राष्ट्रीय समाचार
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी में हुई मजबूत वृद्धि : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 24 जनवरी। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। इसकी वजह नए निर्यात ऑर्डर में इजाफा होना है। यह जानकारी एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई रिपोर्ट में शुक्रवार को दी गई।
100 एक्टिविटीज इंडिकेटर्स के एनालिसिस के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया कि दिसंबर के अंत में समाप्त होने वाली तिमाही में 65 प्रतिशत इंडिकेटर्स सकारात्मक थे। वहीं, इससे पहले की तिमाही में 55 प्रतिशत इंडिकेटर्स सकारात्मक थे। यह दिखाता है कि वृद्धि दर में तेजी आई है।
एचएसबीसी ने बयान में आगे कहा कि जनवरी में सर्विस पीएमआई पिछले महीने के मुकाबले कमजोर रही है।
रिपोर्ट में बताया गया, “मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में अंतर टैरिफ लगने के डर के कारण है। हमने पाया कि मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नए निर्यात ऑर्डर में तेजी से वृद्धि हुई है। यह घरेलू या सर्विस ऑर्डर में वृद्धि से भी अधिक तेजी से बढ़े हैं।”
हमें लगता है कि इसका श्रेय नए संभावित टैरिफ लागू होने से पहले दुनिया भर में तेजी से स्टॉक भरने को दिया जा सकता है। इन नए निर्यात ऑर्डर को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का आउटपुट भी तेजी से बढ़ा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि लागत में भी दोनों सेक्टरों में विपरीत रुझान देखने को मिला है। मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट प्राइस 10 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए इनपुट लागत बढ़ी है। हालांकि, बिक्री कीमत में बदलाव न होने के कारण सर्विस प्रोवाइडर्स का मार्जिन घटा है, जबकि मैन्युफैक्चरर्स का मार्जिन बढ़ा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि महंगाई में गिरावट का दौर जारी है। जनवरी में यह 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
एचएसबीसी को उम्मीद है कि फरवरी और अप्रैल में क्रमश: 25-25 आधार अंक रेपो रेट कम हो सकता है। इससे रेपो रेट घटकर 6 प्रतिशत हो जाएगा, जो फिलहाल 6.5 प्रतिशत है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बोस्टन की सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों का कदमताल, बिखेरा तिरंगे का रंग

अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में भारतीय नौसेना के जवानों ने कदमताल किया है। यहां शहर की मुख्य सड़कों पर भारतीय नौसैनिकों ने परेड की। दरअसल अमेरिका में यह परेड नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी द्वारा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का एक भव्य प्रदर्शन था।
बोस्टन पहुंचा यह पोत दुनिया भर के 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा विशाल नौकायन पोतों के साथ प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह में भाग ले रहा है। बोस्टन की ऐतिहासिक सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्ण यह मार्च किया। भारतीय दल की अनुशासित और आकर्षक प्रस्तुति ने स्थानीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का ध्यान खींचा। परेड के दौरान भारत की समुद्री परंपराओं, नौवहन इतिहास और सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिली।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहभागिता ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही यह भी दर्शाया कि समुद्र केवल व्यापार और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि देशों और समाजों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है। इससे पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित भव्य ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में हिस्सा लेकर हजारों दर्शकों के बीच भारतीय तिरंगे की शान बढ़ाई थी। न्यूयॉर्क में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज कराने के बाद यह पोत बोस्टन पहुंचा। यहां दुनिया के विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोत एक साथ समुद्री विरासत का उत्सव मना रहे हैं।
‘लोकायन 2026’ अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के विभिन्न बंदरगाहों की यात्रा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाना है। नॉरफॉक से बोस्टन तक की यात्रा के दौरान पोत ने भारतीय संस्कृति, मित्रता और सद्भावना का संदेश भी प्रसारित किया। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक नौकायन पोत जहां भी पहुंच रहा है, वहां भारत की समुद्री शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक साझेदारी की नई कहानी लिख रहा है।
बोस्टन में उसकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि भारत की समुद्री विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी दुनिया को जोड़ने वाली एक जीवंत शक्ति है। गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का पाल वाला पोत है। प्राचीन जहाज निर्माण पद्धति पर आधारित इस पोत का उपयोग प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना यात्राओं के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में यह पोत लोकायन 2026 वैश्विक समुद्री अभियान पर है। इसके तहत विभिन्न यह अलग-अलग देशों के बंदरगाहों का दौरा कर भारत की समुद्री विरासत, संस्कृति और नौसैनिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 561 अंक फिसला, निफ्टी 0.6 प्रतिशत लुढ़का

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.72 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर था। इस तरह घरेलू बाजार में लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया।
इस दौरान करीब 1,422 शेयरों में बढ़त, 2,632 शेयरों में गिरावट और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला क्षेत्र बनकर उभरा, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक (-1.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-1.6 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-1.1 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (-1 प्रतिशत) भी गिरावट के साथ बंद हुए।
इसके बाद, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.8 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.3 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, इसके बाद निफ्टी मेटल का स्थान रहा, जिसमें 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल 39 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।
इस बीच, भारतीय रुपया 57 पैसे गिरकर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले सत्र में रुपया 95.68 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई और यह 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़े आर्थिक संकट पैदा कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया है, ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार पर एक नई नाकाबंदी की घोषणा की है। इससे आगामी कारोबारी सत्रों में भी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रोजगार में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की होगी जरूरत: रिपोर्ट

भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
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