राजनीति
मुख्यमंत्री विजय कैबिनेट बैठक की करेंगे अध्यक्षता, एजेंडे में उद्योग प्रस्ताव और विकास योजनाएं शामिल
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय गुरुवार को चेन्नई के सचिवालय में एक कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी, नए औद्योगिक उपक्रमों के प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा और प्रशासनिक निर्णयों पर चर्चा की जाएगी।
विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह तीसरी बैठक है। इस बैठक में प्रशासन द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन किया जाएगा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदमों पर विचार किया जाएगा।
बैठक में जिन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, उनमें नई औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी देना और सरकारी विभागों के कामकाज की समीक्षा करना शामिल है। इसके अलावा, चल रहे कार्यक्रमों की स्थिति और ऐसे प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, जिनके लिए कैबिनेट स्तर पर फैसले लेने की जरूरत है।
सरकार की दीर्घकालिक विकास पहल, ‘वेत्री तमिलनाडु’ पर भी विशेष रूप से चर्चा होने की संभावना है। प्रशासन ने इसे अपने विकास एजेंडे का हिस्सा बताया है और इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
बैठक से पहले मिल रहे संकेतों के अनुसार, मंत्री इस पहल के तहत किए गए कार्यों, परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति और उन्हें पूरा करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों पर चर्चा करेंगे। इस चर्चा के जरिए यह समीक्षा करने का मौका मिलेगा कि संबंधित विभागों में यह कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट इस प्रस्ताव पर भी चर्चा कर सकती है, जिसमें पट्टिनपक्कम में सरकार का प्रशासनिक मुख्यालय बनाने की बात है। मछुआरा समुदायों ने इस प्रस्तावित जगह का विरोध किया है, जिससे गुरुवार को होने वाली चर्चा से पहले यह मुद्दा अहम हो गया है। हालांकि, बैठक से पहले मिली जानकारी में इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि मुख्यालय के प्रस्ताव को आधिकारिक तौर पर एजेंडे में शामिल किया जाएगा या इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विजय प्रशासन सत्ता में आने के बाद घोषित की गई विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है। बैठक में प्रमुख विकास प्रस्तावों के साथ-साथ विभागों के कामकाज की समीक्षा भी मुख्य रूप से शामिल रहने की उम्मीद है।
‘वेत्री तमिलनाडु’ कार्यक्रम को लेकर बैठक में इस बात की समीक्षा होने की उम्मीद है कि कार्यक्रम के तय लक्ष्यों और अलग-अलग परियोजनाओं की प्रगति के बीच क्या संबंध है। औद्योगिक निवेश, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन या प्रस्तावित प्रशासनिक मुख्यालय को लेकर कोई भी फैसला बैठक के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
राजनीति
वाराणसी स्नातक सीट पर सपा की जीत तय, भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने मानी हार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी ताकत का सेमीफाइनल माने जा रहे विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वाराणसी स्नातक सीट पर बड़ा झटका लगता दिख रहा है।
मतगणना के तीसरे दिन गुरुवार को भी इस सीट पर नतीजा घोषित नहीं हो सका लेकिन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा की लगातार मजबूत होती बढ़त के बीच भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जनादेश स्वीकार करते हुए अपनी हार मान ली है। नौवें चक्र की मतगणना तक आशुतोष सिन्हा काफी आगे चल रहे थे। ऐसे में उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में वाराणसी खंड के स्नातक मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है।
उन्होंने लिखा कि वह जनादेश को पूर्ण विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में सफलता और असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन जनसेवा का संकल्प किसी परिणाम का मोहताज नहीं होता। उनके इस संदेश के बाद वाराणसी स्नातक सीट पर भाजपा की हार और सपा की संभावित जीत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम और जीत का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी होने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हुई थी। बुधवार शाम तक 11 में से 10 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे लेकिन वाराणसी स्नातक सीट पर गिनती पूरी नहीं हो सकी।
वाराणसी में मतगणना के दौरान बुधवार शाम से शुरू हुआ विवाद देर रात तक जारी रहा। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह धरने पर बैठ गए और उन्होंने मतगणना पर्यवेक्षक प्रांजल यादव पर धांधली कराने के आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की। हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रत्याशी की ओर से लगाए गए थे। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र पर डटे रहने की अपील की। इसके बाद सपा के 500 से अधिक कार्यकर्ता रातभर मतगणना स्थल पर मौजूद रहे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यकर्ताओं से भोजन, पानी, छतरी और तौलिये की व्यवस्था करने तथा मतगणना केंद्र से नहीं हटने की अपील की। उन्होंने लिखा, ”सब डटे रहें और जीत का प्रमाणपत्र लेकर ही उठें।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने साथियों की मदद करने और हौसला बनाए रखने का भी आह्वान किया।
अखिलेश ने मतगणना की निगरानी को लेकर कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का संदेश देते हुए लिखा, ”नजर हटी, दुर्घटना घटी!” समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके मतदाताओं का समर्थन हासिल किया है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए दावा किया कि यदि यही रुझान आगे भी बना रहा तो 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी। सुजीत यादव ने भाजपा प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद बहाने तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा किसी के स्तर पर उतरकर जवाब नहीं देना चाहती क्योंकि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में सरकार बनाना है।
गौरतलब है कि वाराणसी खंड की दोनों विधान परिषद सीटों पर पहले भी समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के छह उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है जबकि घोषित परिणामों में समाजवादी पार्टी को चार सीटें मिली हैं। उन्होंने कहा कि सपा को इन नतीजों से बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि कई सीटों पर उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और मेहनत की अहम भूमिका रही है।
वहीं, कांग्रेस नेता अजय राय ने चुनाव परिणामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में यह चुनाव लड़ा ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक प्रभाव में गिरावट आने वाली है। उधर, कौशांबी से समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित एमएलसी मान सिंह यादव ने अपनी जीत का श्रेय मतदाताओं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों को दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई स्तरों पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें हुईं और कुछ स्थानों पर सपा समर्थकों को परेशान किया गया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कुछ स्थानों पर प्रशासन का दुरुपयोग कर परिणाम प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, भाजपा प्रत्याशी के सोशल मीडिया संदेश और सपा उम्मीदवार की बड़ी बढ़त ने इस चुनाव को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया है।
अपराध
दिल्ली पुलिस ने फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, 2.5 करोड़ की संपत्ति जब्त

दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए बैंक खाताधारकों के रूप में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी ‘रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट’ (आरटीजीएस) निर्देशों के जरिए बैंक अधिकारियों को 22.56 लाख रुपए का चूना लगाया था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 2.50 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की गई है, जिसमें सोने के आभूषण, 101 सोने के सिक्के, नकद और एक एसयूवी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में से एक ‘घोषित अपराधी’ है, जो नकली नोटों से जुड़े एक मामले में सात साल से अधिक समय से फरार चल रहा था।
यह मामला राजेंद्र प्लेस में स्थित बैंक ऑफ इंडिया की ब्रांच से जुड़ा है। ब्रांच मैनेजर ने एक शिकायत दर्ज कराई थी और बताया कि 5 अगस्त को एक व्यक्ति ने खुद को दीपक मल्होत्रा बताकर बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। दीपक मल्होत्रा कई ऐसी कंपनियों के निदेशक हैं, जिनका इस शाखा में खाता है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पहले अधिकारियों का भरोसा जीतने के लिए 1 करोड़ रुपए की ‘फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट’ (एपडीआर) बनाने की बात की। बाद में उसने फिर संपर्क किया और दावा किया कि कंपनी को एक भुगतान करना है, लेकिन उनकी चेकबुक खत्म हो गई है। उसने अनुरोध किया कि इस लेनदेन को ईमेल के जरिए पूरा किया जाए।
आरोपी ने कंपनी के रजिस्टर्ड ईमेल पते से मिलता-जुलता एक ईमेल आईडी इस्तेमाल करके फर्जी भुगतान अनुरोध भेजा। ईमेल में कंपनी का जाली लेटरहेड लगा था और बैंक को 22,56,922 रुपए किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया था।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी ‘इंडिमनिटी’ (क्षतिपूर्ति) दस्तावेजों की मांग की, तो फोन करने वाले ने यह कहकर दबाव डाला कि पहले भी ऐसे लेनदेन किए जा चुके हैं और भुगतान बहुत जरूरी है। इसके बाद बैंक ने वह फर्जी आरटीजीएस ट्रांसफर कर दिया।
शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की। पुलिस को पता चला कि ठगी गई रकम पश्चिम बंगाल के बंधन बैंक में खुले एक ‘म्यूल’ खाते में गई थी। टेलीकॉम रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और बातचीत के विवरण के तकनीकी विश्लेषण से जांचकर्ताओं को संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनकी पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (लोनी) निवासी 36 वर्षीय विनय कुमार यादव और नोएडा निवासी 65 वर्षीय अनिल कुमार सहगल के रूप में हुई है।जांच से पता चला है कि आरोपी कॉर्पोरेट बैंक ट्रांजेक्शन को निशाना बनाने के लिए फर्जी कंपनी लेटरहेड, धोखेपूर्ण ईमेल आईडी, सोशल इंजीनियरिंग और ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद, इस पैसे को अन्य संपत्तियों में निवेश कर दिया जाता था, जिसमें पश्चिम बंगाल के एक जौहरी से खरीदा गया सोना भी शामिल है।
पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी गाजियाबाद, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद सहित कई जगहों पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पहले भी शामिल रहे हैं। बताया जाता है कि जेल में रहने के दौरान इनकी जान-पहचान हुई थी। इससे पहले ये लोग ‘मैजिक पेन’ का इस्तेमाल करके चेक से जुड़ी धोखाधड़ी में भी शामिल रह चुके हैं।
इन गिरफ्तारियों से पुलिस को गुरुग्राम, पलवल और दिल्ली में दर्ज छह अन्य मामलों को सुलझाने में भी मदद मिली है। इन मामलों में 16.65 लाख रुपए से लेकर 2.98 करोड़ रुपए तक की धोखाधड़ी हुई थी। साथ ही, 88 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने की एक कोशिश भी शामिल है।
महाराष्ट्र
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: पत्नी शहजीन सिद्दीकी का आरोप, ‘सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही मुंबई पुलिस’

एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में पत्नी शहजीन सिद्दीकी ने आरोप लगाए हैं कि मुंबई पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस अपनी मनमानी को छिपाने के लिए प्रशासनिक अड़चनों का सहारा ले रही है।
शहजीन सिद्दीकी के वकील त्रिवनकुमार करनानी ने अपने बयान में कहा, “मुंबई पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है। राज्य सरकार ने पहले भी कई बार केंद्र को पत्र लिखा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जानबूझकर की जा रही प्रशासनिक देरी के कारण हत्या के मामले की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह तब और भी गंभीर हो जाता है, जब मुंबई पुलिस को पता है कि जेल में पूछताछ करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कस्टडी सुनिश्चित करने के लिए अदालती आदेश लिए जा सकते हैं। इसके बावजूद, मुंबई पुलिस अपनी मनमानी को छिपाने के लिए प्रशासनिक अड़चनों का सहारा ले रही है।”
बता दें कि बाबा सिद्दीकी की 12 अक्टूबर 2024 को मुंबई के बांद्रा ईस्ट इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-अजीत पवार गुट) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री थे।
बाबा सिद्दीकी को उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारी थी। इस हत्याकांड में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का कनेक्शन आया था। मुंबई पुलिस ने अपनी चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को वांछित आरोपी के रूप में चिन्हित किया था।
फिलहाल, यह आरोप उस समय लगाए गए हैं, जब मुंबई पुलिस पर बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुए हमले के बाद सवाल उठ रहे हैं। 18 सितंबर की शाम को टाइगर पर मुंबई के जुहू इलाके में हमला हुआ था, जिसमें वे बाल-बाल बचे। हालांकि, गोलीबारी में टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। इस हमले में भी लॉरेंस बिश्नोई का कनेक्शन सामने आया।
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