अंतरराष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति भवन और अन्य कब्जा हुई इमारतों को वापस सौंपेंगे श्रीलंकाई प्रदर्शनकारी
श्रीलंका में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन और उन अन्य सार्वजनिक भवनों को वापस सौंपने का फैसला किया है, जिन पर उन्होंने पिछले कुछ दिनों से कब्जा जमा रखा है। वर्तमान सरकार की नीतियों से परेशान होकर प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवेश द्वार पर कब्जा कर लिया था। यही नहीं, वे राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति कार्यालय और प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास में भी घुस गए थे और वहां उनकी दैनिक गतिविधियां भी देखने को मिल रही थीं।
पुलिस के साथ गतिरोध के बावजूद बुधवार को उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय पर भी कब्जा जमा लिया था। इस दौरान पुलिस के साथ गतिरोध में 40 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
तनावपूर्ण स्थिति के बीच कोलंबो में गुरुवार दोपहर 12 बजे से (शुक्रवार) सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू लगा दिया गया है।
बुधवार तड़के संकटग्रस्त देश से भागे राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अभी तक अपने इस्तीफे की घोषणा नहीं की है। इससे संवैधानिक गतिरोध पैदा हो गया है, क्योंकि मौजूदा राष्ट्रपति के इस्तीफे के बिना नए राष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं की जा सकती है।
मीडिया रिपोटरें में कहा गया है कि वह मालदीव से सिंगापुर के लिए रवाना हो चुके हैं, जहां से उनके इस्तीफे की घोषणा करने की उम्मीद है।
इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह 13 जुलाई को पद छोड़ देंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
चीन में वायु गुणवत्ता के सुधार के लिए नए दौर की कार्रवाई योजना जोरों पर

चीनी उप पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री शु पीच्यो ने 13 अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि चीन में अब वायु गुणवत्ता के सुधार के लिए नए दौर की कार्रवाई योजना बनाने का काम जोरों पर है। उन्होंने कहा कि 18वीं सीपीसी कांग्रेस के बाद चीन ने वायु सुधार के लिए लगातार तीन कार्रवाई योजनाएं जारी कीं, जिससे वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार आया है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में चीन में पीएम 2.5 (पीएम 2.5) का राष्ट्रीय औसत घनत्व घटकर 28 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया, जो 2013 की तुलना में 59 प्रतिशत कम है। भारी प्रदूषित दिनों की संख्या का अनुपात 0.9 प्रतिशत तक घट गया, जो निगरानी शुरू होने के बाद सबसे अच्छा रिकॉर्ड है।
शु पीच्यो ने बताया कि वर्तमान में वायु प्रदूषण के निपटारे में अपर्याप्त, अस्थिर और असंतुलित सवाल उल्लेखनीय बना रहा है। वायु गुणवत्ता का सुधार स्पष्ट सुधार से सर्वांगीण सुधार की ओर संक्रमण के कुंजीभूत काल से गुजर रहा है। नई कार्रवाई योजना का मापदंड अधिक ऊंचा होगा। विभिन्न इलाकों के प्रति उसका कार्यांवयन अधिक लक्षित होगा और कदम अधिक वैज्ञानिक होंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कोलंबिया भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 273 हुई, 3,824 घायल और 377 लोग लापता

कोलंबिया में सोमवार को आए भूकंप से तबाही मची हुई है। नेशनल यूनिट फॉर डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट के डायरेक्टर डेविड तमायो ने बताया कि सोमवार को आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 273 हो गई है।
तामायो ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हमारे पास 40,753 प्रभावित परिवारों, 97,515 प्रभावित लोगों और 273 मौतों की रिपोर्ट है। उन 273 मौतों में से 250 शव चिकित्सा विभाग में आ चुके हैं, 227 की पहचान की जा चुकी है और 189 को उनके परिवारों को सौंप दिया गया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भूकंप में 3,824 लोग घायल हुए और 377 लोग लापता हो गए।
बुनियादी ढांचे के संदर्भ में, तामायो ने कहा कि 12,584 घर नष्ट हो गए और 74,873 क्षतिग्रस्त हो गए। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि भूकंप के कारण 172 इमारतें ढह गईं और 2,198 स्कूल और शैक्षणिक संस्थान, 825 सामुदायिक केंद्र, 216 स्वास्थ्य केंद्र और पांच हवाई अड्डे प्रभावित हुए।
कोलंबिया भूकंप से हुए नुकसान की निगरानी के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी और हाई-रिजॉल्यूशन इमेज का उपयोग किया जा रहा है। जमीन पर, खोज और बचाव दल मलबे के नीचे लापता लोगों का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वायड के साथ काम करते रहे।
कोलंबियाई भूवैज्ञानिक सेवा ने कहा कि चोको के उत्तर-पश्चिमी विभाग में सैन जोस डेल पालमार में गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 9:42 बजे 4.2 तीव्रता का एक नया झटका दर्ज किया गया, जो सोमवार के भूकंप का केंद्र था।
इस बीच, मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) और उसके सहयोगी कोलंबिया में विनाशकारी भूकंप के लिए सरकार के नेतृत्व वाली प्रतिक्रिया का समर्थन किया। ओसीएचए ने अपने दैनिक समाचार अपडेट में कहा कि घरों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
कार्यालय ने कहा, आपातकालीन आश्रय, भोजन सहायता, सुरक्षित पेयजल तक पहुंच और प्रभावित समुदायों के लिए स्वास्थ्य देखभाल सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से हैं। संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी भी संसाधन जुटा रहे हैं। ओसीएचए ने कहा कि विश्व खाद्य कार्यक्रम भोजन भेज रहा है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन देश में अपने गोदामों से चिकित्सा आपूर्ति भेज रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल: पांच महीने बाद स्वदेश लौटे पूर्व पीएम देउबा

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा गुरुवार को स्वदेश लौटे। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। पांच महीने पहले वे सिंगापुर में “मेडिकल चेक-अप” कराने गए थे।
थाईलैंड के रास्ते एयरपोर्ट पहुंचने पर पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों में शामिल तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का, कृष्ण प्रसाद सितौला, प्रकाश मान सिंह, बिमलेंद्र निधि और प्रकाश शरण महत समेत कई नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
समर्थकों ने देउबा के समर्थन में नारे लगाए। जनवरी में विवादित विशेष आम अधिवेशन के जरिए उन्हें पार्टी नेतृत्व पद से हटा दिया था।
देउबा 25 फरवरी को देश छोड़कर सिंगापुर चले गए थे। खबरों के अनुसार वो “मेडिकल चेक-अप” के लिए गए थे, और महीनों तक विदेश में रहे क्योंकि पिछले साल सितंबर में जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था। इस दौरान भारी मात्रा में कैश जलाया गया था। इसके बाद से ही उन पर मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच रही है।
नेपाली अधिकारियों ने चल रही जांच के तहत पहले ही उनके एसेट्स और बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद, मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अनुरोध पर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए थे।
नेपाली सरकार ने इंटरपोल के जरिए उनके नाम पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की नाकाम कोशिश की थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया था। इसके बाद ही शायद देउबा ने घर लौटने का फैसला किया।
उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनकी पार्टी में संभावित फूट पड़ सकती है, और उनका गुट शुक्रवार को काठमांडू में कैडर की एक राष्ट्रीय सभा करने की घोषणा कर चुका है।
पार्टी के पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक करने की कोशिशों में जुटे हैं। इस गुट को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट विशेष आम अधिवेशन को अमान्य कर देगा। उस अधिवेशन में गगन थापा को पार्टी की नई केंद्रीय समिति का अध्यक्ष चुना गया था।
हालांकि इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष आम अधिवेशन को मान्यता दे दी थी, जिससे इस पुरानी पार्टी को थापा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई थी।
इसके बाद 5 मार्च के चुनावों में पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, जिससे देउबा गुट ने थापा के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की थी।
इस गुट ने सुप्रीम कोर्ट के 17 अप्रैल के फैसले की समीक्षा की अपील की थी। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को मंजूरी दे दी, और केस को तीन जजों की बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। नई सुनवाई का नतीजा ही पार्टी का भविष्य तय करेगा।
हालांकि उनकी वापसी से उनके गुट में जोश आ सकता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार उनके और उनकी पत्नी, पूर्व विदेश मंत्री आरजू देउबा, जो उनके साथ विदेश गई थीं, के खिलाफ कैसा बर्ताव करेगी।
उनकी पत्नी और बेटा, जयबीर स्वदेश नहीं लौटे हैं। देउबा और उनकी पत्नी, जिन्हें पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बुरी तरह पीटा था, मेडिकल इलाज का हवाला देकर देश छोड़कर चले गए थे लेकिन उनके इतने लंबे समय तक विदेश में रहने का कारण साफ नहीं हुआ।
इस जोड़े ने विदेश में अपनी यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी है, न ही उन्होंने यह बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री किन बीमारियों का इलाज करा रहे थे।
इस दौरान, माना जाता है कि वे सिंगापुर से हांगकांग चले गए थे। देउबा परिवार के हांगकांग में घूमते हुए वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, हालांकि जोड़े ने कभी भी ये साफतौर पर नहीं माना कि वो हांगकांग में थे।
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