राजनीति
गांधी जयंती पर एनएसयूआई का कई मुद्दों पर सत्याग्रह
गांधी जयंती के मौके पर एनएसयूआई के कार्यकर्ता तीन मुद्दों को लेकर शुक्रवार को सत्याग्रह कर रहें हैं। किसान विरोधी कानून, हाथरस की बेटी के साथ दुष्कर्म और राहुल और प्रियंका गांधी के साथ हुई धक्कामुक्की को लेकर कार्यकर्ता विरोध जता रहे हैं। कार्यकतार्ओं का कहना है कि, सरकार सत्ता के नशे में चूर हो चुकी है, मोदी जी ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट नहीं किया जबकि अगर किसी क्रिकेटर का अंगूठा टूट जाता है तो ट्वीट करते हैं। हाथरस के डीएम का वीडियो लीक हुआ जिसमें वह पीड़ित परिवार को धमकाता नजर आ रहा है। ये दिखाता है कि सरकार की सोच क्या है।
एनएसयूआई अध्यक्ष नीरज कुंदन ने आईएएनएस को बताया, आज सत्याग्रह पर हम बैठे हैं क्योंकि जिस तरह महात्मा गांधी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सत्यग्राह पर बैठे थे, उसी तरह आज हम भी इस सरकार के विरोध में बैठे हैं।
सरकार किसान विरोधी कानून लेकर आई, हाथरस की बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ और जब राहुल और प्रियंका गांधी पीड़िता से मिलने जा रहे थे तो उनको मिलने नहीं दिया गया। वहीं उनके साथ धक्कामुक्की की गई। हम इन्हीं तीन मुद्दों के खिलाफ सत्याग्रह पर बैठे हुये हैं और हमारी लड़ाई चलती रहेगी जब तक हाथरस की बेटी को न्याय नहीं मिल जाता।
राष्ट्रीय समाचार
68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर अभ्यर्थियों का विधानसभा के सामने प्रदर्शन, पुलिस ने बसों से ईको गार्डन भेजा

उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में आरक्षण विसंगति को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर सरकार से संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सड़क पर बैठकर अपना विरोध जताया। बाद में पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर बसों से ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प हुई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों के लिए समान अर्हता मानक अपनाए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को आरक्षण का नियमानुसार लाभ नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने अधिकारों से वंचित रह गए। इस मामले में उन्होंने बेसिक शिक्षा नियमावली, उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली और एनसीटीई की गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप लगाया है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन संस्थाओं ने उनके पक्ष में संस्तुतियां और आदेश जारी किए हैं। उनकी मांग है कि ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिले।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मामला उठा था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री ने अभ्यर्थियों की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
अभ्यर्थियों ने पिछले 63 दिनों में ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, अनिल कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। उनका कहना है कि आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम कठिनाइयों के बावजूद न्याय की उम्मीद में धरने पर डटे हैं। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक और आरक्षण संबंधी अधिकारों तथा नियुक्ति के लिए है। अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि शासन से ठोस लिखित निर्णय मिलने तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का अक्टूबर में कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 22.03 मिलियन टन रहा

सरकार ने सोमवार को बताया कि अक्टूबर में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयले का उत्पादन 22.03 मिलियन टन (एमटी) रहा, जो अक्टूबर 2025 के 15.49 एमटी से अधिक है। यह सालाना आधार पर 42 प्रतिशत की वृद्धि है।
पिछले महीने कोयले की आपूर्ति सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 21.11 एमटी रही, जो अक्टूबर 2025 के 15.48 एमटी से अधिक है।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि इस क्षेत्र में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल की अप्रैल से अक्टूबर की अवधि की तुलना में, कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 11.30 प्रतिशत बढ़कर 117.23 एमटी हो गया है, जो कि पहले 105.33 एमटी था। कोयले की आपूर्ति 111.95 एमटी से बढ़कर 124.86 एमटी हो गई है। यह खनन कार्यों में बनी निरंतर तेजी को दर्शाता है।
इस क्षेत्र को और बढ़ावा देते हुए, झारखंड की लोहारी कोयला खदान को अक्टूबर 2026 में खदान खोलने की अनुमति दी गई है। यह खदान कई वर्षों से चालू होने का इंतजार कर रही थी, और इसे मिली मंजूरी मंत्रालय के व्यापार करने में आसानी सुधारों के असर को दर्शाती है।
मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही, चालू कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है।
इन खदानों से बढ़ता उत्पादन, आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करने, सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करेगा। साथ ही, यह औद्योगिक विकास के लिए जरूरी कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर, सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी आगे बढ़ाएगा।
मंत्रालय ने कहा, “ये उत्साहजनक नतीजे बेहतर परिचालन दक्षता, खनन उत्पादकता में वृद्धि और कैप्टिव तथा कमर्शियल कोयला खनन क्षेत्रों में खनन क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।”
इसके अतिरिक्त, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के चलते, अगस्त 2026 में भारत का कोयला आयात पिछले साल के इसी महीने के 111.05 मिलियन टन से 5.83 प्रतिशत घटकर 104.57 मिलियन टन रह गया। इस महीने देश का कोयला आयात 6.48 एमटी कम हुआ, जो घरेलू स्तर पर कोयले की बेहतर उपलब्धता और सप्लाई-चेन को मजबूत करने के उपायों को दिखाता है।
मंत्रालय उत्पादन में वृद्धि बनाए रखने, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने और कोयले की उपलब्धता में सुधार करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा। इसके लिए प्रगतिशील नीतियों, मजबूत नियामक निगरानी और सभी हितधारकों के निरंतर सहयोग का सहारा लिया जाएगा, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में एक भरोसेमंद योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
राष्ट्रीय समाचार
आविन ने दूध की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का रखा प्रस्ताव, सरकार की मंजूरी का इंतजार

तमिलनाडु की सहकारी दुग्ध आपूर्तिकर्ता कंपनी आविन ने खुदरा दूध कीमतों में 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। संस्था का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत और दूध बिक्री केंद्र संचालकों की वित्तीय चुनौतियों को देखते हुए यह कदम आवश्यक हो गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी तभी लागू होगी जब राज्य सरकार इसे मंजूरी देगी।
आविन सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित 5 रुपए की बढ़ोतरी में से 4 रुपए सहकारी समिति को मिलेंगे, जबकि 1 रुपया दूध आउटलेट संचालकों के लिए निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य उनके कारोबार को आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बनाना है।
आविन प्रतिदिन लगभग 35 लाख लीटर दूध की खरीद करती है, जबकि अकेले चेन्नई में इसकी दैनिक बिक्री करीब 15 लाख लीटर है। अपेक्षाकृत कम कीमत के कारण आविन दूध घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों दोनों के बीच लोकप्रिय है।
वर्तमान में 500 मिलीलीटर के नारंगी पैकेट वाला दूध 30 रुपए में बिकता है, जबकि समान मात्रा के हरे और बैंगनी पैकेट की कीमत 24 रुपए है। नीले पैकेट की कीमत 20 रुपए है।
दूध विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें प्रति पैकेट केवल 75 पैसे का कमीशन मिलता है, जो बिजली बिल, दुकान किराया और अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कई विक्रेता लगातार मांग होने के बावजूद अपने कारोबार को बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण कई नए खुले आविन आउटलेट कुछ महीनों के भीतर बंद हो गए हैं। यही वजह है कि प्रस्तावित मूल्य वृद्धि में विक्रेताओं के लिए अतिरिक्त सहायता का प्रावधान रखा गया है।
आविन और निजी ब्रांडों के बीच बढ़ते मूल्य अंतर ने व्यावसायिक ग्राहकों की मांग भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, निजी कंपनियां दूध 75 रुपए प्रति लीटर से अधिक कीमत पर बेच रही हैं। इसके चलते होटल, चाय की दुकानें और मिठाई विक्रेता बड़ी मात्रा में आविन दूध खरीदते हैं, जिससे कई बार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्धता प्रभावित होती है।
आविन का कहना है कि कम बिक्री मूल्य का दबाव किसानों, सहकारी समिति और खुदरा विक्रेताओं तीनों पर पड़ रहा है। हाल ही में सरकार द्वारा दूध खरीद मूल्य बढ़ाए जाने से किसानों को राहत मिली है, लेकिन सहकारी संस्था और उसके वितरण नेटवर्क के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों का समाधान अभी भी आवश्यक है।
कंपनी ने यह भी उल्लेख किया है कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक में हाल ही में दूध की कीमतों में 8 रुपए प्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है, जबकि तमिलनाडु के लिए प्रस्तावित बढ़ोतरी उससे कम है।
फिलहाल 5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल प्रस्ताव के रूप में सरकार के विचाराधीन है। जब तक राज्य सरकार मंजूरी नहीं देती, तब तक मौजूदा खुदरा कीमतें ही लागू रहेंगी।
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