राष्ट्रीय समाचार
ट्रंप के टैरिफ़ को लेकर अनिश्चितता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
मुंबई, 11 जुलाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता के बीच, विभिन्न क्षेत्रों और देशों में टैरिफ़ बढ़ाने की धमकी जारी रहने के बीच, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाज़ार के सूचकांक गिरावट के साथ खुले।
सुबह 9.20 बजे, सेंसेक्स 224 अंक या 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,965 पर और निफ्टी 65 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,289 पर था।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मामूली खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 60 अंक या 0.10 प्रतिशत बढ़कर 59,220 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 11 अंक या 0.06 प्रतिशत बढ़कर 18,967 पर था।
विश्लेषकों के अनुसार, अनिश्चितता और अत्यधिक अस्थिरता से भरे मौजूदा माहौल को देखते हुए, व्यापारियों को सलाह दी जाती है कि वे विशेष रूप से लीवरेज्ड पोजीशन के मामले में, सतर्क “प्रतीक्षा करें और देखें” का रुख अपनाएँ। तेजी पर आंशिक मुनाफावसूली और कम स्टॉप-लॉस लगाने की सलाह दी जाती है।
सेंसेक्स में एचयूएल, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एसबीआई, अदानी पोर्ट्स, टाटा स्टील, सन फार्मा और आईटीसी प्रमुख लाभ में रहे। टीसीएस, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व और ट्रेंट प्रमुख नुकसान में रहे।
क्षेत्रीय मोर्चे पर, पीएसयू बैंक, वित्तीय सेवाएँ, फार्मा, एफएमसीजी और धातु हरे निशान में रहे, जबकि ऑटो, आईटी, रियल्टी और मीडिया लाल निशान में रहे।
एशिया में, शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी स्थिर कारोबार कर रहे थे। हालाँकि, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग एक प्रतिशत से अधिक चढ़ गए।
अमेरिका में रातोंरात, वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों, एसएंडपी 500 और तकनीक-प्रधान नैस्डैक कंपोजिट ने रिकॉर्ड उच्च स्तर दर्ज किया। डॉव जोन्स 0.43 प्रतिशत चढ़ा और एसएंडपी 500 में 0.27 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 10 जुलाई को 221 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी उसी दिन 591 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
ट्रंप ने कनाडा पर 35 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है और चेतावनी दी है कि अगर ओटावा जवाबी कार्रवाई करता है तो और भी शुल्क लगाए जाएँगे। ये टैरिफ 1 अगस्त से प्रभावी होंगे। हाल ही में, ट्रंप ने ब्राजील के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जब तक कि ब्राजील पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही बंद नहीं कर देता।
राजनीति
धर्मेंद्र प्रधान का ऐसे स्वागत शर्मनाक, जैसे कोई सुपरस्टार संसद आया हो: प्रियंका गांधी

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय और गरमा गया जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर भाजपा और एनडीए सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर छात्रों के मुद्दों को दबाने और राजनीतिक संदेश देने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने सदन की कार्यवाही, पेपर लीक और एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक को लेकर भी सरकार को घेरा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को लेकर कहा कि जिन परिस्थितियों में उन्होंने इस्तीफा दिया था, उन्हें देखते हुए उनका इस तरह स्वागत किया जाना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार किया गया मानो कोई सुपरस्टार संसद पहुंचा हो।
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह आज भी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि कुछ इंस्टाग्राम हैंडल पर छात्राओं की तस्वीरें पोस्ट कर उनके खिलाफ दावे किए जा रहे हैं। यदि सरकार वास्तव में बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहती है तो उसे छात्रों को परेशान करने और उन्हें निशाना बनाने की बजाय सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
उधर, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्यक्रम गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि अदालतें पहले ही संविधान की दसवीं अनुसूची की व्याख्या कर चुकी हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केवल राजनीतिक दलों का विलय मान्य है, दलबदल नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है।
संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने पर कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने भी सरकार और लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष नहीं बल्कि सरकार, स्पीकर और ट्रेजरी बेंच की जिम्मेदारी है कि सदन सुचारू रूप से चले। सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि विपक्ष कार्यवाही में बाधा डाल रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि सदन का संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है।
इस बीच, प्रस्तावित पेपर लीक विधेयक को लेकर कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर चर्चा कर रहे हैं और सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल सरकार की नीयत का है। उनके मुताबिक 2024 के नीट पेपर लीक मामले के बाद गठित राधाकृष्णन समिति ने कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं लेकिन सरकार ने उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया।
उज्ज्वल रमन सिंह ने आरोप लगाया कि कानून बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2024 के नीट पेपर लीक मामले में निर्धारित 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई और कथित मास्टरमाइंड जमानत पर बाहर है। ऐसे में छात्रों का सरकार पर भरोसा कमजोर हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल सरकार के रुख का आकलन करने के बाद ही पेपर लीक विधेयक पर अपना अंतिम फैसला करेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
एआई निवेश से ग्लोबल आईटी खर्च 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद : रिपोर्ट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एप्लिकेशन में तेजी से बढ़ते निवेश के चलते वर्ष 2026 में वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) खर्च बढ़कर 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक होगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर सिस्टम और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज ए सर्विस (आईएएएस) पर खर्च सबसे तेज गति से बढ़ेगा, क्योंकि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च 2025 के 506 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 822 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि 62.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है।
वहीं, आईएएएस पर खर्च 29.3 प्रतिशत बढ़कर 287 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि सॉफ्टवेयर पर खर्च 15.5 प्रतिशत बढ़कर 1.47 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, डिवाइस पर खर्च लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 868 अरब डॉलर, आईटी सेवाओं पर खर्च करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 1.57 ट्रिलियन डॉलर और कम्युनिकेशन सेवाओं पर खर्च 4.4 प्रतिशत बढ़कर 1.35 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
गार्टनर के वीपी एनालिस्ट जॉन-डेविड लवलॉक ने कहा, “एआई के लिए आवश्यक कंप्यूट क्षमता तैयार करना मानव इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। एआई वर्कलोड और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के चलते हाइपरस्केलर कंपनियां और बड़े उद्यम अगली पीढ़ी के डेटा सेंटरों की क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।”
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि तकनीकी बजट अभी भी महंगाई, सेमीकंडक्टर और मेमोरी की आपूर्ति संबंधी बाधाओं, हार्डवेयर लागत में बढ़ोतरी और उद्यमों की बदलती प्राथमिकताओं के कारण दबाव में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ताजा अनुमान यह दर्शाता है कि एआई के नेतृत्व में बाजार के विस्तार को लेकर भरोसा बढ़ा है। अतिरिक्त आईटी खर्च का बड़ा हिस्सा अब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सेवाओं और सॉफ्टवेयर पर केंद्रित होगा, जबकि पारंपरिक तकनीकी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि देखने को मिलेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां एंटरप्राइज एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एआई-अनुकूलित सर्वर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई-रेडी सॉफ्टवेयर में तेजी से निवेश कर रही हैं। इसके चलते एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर वैश्विक आईटी खर्च के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र बन गए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्दारमैया का ऐलान, 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है। उनकी इस घोषणा से समर्थकों में मायूसी देखने को मिली क्योंकि कई लोगों ने उनसे राजनीति में कम से कम एक दशक और सक्रिय रहने की अपील की थी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि राजनीतिक जीवन के 50 साल सक्रिय रहने के बाद अब वह सक्रिय राजनीति से किनारा करेंगे लेकिन समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
हालांकि, समर्थकों की अपील के बाद भी सिद्दारमैया अपने फैसले पर अडिग रहे और संकेत दिया कि 2028 का चुनाव उनके चुनावी राजनीतिक सफर का आखिरी पड़ाव नहीं बल्कि उससे पहले ही वह चुनावी राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
सिद्दारमैया ने यह बात मांड्या में आयोजित दिवंगत केआर पेटे कृष्णा की जयंती कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने उनसे अपना फैसला बदलने का आग्रह किया और भविष्य में भी चुनाव लड़ते रहने की अपील की लेकिन उन्होंने दोहराया कि वह 2028 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे।
उनके इस बयान को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। लंबे समय से राज्य की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे सिद्दारमैया ने अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अब चुनावी राजनीति से दूरी बनाने की तैयारी कर चुके हैं।
बता दें कि कर्नाटक विधानसभा का अगला चुनाव मई 2028 तक होने की संभावना है। मौजूदा विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 13 मई 2028 को समाप्त होगा जिसके बाद नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कराए जाएंगे।
कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 निर्वाचित सीटें हैं। इनमें 36 सीटें अनुसूचित जाति और 15 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को 113 सीटों का बहुमत हासिल करना आवश्यक होता है।
सिद्दारमैया के इस फैसले के बाद अब कर्नाटक की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का नेतृत्व कौन करेगा और पार्टी चुनावी रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाएगी।
-
दुर्घटना11 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
