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Tuesday,26-May-2026
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न्याय

यूपी: लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प, पार्टी प्रतिनिधिमंडल को संभल जाने से रोका गया

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सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की और पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, क्योंकि उन्हें हिंसा प्रभावित संभल की ओर जाने से रोका गया था।

पुलिस ने रविवार रात को राज्य की राजधानी में पार्टी कार्यालय और उसके कई नेताओं के आवासों के बाहर बैरिकेड्स लगा दिए थे, जो कांग्रेस के संभल में तथ्यान्वेषण दौरे पर इकाई प्रमुख अजय राय के साथ जाने वाले थे।

सोमवार को जब राय के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संभल के लिए कूच करने का प्रयास किया तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेड्स पर रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप शोरगुल और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई।

पार्टी ने हिंसा प्रभावित जिले में जाने से अपने नेताओं को रोकने के लिए पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को “लोकतंत्र विरोधी” करार दिया।

संभल में 19 नवंबर से तनाव व्याप्त है, जब अदालत के आदेश पर एक मुगलकालीन मस्जिद का सर्वेक्षण किया गया था, क्योंकि दावा किया गया था कि उस स्थान पर पहले हरिहर मंदिर था।

24 नवंबर को दूसरे सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी जब प्रदर्शनकारी शाही जामा मस्जिद के पास एकत्र हुए। इसके बाद हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

पुलिस की कार्रवाई लोकतंत्र विरोधी: कांग्रेस नेता

सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के संभल शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद ने कहा कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल राय के नेतृत्व में संभल पहुंचेगा और शोकाकुल परिवारों को संवेदना व्यक्त करेगा, स्थिति का जायजा लेगा और शांति की अपील करेगा।

अहमद ने कहा, “इससे पहले जिला अधिकारी ने 30 नवंबर तक संभल में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था, उससे पहले हमने 2 दिसंबर को प्रतिनिधिमंडल के दौरे की घोषणा की थी। लेकिन अब पुलिस प्रशासन सभी को संभल आने से रोक रहा है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।”

उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और संभल जिला प्रशासन संभल में हिंसा को रोकने में पूरी तरह विफल रहा।

कांग्रेस कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात

लखनऊ में मॉल एवेन्यू इलाके में कांग्रेस कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। राय और पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते देखे गए।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा, “संभल की घटना कोई आम घटना नहीं है। यह एक बड़ी घटना है। अजय राय के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल तथ्यान्वेषण मिशन पर वहां जाना चाहता था। कल (रविवार) रात से ही मुझे नजरबंद कर दिया गया है। हमारी पार्टी के नेताओं को रोका जा रहा है।” मिश्रा ने कहा, “यह सरकार की ओर से पूरी तरह अराजकता है। सरकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (उपद्रव या आशंका वाले खतरे के तत्काल मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति) लागू करने का हवाला देकर अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश कर रही है और हमें लखनऊ से वहां (संभल) जाने की अनुमति नहीं दे रही है।”

उन्होंने कहा कि बीएनएसएस की धारा 163 संभल में लगाई गई है, लखनऊ में नहीं।

“हमने 2 दिसंबर को संभल जाने का फैसला किया था क्योंकि जनप्रतिनिधियों के प्रवेश पर सरकारी प्रतिबंध 30 नवंबर तक हटाया जाना था। अब, उन्होंने अचानक प्रतिबंध को 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। सरकार स्पष्ट रूप से अपनी खामियों को छिपाना चाहती है।” उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कई पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस कमेटी कार्यालय में रात बिताई।

राय ने तब कहा था, “अगर हमें रोका गया तो हम गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलन करेंगे क्योंकि हम महात्मा गांधी के अनुयायी हैं।”

संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद समेत समाजवादी पार्टी (सपा) के कई विधायकों को शनिवार को हिंसा प्रभावित जिले में प्रवेश करने से रोक दिया गया, क्योंकि प्रशासन ने शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए बाहरी लोगों और जनप्रतिनिधियों के प्रवेश पर प्रतिबंध 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया है।

बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया

बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध शनिवार को समाप्त हो रहा था।

बीएनएसएस की धारा 163 (उपद्रव या आशंकाजनक खतरे के तत्काल मामलों में आदेश जारी करने की शक्ति) के तहत प्रतिबंध, जो रविवार को समाप्त होने वाले थे, अब 31 दिसंबर तक बढ़ा दिए गए हैं।

कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायिक आयोग के सदस्यों ने रविवार को शाही जामा मस्जिद और अन्य क्षेत्रों का दौरा किया, जहां 24 नवंबर को हिंसा हुई थी।

न्याय

भायखला मे गरीब झोपड़ा वासियों से लूट। बिल्डर और ई वार्ड अधिकारियों को ५०० करोड़ का फायदा।

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गरीबों के झोपड़ों पर खड़ा किया आशियाना। बी एम सी ई वार्ड के अधिकारियों और बिल्डर की सांठ घाट का काला सच।

मुंबई : एक आम इंसान का सपना होता है के उस का एक अपना घर हो और जब इन के साथ हमदर्दी दिखा उन का आशियाना ही छीन लिया जाए तो उन के लबों पर सिर्फ बददुआ ही होती है। हम बात कर रहे है ऐसे सैकड़ों परिवारों की जिन को उन के झोपड़ों की जगह पक्के घर देने की बात की गई थी और सरकार ने उन को पक्के घर के लिए हकदार भी बताया पर मुंबई महानगर पालिका के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने उन के घरों की फाइल नामचीन बिल्डरों को बेच दी और यह बिल्डर खुद को साफ सुथरा दीनदार कहलवाते हैं।

ई वार्ड ऑफिस के अधीन आने वाले सैकड़ों झोपड़ों को हटाने का काम साल २०१७ से शेरू हुआ जिस मे मुकामी नगरसेवक रईस शेख ने काफी जद्दोजहद की के इन फुटपाथ वासियों को पक्का घर मिल जाए और कई सालों से जानवरों सी जिंदगी गुजरने वाले फुटपाथ वासियों की आने वाली नस्ल एक अच्छे घर मे रह सके, पर हुआ इस का उल्ट ।

आप को यह जान कर हैरत होगी के इंसानियत को शर्मसार करने वाले बीएमसी के अधिकारियों ने बिल्डरों से अपने ईमान का सौदा कर दिया । कई झोपड़ा मालिकों को बुला के धमकाया भी गया के आप अपनी जगह खाली कर दो और आप को घर भी नहीं मिल सकता क्यों के आप के कागजात पूरे नहीं है आप अपात्र हैं सरकारी घर के लिए। घबराए लोगों ने समाजसेवकों और मुकामी नेताओं से गुहार लगाई के वो कहां जायेंगे पर कुछ हासिल ना हुआ ।

बीएमसी ई विभाग के मेंटिनेंस विभाग मे कार्यरत असिस्टेंट इंजीनियर परवीन मुल्क, अमजद खान और अन्य सहयोगी अधिकारियों ने सब झोपड़ा मालिकों को अकेले अकेले बुला के मीटिंग की, इस मीटिंग मैं सब इंजीनियर और स्थानीय बिल्डर के लोगो को भी रखा गया, पूरा काम एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया।

बीएमसी अधिकारी ने नोटिस दी के आप को फुटपाथ खाली करना है आप के दस्तावेज काफी नहीं है यह साबित करने को के आप वहां ५० सालों से रह रहे हो इसी दौरान घबराए झोपड़ा धारक को बिल्डर के आदमी द्वारा धारस दी गई और फिर क्या उस झोपड़ा मालिक से एफिडेविट लिया गया के उस ने अपना झोपड़ा बिल्डर के रिश्तेदारों या उस के एम्पलाई को दे दिया है बदले मैं बिल्डर ने उसे कुछ पैसे दे दिए ता के वो कहीं और किराए के मकान में अपना बसेरा कर ले ।

अब भ्रष्ट बीएमसी ई विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया के जब झोपड़े का इंस्पेक्शन किया गया तो वहां जिस के नाम पर झोपड़ा था वो नहीं मिला और उस ने जिन को रहने दिया था वो बंदे को हम ने झोपड़ा मालिक मान लिया है और उसे सरकार से घर दिया जाएगा ।

अगली कड़ी मे यह बिल्डर अपने नाम पर लिए गए झोपड़े और अपने रिश्तेदारों के नाम के झोपड़ों को अपनी कंपनी द्वारा बनाई जा रही उच्च प्रोफ़ाइल की बिल्डिंग मे जगह देने की विनती बीएमसी से करता है जिसे पैसे खाने के बाद मान लिया जाता है और बिल्डर के हाइप्रोफाइल प्रोजेक्ट मे उन झोपड़वासियों जो के बोगस होते हैं शिफ्टिंग बता दी जाती है इतना ही नहीं इन झोपड़ा वासियों को अपने प्रोजेक्ट मे जगह देने के एवज बिल्डर सरकार से अच्छी एफ एस आई भी लेता है ।

अगले अंक मे पढ़ना ना भूलें कौन कौन सी बिल्डिंग मे करोड़ों के घरों को यह बताया गया है के झोपड़ा वासी को दिया गया है कौन है भ्रष्ट अधिकारी और कौन कौन है वो दयालु चीटर बिल्डर

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न्याय

जेल में बंद किसानों को अगर नहीं छोड़ा गया तो, बीकेयू 23 को लेगा बड़ा फैसला

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ग्रेटर नोएडा, 16 दिसंबर: गौतमबुद्ध नगर में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों को लुक्सर जेल में बंद कर दिया गया है। अभी तक इन किसानों की रिहाई नहीं हुई है। इसमें सुखबीर खलीफा समेत कई संगठन के किसान नेता शामिल हैं। अब उनकी रिहाई की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने रविवार को एक बैठक की है जिसमें उसने फैसला लिया है कि अगर 22 दिसंबर तक इन्हें नहीं छोड़ा गया तो 23 दिसंबर यानी चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर भारतीय किसान यूनियन एक बड़ा फैसला लेगा।

इसके साथ साथ भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने भी अपने जिले के सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जिले के कम से कम एक थाने में गौतम बुद्ध नगर के 129 आंदोलनकारी किसान जो 3 दिसंबर से गौतमबुद्ध नगर की जेल में बंद हैं, उनके लिए सांकेतिक गिरफ्तारी देंगे और ज्ञापन सौंपेंगे।

भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति ने यह आरोप लगाया है कि जेल में बंद चार किसान नेताओं से तो मुलाकात भी बंद है। किसी को मिलने भी नहीं दिया जा रहा है। संज्ञान में आया है कि उनको अकेले में भी रखा गया है। यह आजाद भारत में पहली बार देखने को मिला है।

भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के नेता मास्टर श्यौराज का कहना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गौतम बुद्ध नगर के किसान आंदोलन से भले ही खफा हैं। लेकिन प्रशासन सांकेतिक गिरफ्तारी न लेकर वास्तव में जेल भेजना चाहे तो भी खुशी खुशी अपने किसान भाईयों के सम्मान में जेल जाएंगे और यह संदेश प्रत्येक जिले में भेजने का काम करेंगे। यह फैसला उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय पदाधिकारियों से विचार विमर्श कर लिया गया है। इसलिए सभी पालन करेंगे।

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दुर्घटना

कुर्ला बस हादसा: काम के बाद घर लौट रही 20 वर्षीय महिला की कुचलकर मौत; पिता ने बीएमसी, हॉकर्स और ट्रैफिक पुलिस को ठहराया जिम्मेदार

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मुंबई: मुंबई के कुर्ला में सोमवार रात करीब 9:30 बजे हुई दुखद दुर्घटना ने पीड़ितों के परिवारों के लिए दर्दनाक यादें छोड़ दी हैं। मृतकों में से एक 20 वर्षीय लड़की थी जिसकी पहचान आफरीन शाह के रूप में हुई जो सुबह नौकरी के पहले दिन के लिए घर से निकली थी। जब वह नई नौकरी के पहले दिन के लिए उम्मीद और उत्साह से भरी हुई अपने घर से बाहर निकली, तो उसके पिता ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह आखिरी बार होगा जब वह उसे जीवित देख पाएगी।

दुखद बात यह है कि आफरीन उन सात पीड़ितों में से एक बन गई, जिनकी जिंदगी उस समय खत्म हो गई, जब रूट नंबर ए-332 पर चलने वाली एक तेज रफ्तार बेस्ट वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बस ने कुर्ला (पश्चिम) में एसजी बारवे रोड पर पैदल यात्रियों और कई वाहनों को कुचल दिया।

आफरीन के पिता अब्दुल सलीम शाह ने अपनी आखिरी बातचीत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बेटी से आखिरी बार तब बात की थी, जब उसने उन्हें फोन करके शिकायत की थी कि वह काम का पहला दिन पूरा करने के बाद घर लौटते समय कुर्ला रेलवे स्टेशन पर ऑटो नहीं ढूंढ पा रही है।

शाह ने बताया कि उसने उसे हाईवे से ऑटो लेने को कहा, जो दुर्घटना वाली जगह से अलग रास्ते पर पड़ता है। कथित तौर पर यह लड़की और उसके पिता के बीच आखिरी बातचीत थी।

आफ़रीन ने अपने पिता की सलाह नहीं मानी और दूसरा रास्ता नहीं अपनाया। उसके पिता का मानना ​​है कि अगर उसने दूसरा रास्ता चुना होता तो शायद वह अभी भी ज़िंदा होती।

सलीम शाह ने एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि उन्हें कुर्ला भाभा अस्पताल से फोन आया जिसमें दावा किया गया कि उन्हें उनकी बेटी का मोबाइल फोन मिल गया है और उन्हें तुरंत अस्पताल आने को कहा गया है।

जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अपनी बेटी का शव मिला। तीन बच्चों में उनकी इकलौती बेटी आफरीन इस दुखद घटना में कुचलकर मर गई थी। शाह ने दुख जताते हुए बताया कि वे अगले पांच-छह महीनों में उसकी शादी की योजना बना रहे थे।

शाह ने इस दुर्घटना के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), सड़कों के किनारे अवैध रूप से सामान बेचने वालों, यातायात पुलिस, पार्षद, विधायक और सांसद को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि इतने सालों में स्थिति नहीं बदली है, लोगों को इन अवैध फेरीवालों द्वारा अतिक्रमण की गई भीड़भाड़ वाली सड़कों पर चलने में भी परेशानी हो रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि ये फेरीवाले अधिकारियों को रिश्वत देकर इलाके में अपना धंधा चलाते हैं। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।

इस दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई और 42 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने उसे 21 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। बेस्ट ने बस दुर्घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की है।

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