अपराध
दक्षिण गुजरात की चीनी मिलों पर 150 करोड़ रुपये की मजदूरी चोरी का आरोप
सूरत: दक्षिण गुजरात की सहकारी चीनी मिलें लगभग 1.5 लाख आदिवासी गन्ना कटाई श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करने के कारण जांच के दायरे में आ गई हैं, जिसके कारण उन्हें लगभग 150 करोड़ रुपये का वेतन नुकसान हुआ है। श्रम न्यायालयों में मामले दायर करके न्याय पाने का प्रयास करने वाले श्रमिकों को कथित तौर पर उत्पीड़न और काम से वंचित होने का सामना करना पड़ रहा है।
मुद्दे के बारे में
यह मुद्दा तब तूल पकड़ गया जब नवसारी में गनदेवी शुगर फैक्ट्री पर आरोप लगा कि उसने न्यूनतम मज़दूरी न दिए जाने के मामले में दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने के लिए मज़दूरों पर दबाव डाला। गुजरात सरकार द्वारा 1 अप्रैल, 2023 से गन्ना कटाई करने वालों के लिए न्यूनतम मज़दूरी 238 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 476 रुपये प्रति टन करने के बावजूद, कई फैक्ट्रियाँ केवल 375 रुपये प्रति टन का भुगतान करना जारी रखती हैं, जिससे मज़दूरों को काफ़ी कम मज़दूरी मिल रही है।
2023 में, गंडेवी शुगर फैक्ट्री के 16 श्रमिकों ने वेतन विसंगतियों को लेकर नवसारी सरकारी श्रम अधिकारी (जीएलओ) के पास शिकायत दर्ज कराई। जब फैक्ट्री प्रबंधन उनकी शिकायतों का समाधान करने में विफल रहा, तो जीएलओ ने श्रमिकों को नवसारी में श्रम न्यायालय में मामला उठाने की सलाह दी। ये मामले 16 मई, 2024 को दर्ज किए गए।
न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा करते समय, श्रमिकों ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा उनकी शिकायतें वापस लेने के लिए उन पर दबाव बढ़ गया है। शुरू में, ठेकेदारों ने उन श्रमिकों को काम देना बंद कर दिया जिन्होंने मामले दर्ज किए थे। बाद में, प्रत्यक्ष दबाव लागू किया गया, जिसमें कुछ श्रमिकों को दूरदराज के जिलों में स्थानांतरित कर दिया गया। इन परिस्थितियों में, दो श्रमिकों ने अपने मामले वापस ले लिए, जबकि 14 न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। श्रम न्यायालय के न्यायाधीश ने हाल ही में इनमें से सात मामलों को 14 दिसंबर, 2024 को आगामी लोक अदालत में समाधान के लिए सूचीबद्ध किया, कथित तौर पर श्रमिक संघ से परामर्श किए बिना।
गन्ना मजदूरों का शोषण मजदूरी चोरी से कहीं आगे तक फैला हुआ है। हर साल गुजरात और महाराष्ट्र से करीब 1.5 लाख आदिवासी मजदूर 14 सहकारी चीनी मिलों में काम करने के लिए दक्षिण गुजरात आते हैं। ये मजदूर अपने परिवारों के साथ छह महीने घटिया आवास और कठिन जीवन स्थितियों में गुजारते हैं। बार-बार सार्वजनिक पूछताछ और मीडिया रिपोर्टों में इन मुद्दों को उजागर करने के बावजूद, कोई सुधार नहीं हुआ है।
मजूर अधिकार मंच डांग ने सहकारी कारखानों की कार्रवाई की निंदा की
प्रमुख वकालत समूह माजुर अधिकार मंच डांग ने गंडेवी शुगर फैक्ट्री प्रबंधन और अन्य सहकारी कारखानों की कार्रवाई की निंदा की है। माजुर अधिकार मंच डांग के सचिव जयेश गामित ने कहा, “श्रमिकों का यह शोषण जारी नहीं रह सकता। हम मजदूरों के लिए सुरक्षा, मजदूरी के मामलों का त्वरित समाधान और न्यूनतम मजदूरी कानून का तत्काल अनुपालन की मांग करते हैं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इन मांगों को पूरा न करने पर श्रमिकों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
कथित वेतन चोरी और उत्पीड़न दक्षिण गुजरात के गन्ना श्रमिकों के सामने आने वाली प्रणालीगत चुनौतियों को रेखांकित करता है। अनसुलझे मामले और लगातार श्रमिकों का विस्थापन मजबूत श्रम सुरक्षा और जवाबदेही उपायों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
अपराध
एआई डीपफेक और अश्लील तस्वीरों से परेशान रूपाली गांगुली पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट, 4 नवंबर को होगी सुनवाई

टीवी की मशहूर अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और अन्य कंटेंट का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही हैं और कुछ वीडियो के साथ भी छेड़छाड़ की गई है।
रूपाली का कहना है कि इस तरह तैयार किए गए कंटेंट को कुछ ऐसी वेबसाइटों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जाती है।
अभिनेत्री ने अपनी याचिका में इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर, आवाज और छवि का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से इस मामले में दखल देने की मांग की है।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई होगी। इस मामले को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनेगी।
रूपाली से पहले कई दूसरी अभिनेत्रियां भी अपनी तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत पहुंच चुकी हैं। हाल ही में अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कई वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, आवाज और पहचान का इस्तेमाल करके एआई से नकली वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें और अश्लील कंटेंट तैयार कर रहे हैं।
इस मामले में कोर्ट ने सामंथा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने गूगल, मेटा और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले चिह्नित कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया था।
इससे पहले जुलाई में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।
अपराध
कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ईडी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया है।
ईडी की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त से चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह केस तवरेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
यह एफआईआर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस वालों की ओर से 18 अगस्त को सीके तांड्या गांव में एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर की गई जॉइंट सर्च और रेड से जुड़ी है, जहां आरोपी बिना वैलिड लाइसेंस, परमिट या ऑथराइजेशन के दवाएं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स स्टोर करते हुए और स्टोर की गई दवाओं पर लेबल बदलते हुए पाए गए।
ईडी ने केस दर्ज किया और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिना ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं को बनाने, री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग के लिए बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से मंगाए गए सस्ते बल्क फॉर्मूलेशन को कथित तौर पर नई शीशियों में रीपैकेज किया गया और धोखे से महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स, जैसे कि जेविसेफ्टा, एम्ब्लेवो वगैरह के तौर पर रीलेबल किया गया।
शीशियों में जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर-ब्रांडेड लेबल थे। ये दवाएं कथित तौर पर मेसर्स डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटी गईं और मेसर्स कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई की गईं। इसके बाद मेसर्स कृपा हेल्थकेयर ने पता लगने से बचने के लिए असली दवाओं के साथ दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को भी सप्लाई कीं।
छापेमारी के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक अकाउंट में लगभग 9 लाख रुपए थे। उस अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, सर्च एक्शन के दौरान अलग-अलग लोगों के डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और गलत जानकारी देने वाले डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।
अपराध
बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, करीब 54 करोड़ रुपए की संपत्ति की जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2,200 करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड (पीएएल) से जुड़ी 53.95 करोड़ रुपए मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।
ईडी के मुंबई जोन-1 कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अब तक कुल 546 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं।
यह जांच सीबीआई, ईओडब्ल्यू मुंबई और ईओबी मुंबई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। मामले में पारेख एल्युमिनेक्स लिमिटेड और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर स्टॉक और देनदारियों से संबंधित बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से ऋण प्राप्त किया। बाद में कंपनी के ऋण खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिए गए, जिनकी कुल राशि 2,296 करोड़ रुपए से अधिक थी।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी में जेके शाह ग्रुप ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विभिन्न संस्थाओं तथा व्यक्तियों के जरिए 110.54 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित आय को इधर-उधर करने में मदद की।
ईडी ने दावा किया कि इस धनराशि का एक लाभार्थी 70.25 करोड़ रुपए का फायदा उठाने में सफल रहा, जो कुल 2,296.58 करोड़ रुपए की कथित अपराध आय का हिस्सा था।
एजेंसी ने बताया कि इससे पहले भी इस मामले में 493 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। साथ ही ईडी विशेष पीएमएलए अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है, जिस पर अदालत ने संज्ञान ले लिया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इंडियन ओवरसीज बैंक के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम को इस कथित साजिश के कारण भारी वित्तीय नुकसान हुआ। ईडी अब छापों के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि इस बैंक धोखाधड़ी में शामिल अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान की जा सके।
एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धन के प्रवाह तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
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