ़ीं कि भाजपा का यह गुप्त रिश्ता पूरी दुनिया में फैल गया।”
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में विपक्ष के वोटों को बांटने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम का अक्सर “छिपे हुए मददगार” के तौर पर इस्तेमाल किया है।
संपादकीय में कहा गया, “जब भी ओवैसी महाराष्ट्र में ‘अजान’ देने आते हैं, तो यह इस बात का संकेत होता है कि भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं,” इस रिश्ते को “पेड़ों के पीछे का रोमांस” बताया गया है जो अब सबके सामने आ गया है।
ठाकरे कैंप ने नगर परिषदों में हाल के घटनाक्रमों का हवाला दिया। अकोट नगर परिषद में, भाजपा पर एआईएमआईएम के साथ “खुली शादी” करने का आरोप लगाया। अंबरनाथ नगर परिषद में, भाजपा ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को कमजोर करने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया। सार्वजनिक विरोध के बाद, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन गठबंधनों से “ट्रिपल तलाक” का आदेश देकर और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का वादा करके स्थिति को संभालने की कोशिश की। हालांकि, भाजपा की प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा की हालत ऐसी हो गई है कि जो प्रतिष्ठा एक बूंद में चली जाती है, वह टंकी भर पानी से भी वापस नहीं आती।
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