राजनीति
केरल से तमिलनाडु जाने वाले यात्रियों के लिए आरटी-पीसीआर का निगेटिव सर्टिफिकेट जरूरी
तमिलनाडु सरकार ने केरल से राज्य की यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक निगेटिव आरटी-पीसीआर परीक्षण अनिवार्य कर दिया है। इसे 5 अगस्त से लागू कर दिया जाएगा। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री, मा सुब्रमण्यम ने कहा कि, केरल में कोविड के मामलों में वृद्धि के बाद यह निर्णय लिया गया।
केरल के लोग जो यात्रा से 14 दिन पहले ली गई दूसरी खुराक के साथ पूरी तरह से टीकाकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं, उन्हें ही 5 अगस्त से राज्य में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
हालांकि, तमिलनाडु के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे कम्बम, नागरकोइल और वालयार में प्रतिबंध सोमवार से लागू हो गए हैं, क्योंकि अधिकारियों ने यात्रा से 14 दिन पहले निगेटिव आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र या टीकाकरण प्रमाण पत्र पर जोर दिया है।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव, जे राधाकृष्णन के साथ मा सुब्रमण्यम ने रविवार को हवाई अड्डे पर कोविड -19 स्क्रीनिंग की निगरानी के लिए चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनलों का निरीक्षण किया।
मंत्री मा सुब्रमण्यम ने आईएएनएस को बताया, “केरल में मामले बढ़ रहे हैं और इसलिए तमिलनाडु राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने यात्रा के 72 घंटों के भीतर निगेटिव आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र या दूसरी खुराक के साथ पूरी तरह से टीकाकरण प्रमाण पत्र लिया है। यात्रा से 14 दिन पहले लिया गया टीका केरल से तमिलनाडु पहुंचने वाले लोगों के लिए जरूरी है।”
मंत्री ने यह भी कहा कि, सड़क, रेल या हवाई मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को ये प्रमाण पत्र तमिलनाडु की सीमा पर प्रस्तुत करना होगा और प्रमाण पत्र दिखाने वालों को ही राज्य में प्रवेश की अनुमति होगी।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने उन जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है जहां कोविड के मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे मामलों की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए निवारक उपायों की निगरानी और लागू किया जा सके।
कर्नाटक ने एक स्वास्थ्य चेतावनी भी जारी की है जिसमें कहा गया है कि, केरल के लोगों को उस राज्य में यात्रा करने की अनुमति तभी दी जाएगी जब वे यात्रा के 72 घंटों के भीतर निगेटिव आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेंगे। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने केरल के लोगों के लिए टीके की दोनों खुराक लेने वालों के लिए भी निगेटिव आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 19 से बढ़कर 68.4 प्रतिशत हुआ, एक अरब लोग इसके दायरे में

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे का तेजी से विस्तार किया है। सरकारी फैक्टशीट के मुताबिक, देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया है, जिससे एक अरब से अधिक लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।
शनिवार को जारी फैक्टशीट में बताया गया कि ईपीएफओ के योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में ईपीएफओ के 3.49 करोड़ सदस्य थे, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ हो गए। यानी इस अवधि में करीब 4.49 करोड़ सदस्य बढ़े हैं।
सितंबर 2026 तक 7.68 लाख संस्थान ईपीएफओ में योगदान दे रहे हैं। यह पात्र श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने के लिए एक बड़ा संस्थागत आधार प्रदान करता है।
सदस्यता के साथ-साथ पेंशन सहायता भी बढ़ी है। 2014-15 में ईपीएफओ ने 51.04 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन दी थी। सितंबर 2026 तक करीब 82 लाख पेंशनभोगी पेंशन लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह 31 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की वृद्धि है।
सामाजिक सुरक्षा लाभों का दायरा भी काफी बढ़ा है। 2014-15 के दौरान करीब 1.30 करोड़ दावों का निपटारा किया गया था। पिछले एक साल की अवधि में अक्टूबर 2026 तक ईपीएफओ ने 6.42 करोड़ दावों का निपटारा किया है। यह ईपीएफओ सदस्यों को दी जाने वाली सेवाओं के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है।
ईपीएफओ कवरेज के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को आखिरी बार सितंबर 2014 में 6,500 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रति माह किया गया था। सितंबर 2026 में इसे और बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह करने को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज मिलने की उम्मीद है। यह वेतन स्तर में बदलाव और औपचारिक रोजगार के विस्तार को दर्शाता है।
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी से जुड़े 13 प्रावधानों को तीन श्रेणियों में समेकित किया है, जिनमें आवश्यक जरूरतें, आवास की जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं। आवश्यक जरूरतों में बीमारी, शिक्षा और शादी से जुड़े खर्च शामिल हैं। इससे प्रोविडेंट फंड की बचत तक पहुंच आसान हो गई है। ईपीएफओ ने शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी है।
साथ ही, ईपीएफओ ने पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया है, जिससे बिना मैनुअल हस्तक्षेप के तेजी से निकासी संभव होगी।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और शोक संतप्त परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करती है। इसे अक्टूबर 2026 में मौजूदा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) से संशोधित किया गया है। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।
राजनीति
यूपी चुनाव 2027: गोंडा की सातों विधानसभा सीटों पर 2022 में खिला था कमल, सपा को मिली थी करारी हार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गोंडा जिले की सभी सात विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज कर शानदार प्रदर्शन किया था। जिले की मेहनौन, कटरा बाजार, कर्नलगंज, तरबगंज, मनकापुर, गोंडा सदर और गौरा विधानसभा सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने अपने विरोधियों को शिकस्त देकर पार्टी का परचम लहराया था।
चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला गोंडा सदर सीट पर देखने को मिला, जहां भाजपा प्रत्याशी प्रतीक भूषण सिंह ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सूरज सिंह को 6,699 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं तरबगंज और मनकापुर जैसी सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की सभी सात सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखा। खास बात यह रही कि कर्नलगंज विधानसभा सीट पर पार्टी ने मौजूदा विधायक अजय प्रताप सिंह का टिकट काटकर अजय सिंह को प्रत्याशी बनाया था। इसके बावजूद भाजपा ने यहां जीत दर्ज की।
कर्नलगंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह ने जीत हासिल की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी योगेश प्रताप सिंह उर्फ योगेश भैया को 35,472 वोटों से हराया था। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को कुल 1,08,109 वोट मिले, जबकि सपा के योगेश प्रताप सिंह को 72,637 मत हासिल हुए थे। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी रंजीत को 7,764 वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी त्रिलोकीनाथ तिवारी 3,756 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहे।
कर्नलगंज सीट का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया ने पिछले सात विधानसभा चुनावों में पांच बार जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में की थी। 1991 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए और पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस सीट पर उनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से बना रहा है।
गौरा विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रभात कुमार वर्मा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के संजय कुमार को लगभग 22,974 वोटों से हराया था। प्रभात कुमार वर्मा को कुल लगभग 73,545 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी संजय कुमार को लगभग 50,571 मत प्राप्त हुए थी। इस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी राम प्रताप सिंह 31,589 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, बसपा प्रत्याशी चौधरी रविंद्र प्रताप को 11,016 वोट मिले थे।
गौरा विधानसभा सीट पर चुनावी मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच रहा। स्थानीय विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था, किसान समस्याएं और जातीय समीकरण चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहे। इन मुद्दों के बीच प्रभात कुमार वर्मा ने मतदाताओं का समर्थन हासिल कर भाजपा की जीत सुनिश्चित की।
कटरा बाजार विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी बावन सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के बैजनाथ दुबे को लगभग 18,457 वोटों से हराया था। बावन सिंह इससे पहले 2012 और 2017 के विधानसभा चुनावों में भी जीत हासिल कर चुके थे। 2022 में जीत दर्ज करने के साथ ही उन्होंने लगातार तीसरी बार इस सीट पर भाजपा का परचम लहराया। कटरा बाजार विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की अच्छी संख्या है। इसके अलावा मुस्लिम, क्षत्रिय, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मनकापुर विधानसभा सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रमापति शास्त्री ने शानदार जीत दर्ज की थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रमेश चंद्र गौतम को 42,349 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। रमापति शास्त्री को कुल 1,05,677 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी रमेश चंद्र गौतम को 63,328 मत प्राप्त हुए। बसपा प्रत्याशी श्याम नारायण को 6,579 वोट मिले। मनकापुर सीट पर भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। चुनाव में विकास कार्य, रोजगार, किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। रमापति शास्त्री ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराकर एक बार फिर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति का परिचय दिया था।
मेहनौन विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी विनय कुमार ने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार नंदिता शुक्ला को 23,218 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। मेहनौन विधानसभा सीट वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर अब तक हुए विधानसभा चुनावों में राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी जबकि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। 2022 में भी विनय कुमार की जीत के साथ भाजपा ने अपना दबदबा कायम रखा।
तरबगंज विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रेम नारायण पांडेय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए समाजवादी पार्टी के रामभजन चौबे को 53,690 वोटों से हराया। यह जिले की उन सीटों में शामिल रही, जहां भाजपा प्रत्याशी ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। प्रेम नारायण पांडेय को कुल 1,25,325 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी राम भजन चौबे को 71,635 मत हासिल हुए। बसपा प्रत्याशी लालजी को 3,751 वोट मिले जबकि कांग्रेस प्रत्याशी त्वरिता सिंह को 2,684 मत प्राप्त हुए।
तरबगंज विधानसभा सीट पर भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबला रहा। चुनाव के दौरान स्थानीय विकास, किसान समस्याएं, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। प्रेम नारायण पांडेय ने मतदाताओं का व्यापक समर्थन हासिल करते हुए बड़ी जीत दर्ज की। जिले की सातों सीटों पर भाजपा की जीत में तरबगंज का परिणाम भी महत्वपूर्ण रहा।
गोंडा सदर विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रतीक भूषण सिंह और समाजवादी पार्टी के सूरज सिंह के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने 6,699 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। प्रतीक भूषण सिंह को कुल 96,528 वोट मिले जबकि सपा प्रत्याशी सूरज सिंह को 89,829 मत प्राप्त हुए। बसपा प्रत्याशी हम्मद जाकी 5,758 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी ताहिर बानो को 2,701 वोट मिले थे।
राजनीति
पीएम मोदी ने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल को अर्पित की पुष्पांजलि, 400 करोड़ रुपए से अधिक की योजनाओं का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर गुजरात के केवड़िया स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन शनिवार को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर केवड़िया पहुंचे। यहां उन्होंने ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ पर सरदार पटेल को पुष्प अर्पित किए।
इसके बाद, प्रधानमंत्री ने एकता नगर में 400 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया। इनमें सीवेज व जल उपचार संयंत्र, नर्मदा घाट का उन्नयन, आईआरसीटीसी होटल, वर्षावन और इको-ट्रेल सहित पर्यटन व बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
उन्होंने एकता नगर में ‘रेन फॉरेस्ट’ परियोजना का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण कर इसकी प्रमुख विशेषताओं का जायजा लिया।
इससे पहले, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट के जरिए सरकार पटेल को याद किया। उन्होंने लिखा, “अखंड भारत के प्रणेता देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मां भारती की सेवा में उनका त्याग और समर्पण विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्रोत है।”
एक अन्य पोस्ट के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें केवड़िया में आयोजित सांस्कृतिक विरासत, विविधता और राष्ट्रीय एकता पर आधारित ‘भारत पर्व’ की झलकियां दिखाई गईं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “अद्भुत भारत की विविध परंपराएं और संस्कृतियां। केवड़िया में ‘भारत पर्व’, जिसका उद्घाटन कल हुआ, हमारी एकता और जीवंतता का जश्न मनाता है।”
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