अंतरराष्ट्रीय
साहा ने पत्रकार को दी चेतावनी, बोले, अगर ऐसा दोबारा हुआ तो मैं पीछे नहीं हटूंगा
भारत के बल्लेबाज रिद्धिमान साहा ने मंगलवार को कहा कि वह आहत हैं, लेकिन विकेटकीपर उस पत्रकार के नाम का खुलासा नहीं करेंगे, जिसने उन्हें पिछले हफ्ते धमकी भरे मैसेज किए थे। सीनियर विकेटकीपर ने एक व्हाट्सएप चैट शेयर की थी, जिसमें एक पत्रकार ने साहा को इंटरव्यू न देने के लिए धमकाया था।
भारतीय टेस्ट टीम से बाहर किए जाने वाले साहा ने कहा कि इंसानियत के नाते फिलहाल पत्रकार के नाम का खुलासा नहीं करेंगे।
साहा ने लिखा, “मैं आहत हूं। मैंने सोचा कि इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए और मैं नहीं चाहता था कि कोई भी इस तरह की बदमाशी से गुजरे। मैंने फैसला किया कि मैं बाहर जाकर लोगों के सामने चैट का खुलासा करूंगा, लेकिन उसके नाम की घोषणा नहीं करूंगा।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरा स्वभाव ऐसा नहीं है कि मैं किसी का करियर खत्म करने की हद तक किसी को नुकसान पहुंचाऊं। इसलिए इंसानियत के नाते उसके परिवार को देखते हुए मैं फिलहाल नाम उजागर नहीं कर रहा हूं, लेकिन अगर ऐसी कोई पुनरावृत्ति होती है, मैं पीछे नहीं हटूंगा।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं उन सभी को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने समर्थन दिया है और मदद करने की इच्छा को बढ़ाया है। मेरा उन सबको आभार।”
घटना के बाद वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह सहित क्रिकेट जगत साहा के समर्थन में उतर आया था।
इससे पहले दिन में भारतीय क्रिकेटर्स एसोसिएशन ने एक बयान जारी किया और संस्था ने पत्रकार द्वारा साहा को भेजे गए धमकी भरे मैसेजो की निंदा की।
इस बीच टीम इंडिया ने एक युवा विकेटकीपर बल्लेबाज को तैयार करने का फैसला किया है और इसी वजह से श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट टीम में साहा की अनदेखी की गई थी।
फिलहाल केएस भारत को श्रीलंका सीरीज के लिए बैकअप के तौर पर टेस्ट टीम में शामिल किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव: युद्ध खत्म करने की शर्तें तय

तेहरान, 8 अप्रैल : ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के साथ दो हफ्ते का सीजफायर युद्ध के खत्म होने का संकेत नहीं है। क्योंकि उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव के विवरण पर अभी बातचीत होनी बाकी है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ के अनुसार, तेहरान की ओर से रखे जाने वाले 10 सूत्रीय प्रस्ताव में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर ईरान का लगातार नियंत्रण, ईरान के परमाणु संवर्धन अधिकारों की स्वीकृति, सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना, सभी द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाना और ईरान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना शामिल है। अमेरिका की यह प्रतिबद्धता कि वह आगे कोई भी आक्रामक कार्रवाई नहीं करेगा और ईरान के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करने की भी मांग रखी गई है।
इसके अतिरिक्त, मांगों में युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा देना, क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर शत्रुता की समाप्ति भी शामिल है। काउंसिल ने एक बयान भी जारी किया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित दो हफ्ते के सीजफायर की पुष्टि की गई।
बयान के मुख्य बिंदुओं में यह उल्लेख किया गया है कि ईरान ने एक बड़ी जीत हासिल की है और अमेरिका को अपनी 10-सूत्रीय योजना को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया है। इस योजना में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से नियंत्रित मार्ग और प्रतिरोध की धुरी के सभी तत्वों के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने की जरूरत शामिल है।
ईरान के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 10-सूत्रीय योजना को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया है। बयान में आगे कहा गया है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की मंजूरी के तहत, ईरान युद्धविराम के विवरण को अंतिम रूप देने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत करेगा।
बयान में कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष पर पूर्ण अविश्वास के साथ ये बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में शुरू होगी और ईरान इन वार्ताओं के लिए दो हफ्ते का समय देगा। आपसी सहमति से इस अवधि को बढ़ाया जा सकता है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बाध्यकारी प्रस्ताव की भी मांग की, जो अमेरिका के साथ सभी समझौतों को बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय कानून में बदल देगा।
इसमें यह भी कहा गया कि सीजफायर का मतलब युद्ध की समाप्ति या 10-सूत्रीय योजना के विवरण पर चल रही बातचीत का अंत नहीं है। बयान में आगे ईरानियों से अमेरिका के साथ बातचीत की प्रक्रिया पर भरोसा करने और उसका समर्थन करने की अपील की गई है। यह प्रक्रिया सर्वोच्च नेता और व्यवस्था के उच्चतम स्तरों की निगरानी में हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप के कड़े रुख में नरमी: 14 दिनों तक ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोकी, बताया द्विपक्षीय युद्धविराम का हिस्सा

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वाशिंगटन, 8 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है। कि वह ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो हफ्तों के लिए रोकने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले को इस शर्त से जोड़ा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोले और व्यापक शांति समझौते के लिए बातचीत जारी रखे।
एक बयान में, ट्रंप ने कहा कि यह फैसला “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के आधार पर” लिया गया है, जिन्होंने तनाव बढ़ने पर संयम बरतने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा, “इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो जाए, मैं दो हफ़्ते की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने पर सहमत हूं।” उन्होंने इस कदम को “दो-तरफा संघर्ष-विराम” का हिस्सा बताया।
यह घोषणा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम विराम का संकेत है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा, “हम अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरा कर चुके हैं और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। इससे मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।”
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका को ईरान की ओर से 10 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिसे उन्होंने बातचीत के लिए उपयोगी आधार बताया।
उन्होंने कहा, “अमेरिका और ईरान के बीच पुराने ज्यादातर विवादों पर सहमति बन चुकी है।” उनका मानना है कि यह दो हफ्तों का समय समझौते को अंतिम रूप देने में मदद करेगा। ट्रंप ने कहा, “इन दो हफ्तों में समझौते को पूरी तरह तय किया जा सकेगा।”
उन्होंने इस घटनाक्रम को क्षेत्र में स्थिरता लाने के प्रयासों में एक बड़ी सफलता के रूप में पेश किया और कहा कि “इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के करीब पहुँचना हमारे लिए गर्व की बात है।”
यह बयान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर उस समय पोस्ट किया, जब उन्होंने ईरान को रात 8 बजे (ईएसटी) तक समझौते के लिए राजी होने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान नहीं माना, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान-अमेरिका तनाव: पाक प्रधानमंत्री ने ट्रंप से सैन्य कार्रवाई टालने का किया अनुरोध

trump
वाशिंगटन, 8 अप्रैल : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सार्वजनिक रूप से अपील की है। कि वे एक अहम समय-सीमा को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें, ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बातचीत का रास्ता खुला रह सके। व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव पर विचार करने के संकेत दिए।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिना लेविट ने मीडिया से कहा कि राष्ट्रपति को इस प्रस्ताव की जानकारी दे दी गई है और जल्द ही इसका जवाब दिया जाएगा। यह इस मामले पर अमेरिका की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है।
शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि कूटनीतिक प्रयास लगातार आगे बढ़ रहे हैं और जल्द ही ठोस नतीजे सामने आ सकते हैं। उन्होंने अमेरिका से अनुरोध किया कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए समय-सीमा दो हफ्ते बढ़ाई जाए।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ईमानदारी से ईरान से अनुरोध करता है कि वह सद्भावना के तौर पर दो हफ्तों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे।
इसके साथ ही उन्होंने सभी लड़ाई में शामिल पक्षों से कहा कि वे दो हफ्तों के लिए हर जगह युद्धविराम लागू करें, ताकि बातचीत के जरिए युद्ध को खत्म किया जा सके और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता बनी रहे।
यह अपील ऐसे समय आई है जब हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने एक तरफ बातचीत की इच्छा जताई है, तो दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी भी दी है। पिछले 48 घंटों में ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने साफ कहा है कि आगे क्या होगा, यह ईरान के रुख पर निर्भर करेगा।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि अब फैसला ईरान को करना है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन उसके पास कड़ी कार्रवाई करने की क्षमता है। वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वैश्विक समुद्री मार्गों में बाधा के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को बेहद अहम बताया।
बता दें कि ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमलों को सप्ताह के लिए स्थगित करने पर सहमति जता दी है। इसको एक ठोस शांति समझौता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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