राष्ट्रीय
यूएस आईटी फर्म प्योर स्टोरेज ने खोला नया भारत अनुसंधान एवं विकास केंद्र
यूएस स्थित आईटी फर्म प्योर स्टोरेज ने गुरुवार को बेंगलुरु में अपने नए रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर का उद्घाटन किया जो स्टोरेज और डेटा प्रबंधन को बदलने वाले नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करेगा।
राज्य के आईटी और कौशल विकास मंत्री, डॉ सीएन अश्वथ नारायण ने कहा कि शुद्ध भंडारण भारतीय प्रतिभाओं को उन प्रौद्योगिकियों में योगदान करने का अवसर प्रदान कर रहा है जिनकी दुनिया भर में मांग है।
अनुसंधान एवं विकास केंद्र के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा, “डेटा की मात्रा और जटिलता में लगातार वृद्धि के साथ, हाइब्रिड और मल्टी-क्लाउड वातावरण में इसे प्रबंधित करने, संरक्षित करने और स्थानांतरित करने के कौशल की मांग और भी अधिक हो जाएगी और कर्नाटक के लिए इस आंदोलन में शामिल होना महत्वपूर्ण है।”
दुनिया भर में डिजिटल परिवर्तन का त्वरण डेटा विशेष रूप से असंरचित डेटा जैसे वीडियो, चित्र और ऑडियो फाइल्स के विकास को बढ़ावा दे रहा है।
यह ऐसे पेशेवरों की मांग पैदा कर रहा है जो ऐसे डेटा को स्टोर, प्रबंधित, संरक्षित और विश्लेषण करने वाले समाधानों में विशेषज्ञ हैं।
प्रबंधन परामर्श फर्म जिन्नोव के साथ प्योर स्टोरेज द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि प्रासंगिक डेटा प्रबंधन कौशल के साथ भारत में 700,000 से अधिक पेशेवर हैं।
यह देश में कुल प्रौद्योगिकी कार्यबल का लगभग 14 प्रतिशत है और आगे बढ़ने की ओर अग्रसर है।
प्योर स्टोरेज के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर अजय सिंह ने कहा, “इंडिया आरएंडडी सेंटर भारत में डेटा प्रबंधन क्षमताओं को और बढ़ावा देगा, जबकि प्योर के वैश्विक ग्राहकों को प्रतिभा की इस अधिकता से लाभ होगा।”
प्योर स्टोरेज में डेटा प्रबंधन समाधानों का एक पोर्टफोलियो है जिसमें फ्लैशएरे, फ्लैशब्लेड, फ्लैशस्टैक, एआईआरआई, प्योर ऐज-ए-सर्विस, पोर्टवर्क्स, प्योर1, एवरग्रीन, प्योर क्लाउड ब्लॉक स्टोर और प्योरिटी शामिल हैं।
भारत अनुसंधान एवं विकास केंद्र, कंपनी ने कहा, इनमें से अधिकांश उत्पाद लाइनों में निरंतर नवाचार में योगदान देगा।
राष्ट्रीय
ईरान में युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती हैं वैश्विक चुनौतियां, फिलहाल भारत पर कोई असर नहीं: एन चंद्रशेखरन

जमशेदपुर, 3 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे। इस दौरान टाटा स्टील परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शहरवासियों को संस्थापक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र से टाटा समूह को लाइमस्टोन सहित अन्य कच्चे माल का आयात होता है। समूह का कारोबार वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है, ऐसे में किसी भी लंबे युद्ध का प्रभाव सप्लाई चेन, माल की डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबिलिटी पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस युद्ध का टाटा समूह या भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह के कर्मचारी विश्व भर में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, होटल और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कंपनी इस दिशा में सतर्कता के साथ आवश्यक कदम उठा रही है।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नई इकाइयों की स्थापना और विस्तार योजनाओं के कारण रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग 7 लाख तक थी, लेकिन अब बढ़कर 11 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं आने वाले 5-6 साल में इसे 15 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही महिला कर्मचारियों की भागीदारी 28-30 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
आईटी क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के आगमन से रोजगार को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे। इसका सकारात्मक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी मिलेगा।
इस अवसर पर टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेन्द्रन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय
नए आधार वर्ष के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बने रहने की उम्मीद

GDP
नई दिल्ली, 27 फरवरी : नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) शुक्रवार को जारी होने वाली है। इससे पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा गठित एक उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों के लिए नई सीरीज में जीएसटी डेटा के अधिक उपयोग की सिफारिश की है।
उप-समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को वित्त वर्ष 2022-23 में संशोधित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे एमओएसपीआई ने शुरू किया है।
2011-12 सीरीज में जीएसटी डेटा का उपयोग तिमाही राष्ट्रीय खातों और वार्षिक राष्ट्रीय खातों के कुछ क्षेत्रों में किया गया था।
भारत अब जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस भी 2024 में अपडेट किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर तरीके से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कारोबार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी शामिल है।
इस बदलाव में असंगठित क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस की खपत से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। नई पद्धति से भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य योगदान घरेलू मांग का होगा।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 (चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही) के उच्च-आवृत्ति आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक रह सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम जीडीपी अनुमान, पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े और नए बेस 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी आंकड़े शुक्रवार को जारी किए जाएंगे।
राजनीति
तमिलनाडु: कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वेल्लोर में टीवीके की बैठक को संबोधित करेंगे विजय

वेल्लोर, 23 फरवरी : तमिलगा वेट्टी कजगम (टीवीके) के अध्यक्ष विजय सोमवार को वेल्लोर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को सुचारू और सुरक्षित बनाने के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।
इसके साथ ही सख्त प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक कोल्लमंगलम में आयोजित की जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लगभग 4,900 कार्यकारी सदस्यों को बैठक में शामिल होने की अनुमति मिली है।
इस कार्यक्रम में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश दी जाएगी, जिनके पास क्यूआर कोड वाले विशेष प्रवेश टिकट होंगे। पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि क्यूआर कोड प्रणाली को प्रवेश प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने, भीड़भाड़ से बचने और यह सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है कि केवल अधिकृत कार्यकारी ही बंद कमरे में होने वाली बैठक में भाग लें।
टीवीके के महासचिव एन. आनंद ने एक बयान में स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से कुछ श्रेणियों के लोगों को प्रवेश पास जारी नहीं किए जाएंगे। जिसमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों, स्कूली छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और पहले से किसी बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों को बैठक में शामिल न होने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध पूरी तरह से एहतियाती हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में इरोड में हुए एक टीवीके कार्यक्रम के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई थी। जिसमें एक व्यक्ति की कथित तौर पर मौत हो गई थी। जिसके बाद पार्टी ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए हैं।
उन्होंने बताया कि उस घटना को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने वेल्लोर कार्यक्रम स्थल पर एक बड़ा टेंट लगाया है, जिससे कि उपस्थित लोगों को गर्मी से बचाया जा सके और तीन घंटे के सत्र के दौरान उन्हें बेहतर आराम मिल सके। इसके साथ ही बेहतर सुरक्षा योजना के तहत चिकित्सा सहायता और बुनियादी आपातकालीन व्यवस्था भी तैयार रखी गई है।
बता दें कि रविवार देर रात विजय का प्रचार वाहन कड़ी सुरक्षा के बीच वेल्लोर पहुंचा। पार्टी कार्यकर्ता छोटे-छोटे समूहों में उनकी वाहन की एक झलक पाने के लिए इकठ्ठा हो गए थे। वेल्लोर में यह कार्यकारी बैठक सलेम में इसी तरह के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तुरंत बाद हुई है। अब टीवीके 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर रही है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में बूथ स्तर की संरचनाओं को मजबूत करने, प्रचार रणनीतियों की समीक्षा करने और जिला स्तरीय पदाधिकारियों को सक्रिय करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यकर्ताओं में बढ़ती उत्सुकता के बीच, विजय के भाषण से उत्तरी तमिलनाडु में पार्टी के अगले चरण के राजनीतिक लामबंदी की दिशा तय होने की उम्मीद है।
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