राष्ट्रीय
लाल किला के ‘छत्ता बाजार’ में दुकानदारों का कोरोना से बुरा हाल
लालकिला देश के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों के भी आकर्षण का विषय हमेशा से रहा है। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण लाल किला बेहद लंबे वक्त के लिए बंद रहा, जिसके कारण लाल किला परिसर में मौजूद छत्ता बाजार के दुकानदारों पर इसका काफी प्रभाव पड़ा है।
दरअसल शाहजहां ने लालकिले का निर्माण 1638 में करवाना शुरू किया था, करीब 10 साल की अथक मेहनत के बाद 1648 में लालकिला बनकर तैयार हुआ था।
लाल किले से बाहर मुगल बेगमें व शहजादियां ना जाएं, इसीलिए पेशावर( अब पाकिस्तान में) की तर्ज पर छत्ता बाजार का निर्माण करवाया गया, जिसे बाजार-ए-मिशकाफ कहा जाता था।
लाल किला के लाहौरी दरवाजे के अंदर पहुंचते ही यह बाजार मिलता है। इस बाजार में 40 से अधिक दुकानें है लेकिन कुछ लोगों ने एक दुकान को बदलकर उनमें दो दुकानें बनवा ली हैं।
इन दुकानों पर हैंडीक्राफ्ट का सामान बिकता है, कोरोना महामारी पाबंदियों के चलते इंटरनेशनल फ्लाइट पर रोक है। जिसकी वजह से विदेशी इन सभी स्मारकों में घूमने नहीं आ पा रहें हैं। यही कारण है कि दुकानदारों के लिए अब ये परेशानी का सबब बन गया है।
हालांकि इस बाजार की अब एसोसिएशन भी है जिसका नाम रेडफोर्ट बाजार शॉपकीपर एसोसिएशन है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आसिम हुसैन की दुकान सन 1893 से है उनके ‘परदादा’ को ब्रिटिश आर्मी द्वारा ये दुकान दी गई थीं।
आसिम हुसैन ने आईएएनएस को बताया , हमारी दुकान सन 1893 से है। हमारे ‘परदादा’ ने उस वक्त लंदन से फोटोग्राफी का कोर्स किया था, तो उन्हें ब्रिटिश आर्मी ने हॉनर में ये दुकान दी थी। हमारी 1904 में फर्म रजिस्टर्ड है।
कोरोना महामारी का असर टूरिस्म पर सबसे ज्यादा पड़ा है। जो दुकानदार 100 फीसदी लाल किले के भरोसे ही रहते है, उनका बेहद बुरा हाल है। कुछ तो उधार लेकर या किसी से कर्जा लेकर अपनी जीविका चला रहे हैं।
लाल किला बीते साल से अब तक काफी समय के लिए बंद रहा है। अब खुला भी तो विदेशी पर्यटक नहीं है। दिल्ली या आस पास का पर्यटक सिर्फ घूमने आता है कुछ खरीदारी नहीं करते हैं।
आसिम के अनुसार, कुछ दुकानदारो ने मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ और काम करने का सोच लिया है क्योंकि हालात कब सामान्य हो, किसी को नहीं पता है।
दरअसल दुकानदारों ने महामारी के वक्त भी इन दुकानों का बिजली का किराया दिया, हालांकि दुकानों के किराए की बात करें तो किराया बेहद कम है।
जानकारी के मुताबिक, 34 रुपए से लेकर करीब 1300 रुपए तक ही इन दुकानों का किराया है। इसके अलावा इन दुकानों में काम करने वाले लोग बेहद लंबे वक्त से यहां बैठते हैं।
दुकानदारों के अनुसार, उन्हें हैंडी क्राफ्ट के काम का अनुभव है, हम इन्हें निकाल नहीं सकते वहीं कोई नया आएगा तो उसे सीखाना पड़ेगा।
दरअसल छत्ता बाजार का तात्पर्य ढके हुए बाजार से है। छतनुमा बाजार का विचार शाहजहां को वर्ष 1646 में पेशावर शहर (अब पाकिस्तान में) देखने के बाद आया था।
आसिम ने आगे बताया कि शाहजहां के बाद फिर ब्रिटिशर्स ने दुकानों को मिल्रिटी की दुकानें बना दी थी। उनके बाद ये मार्केट एमसीडी के पास आ गई। ऐसे करते करते अब ये एएसआई के पास है।
इस बाजार में एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट मनीष की भी पुश्तैनी दुकान है। महामारी के प्रभाव के कारण वह भी अब कहीं जॉब करने का सोच रहे हैं।
मनीष आईएएनएस को बताते है, पिछले डेढ़ साल से लाल किला बंद है। हम लाल किले में हैंडी क्राफ्ट प्रोडक्ट ही बेच सकते हैं, जो कि पूरी तरह विदेशी पर्यटकों के ही भरोसे पर है।
मनीष कहते हैं, छत्ता बाजार के दुकानदारों ने अब तक जो सेविंग बचाई थी, उसी के भरोसे अपनी जीविका चला रहे हैं। सरकार की तरफ से और एएसआई की तरफ से कोई प्रोत्साहन नहीं है। मौजुद वक्त में करीब 250 पर्यटक आते हैं, जिनका हमारे लिए कोई महत्व नहीं है।
लाल किला खुला है तो हमें दुकानें भी खोलनी पड़ती है लेकिन काम नहीं है । इसके अलावा हमारे पास कुछ और काम भी नहीं है। हम सभी परिवारो के खर्चे पूरे हैं, लेकिन कमाई फिलहाल कुछ भी नहीं है।
मेरी यहां पुश्तैनी दूकान है जिसे मेरे पिता संभाल रहे है। अब मैं और मेरा एक भाई और है। फिलहाल हम अब जॉब करने का सोच रहे हैं कि एक भाई दुकान पर बैठे और एक जॉब करे।
हालांकि करीब 10 से 12 दुकानदारों की लाल किले से बाहर अन्य मार्केट में भी दुकान है लेकिन अधिकतर दुकानदार अपनी इन्ही दुकानों के भरोसे है।
इसके अलावा ये सभी दुकानदार किसी तीसरे व्यक्ति को दुकान नहीं बेच सकते, यदि ये दुकान किसी को दी जा सकती है तो वो इन्हें के परिवार के सदस्यों को, जिसकी भी एक प्रक्रिया है।
राष्ट्रीय
क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है: संजय राउत

मुंबई, 13 जुलाई: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले 16 दिनों से सोनम वांगचुक अनशन पर हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यही सवाल उभरकर सामने आ रहा है कि क्या सरकार सोनम वांगचुक को मारना चाहती है?
संजय राउत ने सोनम वांगचुक की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, सोनम वांगचुक असाधारण, पर्यावरणविद, शिक्षाविद और पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने यह भी बताया कि आखिर सोनम वांगचुक क्यों अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे धर्मेंद्र प्रधान ने पूरी तरह से भ्रष्टाचार किया है। उनके कार्यकाल के दौरान ही नीट जैसी परीक्षा लीक हुई। कई छात्रों ने मौत को भी गले लगा लिया। इन्हीं सब स्थिति को देखते हुए सोनम वांगचुक आज अनशन पर बैठे हुए हैं।
उनके मुताबिक, सरकार को सोनम वांगचुक के पास आकर उनसे बात करनी चाहिए थी। उनसे बात करनी चाहिए थी, लेकिन अफसोस की बात है कि अभी तक सरकार की तरफ से कोई भी उनके पास नहीं आया। कुल मिलाकर हमें यह समझना होगा कि सोनम वांगचुक अनशन पर क्यों बैठे हैं। सोनम वांगचुक हम सभी लोगों के लिए ही बैठे हैं।
इसके अलावा, उन्होंने अन्ना हजारे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अन्ना हजारे अनशन पर बैठे हुए थे, तब तत्कालीन सरकार की ओर से कई लोग उनके पास गए थे और उनसे संवाद स्थापित करके उनका पक्ष जानने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे के लिए भी यह जरूरी हो जाता है कि वो सोनम वांगचुक का समर्थन करें, उनसे मुलाकात करें।
अपराध
बदरपुर में 17 वर्षीय नाबालिग की चाकू मारकर हत्या, प्रेम संबंध की शक में बुलाकर किया हमला

नई दिल्ली, 13 जुलाई: दक्षिण दिल्ली के बदरपुर इलाके के मोलरबंद एक्सटेंशन में 40 फीट रोड पर एक 17 वर्षीय नाबालिग युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान यश के रूप में हुई है, जो 12वीं कक्षा का छात्र था। घटना शाम करीब पौने सात बजे पांडे मेडिकल स्टोर के पास गली नंबर 4 में हुई। पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
मृतक के पिता जगमोहन सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, “मुझे कुछ पता नहीं था। सूचना मिलने पर जब अस्पताल पहुंचा तो देखा कि मेरा लड़का मर चुका था। उसकी छाती पर चाकू लगा हुआ था। मेरे इकलौते बेटे को ताबड़तोड़ चाकू के वार किए गए। वह 12वीं कक्षा में पढ़ता था। मुझे न्याय चाहिए, अगर इंसाफ नहीं मिला तो मैं कुछ भी कर सकता हूं।”
जगमोहन सिंह का कहना है कि उनका बेटा शांत स्वभाव का था और उन्होंने पुलिस से जल्द से जल्द दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यश उस लड़की के भाई द्वारा मौके पर बुलाया गया था, जिसके साथ वह रिलेशनशिप में था। यश तीन दोस्तों के साथ वहां पहुंचा। वहां दूसरे ग्रुप से झगड़ा हो गया। विवाद के दौरान यश की छाती और पेट में धारदार हथियार से कई वार किए गए। स्थानीय लोगों ने मदद की और घायल यश को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। चोटों की तीव्रता के कारण इलाज के दौरान यश की मौत हो गई।
थाना बदरपुर के अधिकारियों ने बताया कि रात करीब 8 बजे स्थानीय बीट स्टाफ से सूचना मिली। डीडी नंबर 94ए दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई। क्राइम टीम ने घटनास्थल (एसओसी) का निरीक्षण किया। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। दो आरोपियों को मौके से पकड़ लिया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं।
दुर्घटना
कानपुर में खड़े ट्रक से टकराई स्कॉर्पियो, दो बच्चों समेत तीन की मौत

कानपुर, 13 जुलाई: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक दुर्घटना में स्कॉर्पियो कार सवार दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में 5 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, कानपुर जिले के महाराजपुर इलाके में सोमवार सुबह 6 बजे स्कॉर्पियो कार राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक खड़े ट्रक से जा टकराई। स्कॉर्पियो कार में हादसे के समय करीब 8 लोग सवार थे। यह कार फतेहपुर की ओर जा रही थी।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और राहगीरों की भीड़ जमा हो गई। पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई। बताया गया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि कार चकनाचूर हो गई। अंदर फंसे लोग दर्द से तड़पते रहे।
मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस टीम ने सभी तीन मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लिया और बाकी घायलों को अस्पताल के लिए भेजा। बताया गया कि मरने वालों में दो मासूम बच्चे भी शामिल थे। हालांकि, मृतकों की पहचान अभी सामने नहीं आई।
इससे पहले, एटा जिले में एक कार से सांड की टक्कर के बाद ड्राइवर की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि एटा जिले के पिलुआ थाना क्षेत्र में निधोली रोड स्थित जवाहरपुर गोदाम के पास यह हादसा हुआ। मृतक की पहचान 35 वर्षीय नरेंद्र शर्मा के रूप में हुई, जो एटा जिले के जिटौली गांव के निवासी था। बताया गया कि नरेंद्र अपनी दुकान बंद करने के बाद गांव लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में सांड से कार की टक्कर हुई।
अग्निशमन प्रभारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें हादसे की सूचना मिली थी। बताया गया कि कार की सांड से टक्कर हुई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और इस दुर्घटना में घायल युवक को अस्पताल भेजा गया। साथ ही, पुलिस टीम ने कार को सड़क से हटाकर किनारे किया।
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