अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध : व्हाइट हाउस
वाशिंगटन, 11 मार्च : व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने साफ किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने की अनुमति नहीं देंगे।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अमेरिकी सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का एक मुख्य लक्ष्य इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया है कि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की आपूर्ति लगातार जारी रहनी चाहिए, ताकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को उनकी ऊर्जा जरूरतें मिलती रहें।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान इस अहम समुद्री रास्ते को बंद करने की कोशिश करता है, तो उसे कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
लेविट ने कहा कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में तेल या सामान की आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो दुनिया की सबसे ताकतवर सेना उसे अब तक से भी कई गुना ज्यादा सख्त जवाब देगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे ज़रूरी एनर्जी चेकपॉइंट्स में से एक है, जहां से दुनिया भर में तेल शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा जाता है। वहाँ कोई भी रुकावट तेल की कीमतों को तेजी से बढ़ा सकती है और इंटरनेशनल मार्केट को अस्थिर कर सकती है।”
लेविट ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को पहले से अंदेशा था कि ईरान संघर्ष के दौरान ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है। इसी वजह से सरकार ने पहले से कई सुरक्षा कदम तैयार कर रखे हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को पूरी उम्मीद थी कि ईरान की सरकार वैश्विक बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश करेगी।
इन तैयारियों के तहत अमेरिकी प्रशासन ने खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए हैं। लेविट के मुताबिक, अब तक ट्रंप प्रशासन ने खाड़ी में काम करने वाले टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने की पेशकश की है।
इसके अलावा संकट के दौरान तेल की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए अमेरिकी सरकार ने कुछ नियमों में अस्थायी राहत भी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से ढील दी है।
व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी नौसेना तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकालने के लिए उनके साथ चल सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा और ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए आगे के कदमों पर भी लगातार विचार कर रहा है।
लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी ऊर्जा टीम बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उद्योग जगत के नेताओं से बातचीत भी कर रहे हैं। साथ ही अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिए गए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अतिरिक्त विकल्प तैयार किए जाएं।
व्हाइट हाउस ने बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर चिंतित अमेरिकी नागरिकों को भी भरोसा दिलाने की कोशिश की है।
लेविट ने कहा कि हाल के दिनों में तेल और गैस की कीमतों में जो बढ़ोतरी हुई है, वह अस्थायी है। उन्होंने दावा किया कि इस सैन्य अभियान के लंबे समय में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं।
उन्होंने कहा, “एक बार जब ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के नेशनल सिक्योरिटी के मकसद पूरी तरह से पूरे हो जाएंगे, तो अमेरिकी तेल और गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट देखेंगे, शायद ऑपरेशन शुरू होने से पहले की तुलना में भी कम।”
व्हाइट हाउस के अनुसार, यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान की मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने, उसकी नेवी फोर्स को कमजोर करने और तेहरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया था।
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है। दुनिया के समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसी कारण इस जलमार्ग की सुरक्षा पर दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों, जैसे भारत, चीन, जापान और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं की भी करीबी नजर रहती है।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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