राजनीति
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान जारी
नई दिल्ली, 4 नवंबर: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आज यानी मंगलवार को छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस दौरान कई छात्र ऊर्जा एवं उत्साह के साथ मतदान के लिए पहुंच रहे हैं। विश्वविद्यालय के प्रत्येक स्कूल व केंद्र के छात्र इस चुनाव में मतदाता हैं।
विभिन्न छात्र संगठन बीते कई दिनों से विश्वविद्यालय के अलग-अलग हॉस्टल्स में छात्रों से संवाद स्थापित करने का प्रयास करते रहे। छात्र संगठनों का कहना है कि यह चुनाव केवल वैचारिक आंदोलन नहीं, बल्कि सेवा और समाधान की संस्कृति का प्रतीक है। मंगलवार सुबह से ही विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े युवा मतदान केंद्रों के आसपास जुटना शुरू हो गए थे। विश्वविद्यालय में कुल 8 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
जेएनयू के इन मतदान केन्द्रों पर मंगलवार सुबह 9 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहली पाली का मतदान दोपहर 1 बजे तक चलेगा। इसके बाद दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर दूसरी पाली का मतदान प्रारंभ होगा जो शाम 5 बजकर 30 मिनट तक जारी रहेगा। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव व संयुक्त सचिव के लिए यह मतदान हो रहा है। विश्वविद्यालय के कुल 9043 छात्र मतदान में हिस्सा ले सकेंगे।
गौरतलब है कि विभिन्न वाम संगठन जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में इस वर्ष संयुक्त रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। वाम संगठन जैसे कि एसएफआई, आइसा व डीएसएफ लंबे समय बाद छात्रसंघ चुनाव में साथ आए हैं। इन वामदलों की ओर से अध्यक्ष पद के लिए अदिति मिश्रा मैदान में हैं। उपाध्यक्ष के लिए कीझाकूट गोपिका बाबू, सचिव पद पर सुनील यादव व संयुक्त सचिव के लिए दानिश अली चुनाव लड़ रहे हैं।
जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में अभाविप की ओर से अध्यक्ष पद पर विकास पटेल चुनाव मैदान में हैं। उपाध्यक्ष पद पर तान्या कुमारी चुनाव लड़ रही हैं। महासचिव पद के लिए राजेश्वर कांत दुबे व संयुक्त सचिव पद के लिए अनुज एबीवीपी के प्रत्याशी हैं। इसके अलावा अन्य संगठनों ने भी इन चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। विश्वविद्यालय में मतदान प्रारंभ होने के साथ ही छात्रों को इस संबंध में जानकारी देने की भी पूरी व्यवस्था की गई है।
चुनाव नतीजों की बात करें तो 6 नवंबर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का नतीजा जारी किया जाएगा। इस साल जेएनयू छात्र संघ चुनाव कमेटी की ओर से एक ऑफिशियल वेबसाइट की जानकारी दी गई है। विश्वविद्यालय के छात्र इस वेबसाइट के जरिए लाइव रिजल्ट और अन्य आधिकारिक सूचनाएं हासिल कर सकेंगे। छात्र संगठनों ने इन चुनावों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व छात्रों से जुड़े अनेक मुद्दे उठाए हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने इन चुनावों में शोधार्थियों की फेलोशिप, हॉस्टल आवंटन की पारदर्शिता, वाई-फाई सुविधा के विस्तार, और अकादमिक वातावरण के सुदृढ़ीकरण जैसे मुद्दों को उठाया है। एबीवीपी का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में अभाविप के प्रति छात्रों का समर्थन तेजी से बढ़ा है। यह लहर केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक परिवर्तन की लहर है, जो बताती है कि आज का युवा संघर्ष नहीं, समाधान चाहता है।
महाराष्ट्र
मुंबई मानखुर्द एटीएम कार्ड फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने एटीएम कार्ड बदलकर फ्रॉड करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। 5 अगस्त को शिकायत करने वाली महिला पैसे निकालने के लिए मंगल मूर्ति जंक्शन पर बने एटीएम सेंटर गई थी। एटीएम से पैसे निकालते समय उसके पीछे खड़े एक अनजान व्यक्ति ने कार्ड का पिन देख लिया। इसके बाद उसने चालाकी से एटीएम रॉड बदलकर 19,000 रुपये निकाल लिए। पुलिस ने इस मामले में फ्रॉड का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में तीन संदिग्ध लोग दिखे थे जो एटीएम कार्ड से पैसे निकालते हुए पाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों की पहचान की। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों की पहचान कल्याण के रहने वाले 30 साल के कासिम अली बरकत अली और 38 साल के परवेज अकबर अली शेख के तौर पर हुई है। पुलिस दोनों से आगे की जांच कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने पहले कितने लोगों को ठगा है। यह कार्रवाई एडिशनल कमिश्नर धनंजय कुलकर्णी के निर्देश पर डीसीपी समीर शेख ने की।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
राजनीति
एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित, सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सांसदों के जोरदार नारेबाजी के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनि मत से पारित हो गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके।
इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
सदन की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने विपक्षी सांसदों से सदन को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
इसके बाद लोकसभा में ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
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