अपराध
पुलिस जांच शुरू होते ही सोशल मीडिया से विकास दुबे के फैन पेज गायब

कानपुर पुलिस द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद सोशल मीडिया से गैंगस्टर विकास दुबे को समर्पित फैन पेजेज तेजी से गायब होने लगे हैं। अब मुश्किल से दो ही फैन पेज बच गए हैं। कानपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, पुलिस ने विकास दुबे के पन्नों के बारे में तब जाना, जब सर्विलांस टीमों ने इन पन्नों को सक्रिय पाया।
उन्होंने कहा, “जांच चल रही है। हमने चेक किया है, सामग्री बेहद संवेदनशील है। कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम फेसबुक को पत्र भेजकर इन पेजों को ब्लॉक करने के लिए भी कहेंगे, लेकिन पहले हम अपनी जांच पूरी करेंगे।”
विकास दुबे ने इस साल 3 जुलाई को बिकरू गांव में घात लगाकर आठ पुलिसकर्मियों को मार डाला था, जिसके बाद वह सुर्खियों में आया था।
दुबे को एक सप्ताह बाद मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किए जाने के बाद कानपुर में एक कथित मुठभेड़ में मार दिया गया था।
विकास दुबे को समर्पित कुछ फेसबुक पेजों में स्वचालित हथियारों का महिमामंडन करना, गैंगस्टर का महिमामंडन करना और सुपारी लेकर हत्या करने जैसी चीजें पाई गईं।
इन पेजों पर संवेदनशील और आपत्तिजनक पोस्ट थे। पेजों का नाम ‘विकास दुबे कानपुर वाला’ और ‘विकास दुबे अमर रहे’ जैसे थे।
वहीं कुछ पेज ‘विकास दुबे फैन पेज’, ‘ब्राह्मण शिरोमणि पंडित विकास दुबे’ और ‘विकास दुबे गैंगस्टर’ जैसे थे, जो अब सोशल मीडिया से गायब होने लगे हैं।
कानपुर पुलिस ने अपनी निगरानी टीम और साइबर सेल को और अधिक विवरण एकत्र करने और इन पन्नों को बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
संयोग से ऐसा पहली बार नहीं है जब गैंगस्टरों के सोशल मीडिया पर मजबूत स्थिति पाई गई है।
मारे गए कई डॉन को उनके दोस्तों और समर्थकों द्वारा ‘जीवित’ रखा जा रहा है जो समय-समय पर आइटम पोस्ट करते रहते हैं, ताकि इन डॉन की यादों को पुनर्जीवित किया जा सके और लोगों से जुड़ सकें।
70 और 80 के दशक में उत्तर भारत में क्राइम सिटी का निर्माण करने वाले गोरखपुर के डॉन वीरेंद्र प्रताप शाही की 1997 में लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
उसके फेसबुक की डिस्प्ले तस्वीर पर ‘शेर-ए-पूर्वाचल’ लिखा हुआ है और दहाड़ते हुए शेर की तस्वीर पोस्ट की गई है।
वहीं विभिन्न त्योहारों पर उनके समर्थकों द्वारा शुभकामनाएं दी जाती रहती हैं।
डॉन की मौत के 23 साल बाद भी पेज पर 2,000 से अधिक लाइक्स और इतनी ही संख्या में फॉलोअर्स भी हैं।
फेसबुक पर एक और मारा गया डॉन ‘सक्रिय’ है, जो श्रीप्रकाश शुक्ला है। उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे खूंखार बदमाशों में से एक अंडरवल्र्ड में शुक्ला की गतिविधियों के कारण 1998 में उत्तर प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया था।
उसी साल, गाजियाबाद में एसटीएफ द्वारा गैंगस्टर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसका फेसबुक पेज गर्व से उसे ‘डॉन’ कहता है।
हालांकि अपराधी की 1998 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, लेकिन उसका एफबी पेज उसे ‘जिंदा’ रखता है और उसका दावा है कि उसने ‘जनवरी 2015 में रिलेशनशिप’ शुरू किया और फिर ‘जनवरी 2015 में शादी कर ली’। हालांकि जनवरी 2015 के बाद वह गायब है।
मुन्ना बजरंगी की 2018 में बागपत जेल के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसकी भी एक फेसबुक पेज है, लेकिन उस पर कोई पोस्ट नहीं हैं। उसकी प्रोफाइल का दावा है कि वह ‘माफिया डॉन’ है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कनाडा में भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या

ओटावा, 5 अप्रैल। कनाडा के ओटावा के निकट रॉकलैंड इलाके में एक भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। कनाडा में भारतीय दूतावास ने शनिवार सुबह घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है।
भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवार को सहायता देने का भी ऐलान किया।
दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “ओटावा के निकट रॉकलैंड में चाकू घोंपने से एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत से हम बहुत दुखी हैं। पुलिस ने बताया है कि एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। हम शोक संतप्त परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए स्थानीय सामुदायिक संघ के माध्यम से निकट संपर्क में हैं।”
हालांकि चाकू मारने की घटना का विवरण अभी भी अस्पष्ट है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि यह घटना सुबह-सुबह क्लेरेंस-रॉकलैंड क्षेत्र में हुई।
अधिकारियों ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है कि क्या यह वही मामला है जिसका उल्लेख भारतीय दूतावास ने किया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हत्या की चल रही जांच के तहत ओन्टारियो प्रांतीय पुलिस (ओपीपी) ने क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है।
पुलिस ने रॉकलैंड निवासियों को भी चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्हें सलाह दी गई है कि वे कानून प्रवर्तन की गतिविधियों में वृद्धि की अपेक्षा करें, जबकि अधिकारी अपराध से जुड़ी परिस्थितियों की जांच जारी रखेंगे।
कनाडा स्थित दूतावास ने जनता को आश्वासन दिया कि वह इस कठिन समय में पीड़ित परिवार को सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है।
चाकू घोंपने के पीछे का मकसद अभी भी स्पष्ट नहीं है और जांच जारी है। दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का वादा किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परिवार को उनकी ज़रूरत के मुताबिक सहायता मिले और मामले से जुड़ी आगे की कार्रवाई में मदद मिले।
अपराध
झारखंड में आयुष्मान भारत घोटाले में रांची सहित 21 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

रांची, 4 अप्रैल। आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने रांची में शुक्रवार सुबह से कई स्थानों पर छापेमारी शुरू की है। शहर के अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एदलहातु, बरियातू, लालपुर और चिरौंदी इलाके में कई ठिकानों पर कड़ी सुरक्षा के बीच तलाशी चल रही है।
बताया जा रहा है कि रांची के अलावा कुल 21 ठिकानों पर यह रेड चल रही है। ईडी ने आयुष्मान भारत योजना में झारखंड में हुई गड़बड़ियों को लेकर हाल में ईसीआईआर (इन्फोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज कर जांच शुरू की है। यह छापेमारी इसी मामले में उन लोगों के खिलाफ की जा रही है, जिनके घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में संलिप्त होने की संभावना है।
एक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के दफ्तर में भी तलाशी की जा रही है। संसद में पेश भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट (सीएजी) में भी आयुष्मान भारत योजना में गड़बड़ियों का खुलासा किया गया था। इसमें बताया गया था कि झारखंड में भी कई अस्पतालों ने मरीजों के फर्जी इलाज का बिल बनाकर सरकार से करोड़ों की राशि का भुगतान ले लिया।
यहां तक कि कई ऐसे लोगों के इलाज के नाम पर राशि निकाली गई, जिनकी मौत हो चुकी थी। सीएजी की इस रिपोर्ट के बाद ईडी ने झारखंड स्टेट हेल्थ सोसायटी और स्वास्थ्य विभाग से आयुष्मान योजना में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा था। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अस्पतालों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर की सूचना ईडी को भेजी थी।
बताया जा रहा है कि ईडी ने इसी एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर के रूप में दर्ज कर जांच शुरू की है। झारखंड में आयुष्मान योजना के तहत करीब 750 से अधिक अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इनमें से कई अस्पतालों में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें हैं।
अपराध
मुंबई लॉरेंस बिश्नोई गैंग के पांच सदस्य गिरफ्तार, बिश्नोई गैंग को मुंबई क्राइम ब्रांच का झटका

मुंबई: मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक बड़े ऑपरेशन में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के पांच शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। इन शूटरों के कब्जे से 5 रिवॉल्वर और 21 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। मुंबई पुलिस भी इन शूटरों से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने घटना को अंजाम देने से पहले ही हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया और घटना को टाल दिया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने इन पांचों को अंधेरी इलाके से गिरफ्तार किया है। वे यहां बड़ी तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम देने के इरादे से आए थे, लेकिन पुलिस ने उससे पहले ही वारदात को नाकाम कर दिया।
गिरफ्तार आरोपियों में विकास ठाकुर, समित दिलावर, देवेन्द्र रूपेश सक्सैना, श्रेया सुरेश यादव, विवेक गुप्ता शामिल हैं। विकास ठाकुर वर्सोवा अंधेरी के रहने वाले हैं, समित मुकेश कुमार दिलावर सोनीपत, हरियाणा के रहने वाले हैं, देवेन्द्र रूपेश सक्सेना मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, श्रेया सुरेश यादव जगदीशपुर, बिहार की रहने वाली हैं और विवेक कुमार गुप्ता रामपुर, राजस्थान के रहने वाले हैं।
उनके कब्जे से हथियार बरामद किए गए हैं और अपराध शाखा ने उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 3 और 25, धारा 55 और 61 (2) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। क्राइम ब्रांच इस बात की जांच कर रही है कि आरोपी हथियार कहां से लाए थे।
सलमान खान की शूटिंग के बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुंबई में सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच की सख्त कार्रवाई के चलते गैंग की कमर टूट चुकी है और अब क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को बड़ा झटका दिया है और इसके पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। अपराध शाखा मामले की आगे जांच कर रही है।
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