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Friday,03-April-2026
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अमेरिका के साइबर राजनयिक ने वैश्विक टेलीकॉम कंपनियों से जियो का मॉडल अपनाने को कहा

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Robert

अमेरिका ने चीनी टेलीकॉम दिग्गज हुआवेई की तीखी आलोचना करते हुए और 5जी अवसंरचना में ‘अविश्वसनीय चीनी उपकरणों’ के उपयोग के प्रति चेताते हुए दुनिया भर के दूरसंचार ऑपरेटरों से भारतीय कंपनी रिलायंस जियो के 5जी टेम्पलेट को अपनाने का आग्रह किया है।

शीर्ष अमेरिकी साइबर राजनयिक रॉबर्ट एल स्ट्रायर ने आईएएनएस से कहा, “मुझे लगता है कि रिलायंस जियो का सबक यह है कि 5जी प्रौद्योगिकी के बारे में कुछ भी रहस्यमय नहीं है। इसमें 4जी प्रौद्योगिकी के समान ही घटक हैं, बस इतना है कि यह एक अलग स्तर तक विकसित हुआ है।”

स्ट्रायर जियो के 100 प्रतिशत मेड-इन-इंडिया 5जी सोलूशन पर अमेरिकी मूल्यांकन पेश कर रहे थे जिसकी घोषणा 15 जुलाई को रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी के 43वें एजीएम में की थी।

स्ट्रायर साइबर एवं अंतर्राष्ट्रीय संचार व सूचना नीति के अमेरिकी उप सहायक सचिव हैं। वह अमेरिका के लिए विदेशी सरकारों के साथ अंतर्राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा, इंटरनेट, डेटा और गोपनीयता नीति पर वार्ताओं का नेतृत्व करते हैं। उनके काम का एक बड़ा हिस्सा 5जी नेटवर्क के लिए गैर-हुआवेई उपकरणों में निवेश करने के लिए अन्य देशों को अमेरिका के पाले में शामिल करना है।

एयरटेल, वोडा आइडिया, बीएसएनएल की चीनी उपकरणों पर निर्भरता के बारे में विशेष रूप से पूछे जाने पर स्ट्रायर ने प्रौद्योगिकी जीवन चक्र और मूल्यह्रास की वास्तविकताओं के बारे में बात की, जो कि ‘अविश्वसनीय विक्रेताओं से विश्वसनीय विक्रेताओं की तरफ जाने में काम आती हैं।’

उन्होंने कहा, “हमारा अभियान 5जी की तरफ बढ़ने पर केंद्रित है, लेकिन हमें यह एहसास है कि 3जी और 4जी अवसंरचना 5जी की तरफ जाने पर असर डालेगी। इसलिए हम सरकारों और दूरसंचार ऑपरेटरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे यह देखें कि वे कैसे अविश्वसनीय विक्रेताओं से विश्वसनीय विक्रेताओं तक पहुंच सकते हैं।”

अमेरिका ने 5जी के लिए केवल ‘विश्वसनीय विक्रेताओं’ का उपयोग करने के फैसले के लिए स्पेन में टेलीफोनिका, फ्रांस में ऑरेंज, भारत में जियो, ऑस्ट्रेलिया में टेलस्ट्रा, दक्षिण कोरिया में एसके और केटी, जापान में एनटीटी और कनाडा और सिंगापुर के दूरसंचार ऑपरेटरों की प्रशंसा की है।

स्ट्रायर की यह टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब लंदन में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने चीन को भारत को धमकाने के लिए और हुआवेई और जेडटीई जैसी ‘अविश्वासी’ चीनी आईटी कंपनियों के लिए आड़े हाथ लिया।

शून्य चीनी इनपुट वाले जियो मॉडल पर स्ट्रायर ने भारत में एंटीना, बेस स्टेशन, बैकहॉल, कोर सर्वर और नेटवर्क प्रबंधन के स्वदेशी उत्पादन और इनका ‘वैश्विक बाजार’ बनने के अवसरों का उल्लेख किया।

स्ट्रायर ने कहा कि अगले साल के दौरान सरकार और टेलिकॉम ऑपरेटरों द्वारा 5जी के लिए जो कुछ होने वाला है, उसके नतीजे अगर दशकों तक नहीं तो भी सालों तक महसूस किए जाएंगे।

स्ट्रायर ने कहा, “माहौल हुआवेई के खिलाफ हो रहा है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के निगरानी तंत्र और सूचनाओं के दमन के खतरों के प्रति दुनिया जाग रही है।”

उन्होंने कहा, “5जी नेटवर्क के किसी भी हिस्से में हुआवेई और जेडटीई जैसे अविश्वसनीय, उच्च जोखिम वाले वेंडरों को अनुमति देने से संवेदनशील सरकारी, वाणिज्यिक और व्यक्तिगत स्तर की जानकारी खतरे में पड़ सकती है और साथ ही सिस्टम भी व्यवधान, हेरफेर और जासूसी के दायरे में आ सकता है।”

राजनीति

ईरान युद्ध के बीच कुकिंग गैस पर निर्भरता घटाने की तैयारी, सरकार घरेलू इंडक्शन हीटर उत्पादन बढ़ाने पर कर रही फोकस

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नई दिल्ली, 3 अप्रैल : केंद्र सरकार कुकिंग गैस की खपत कम करने के लिए अब इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है। इस दिशा में शुक्रवार को उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव, विद्युत सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक की।

इस बैठक में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए इंडक्शन हीटर और कुकिंग उपकरणों के उत्पादन को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई, ताकि कुकिंग गैस की खपत कम की जा सके।

पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से इंडक्शन हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पादों की मांग में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अगर यह युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो भारत को संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब सरकार लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की संभावना को देखते हुए आयात पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रही है। खासतौर पर तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात में बाधा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

सरकार पहले ही कई पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क कम कर चुकी है, ताकि सप्लाई बनी रहे और लागत का दबाव कम किया जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य फोकस जरूरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आयात पर निर्भरता कम करना है।

कतर में एक बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) प्लांट को नुकसान पहुंचने के बाद मध्य पूर्व से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है।

भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाई है और अब रूस के साथ-साथ नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां अमेरिका से भी गैस की आपूर्ति ले रही हैं।

इस बीच, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना अगले 2-3 हफ्तों तक ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को ‘स्टोन एजेज यानी पाषाण युग’ (उनकी पुरानी स्थिति जहां वे असल में थे) में पहुंचा देगा।

इसके कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उस समय मध्य पूर्व में न तेल था और न ही गैस का उत्पादन होता था।”

ट्रंप ने यह चेतावनी ऐसे समय दोहराई है जब यह संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती जारी है। वहीं ईरान ने युद्धविराम और 15-सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए इसे ‘बेहद एकतरफा और अव्यवहारिक’ बताया है।

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व्यापार

पश्चिम एशिया तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर, ब्रेंट क्रूड में 8 प्रतिशत की वृद्धि

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नई दिल्ली, 3 अप्रैल : वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को तेज उछाल देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में संभावित सैन्य हमले की चेतावनी देने के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 8 प्रतिशत बढ़कर 109.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) फ्यूचर्स 111.54 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।

सप्ताह के दौरान यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड में पिछले शुक्रवार के मुकाबले 11.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ब्रेंट क्रूड में इसी अवधि में 3.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार से हर दिन लाखों बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते ऊर्जा कीमतें कई साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से गुजरने वाली सप्लाई पर निर्भर देशों में ईंधन की कमी भी देखने को मिल रही है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।

इस हफ्ते दिए गए अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ्तों में ईरान पर ‘बेहद कड़ा प्रहार’ कर सकता है। हालांकि, उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं बताई और अन्य देशों से इसे सुचारू करने की जिम्मेदारी लेने को कहा।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रुपए और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर दबाव बना रह सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर स्थिति में सुधार होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और करेंसी में स्थिरता आ सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने पर बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी।

कीमती धातुओं की बात करें तो कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.48 प्रतिशत गिरकर 4,679.70 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प तलाश रहे हैं।

इस बीच, गुड फ्राइडे के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार सुबह के सत्र में बंद रहे।

वहीं, पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव और करेंसी में उतार-चढ़ाव के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए, जहां दोनों प्रमुख बेंचमार्कों – सेंसेक्स और निफ्टी – में कमजोरी रही।

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अंतरराष्ट्रीय

भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 54.91 अरब डॉलर पहुंचा, टॉप घाटे वाले देशों की सूची में शामिल

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TRUMP

वाशिंगटन, 3 अप्रैल : सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में 54.91 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। इस बड़े घाटे की वजह से भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जिनसे अमेरिका को सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा (नुकसान) होता है। वहीं, फरवरी के महीने में दुनिया भर के दूसरे देशों के साथ भी अमेरिका का कुल व्यापार घाटा और ज्यादा बढ़ा है।

महीने के आंकड़ों से पता चला कि फरवरी में अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़कर 57.35 बिलियन डॉलर हो गया, जो जनवरी से 2.67 बिलियन डॉलर ज्यादा है, हालांकि यह अभी भी 12 महीने के एवरेज से 11 फसदी कम है।

यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि इम्पोर्ट, एक्सपोर्ट से ज्यादा तेजी से बढ़ा। महीने के दौरान कुल एक्सपोर्ट 314.8 बिलियन डॉलर रहा, जबकि इम्पोर्ट 372.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

वस्तु व्यापार में अमेरिका को 84.60 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जबकि सेवाओं के क्षेत्र में 27.26 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया। जनवरी की तुलना में वस्तु व्यापार घाटा बढ़ा, जबकि सेवाओं का अधिशेष घट गया।

भारत अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में बना रहा। केवल फरवरी में ही अमेरिका ने भारत के साथ लगभग 3.5 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार घाटा दर्ज किया।

फरवरी 2026 तक 12 महीने के समय में, भारत का अमेरिका के कुल सामान व्यापार घाटा में लगभग 5.01 फीसदी हिस्सा था, जो दोनों देशों के बीच लगातार ट्रेड फ्लो को दिखाता है।

भारत अमेरिकी इंपोर्ट के बड़े सोर्स में भी शामिल था। इसी समय में भारत से कुल 101.97 बिलियन डॉलर का सामान इंपोर्ट हुआ, जो अमेरिकी मार्केट में फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और दूसरे प्रोडक्ट्स की सप्लाई में इसकी भूमिका को दिखाता है।

वहीं, भारत से इंपोर्ट से अमेरिकी कस्टम ड्यूटी में 12.34 बिलियन डॉलर आए, जिसका एवरेज टैरिफ दर 12.12 फीसदी था।

अमेरिका के समग्र व्यापार परिदृश्य में मेक्सिको, वियतनाम और चीन के साथ बड़े असंतुलन देखने के लिए मिले, जो वस्तु व्यापार घाटे में सबसे अधिक योगदान देने वाले देश बने रहे।

फरवरी में एक्सपोर्ट बढ़ा, क्योंकि इंडस्ट्रियल सप्लाई और मटीरियल की शिपमेंट ज्यादा हुई, जिसमें नॉन-मॉनेटरी सोना और नैचुरल गैस शामिल हैं। सर्विसेज एक्सपोर्ट भी थोड़ा बढ़ा।

हालांकि, कैपिटल गुड्स, कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, क्रूड ऑयल और फार्मास्यूटिकल तैयारियों की डिमांड की वजह से इंपोर्ट ज्यादा तेजी से बढ़ा।

पिछले साल ट्रेड किए गए सामानों में, सिविलियन एयरक्राफ्ट, फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट और नॉन-मॉनेटरी सोना अमेरिका के मुख्य एक्सपोर्ट थे। इंपोर्ट की बात करें तो, फार्मास्यूटिकल्स, कंप्यूटर और पैसेंजर गाड़ियों का दबदबा रहा।

महीने में बढ़ोतरी के बावजूद, लंबे समय के ट्रेंड से व्यापार असंतुलन में कुछ कमी दिख रही है। साल-दर-साल के डेटा से पता चला है कि पिछले साल इसी समय की तुलना में घाटा कम हुआ है, जिसमें एक्सपोर्ट बढ़ा है और इंपोर्ट सालाना आधार पर घटा है।

फरवरी में, अमेरिका ने इंपोर्ट ड्यूटी के तौर पर 21.24 बिलियन डॉलर इकट्ठा किए, जो 12 महीने के एवरेज से लगभग 13 फीसदी कम है। एवरेज लागू ड्यूटी रेट 8.48 फीसदी था।

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