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Thursday,17-September-2026
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लाल किला के ‘छत्ता बाजार’ में दुकानदारों का कोरोना से बुरा हाल

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लालकिला देश के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशी पर्यटकों के भी आकर्षण का विषय हमेशा से रहा है। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण लाल किला बेहद लंबे वक्त के लिए बंद रहा, जिसके कारण लाल किला परिसर में मौजूद छत्ता बाजार के दुकानदारों पर इसका काफी प्रभाव पड़ा है।

दरअसल शाहजहां ने लालकिले का निर्माण 1638 में करवाना शुरू किया था, करीब 10 साल की अथक मेहनत के बाद 1648 में लालकिला बनकर तैयार हुआ था।

लाल किले से बाहर मुगल बेगमें व शहजादियां ना जाएं, इसीलिए पेशावर( अब पाकिस्तान में) की तर्ज पर छत्ता बाजार का निर्माण करवाया गया, जिसे बाजार-ए-मिशकाफ कहा जाता था।

लाल किला के लाहौरी दरवाजे के अंदर पहुंचते ही यह बाजार मिलता है। इस बाजार में 40 से अधिक दुकानें है लेकिन कुछ लोगों ने एक दुकान को बदलकर उनमें दो दुकानें बनवा ली हैं।

इन दुकानों पर हैंडीक्राफ्ट का सामान बिकता है, कोरोना महामारी पाबंदियों के चलते इंटरनेशनल फ्लाइट पर रोक है। जिसकी वजह से विदेशी इन सभी स्मारकों में घूमने नहीं आ पा रहें हैं। यही कारण है कि दुकानदारों के लिए अब ये परेशानी का सबब बन गया है।

हालांकि इस बाजार की अब एसोसिएशन भी है जिसका नाम रेडफोर्ट बाजार शॉपकीपर एसोसिएशन है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आसिम हुसैन की दुकान सन 1893 से है उनके ‘परदादा’ को ब्रिटिश आर्मी द्वारा ये दुकान दी गई थीं।

आसिम हुसैन ने आईएएनएस को बताया , हमारी दुकान सन 1893 से है। हमारे ‘परदादा’ ने उस वक्त लंदन से फोटोग्राफी का कोर्स किया था, तो उन्हें ब्रिटिश आर्मी ने हॉनर में ये दुकान दी थी। हमारी 1904 में फर्म रजिस्टर्ड है।

कोरोना महामारी का असर टूरिस्म पर सबसे ज्यादा पड़ा है। जो दुकानदार 100 फीसदी लाल किले के भरोसे ही रहते है, उनका बेहद बुरा हाल है। कुछ तो उधार लेकर या किसी से कर्जा लेकर अपनी जीविका चला रहे हैं।

लाल किला बीते साल से अब तक काफी समय के लिए बंद रहा है। अब खुला भी तो विदेशी पर्यटक नहीं है। दिल्ली या आस पास का पर्यटक सिर्फ घूमने आता है कुछ खरीदारी नहीं करते हैं।

आसिम के अनुसार, कुछ दुकानदारो ने मौजूदा हालात को देखते हुए कुछ और काम करने का सोच लिया है क्योंकि हालात कब सामान्य हो, किसी को नहीं पता है।

दरअसल दुकानदारों ने महामारी के वक्त भी इन दुकानों का बिजली का किराया दिया, हालांकि दुकानों के किराए की बात करें तो किराया बेहद कम है।

जानकारी के मुताबिक, 34 रुपए से लेकर करीब 1300 रुपए तक ही इन दुकानों का किराया है। इसके अलावा इन दुकानों में काम करने वाले लोग बेहद लंबे वक्त से यहां बैठते हैं।

दुकानदारों के अनुसार, उन्हें हैंडी क्राफ्ट के काम का अनुभव है, हम इन्हें निकाल नहीं सकते वहीं कोई नया आएगा तो उसे सीखाना पड़ेगा।

दरअसल छत्ता बाजार का तात्पर्य ढके हुए बाजार से है। छतनुमा बाजार का विचार शाहजहां को वर्ष 1646 में पेशावर शहर (अब पाकिस्तान में) देखने के बाद आया था।

आसिम ने आगे बताया कि शाहजहां के बाद फिर ब्रिटिशर्स ने दुकानों को मिल्रिटी की दुकानें बना दी थी। उनके बाद ये मार्केट एमसीडी के पास आ गई। ऐसे करते करते अब ये एएसआई के पास है।

इस बाजार में एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट मनीष की भी पुश्तैनी दुकान है। महामारी के प्रभाव के कारण वह भी अब कहीं जॉब करने का सोच रहे हैं।

मनीष आईएएनएस को बताते है, पिछले डेढ़ साल से लाल किला बंद है। हम लाल किले में हैंडी क्राफ्ट प्रोडक्ट ही बेच सकते हैं, जो कि पूरी तरह विदेशी पर्यटकों के ही भरोसे पर है।

मनीष कहते हैं, छत्ता बाजार के दुकानदारों ने अब तक जो सेविंग बचाई थी, उसी के भरोसे अपनी जीविका चला रहे हैं। सरकार की तरफ से और एएसआई की तरफ से कोई प्रोत्साहन नहीं है। मौजुद वक्त में करीब 250 पर्यटक आते हैं, जिनका हमारे लिए कोई महत्व नहीं है।

लाल किला खुला है तो हमें दुकानें भी खोलनी पड़ती है लेकिन काम नहीं है । इसके अलावा हमारे पास कुछ और काम भी नहीं है। हम सभी परिवारो के खर्चे पूरे हैं, लेकिन कमाई फिलहाल कुछ भी नहीं है।

मेरी यहां पुश्तैनी दूकान है जिसे मेरे पिता संभाल रहे है। अब मैं और मेरा एक भाई और है। फिलहाल हम अब जॉब करने का सोच रहे हैं कि एक भाई दुकान पर बैठे और एक जॉब करे।

हालांकि करीब 10 से 12 दुकानदारों की लाल किले से बाहर अन्य मार्केट में भी दुकान है लेकिन अधिकतर दुकानदार अपनी इन्ही दुकानों के भरोसे है।

इसके अलावा ये सभी दुकानदार किसी तीसरे व्यक्ति को दुकान नहीं बेच सकते, यदि ये दुकान किसी को दी जा सकती है तो वो इन्हें के परिवार के सदस्यों को, जिसकी भी एक प्रक्रिया है।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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