अंतरराष्ट्रीय
‘शीतकालीन तूफान’ का सामना कर रहा संयुक्त राज्य अमेरिका का दक्षिणी हिस्सा
ह्यूस्टन, 22 जनवरी। संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी भाग का बड़ा हिस्सा ‘शीतकालीन तूफान’ का सामना कर रहा है। इसमें टेक्सास, लुइसियाना और फ्लोरिडा शामिल हैं। इस तूफान में भारी बर्फबारी, ओले और बर्फीली हवाएं चल रही हैं। ऐसे में यहां यातायात के लिहाज से खतरनाक हालात बन गए हैं।
तूफान से 235 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं यूएस नेशनल वेदर सर्विस (एनडब्ल्यूएस) ने इसे “हाल में आने वाला सबसे भीषण तूफान” बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार एनडब्ल्यूएस ने दक्षिणी लुइसियाना और पूर्वी टेक्सास के कुछ हिस्सों के लिए बर्फ़ीले तूफ़ान की चेतावनी जारी की। यहां भारी बर्फबारी और तेज़ हवाओं के कारण व्हाइटआउट जैसी स्थिति बन गई।
एनडब्ल्यूएस ने यात्रा करने से बचने की सलाह दी गई है।
मंगलवार को पूरे क्षेत्र में स्कूल, सरकारी दफ्तर, कई दुकानें और रेस्तरां बंद रहे। कई सड़कें बर्फ से ढकी हुई थीं। मंगलवार सुबह ठंडी हवाओं की वजह से खाड़ी तट पर तापमान कम हुआ और उत्तरी टेक्सास में तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटअवेयर के मुताबिक, मंगलवार को टेक्सास और लुइसियाना से आने वाली 2,100 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं। तूफान के कारण मिसिसिपी, अलबामा और फ्लोरिडा के कई हवाई अड्डों पर भी उड़ानें रद्द या रोकी गईं।
टेक्सास और लुइसियाना में खाड़ी तट के प्रमुख रास्तों को विषम परिस्थितियों की वजह से मंगलवार को बंद कर दिया गया।
टेक्सास के सबसे बड़े शहर ह्यूस्टन में तीन से छह इंच तक बर्फबारी हुई। दक्षिणी लुइसियाना के कुछ हिस्सों में मंगलवार दोपहर तक आधे फुट से ज्यादा बर्फ गिर चुकी थी।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, लुइसियाना के रेने के उत्तर में एक जगह पर दोपहर से पहले 10.5 इंच बर्फ गिर चुकी थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मंगलवार सुबह टेक्सास के तट पर रेतीले समुद्र तट भी बर्फ से ढके हुए थे।
लुइसियाना, जॉर्जिया, अलबामा, फ्लोरिडा और मिसिसिपी जैसे खाड़ी तट के राज्यों के गवर्नरों ने इस तूफान से निपटने के लिए आपातकाल की घोषणा की है।
फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा बुनियादी ढांचा उन राज्यों से अलग है जो सर्दी के मौसम के आदी हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि बर्फीली सड़कों पर गाड़ी चलाना “बहुत खतरनाक हो सकता है।”
लुइसियाना के मौसम वैज्ञानिक जे ग्रिम्स ने सोमवार को कहा, “हम में से ज्यादातर लोगों ने अपनी जिंदगी में कभी इतनी ठंड और बर्फबारी का सामना नहीं किया है।”
व्यापार
केंद्र कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नए इंसेंटिव पैकेज देने की कर रहा तैयारी, आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद

केंद्र सरकार देश में कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए नया इंसेंटिव पैकेज देने की तैयारी कर रहा है और इसका परिव्यय 35,000 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से दी गई।
इसे कोयला मंत्रालय द्वारा जनवरी 2024 में शुरू किए गए 8,500 करोड़ रुपए के इंसेंटिव प्रोग्राम का की विस्तार माना जा रहा है, जिसने देश में कोयला गैसीफिकेशन की नींव रखी थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा विचाराधीन प्रस्तावित योजना का उद्देश्य देशभर में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं में तेजी लाना है, जिससे एलएनजी, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट और अमोनिया पर आयात निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का लक्ष्य 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण क्षमता के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति को तेज करना भी है।
देश में कोल गैसीकरण को ऐसे समय पर बढ़ावा दिया जा रहा है, जब मध्य पूर्व संघर्ष के कारण एलएनजी, उर्वरक और उर्वरक कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा बनी हुई है।
इस वर्ष फरवरी में कोयला मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने देश के कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई 8,500 करोड़ रुपए की कोयला गैसीकरण प्रोत्साहन योजना की श्रेणी II के तहत चयनित आवेदकों को लेटर ऑफ अवार्ड (एलओए) जारी कर दिए हैं।
योजना की श्रेणी II के तहत, निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) को प्रति परियोजना 1,000 करोड़ रुपए या पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) का 15 प्रतिशत, जो भी कम हो, आवंटित किया गया है।
ओडिशा के अंगुल में जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की 2 मिमीपीए कोयला गैसीकरण परियोजना को 569.05 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 3,793 करोड़ रुपए की इस परियोजना में कोयला गैसीकरण के माध्यम से कोयले को डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) में परिवर्तित किया जाएगा।
न्यू एरा क्लीनटेक सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है। 6,976 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य प्रति वर्ष 0.33 मिलियन मीट्रिक टन अमोनियम नाइट्रेट और 0.1 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
इसी प्रकार, ग्रेटा एनर्जी लिमिटेड को महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के भद्रावती जिले के एमआईडीसी में स्थित अपने कोयला गैसीकरण परियोजना के लिए 414.01 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन दिया गया है।
कोयला गैसीकरण पहल का उद्देश्य कोयला गैसीकरण में तकनीकी प्रगति को गति देना, कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और अधिक टिकाऊ ऊर्जा परिदृश्य की नींव रखना है।
व्यापार
हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बीच ओपेक प्लस ने बढ़ाया तेल उत्पादन कोटा, कुवैत का कच्चा तेल निर्यात शून्य

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ओपेक प्लस देशों ने जून के लिए अपने तेल उत्पादन कोटे को बढ़ाने का फैसला किया है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि सात ओपेक प्लस देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन को अगले महीने के लिए 1.88 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमति जताई है। हालांकि, यह वृद्धि सांकेतिक होगी, क्योंकि मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है।
भू-राजनीतिक संकट और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समूह से अलग होने के बावजूद, यह लगातार तीसरी मासिक वृद्धि होगी।
यूएई के अलग होने के बाद ओपेक प्लस में ईरान सहित 21 सदस्य देश रह गए हैं।
हालांकि, मासिक उत्पादन निर्णयों में केवल सात देशों की ही भागीदारी रही है। नाकाबंदी के कारण ईरान के निर्यात में भारी गिरावट देखी जा रही है।
मार्च में सभी ओपेक प्लस सदस्यों का औसत कच्चा तेल उत्पादन 35.06 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो फरवरी से 7.70 मिलियन बैरल प्रति दिन कम है।
पिछले सप्ताह, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओपेक और ओपेक प्लस कार्टेल से अलग होने की घोषणा की, जिसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल निर्यातक देशों के समूह के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यूएई ने कहा कि यह निर्णय उसकी “दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि और विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफाइल” को दर्शाता है।
यूएई के इस बाहर निकलने से तेल कार्टेल के कमजोर होने की आशंका है, ऐसे समय में जब ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के कारण फारस की खाड़ी के देशों के निर्यात को भारी नुकसान हुआ है। ओपेक के तेल निर्यात में यूएई की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है।
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुवैत ने अप्रैल में कच्चे तेल का शून्य बैरल निर्यात किया, जो 1991 में इराक के कब्जे के बाद से पहली बार हुआ है। यह स्थिति होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के कारण उत्पन्न हुई है।
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने फोर्स मेज्योर घोषित किया, जिससे लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन का उत्पादन प्रभावित हुआ। इस नाकाबंदी के कारण कुवैती निर्यात पूरी तरह से ठप हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका का मानना, समुद्री नाकेबंदी से ईरान को हुआ 456 अरब रुपए का नुकसान: रिपोर्ट

अमेरिकी की समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान को तेल राजस्व में लगभग 4.8 अरब डॉलर (456 अरब रुपए ) का नुकसान हुआ है। एक्सियोस के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नाकेबंदी के दौरान दो टैंकर जब्त किए गए। इसके अलावा, अधिकारियों ने दावा किया कि लगभग 53 मिलियन बैरल तेल ले जा रहे 31 टैंकर इस समय “खाड़ी में फंसे हुए हैं,” जिससे ईरान के तेल निर्यात में आई भारी गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। कथित तौर पर इसी वजह से उसे 4.8 अरब डॉलर (करीब 45,600 करोड़ रुपए) का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ईरान के समुद्र में अमेरिकी नाकाबंदी पूरी ताकत से लागू है, जिससे ईरान की फंडिंग क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
इन्हीं अधिकारियों के अनुसार, कुछ जहाज अब “अमेरिकी नाकेबंदी के डर से चीन को तेल पहुंचाने के लिए एक महंगा और लंबा रास्ता चुन रहे हैं,” जिससे पता चलता है कि अमेरिकी सेना की सख्त कार्रवाई के डर से जहाजों के आने-जाने के तरीकों में बदलाव आया है।
यह नाकेबंदी अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर एक अस्थायी संघर्षविराम के दौरान लगाई थी। इसका मकसद ईरान पर दबाव डालना था ताकि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए उस युद्धविराम को मान ले, जिससे इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष हमेशा के लिए खत्म हो जाए।
ईरान ने पिछले महीने कहा था कि इजरायल और लेबनान में सशस्त्र समूह हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन के संघर्ष विराम की घोषणा के बाद होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से फिर से खोल दिया है।
हालांकि, बाद में इस जलमार्ग पर फिर से पाबंदी लगा दी गई, जब अमेरिका ने अपनी नाकेबंदी हटाने से इनकार कर दिया। अमेरिका का कहना था कि जब तक ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए कोई पक्का समझौता नहीं हो जाता, तब तक ये पाबंदियां जारी रहेंगी।
अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर यानी लगभग 456 अरब रुपये (करीब 45,600 करोड़ रुपये) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक यह आकलन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) का है।
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