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Saturday,31-October-2026
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आईआईएम से लीडरशिप ट्रेनिंग लेंगे दिल्ली के स्कूल प्रिंसिपल

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Manish-Sisodia

आईआईएम अहमदाबाद दिल्ली सरकार के 50 स्कूलों के प्राचार्यो को नेतृत्व और सशक्तीकरण प्रशिक्षण देगा। इसके लिए आईआईएम अहमदाबाद के साथ एससीईआरटी दिल्ली ने समझौता किया है। इसके तहत विगत चार साल से प्राचार्यो को प्रशिक्षण मिल रहा है।

प्राचार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नेतृत्व दक्षता का निर्माण, उन्हें सशक्त बनाने और अपने स्कूल के प्रति जवाबदेही पैदा करना है।

Manish Sisodia

सिसोदिया ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “इस कार्यक्रम के तहत 700 स्कूलों के प्राचार्यो को प्रशिक्षण मिल चुका है। शिक्षाविदों से लेकर प्रशासन तक और योजना बनाने से लेकर निर्णय लेने तक मैं चाहता हूं कि स्कूल विकेंद्रीकृत स्वायत्त संस्थान बनें और शिक्षा का दायित्व संभालें।”

दिल्ली सरकार के मुताबिक स्कूलों के प्राचार्यो के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने स्कूलों का पूरा दायित्व लें। दिल्ली सरकार अपने स्कूलों को विकेंद्रीकृत स्वायत्त संस्थाओं के रूप में देखना चाहती है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि प्राचार्य ही स्कूल चलाते हैं। मंत्री और अधिकारी सिर्फ फैसिलिटेटर हैं। स्कूल प्राचार्यो का दायित्व है कि स्कूलों के सुचारू संचालन पर ध्यान दें और उनके सुधार की दिशा में काम करें। स्कूल चलाना प्रत्येक स्कूल के प्रिंसिपल की जिम्मेदारी है जो पूरे स्कूल की व्यवस्था के लिए केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।

मनीष सिसोदिया ने कोरोना महामारी के दौरान यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के लिए आईआईएम अहमदाबाद को धन्यवाद दिया। अनिश्चितता के इस दौर में जब स्कूल बंद हैं और नियमित कक्षाएं नहीं हो रही हैं, ऑनलाइन लर्निग का महत्व बढ़ जाता है। सिसोदिया ने कहा, “ऑनलाइन शिक्षण कोई सम्पूर्ण समाधान नहीं हो सकता है, लेकिन यह आज की जरूरत है। सिसोदिया ने सभी स्कूल प्रिंसिपलों से इसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध होने का अनुरोध किया।”

इस दौरान आईआईएम अहमदाबाद की निहारिका वोहरा ने स्कूल प्रिंसिपल की भूमिका पर प्रकाश डाला। राजीव शर्मा ने नवाचारों के लिए समाज और स्कूल की भूमिका पर चर्चा की।

राष्ट्रीय समाचार

1 नवंबर को प्रस्तावित रैली से व्यापारी वर्ग में चिंता, सीटीआई ने इंडिया ब्लॉक के घटक दलों को लिखा पत्र

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1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, उद्धव ठाकरे समेत सभी घटक दलों को पत्र लिखकर रैली को दीपावली के बाद कराने की मांग की है।

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि व्यापारी वर्ग रैली का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन 1 नवंबर, धनतेरस और दीपावली से पहले की तैयारियों के लिए पीक दिन है। अगर महारैली का आयोजन होता है तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप हो जाएगा।

सीटीआई ने इसके लिए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को टालने का अनुरोध किया। सीटीआई इससे पहले राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत करा चुकी है।

सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 20 बाजार आते हैं जो 300 साल पुराने हैं और पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

इन बाजारों में रोजाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5000 ट्रक-टेम्पो माल लाते हैं और यहां से 3000 ट्रक रोजाना गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों समेत देशभर के सभी राज्यों में माल ले जाते हैं।

व्यापारी वर्ग के अनुसार, ऐसी स्थिति में अगर महारैली होती है तो 31 अक्टूबर दोपहर से ही बसें और गाड़ियां दिल्ली बॉर्डर (सिंघु, टिकरी, गाजीपुर, बदरपुर) पर आना शुरू हो सकती हैं और शाम से ही बहादुर शाह जफर मार्ग, जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग लग सकती है। ट्रांसपोर्टर 31 अक्टूबर से ही गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं। तो असर 1 नवंबर नहीं, 31 अक्टूबर से ही शुरू हो जाएगा।

सीटीआई ने कहा कि 1 नवंबर की रैली को दीपावली बाद 10 या 11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई विघ्न न पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए, जहां 15,000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 से बढ़कर 68.4 प्रतिशत हुआ, एक अरब लोग इसके दायरे में

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भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे का तेजी से विस्तार किया है। सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया है, जिससे एक अरब से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।

शनिवार को जारी फैक्टशीट में बताया गया कि ईपीएफओ के योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में ईपीएफओ के 3.49 करोड़ सदस्य थे, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ हो गए। यानी इस अवधि में करीब 4.49 करोड़ सदस्य बढ़े हैं।

सितंबर 2026 तक 7.68 लाख संस्थान ईपीएफओ में योगदान दे रहे हैं। यह पात्र श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने के लिए एक बड़ा संस्थागत आधार प्रदान करता है।

सदस्यता के साथ-साथ पेंशन सहायता भी बढ़ी है। 2014-15 में ईपीएफओ ने 51.04 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन दी थी। सितंबर 2026 तक करीब 82 लाख पेंशनभोगी पेंशन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह 31 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की वृद्धि है।

सामाजिक सुरक्षा लाभों का दायरा भी काफी बढ़ा है। 2014-15 के दौरान करीब 1.30 करोड़ दावों का निपटारा किया गया था। पिछले एक साल की अवधि में अक्टूबर 2026 तक ईपीएफओ ने 6.42 करोड़ दावों का निपटारा किया है। यह ईपीएफओ सदस्यों को दी जाने वाली सेवाओं के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है।

ईपीएफओ कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को आखिरी बार सितंबर 2014 में 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रति माह किया गया था। सितंबर 2026 में इसे और बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज मिलने की उम्मीद है। यह वेतन स्तर में बदलाव और औपचारिक रोजगार के विस्तार को दर्शाता है।

ईपीएफओ ने आंशिक निकासी से जुड़े 13 प्रावधानों को तीन श्रेणियों में समेकित किया है, जिनमें आवश्यक जरूरतें, आवास की जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। आवश्यक जरूरतों में बीमारी, शिक्षा और शादी से जुड़े खर्च शामिल हैं। इससे प्रोविडेंट फंड की बचत तक पहुंच आसान हो गई है। ईपीएफओ ने शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी है।

साथ ही, ईपीएफओ ने पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है, जिससे बिना मैनुअल हस्तक्षेप के तेजी से निकासी संभव होगी।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और शोक संतप्त परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करती है। इसे अक्टूबर 2026 में मौजूदा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) से संशोधित किया गया है। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।

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राजनीति

यूपी चुनाव 2027: गोंडा की सातों विधानसभा सीटों पर 2022 में खिला था कमल, सपा को मिली थी करारी हार

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोंडा जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर शानदार प्रदर्शन किया था। जिले की मेहनौन, कटरा बाजार, कर्नलगंज, तरबगंज, मनकापुर, गोंडा सदर और गौरा विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने अपने विरोधियों को शिकस्त देकर पार्टी का परचम लहराया था।

चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला गोंडा सदर सीट पर देखने को मिला, जहां भाजपा प्रत्याशी प्रतीक भूषण सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सूरज सिंह को 6,699 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं तरबगंज और मनकापुर जैसी सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।

विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की सभी सात सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। खास बात यह रही कि कर्नलगंज विधानसभा सीट पर पार्टी ने मौजूदा विधायक अजय प्रताप सिंह का टिकट काटकर अजय सिंह को प्रत्याशी बनाया था। इसके बावजूद भाजपा ने यहां जीत दर्ज की।

कर्नलगंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह ने जीत हासिल की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह उर्फ योगेश भैया को 35,472 वोटों से हराया था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को कुल 1,08,109 वोट मिले, जबकि सपा के योगेश प्रताप सिंह को 72,637 मत हासिल हुए थे। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी रंजीत को 7,764 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी त्रिलोकीनाथ तिवारी 3,756 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे।

कर्नलगंज सीट का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया ने पिछले सात विधानसभा चुनावों में पांच बार जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में की थी। 1991 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस सीट पर उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से बना रहा है।

गौरा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रभात कुमार वर्मा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के संजय कुमार को लगभग 22,974 वोटों से हराया था। प्रभात कुमार वर्मा को कुल लगभग 73,545 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी संजय कुमार को लगभग 50,571 मत प्राप्त हुए थी। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी राम प्रताप सिंह 31,589 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, बसपा प्रत्याशी चौधरी रविंद्र प्रताप को 11,016 वोट मिले थे।

गौरा विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच रहा। स्थानीय विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, किसान समस्याएं और जातीय समीकरण चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे। इन मुद्दों के बीच प्रभात कुमार वर्मा ने मतदाताओं का समर्थन हासिल कर भाजपा की जीत सुनिश्चित की।

कटरा बाजार विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी बावन सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बैजनाथ दुबे को लगभग 18,457 वोटों से हराया था। बावन सिंह इससे पहले 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में भी जीत हासिल कर चुके थे। 2022 में जीत दर्ज करने के साथ ही उन्होंने लगातार तीसरी बार इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया। कटरा बाजार विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की अच्छी संख्या है। इसके अलावा मुस्लिम, क्षत्रिय, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मनकापुर विधानसभा सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रमापति शास्त्री ने शानदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रमेश चंद्र गौतम को 42,349 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। रमापति शास्त्री को कुल 1,05,677 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी रमेश चंद्र गौतम को 63,328 मत प्राप्त हुए। बसपा प्रत्याशी श्याम नारायण को 6,579 वोट मिले। मनकापुर सीट पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। चुनाव में विकास कार्य, रोजगार, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। रमापति शास्त्री ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराकर एक बार फिर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति का परिचय दिया था।

मेहनौन विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी विनय कुमार ने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार नंदिता शुक्ला को 23,218 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। मेहनौन विधानसभा सीट वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। 2022 में भी विनय कुमार की जीत के साथ भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा।

तरबगंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रेम नारायण पांडेय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी के रामभजन चौबे को 53,690 वोटों से हराया। यह जिले की उन सीटों में शामिल रही, जहां भाजपा प्रत्याशी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। प्रेम नारायण पांडेय को कुल 1,25,325 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी राम भजन चौबे को 71,635 मत हासिल हुए। बसपा प्रत्याशी लालजी को 3,751 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी त्वरिता सिंह को 2,684 मत प्राप्त हुए।

तरबगंज विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबला रहा। चुनाव के दौरान स्थानीय विकास, किसान समस्याएं, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। प्रेम नारायण पांडेय ने मतदाताओं का व्यापक समर्थन हासिल करते हुए बड़ी जीत दर्ज की। जिले की सातों सीटों पर भाजपा की जीत में तरबगंज का परिणाम भी महत्वपूर्ण रहा।

गोंडा सदर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रतीक भूषण सिंह और समाजवादी पार्टी के सूरज सिंह के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने 6,699 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। प्रतीक भूषण सिंह को कुल 96,528 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी सूरज सिंह को 89,829 मत प्राप्त हुए। बसपा प्रत्याशी हम्मद जाकी 5,758 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी ताहिर बानो को 2,701 वोट मिले थे।

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