राष्ट्रीय
यूपी के पहले हैंडीक्राफ्ट पार्क से 22 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
उत्तर प्रदेश के हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) की बेहद सम्पन्न परंपरा की पूरी दुनिया मुरीद रही है। अब इसी सिलसिले में सूबे के सभी प्रमुख हेंडीक्राफ्ट को एक स्थान पर देश और विदेश के लोगों को मुहैया कराने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के सेक्टर 29 में एक हेंडीक्राफ्ट पार्क बनाया जा रहा है। करीब 50 एकड़ के इस पार्क में 76 उद्योगपतियों ने अपनी फैक्ट्री लगाने के लिए जमीन ली है। यह उद्योगपति करीब 403 करोड़ रुपए का निवेश कर अपनी यूनिट पार्क में लगायेंगे। इन उद्योगपतियों के पार्क में किए जा रहे निवेश से 22,144 लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा। यूपी के इस पहले हेंडीक्राफ्ट पार्क से देश तथा विदेश के लोगों को एक ही स्थान पर यूपी के ओडीओपी योजना से जुड़े सभी हेंडीक्राफ्ट एक ही स्थान पर मिल सकेंगे। यही नहीं, इस पार्क के बनने से यूपी के हस्तशिल्प कारोबार को बड़ा बाजार मिलेगा। इस पार्क में आकर निर्यात कारोबार से जुड़े लोग सूबे के हस्तशिल्प को खरीद सकेंगे। दिल्ली तथा नोएडा में रहने वाले लोग भी लखनऊ, मेरठ, बरेली, फिरोजाबाद, आगरा, वाराणसी, चंदौली, गोरखपुर, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, आजमगढ़, मिजार्पुर तथा झांसी एवं ललितपुर के हस्तशिल्प को आसानी से पा सकेंगे।
यीडा के अधिकारियों के अनुसार सूबे के इस पहले हेंडीक्राफ्ट पार्क को लेकर इस क्षेत्र में कार्यरत उद्यमी बेहद उत्साहित है। यही वजह है कि 76 उद्यमियों ने यहां अपनी यूनिट लगाने के लिए जमीन ली है। यहां हैंडीक्राफ्ट पार्क योजना के अंतर्गत विकास एक्सपोर्ट्स को 5,000 वर्ग मीटर जमीन वुड, मेटल, मार्बल हैंडीक्राफ्ट के लिए आवंटित की गई। इसी प्रकार द सिल्क फैक्ट्री, रटेरिया एक्सपोर्ट, नारायण क्रिएशन, वजीर चंद एंड कंपनी, डक्स इंडिया इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, द्वार फुटवियर इंडस्ट्रीज तथा स्पेशलिस्ट होम कांसेप्ट को जमीन आवंटित हो गई है।
अधिकारियों के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट के पास जल्द ही इस पार्क में यूपी सहित देशभर के हैंडीक्राफ्ट से लोग रू-ब-रू हो सकेंगे और यह पार्क कारीगरों, शिल्पकारों और दस्तकारों का सबसे प्रमुख ठीहा बन जाएगा। यहाँ वैसी ही भीड़ जुटेगी जैसी कि दिल्ली में आयोजित होने वाले हुनर हाट में होती है। दिल्ली के हुनर हाट में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 600 से अधिक दस्तकार, शिल्पकार और कारीगार स्वदेशी उत्पादों के साथ शामिल होते हैं। इनके बनाए उत्पादों को खरीद कर लोग अपने घरों को सजाते हैं। पार्क में जिन उद्यमियों ने भूमि ली है, वो सभी हेंडीक्राफ्ट कारोबार से जुड़े हैं। यह लोग अपने बनाए उत्पाद तो यहां बेचेंगे ही ओडीओपी से जुड़े सूबे तमाम जिलों के उत्पाद भी यह लोगों को मुहैया कराएंगे। मिट्टी को जीवंत करने वाले कारीगरों को संरक्षण एवं संवर्धन देने के लिए उनकी पहल पर जहां प्रदेश में पहली बार माटीकला बोर्ड का गठन किया गया । इसके तहत इससे जुड़े कारीगरों को ट्रेनिंग से लेकर बाजार तक कि सुविधा मुहैया कराई गई और अब इसी दिशा में हैंडीक्राफ्ट पार्क बनाया जा रहा है। जहां ना सिर्फ 22 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, बल्कि सूबे के हस्तशिल्प को भी एक नया बाजार मिलेगा।
अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा है कि स्थानीय हुनर का संरक्षण और संवर्धन हो। यह पार्क उनकी मंशा को पूरा करेगा। एक जिला-एक उत्पाद, विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं का भी यही मकसद है। हस्तशिल्प को और ज्यादा मजबूत करने के लिए भी सरकर की ओर से लगातार प्रयास हो रहे हैं।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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