राजनीति
सिद्दारमैया ने भाजपा को निशाने पर लिया, कहा- बीजेपी नेताओं का सूखा अध्ययन दौरा दिखावा
कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि कर्नाटक भाजपा नेताओं का सूखा अध्ययन दौरा एक दिखावा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन लोगों को सूखा राहत प्रदान करनी चाहिए, वे दिल्ली में बैठे हैं, ये राज्य भाजपा नेता केंद्र में अपने आकाओं से अपील करने के बजाय सूखा अध्ययन यात्रा कर रहे हैं।
सीएम ने सवाल किया, “प्रिय भाजपा नेताओं, आपकी अपनी पार्टी की सरकार ने कर्नाटक में सूखे की स्थिति का अध्ययन करने के लिए दिल्ली से विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है। लेकिन अब, आप उसी उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं। क्या आपको अपनी ही सरकार की सूखा अध्ययन टीम पर भरोसा नहीं है?”
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार के अध्ययन के अनुसार, सूखे के कारण अनुमानित नुकसान लगभग 33,770 करोड़ रुपये है। हमने केंद्र सरकार से 17,901 करोड़ रुपये की राहत का अनुरोध किया है। दुर्भाग्य से हमें एक पैसा भी नहीं मिला।”
सीएम ने कहा, “प्रिय भाजपा नेताओं, यदि आप वास्तव में राज्य के किसानों की परवाह करते हैं, तो पहले अपनी सरकार से उनके लिए राहत की मांग करें। कितने भाजपा सांसदों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कर्नाटक के लिए राहत कोष की मांग की है?”
उन्होंने आगे कहा, “आपने यह दावा करके कर्नाटक के भोले-भाले लोगों को मूर्ख बनाया कि यदि ‘डबल इंजन’ सरकार सत्ता में आई तो राज्य में अभूतपूर्व विकास होगा।”
उन्होंने सवाल किया, “ये सांसद क्या कर रहे हैं? वे बेकार क्यों बैठे हैं? क्या उन्होंने कभी केंद्र सरकार द्वारा राज्य के साथ किए गए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है?”
सीएम ने तंज कसते हुए कहा, “प्रिय भाजपा नेताओं, आपको दिल्ली का दौरा करना चाहिए, राज्य का नहीं। अपने 25 लोकसभा सदस्यों को दिल्ली ले जाएं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलें और जरूरत पड़ने पर उनसे सवाल करें और राहत राशि मांगें। यदि आपमें उनसे बात करने का साहस नहीं है, तो कम से कम मेरे लिए प्रधानमंत्री से मिलने का समय तय कर लें।”
उन्होंने पूछा, जमीन, पानी और भाषा के मुद्दे पर कर्नाटक के साथ अन्याय करने के बाद क्या भाजपा नेताओं में कोई शर्म बची है?
सिद्दारमैया ने कहा, “सूखा प्रभावित लोगों को आपकी सांत्वना के खोखले शब्दों की जरूरत नहीं है। उन्हें राहत की जरूरत है। जब आप सूखे की स्थिति का उपयोग तुच्छ राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं तो लोग आपको कैसे स्वीकार कर सकते हैं?”
राष्ट्रीय समाचार
अदाणी पोर्ट्स का मुनाफा पहली तिमाही में 10 प्रतिशत बढ़कर 3,650 करोड़ रुपए रहा, आय में भी उछाल

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) ने बुधवार को वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी का मुनाफा अप्रैल-जून अवधि में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 3,650 करोड़ रुपए हो गया है। इसकी वजह कंपनी के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स कारोबार में मजबूत ग्रोथ होना है।
कंपनी द्वारा दाखिल की गई एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में कंपनी की कंसोलिडेटेड आय सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 10,821 करोड़ रुपए हो गई है। पिछले साल समान अवधि में यह आंकड़ा 9,126 करोड़ रुपए था।
जून तिमाही में कंपनी का ईबीआईटीडीए सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 6,541 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 5,495 करोड़ रुपए था।
एपीएसईजेड ने बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उसका अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह कारोबार प्रमुख वृद्धि चालक बनकर उभरा। इस दौरान इस कारोबार से होने वाला राजस्व सालाना आधार पर 80 प्रतिशत बढ़कर 1,747 करोड़ रुपए पहुंच गया, जबकि ईबीआईटीडीए में 256 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 730 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।
कंपनी ने इस मजबूत प्रदर्शन का श्रेय ऑस्ट्रेलिया और कोलंबो में बेहतर परिचालन को दिया।
कंपनी के अनुसार, इससे उसके विदेशी कारोबार की बढ़ती मजबूती और परिपक्वता का पता चलता है।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अश्विनी गुप्ता ने कहा, “वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही का प्रदर्शन हमारे विविधीकृत कारोबारी मॉडल की मजबूती को दर्शाता है। हमारा वैश्विक विस्तार और विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, कमोडिटी तथा ग्राहकों में फैला मल्टी-मॉडल एसेट बेस हमारी ताकत है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारा घरेलू बंदरगाह कारोबार लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है और यह एपीएसईजेड की कमाई का आधार बना हुआ है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, मरीन और लॉजिस्टिक्स कारोबार अब केवल विस्तार के चरण से आगे बढ़कर मूल्य सृजन के चरण में पहुंच चुके हैं और राजस्व वृद्धि और मुनाफे के महत्वपूर्ण स्रोत बनते जा रहे हैं।”
कंपनी का घरेलू बंदरगाह कारोबार भी मजबूत बना रहा। इस दौरान अधिक कार्गो वॉल्यूम, बेहतर कार्गो मिक्स और बेहतर प्राप्तियों के चलते घरेलू कारोबार का राजस्व सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़ा।
कंपनी के इस सेगमेंट ने 74 प्रतिशत के ईबीआईटीडीए मार्जिन के साथ उद्योग में अग्रणी मुनाफा बनाए रखा।
वहीं, मरीन कारोबार ने भी तिमाही के दौरान मजबूत विस्तार दर्ज किया। ऑफशोर पोतों की संख्या बढ़ने और यूरोप में सब-सी परिचालन के विस्तार के कारण इस कारोबार का राजस्व सालाना आधार पर 67 प्रतिशत बढ़कर 901 करोड़ रुपए हो गया।
राजनीति
राहुल गांधी के परिवार पर विवादित टिप्पणी करना पड़ा भारी, कर्नाटक के भाजपा विधायक पर एफआईआर दर्ज

कर्नाटक में भाजपा के विधायक यशपाल सुवर्णा की एक विवादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के परिवार को लेकर दिए गए बयान के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
बुधवार को उडुपी टाउन पुलिस स्टेशन में यह मामला उडुपी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार कोडावूर की शिकायत पर दर्ज किया गया। पुलिस ने विधायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 57, 192, 196(2), 352, 353(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
जानकारी के मुताबिक, उडुपी में भाजपा द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यशपाल सुवर्णा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर आप लोग ऐसे ही नाटक करते रहे, तो जैसे 1992 में हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हमारी भावनाएं आहत होने पर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था, उसी तरह कांग्रेस का वंश और राहुल गांधी का परिवार भी खत्म कर दिया जाएगा।”
इस बयान के सामने आते ही कर्नाटक की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस ने भाजपा पर नफरत फैलाने वाली भाषा और धमकी की राजनीति करने का आरोप लगाया। विधायक के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी।
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष और एमएलसी मंजूनाथ भंडारी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यशपाल सुवर्णा की टिप्पणी को ‘घृणित, अपमानजनक और भड़काऊ’ बताया और कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले किसी जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह की भाषा उचित नहीं है।
मंजूनाथ भंडारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नीट पेपर लीक विवाद और उसे लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले कर रही है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी मानहानि, नफरत फैलाने वाले भाषण या धमकी का आधार नहीं बन सकते। इस तरह की टिप्पणी से खासकर तटीय कर्नाटक में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को राज्य के गृह मंत्री के सामने उठाकर जांच में तेजी लाने की मांग करेंगे।
महाराष्ट्र
‘तीन साल में 1.21 लाख से ज्यादा एमएसएमई बंद’, सामना में शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर साधा निशाना

शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लोकसभा में पेश केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं। इसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां चली गईं।
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय लिखा, “पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं और नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहां इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
संपादकीय के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया। पार्टी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।
संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
संपादकीय में कहा गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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