अनन्य
हिंदू मंदिर मामले पर मौलवियों ने इमरान को किया क्लीन बोल्ड
पाकिस्तान की इमरान सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के फतवे के आगे घुटने टेकते हुए इस्लामाबाद में बनने वाले मंदिर के निर्माण पर रोक लगा दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल साउथ एशिया ने मंगलवार को एक ट्वीट करते हुए इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए बनने जा रहे पहले मंदिर का निर्माण रोकने के फैसले पर पाकिस्तान को पटकार लगाई।
एमनेस्टी ने कहा, “सभी को धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता का अधिकार है। पाकिस्तान के संविधान में इसकी इजाजत दी गई है और यह उसकी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है। इस्लामाबद में एक हिंदू मंदिर निर्माण रोका जाना गलत कदम और कट्टरता है।” इसके साथ ही एमनेस्टी ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि उसे फौरन अपना फैसला बदलना चाहिए।
पाकिस्तान में धर्मनिरपेक्षता पर चोट करने वाली यह पहली घटना नहीं है। यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर लंबे समय से अत्याचार होता आ रहा है। यही वजह है कि एमनेस्टी ने पाकिस्तान की इस समस्या को उजागर करते हुए देश और उसकी सरकार को अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए पर्याप्त कदम उठाने का दबाव बनाया है।
एक पखवाड़े पहले ही पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद के हिंदुओं के लिए मंदिर निर्माण की घोषणा की थी। श्रीकृष्ण मंदिर के लिए एक भूखंड आवंटित किया गया था और यहां एक चारदीवारी का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया था। प्रधानमंत्री इमरान खान खुद मंदिर के निर्माण को मंजूरी देने और इसके लिए धन जारी करने की प्रक्रिया में शामिल थे।
मगर अब यहां दीवार को ध्वस्त कर दिया गया है। हिंदू संगठनों को मंदिर निर्माण के खिलाफ धमकियां मिली और सरकार को काम बंद करने पर मजबूर होना पड़ा।
हालांकि कारण कई तरह के हैं : इस्लामाबाद में एक मंदिर इस्लाम के मानदंडों और शिक्षाओं के खिलाफ जाता; एक मंदिर शरिया के खिलाफ है; मंदिर मास्टर प्लान का उल्लंघन करता है; साथ ही अंत में पाकिस्तान जैसा इस्लामी देश चचरें और मंदिरों की अनुमति नहीं देता है।
इस्लामाबाद में बनने जा रहे पहले मंदिर का विरोध अविश्वसनीय है। यह विरोध सिर्फ मौलवियों का नहीं है; यहां तक कि वकील भी मंदिर के खिलाफ उनकी नफरत में एकजुट हैं।
एक वकील तनवीर अख्तर ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें कहा गया, “मंदिर के निर्माण के लिए आवंटित भूमि वापस ले ली जाए, साथ ही परियोजना के लिए आवंटित धनराशि भी।” एक अन्य संगठन ने कहा है कि इस्लामाबाद में एक मंदिर का निर्माण राजधानी के मास्टर प्लान का उल्लंघन करेगा।
इस्लामिक धर्मगुरुओं के संगठन जामिया अशरफिया ने मंदिर के खिलाफ फतवा जारी किया है और कहा है कि मंदिर का निर्माण शरिया के खिलाफ है।
अन्य संगठनों ने भी कहा है कि मंदिर बनाना पाकिस्तान की विचारधारा के खिलाफ है। मौलवियों का कहना है कि मुस्लिम देश में कोई भी मंदिर या चर्च नहीं बनाया जा सकता है।
इमरान खान सरकार ने धार्मिक मामलों पर सरकार को सलाह देने वाले संगठन इस्लामिक विचारधारा की परिषद (सीआईआई) के सामने मामला रखा है। सरकार अगले कदम पर अन्य धार्मिक संगठनों से भी परामर्श करेगी।
भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर इस्लामाबद में रहने वाले मुट्ठीभर हिंदुओं के लिए बनाया जाना है। हिंदुओं के लिए यह इस्लामाबाद का पहला मंदिर होगा। यह शहर के हिंदुओं के लिए दिवाली और होली जैसे त्योहारों को मनाने और पूजा-पाठ करने के लिए पहला स्थान होगा। मंदिर के साथ ही हिंदुओं को श्मशान घाट की सुविधा देने की भी मंजूरी दी गई है, जिससे उन्हें किसी हिंदू की मौत हो जाने पर शहर से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। क्योंकि अभी तक इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए एक अदद मंदिर तक नहीं है। हालांकि अब पाकिस्तान में हावी कट्टरता और इस्लामिक विचारधारा मंदिर निर्माण के बीच में रोड़ा बन गई है।
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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मुंबई : मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ का वीडियो वायरल होने के बाद 3 हॉकरों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज

मुंबई : रेलवे पुलिस ने बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन पर नमाज़ पढ़ते हुए तीन फेरीवालों का एक वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों हॉकरों की पहचान मुश्ताक बाबू लोन, सोहेब सदाकत साहा और बिस्मिल्लाह दीन अंसारी के रूप में हुई है। आरपीएफ ने अनाधिकार प्रवेश के लिए रेलवे अधिनियम की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया, जबकि जीआरपी ने स्टेशन मास्टर की शिकायत के बाद बीएनएस की धारा 168 के तहत एक और मामला दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद, भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि इस घटना के संबंध में एफ आई आर दर्ज की जाएगी। समाचार एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई के मलाड रेलवे स्टेशन पर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म के ऊपर, खुलेआम एक छोटे मंडप जैसी संरचना बना दी गई है, और वहाँ नमाज़ पढ़ी जाने लगी है… इस पूरे मामले को लेकर एक एफ आई आर दर्ज की जाएगी।”
वायरल वीडियो में कुछ लोग मलाड रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के ठीक बगल में बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज़ पढ़ते हुए दिखाई दिए। रिपोर्ट के अनुसार, मलाड वेस्ट रेलवे स्टेशन पर विस्तार का काम चल रहा है और रेलवे ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास एक बड़ी खुली जगह बनाई है। इस बीच, पिछले ही हफ़्ते बॉम्बे हाई कोर्ट ने टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान शहर के हवाई अड्डे के भीतर एक अस्थायी शेड में नमाज़ अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि सुरक्षा धर्म से ऊपर है।
अदालत ने कहा कि रमज़ान मुस्लिम धर्म का एक अहम हिस्सा है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि लोग किसी भी जगह पर नमाज़ पढ़ने के धार्मिक अधिकार का दावा नहीं कर सकते, खासकर हवाई अड्डे के आस-पास, जहाँ सुरक्षा को लेकर काफ़ी चिंताएँ होती हैं। अदालत टैक्सी-रिक्शा ओला-ऊबर मेंस यूनियन की तरफ़ से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि जिस अस्थायी शेड में वे नमाज़ पढ़ते थे, उसे पिछले साल गिरा दिया गया था। याचिका में अदालत से यह गुज़ारिश की गई थी कि वह अधिकारियों को निर्देश दे कि वे उन्हें उसी इलाके में नमाज़ पढ़ने के लिए कोई जगह आवंटित करें।
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असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, विवादित वीडियो को लेकर दी शिकायत

हैदराबाद, 9 फरवरी : एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर को औपचारिक शिकायत दी। यह शिकायत एक कथित विवादित और अब डिलीट किए जा चुके वीडियो को लेकर की गई है, जिसमें सीएम सरमा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है।
पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य मंचों के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बयान देते रहे हैं, जिनमें से कई अब भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
पुलिस कमिश्नर के नाम पत्र में ओवैसी ने कहा, “मैं आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहता हूं कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कई सालों से सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, सार्वजनिक भाषणों और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। ऐसे कई भाषण अभी भी पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं। हाल के महीनों में मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपने नफरत भरे भाषणों को और तेज कर दिया है, जिसका साफ और सचेत इरादा मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी और नफरत को बढ़ावा देना है, यह जानते हुए भी कि ऐसे आरोप राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हैं और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने वाले हैं।”
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन अब्दुल्ला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले में साफ तौर पर कहा है कि मौलिक अधिकारों की रक्षा करना, संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक चरित्र, विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा करना राज्य और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का संवैधानिक कर्तव्य है। कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि पुलिस को औपचारिक शिकायत के अभाव में भी नफरत भरे भाषणों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए और कोई भी निष्क्रियता या हिचकिचाहट कर्तव्य की गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
उन्होंने कहा, “मैं यह बताना चाहता हूं कि असम भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट द्वारा 7 फरवरी को पोस्ट किया गया एक हालिया वीडियो, जिसे एक दिन बाद हटा दिया गया था लेकिन अभी भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, उसमें हिमंत बिस्वा सरमा को हथियार से लैस दिखाया गया है और वे उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें साफ तौर पर मुसलमान दिखाया गया है और उन्हें गोली मार रहे हैं। उक्त पोस्ट और वीडियो, उसमें इस्तेमाल की गई तस्वीरों और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ और ‘कोई दया नहीं’ जैसे बयानों के साथ, मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, धार्मिक समुदायों के बीच नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के इरादे से किया गया एक जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया था और पूरे भारत में उपलब्ध था, जिसमें इस पुलिस स्टेशन का अधिकार क्षेत्र भी शामिल है। मैंने इसे इस पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में देखा है। उपरोक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कानून के अनुसार श्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ तत्काल और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
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