अंतरराष्ट्रीय
मोहम्मद शमी विश्व कप टीम में क्यों नहीं हैं : मदन लाल
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मदन लाल ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को टी20 विश्व कप टीम से बाहर रखने पर निराशा जताई है। अनुभवी तेज गेंदबाज शमी विश्व कप टीम में जगह नहीं बना पाए लेकिन वह वैकल्पिक खिलाड़ी के रूप में ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करेंगे।
पिछले वर्ष के टी20 विश्व कप के बाद से शमी भारत की टी20 योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन एशिया कप में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उन्हें दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज के लिए चुना गया है।
मदन लाल का कहना है कि शमी को विश्व कप टीम में चुना जाना चाहिए था क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियां उन्हें मदद करेंगी।
मदन लाल ने आईएएनएस से कहा, ” वह (शमी)आपके मैच विजेता गेंदबाज हैं और ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें 15 सदस्यीय टीम में क्यों नहीं चुना गया। वह ऐसे गेंदबाज हैं जो पहले तीन ओवरों में आपको विकेट दिला सकते हैं।”
आईपीएल 2022 में 32 वर्षीय गेंदबाज ने 16 मैचों में 20 विकेट हासिल किये थे और गुजरात टाइटंस को अपने पहले सत्र में खिताब जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।
मदन लाल ने कहा,”आपको टूर्नामेंट जीतने के लिए अच्छी गेंदबाजी इकाई की जरूरत है। चाहे आपकी टीम 180 रन बना ले और यदि आपके पास अच्छी गेंदबाजी नहीं है तो आप उसका बचाव नहीं कर सकते। चयनकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया के लिए तीन स्पिनर चुने हैं जबकि मुझे नहीं लगता कि स्पिनरों को वहां ज्यादा फायदा मिलेगा। किसी दिन या किसी विकेट पर वे उपयोगी हो सकते हैं लेकिन पूरे टूर्नामेंट के लिए आपको मजबूत तेज गेंदबाजी इकाई की जरूरत है।”
1983 की विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मदन लाल ने कहा, “मुझे खुशी है कि जसप्रीत बुमराह और हर्षल पटेल टीम में वापस आ गए हैं। उनकी फिटनेस आगामी सीरीज में पारखी जायेगी। अर्शदीप सिंह भी सीख रहे हैं। भुवी भी टीम में हैं लेकिन भारत को शमी को टीम में रखना चाहिए। वह अनुभवी गेंदबाज हैं और ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियां उनकी मदद करेंगी।”
भारत के बल्लेबाजी क्रम और केएल राहुल की फॉर्म के बारे में पूछने पर मदन लाल ने कहा, “वह ठीक हैं और मुझे भरोसा है कि वह वापसी करेंगे।”
उन्होंने साथ ही कहा, “विराट कोहली भी संघर्ष कर रहे थे लेकिन उन्होंने ठोस वापसी की और शतक बनाया। राहुल अच्छे बल्लेबाज हैं और चीजों को भारत के पक्ष में मोड़ सकते हैं। वैसे भी मैं भारत के बल्लेबाजी क्रम को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हूं।”
मदन लाल ने कहा, “भारत को एशिया कप में श्रीलंका से सीखना चाहिए। 50 रन पर पांच विकेट गंवाने के बावजूद वे संघर्ष करते रहे और अंत में अच्छा स्कोर बनाने में कामयाब रहे।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के सीजफायर वाले प्रस्ताव को किया खारिज: रिपोर्ट

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तेहरान, 4 अप्रैल : ईरान ने अमेरिका के 48 घंटे के सीजफायर वाले प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। फार्स ने एक जानकार सूत्र के हवाले से बताया कि यह प्रस्ताव गुरुवार को एक मित्र देश के जरिए ईरान को दिया गया।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने सूत्र के हवाले से बताया कि खासकर कुवैत के बुबियान आइलैंड पर अमेरिकी “मिलिट्री फोर्स डिपो” को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले के बाद, वाशिंगटन ने सीजफायर सुनिश्चित करने के लिए अपनी डिप्लोमैटिक कोशिशें तेज कर दी हैं।
फार्स के मुताबिक, कयास लगाए जा रहे हैं कि यह प्रस्ताव इलाके में संकट के बढ़ने और ईरान की सैन्य क्षमता को कम आंकने की वजह से अमेरिकी फोर्स के लिए “गंभीर दिक्कतें” पैदा होने के बाद पेश किया गया।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ईरान ने इस ऑफर पर लिखकर जवाब नहीं दिया, बल्कि लड़ाई के मैदान में हमले जारी रखकर जवाब दिया।
इस बीच, ईरानी सेना ने पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान के दक्षिणी समुद्री इलाके के ऊपर होर्मुज स्ट्रेट के पास एक यूएसए-10 “वॉर्थोग” अटैक प्लेन को मार गिराया, जिससे एयरक्राफ्ट फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया।
इससे पहले आईआरजीसी ने दावा किया कि सेंट्रल ईरानी एयरस्पेस में एक यूएसएफ-35 फाइटर जेट को मार गिराया था। बाद में शुक्रवार को, ईरान की सेमी-ऑफिशियल मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि एक यूएस ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी एयरस्पेस में एक प्रोजेक्टाइल से टकरा गया था, जब वह गिरे हुए यूएस फाइटर जेट के पायलट को ढूंढ रहा था।
कोगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के गवर्नर यादोल्लाह रहमानी ने कबायली और ग्रामीण इलाकों के लोगों से “दुश्मन पायलटों” का पता लगाने में अधिकारियों की मदद करने को कहा।
बता दें, इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को तेहरान और ईरान के कई दूसरे शहरों पर मिलकर हमले किए। इसमें ईरान के उस समय के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, सीनियर मिलिट्री कमांडर और आम लोग मारे गए। ईरान ने जवाब में मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अंतरराष्ट्रीय
ऑस्ट्रेलिया ने दवाइयों पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत से किया इनकार

कैनबरा, 3 अप्रैल : ऑस्ट्रेलियाई सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क के दबाव के बावजूद दवाओं के लिए अपनी सब्सिडी योजना में कोई बदलाव नहीं करेगी। स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने शुक्रवार को सरकार का पक्ष रखा।
बटलर ने सेवन नेटवर्क को बताया कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी प्रशासन के साथ फार्मास्युटिकल बेनेफिट्स स्कीम (पीबीएस) के “मूलभूत सिद्धांतों” पर कोई बातचीत नहीं करेगा। इस योजना के तहत केंद्रीय सरकार प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों में सब्सिडी देती है।
बटलर ने कहा, “हम अमेरिका को यह सबसे स्पष्ट संदेश लगातार भेज रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि वहां बड़ी दवा कंपनियां अपने दबाव में हमारे पीबीएस और दुनिया के अन्य देशों की समान योजनाओं को कमजोर करने की कोशिश करती हैं। हम इन मूलभूत सिद्धांतों पर बातचीत नहीं कर रहे हैं।”
बटलर यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कुछ पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद दे रहे थे।
मार्च के अंत में ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापारिक शिकायतों की अद्यतन सूची में अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि पीबीएस अमेरिकी नवाचार का मूल्य कम करके दिखाता है और अनुचित दवा मूल्य निर्धारण प्रथाओं के माध्यम से अमेरिकी उद्योग को प्रभावित करता है।
इस योजना के तहत, फार्मास्युटिकल निर्माता सीधे ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ बिक्री पर बातचीत करते हैं ताकि वाणिज्यिक बोली युद्धों को रोका जा सके।
संयुक्त राष्ट्र के कॉमट्रेड डेटा के अनुसार, 2025 में ऑस्ट्रेलियाई दवा निर्यात अमेरिका में 1.3 बिलियन डॉलर का था।
बायोटेक्नोलॉजी कंपनी सीएसएल ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी है, लेकिन बटलर ने कहा कि सरकार को भरोसा है कि मेलबर्न स्थित इस कंपनी को नए शुल्क से छूट मिलेगी क्योंकि इसका अमेरिका में बड़ा उत्पादन आधार है।
व्यापार मंत्री डॉन फैरेल के प्रवक्ता ने आस्ट्रेलियन ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन को शुक्रवार को बताया कि सरकार अमेरिकी दवा शुल्क से निराश है और “अनुचित और गैर-जरूरी” शुल्क को हटाने के लिए दबाव डालना जारी रखेगी।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ

TRUMP
वाशिंगटन, 3 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। जिसके तहत स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर के आयात पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
इस आदेश के तहत, आयातित धातु उत्पादों और उनसे बने अन्य उत्पादों के “पूरे कस्टम मूल्य” पर टैरिफ लागू होगा। प्रशासन ने कहा कि इस कदम से पिछली नीतियों में मौजूद उन कमियों को दूर किया जा सकेगा, जिनका फायदा उठाया जा रहा था।
यह फैसला पहले से लागू सेक्शन 232 के नियमों को आगे बढ़ाता है। इस कानून के तहत पहले ही कहा जा चुका है कि धातुओं का बढ़ता आयात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
नए नियमों के तहत, ज्यादातर स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। वहीं, इनसे बने कुछ अन्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
अधिकारियों का कहना है कि अब आयातकों को असली कीमत के आधार पर टैक्स देना होगा, ताकि कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश न हो सके।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संशोधित प्रक्रिया को समझाते हुए कहा, “हम अमेरिका में अमेरिकी ग्राहकों द्वारा स्टील के लिए चुकाए गए पूरे मूल्य का 50 प्रतिशत शुल्क के रूप में लेंगे।”
अधिकारी ने आगे कहा कि इस नई व्यवस्था को इसलिए तैयार किया गया है ताकि निर्यातक कीमतों में जो हेरफेर करते हैं, उसे खत्म किया जा सके। अधिकारी ने कहा, “वे जान-बूझकर कीमतों को आर्टिफिशियल रूप से कम करके दिखाते थे और अब हम इस चीज को खत्म कर रहे हैं, क्योंकि वे मूल रूप से इस पूरी व्यवस्था को धोखा दे रहे थे।”
प्रशासन ने अन्य उत्पादों के लिए भी एक ढांचा पेश किया है। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा बहुत कम होगी, उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट दी जाएगी; जबकि जिन उत्पादों में धातु की मात्रा काफी ज़्यादा होगी, उन पर एक निश्चित दर से शुल्क लगाया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, “अगर किसी उत्पाद में स्टील, एल्यूमीनियम या तांबे की मात्रा काफी ज़्यादा है तो उस पर सीधे-सीधे 25 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा।”
अधिकारियों का तर्क है कि इस बड़े बदलाव से नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा और आयातकों के लिए प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, जबकि दूसरी ओर नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और भी मजबूत होगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले लगाए गए टैरिफ के बाद अमेरिका में एल्युमिनियम और स्टील का उत्पादन बढ़ा है। एल्युमिनियम की क्षमता का इस्तेमाल करीब 50.4 प्रतिशत और स्टील का 77.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकार का कहना है कि अब इन आंकड़ों को 80 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने के लिए और सख्ती जरूरी है, ताकि कोई भी कंपनियां नए तरीकों से नियमों को दरकिनार न कर सकें।
इस आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो आगे चलकर और उत्पादों को भी इस टैक्स के दायरे में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि इन बदलावों का आम लोगों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और इससे चीजों की कीमतों में खास बढ़ोतरी नहीं होगी। उनका कहना है कि यह बदलाव सिर्फ व्यापार से जुड़े नियमों में है, खुदरा कीमतों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
ये नए टैरिफ 6 अप्रैल से लागू होंगे और उसी दिन से अमेरिका में आने वाले सभी संबंधित सामान पर लागू हो जाएंगे।
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