राजनीति
तमिलनाडु में टीके की किल्लत, केंद्र सरकार का मांगा समर्थन
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री मा सुब्रमण्यम ने रविवार को एक बयान में कहा कि राज्य में टीकों की कमी हो रही है और इस संकट से उबरने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से मदद मांगी है। मंत्री ने कहा कि राज्य में टीकों की 6 लाख खुराकें हैं और यह एक-दो दिन में समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य ने 85 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और टीके की 13.85 लाख खुराकें मंगाई हैं । 12 लाख खुराक अभी आनी बाकी हैं।
मा सुब्रमण्यम ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हमें अब तक टीकों की 95.59 लाख खुराक मिल चुकी हैं और पहले ही 84.5 लाख लोगों को टीका लगाया जा चुका है और मौजूदा स्टॉक के साथ हम दो से तीन दिनों तक इस अभियान को जारी रख सकेंगे। लोगों के लिए 45 वर्ष से अधिक आयु के हमारे पास टीके की 6 लाख खुराकें हैं जबकि 18-44 के बीच हमारे पास केवल 2 लाख खुराक हैं।”
मंत्री ने यह भी कहा कि तमिलनाडु सरकार ने वैक्सीन की 3.5 करोड़ खुराक के लिए एक वैश्विक निविदा जारी की है और निविदा प्रक्रिया 5 जून तक पूरी हो जाएगी। टीके की खरीद छह महीने में की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने चेंगलपेट इंटीग्रेटेड वैक्सीन कॉम्प्लेक्स में वैक्सीन उत्पादन शुरू करने के लिए कदम उठाने के लिए केंद्र से चर्चा करने और आग्रह करने के लिए एक मंत्री को नई दिल्ली भेजा है।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, 2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त

दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बैंक खाताधारकों के रूप में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी ‘रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) निर्देशों के जरिए बैंक अधिकारियों को 22.56 लाख रुपए का चूना लगाया था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 2.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें सोने के आभूषण, 101 सोने के सिक्के, नकद और एक एसयूवी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से एक ‘घोषित अपराधी’ है, जो नकली नोटों से जुड़े एक मामले में सात साल से अधिक समय से फरार चल रहा था।
यह मामला राजेंद्र प्लेस में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच से जुड़ा है। ब्रांच मैनेजर ने एक शिकायत दर्ज कराई थी और बताया कि 5 अगस्त को एक व्यक्ति ने खुद को दीपक मल्होत्रा बताकर बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। दीपक मल्होत्रा कई ऐसी कंपनियों के निदेशक हैं, जिनका इस शाखा में खाता है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पहले अधिकारियों का भरोसा जीतने के लिए 1 करोड़ रुपए की ‘फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट’ (एपडीआर) बनाने की बात की। बाद में उसने फिर संपर्क किया और दावा किया कि कंपनी को एक भुगतान करना है, लेकिन उनकी चेकबुक खत्म हो गई है। उसने अनुरोध किया कि इस लेनदेन को ईमेल के जरिए पूरा किया जाए।
आरोपी ने कंपनी के रजिस्टर्ड ईमेल पते से मिलता-जुलता एक ईमेल आईडी इस्तेमाल करके फर्जी भुगतान अनुरोध भेजा। ईमेल में कंपनी का जाली लेटरहेड लगा था और बैंक को 22,56,922 रुपए किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी ‘इंडिमनिटी’ (क्षतिपूर्ति) दस्तावेजों की मांग की, तो फोन करने वाले ने यह कहकर दबाव डाला कि पहले भी ऐसे लेनदेन किए जा चुके हैं और भुगतान बहुत जरूरी है। इसके बाद बैंक ने वह फर्जी आरटीजीएस ट्रांसफर कर दिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की। पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम पश्चिम बंगाल के बंधन बैंक में खुले एक ‘म्यूल’ खाते में गई थी। टेलीकॉम रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बातचीत के विवरण के तकनीकी विश्लेषण से जांचकर्ताओं को संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनकी पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी) निवासी 36 वर्षीय विनय कुमार यादव और नोएडा निवासी 65 वर्षीय अनिल कुमार सहगल के रूप में हुई है।जांच से पता चला है कि आरोपी कॉर्पोरेट बैंक ट्रांजेक्शन को निशाना बनाने के लिए फर्जी कंपनी लेटरहेड, धोखेपूर्ण ईमेल आईडी, सोशल इंजीनियरिंग और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद, इस पैसे को अन्य संपत्तियों में निवेश कर दिया जाता था, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक जौहरी से खरीदा गया सोना भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी गाजियाबाद, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद सहित कई जगहों पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी शामिल रहे हैं। बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान इनकी जान-पहचान हुई थी। इससे पहले ये लोग ‘मैजिक पेन’ का इस्तेमाल करके चेक से जुड़ी धोखाधड़ी में भी शामिल रह चुके हैं।
इन गिरफ्तारियों से पुलिस को गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में दर्ज छह अन्य मामलों को सुलझाने में भी मदद मिली है। इन मामलों में 16.65 लाख रुपए से लेकर 2.98 करोड़ रुपए तक की धोखाधड़ी हुई थी। साथ ही, 88 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने की एक कोशिश भी शामिल है।
महाराष्ट्र
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: पत्नी शहजीन सिद्दीकी का आरोप, ‘सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही मुंबई पुलिस’

एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में पत्नी शहजीन सिद्दीकी ने आरोप लगाए हैं कि मुंबई पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस अपनी मनमानी को छिपाने के लिए प्रशासनिक अड़चनों का सहारा ले रही है।
शहजीन सिद्दीकी के वकील त्रिवनकुमार करनानी ने अपने बयान में कहा, “मुंबई पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है। राज्य सरकार ने पहले भी कई बार केंद्र को पत्र लिखा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जानबूझकर की जा रही प्रशासनिक देरी के कारण हत्या के मामले की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह तब और भी गंभीर हो जाता है, जब मुंबई पुलिस को पता है कि जेल में पूछताछ करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कस्टडी सुनिश्चित करने के लिए अदालती आदेश लिए जा सकते हैं। इसके बावजूद, मुंबई पुलिस अपनी मनमानी को छिपाने के लिए प्रशासनिक अड़चनों का सहारा ले रही है।”
बता दें कि बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-अजीत पवार गुट) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री थे।
बाबा सिद्दीकी को उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारी थी। इस हत्याकांड में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का कनेक्शन आया था। मुंबई पुलिस ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को वांछित आरोपी के रूप में चिन्हित किया था।
फिलहाल, यह आरोप उस समय लगाए गए हैं, जब मुंबई पुलिस पर बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले के बाद सवाल उठ रहे हैं। 18 सितंबर की शाम को टाइगर पर मुंबई के जुहू इलाके में हमला हुआ था, जिसमें वे बाल-बाल बचे। हालांकि, गोलीबारी में टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। इस हमले में भी लॉरेंस बिश्नोई का कनेक्शन सामने आया।
राजनीति
मुख्यमंत्री विजय कैबिनेट बैठक की करेंगे अध्यक्षता, एजेंडे में उद्योग प्रस्ताव और विकास योजनाएं शामिल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय गुरुवार को चेन्नई के सचिवालय में एक कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी, नए औद्योगिक उपक्रमों के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा और प्रशासनिक निर्णयों पर चर्चा की जाएगी।
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह तीसरी बैठक है। इस बैठक में प्रशासन द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदमों पर विचार किया जाएगा।
बैठक में जिन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, उनमें नई औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देना और सरकारी विभागों के कामकाज की समीक्षा करना शामिल है। इसके अलावा, चल रहे कार्यक्रमों की स्थिति और ऐसे प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, जिनके लिए कैबिनेट स्तर पर फैसले लेने की जरूरत है।
सरकार की दीर्घकालिक विकास पहल, ‘वेत्री तमिलनाडु’ पर भी विशेष रूप से चर्चा होने की संभावना है। प्रशासन ने इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बताया है और इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
बैठक से पहले मिल रहे संकेतों के अनुसार, मंत्री इस पहल के तहत किए गए कार्यों, परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति और उन्हें पूरा करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा के जरिए यह समीक्षा करने का मौका मिलेगा कि संबंधित विभागों में यह कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट इस प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकती है, जिसमें पट्टिनपक्कम में सरकार का प्रशासनिक मुख्यालय बनाने की बात है। मछुआरा समुदायों ने इस प्रस्तावित जगह का विरोध किया है, जिससे गुरुवार को होने वाली चर्चा से पहले यह मुद्दा अहम हो गया है। हालांकि, बैठक से पहले मिली जानकारी में इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि मुख्यालय के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर एजेंडे में शामिल किया जाएगा या इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विजय प्रशासन सत्ता में आने के बाद घोषित की गई विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। बैठक में प्रमुख विकास प्रस्तावों के साथ-साथ विभागों के कामकाज की समीक्षा भी मुख्य रूप से शामिल रहने की उम्मीद है।
‘वेत्री तमिलनाडु’ कार्यक्रम को लेकर बैठक में इस बात की समीक्षा होने की उम्मीद है कि कार्यक्रम के तय लक्ष्यों और अलग-अलग परियोजनाओं की प्रगति के बीच क्या संबंध है। औद्योगिक निवेश, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन या प्रस्तावित प्रशासनिक मुख्यालय को लेकर कोई भी फैसला बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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