अपराध
केरल के युवा दंपति को मिली राहत, कोर्ट ने उनके बच्चे को ‘गोद लेने’ पर लगाई रोक
लगभग छह महीने तक संघर्ष के बाद केरल के एक युवा जोड़े को सोमवार को उस समय बड़ी राहत मिली, जब यहां की एक अदालत ने उनके बच्चे को गोद लेने पर रोक लगा दी। अनुपमा, नाम की 22 वर्षीय मां ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सुनने के बाद राहत की सांस ली, जिसमें आंध्र के एक दंपति को राज्य द्वारा संचालित गोद लेने वाली एजेंसियों के माध्यम से दिए गए अपने बच्चे को कानूनी गोद लेने को अंतिम रूप देना था। बड़े स्तर पर मीडिया हस्तक्षेप के बाद, न्यायालय ने आगे की सभी गोद लेने की प्रक्रियाओं पर रोक लगाने का फैसला किया।
सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में जैविक मां पेश हुई है और इसलिए गोद लेने पर रोक लगा दी जानी चाहिए।
अदालत ने न केवल आगे गोद लेने पर रोक लगा दी, बल्कि केरल पुलिस को अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। इस मामले में 1 नवंबर को विस्तृत सुनवाई होगी।
अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अनुपमा ने कहा कि वह वास्तव में खुश हैं। उन्होंने उन सभी का धन्यवाद किया जो उनके साथ खड़े थे।
अनुपमा ने कहा, “मैं वास्तव में अदालत के आदेश से खुश हूं क्योंकि अब हमें लगता है कि हम अपने बच्चे को वापस ले लेंगे। अगर इस तरह का समर्थन जल्दी मिल जाता, तो उनका बच्चा बहुत पहले ही उनके साथ हो जाता।”
राज्य की राजधानी शहर की रहने वाली अनुपमा अपने बच्चे को वापस पाने के लिए दर-दर भटक रही थीं, जिसे उसके माता-पिता ने पिछले साल अक्टूबर में यहां एक अस्पताल में जन्म देने के तुरंत बाद छीन लिया था।
एक स्थानीय माकपा नेता जयचंद्रन की बेटी अनुपमा को पार्टी की युवा शाखा के नेता अजीत, एक दलित ईसाई से प्यार हो गया था। अजीत पहले से शादीशुदा था।
इस साल की शुरुआत में अजीत के आधिकारिक रूप से तलाक के बाद से दोनों साथ रह रहे हैं।
माकपा में सबसे पहले जिस व्यक्ति से अनुपमा ने शिकायत की, वह पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात थी और राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ इस मामले को उठाने के उनके प्रयासों के बावजूद, कुछ नहीं हुआ।
अनुपमा और उनके पति ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, माकपा के कार्यवाहक सचिव ए. विजयराघवन, पुलिस और कुछ सरकारी एजेंसियों से संपर्क किया, जो गोद लेने और बच्चों से संबंधित हैं। हालांकि, उन्हें किसी भी तरफ से कोई मदद नहीं मिली। इस सप्ताह, वे मीडिया के सामने आए और तब से चीजें तेजी से चली गईं।
भले ही वह राज्य की राजधानी शहर में सबसे पुराने माकपा नेताओं में से एक की पोती हैं, लेकिन उसके माता-पिता ने यह देखने के लिए सभी प्रभाव का इस्तेमाल किया कि उसे बच्चे की कस्टडी नहीं मिले। मीडिया के आने तक, उसके माता-पिता सभी अधिकारियों को उसकी दलीलों पर अपनी आँखें बंद करने में कामयाब रहे।
विजयन की पार्टी, सीपीआई-एम, पर हर तरफ से बड़े पैमाने पर हमले हुए, और विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने ‘महिला समानता और बाल अधिकारों की बात करने के अपने दोहरे मानकों’ का नारा दिया।
अनुपमा स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया की कार्यकर्ता हैं, जबकि उनके पति माकपा की युवा शाखा में हैं।
अदालत के भी कदम उठाने के साथ, उसके माता-पिता और चार अन्य लोगों ने अग्रिम जमानत मांगी है।
अपराध
पंजाब: सीबीआई कोर्ट ने 7.8 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड केस में सात आरोपियों को तीन साल की सजा सुनाई

चंडीगढ़, 29 नवंबर: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कोर्ट ने पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर में 7.8 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड मामले में सात आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।
मामले के मुख्य आरोपियों मनीष जैन और रमेश कुमार जैन को तीन साल की कठोर कारावास (आरआई) और प्रत्येक पर 35,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि अन्य आरोपियों रचना जैन, भूपिंदर सिंह, प्रतीपाल सिंह, संजीव कुमार जैन और अनीता जैन को तीन साल की जेल की सजा और प्रत्येक पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला 4 नवंबर 2016 को बैंक ऑफ़ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मनीष ट्रेडर्स के पार्टनर मनीष जैन, रमेश कुमार जैन और कांता जैन ने बैंक के कुछ अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर 7.83 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया। सीबीआई की जांच में सामने आया कि इस साजिश के तहत बैंक को गलत तरीके से बड़ी राशि का नुकसान पहुंचाया गया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 28 जून 2017 को इस मामले में सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों की सुनवाई के बाद दोषियों को सजा सुनाई।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में साजिश के तहत बैंक को हानि पहुंचाना और फर्जीवाड़ा करना आरोपियों का मुख्य उद्देश्य था। अदालत ने मामले की पूरी जांच और चार्जशीट के आधार पर फैसला सुनाया और सभी दोषियों को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया।
इस मामले में दोषियों को दी गई सजा तीन साल की है, लेकिन जुर्माना और कड़ी निगरानी के कारण आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। सीबीआई ने कहा है कि वे भविष्य में भी ऐसे मामलों में सख्त और निष्पक्ष जांच जारी रखेंगे।
अपराध
फिल्म निर्देशक कवल शर्मा पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, निवेश के बहाने एक्ट्रेस से ठगी का आरोप

मुंबई, 29 नवंबर: भारतीय फिल्म निर्देशक और निर्माता कवल शर्मा पर फिल्मों और वेब सीरीज बनाने के बहाने पैसों की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। मुंबई की खार पुलिस ने अभिनेत्री किरण आहूजा से 71.50 लाख रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में कवल शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
किरण आहूजा और कवल शर्मा ने एक फिल्म और कई विज्ञापनों में काम किया है। शिकायत में बताया गया कि साल 2016 में किरण आहूजा और निर्माता कवल शर्मा की पहली बार एक दोस्त के जरिए मुलाकात हुई थी। मुलाकात के समय कवल शर्मा ने उन्हें बताया कि वह अंधेरी स्थित फिल्म फार्मिंग एंटरटेनमेंट नेटवर्क इंडिया नामक एक कंपनी चलाते हैं और उन्हें सीरियल में कास्ट करना चाहते हैं। उस वक्त एक्ट्रेस ने मना कर दिया था, लेकिन 7 साल बाद 2023 में दोनों की फिर से एक कार्यक्रम में मुलाकात हुई।
किरण आहूजा ने शिकायत में बताया कि कवल ने एक्ट्रेस को 3 लाख रुपए के निवेश पर अच्छा रिटर्न देने की बात कही। हालांकि उन्होंने मना कर दिया, लेकिन 2024 में कथित तौर पर दोबारा संपर्क में आने के बाद एक्ट्रेस ने कवल के प्रोडक्शन हाउस में बनने वाली वेब सीरीज “लक बाय एक्सचेंज” में 60-70 लाख रुपए निवेश किए, क्योंकि उन्हें पैसा किस्तों में लौटाने का वादा किया गया था। संतोषजनक जानकारी न मिलने के बाद एक्ट्रेस ने पैसे वापस करने की मांग की, लेकिन जो चेक निर्माता की तरफ से दिए गए, वे बाउंस हो गए।
ऐसे में एक्ट्रेस ने परेशान होकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
इससे पहले इसी साल जुलाई में भी हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने चेक बाउंस के मामले में कवल शर्मा को गिरफ्तार किया था। साल 2022 में पैसों की धोखाधड़ी को लेकर हल्द्वानी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 1 साल की सजा और 51.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था। कवल शर्मा ने कई हिंदी फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया है। उन्होंने ‘हीरालाल पन्नालाल,’ ‘गुनाहों का देवता,’ ‘जीते है शान से’ और ‘मर मिटेंगे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।
अपराध
गुजरात : जेल में कैद नारायण साईं पर एक और मामला दर्ज, सेल से मोबाइल फोन बरामद

सूरत, 29 नवंबर: आसाराम के बेटे नारायण साईं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बलात्कार के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे नारायण साईं के खिलाफ सूरत की लाजपोर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन रखने और उसका इस्तेमाल करने का नया मामला दर्ज किया गया है। यह मामला सचिन पुलिस थाने में दर्ज हुआ है।
जेल प्रशासन को गुरुवार को गुप्त सूचना मिली थी कि हाई-सिक्योरिटी बैरक नंबर-1 में बंद नारायण साईं के पास मोबाइल फोन है। सूचना मिलते ही जेल स्क्वॉड ने तुरंत कार्रवाई की और नारायण साईं के अलग सेल (सेल नंबर-1) की गहन तलाशी ली। तलाशी के दौरान लोहे के मुख्य दरवाजे के पीछे एक स्मार्टफोन चुंबक की मदद से चिपकाया हुआ मिला। फोन के अलावा उसके पास जियो कंपनी का एक सिम कार्ड भी बरामद हुआ।
जांच में पता चला कि नारायण साईं बेहद शातिराना तरीके से फोन का इस्तेमाल करता था। वह बातचीत पूरी होने के बाद तुरंत फोन से बैटरी और सिम कार्ड निकाल लेता था। सिम कार्ड को वह अपने पास रखता था, जबकि बैटरी को सुरक्षा के लिए सेंट्री रूम में छिपा देता था। जेल स्टाफ की सतर्कता से सेंट्री रूम के दरवाजे में लगे नाकूचे (की-होल) के अंदर छिपाई गई बैटरी भी बरामद कर ली गई।
जेल प्रशासन की शिकायत पर सचिन पुलिस ने नारायण साईं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं तथा गुजरात जेल मैनुअल के नियमों के उल्लंघन के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस आगे की जांच कर रही है कि नारायण साईं यह मोबाइल फोन कहां से और कैसे लाया तथा इसका इस्तेमाल किन-किन लोगों से संपर्क करने के लिए कर रहा था।
एसीपी नीरव गोहिल ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “नारायण साईं जहांगीरपुरा पुलिस स्टेशन रेप केस में दोषी कैदी है। गुरुवार को लाजपोर सेंट्रल जेल के स्टाफ को जानकारी मिली कि नारायण साईं ने अपनी बैरक के अंदर एक मोबाइल फोन छिपा रखा है। इस इनपुट पर कार्रवाई करते हुए, जेल सिक्योरिटी स्क्वॉड ने बैरक नंबर 1 में तलाशी ली, जहां उसे एक अलग सेल में रखा गया था। तलाशी के दौरान, सेल के गेट के पीछे एक मोबाइल फोन मिला, जिसे मैग्नेट से लोहे के दरवाजे से चिपकाया गया था, और उसे तुरंत बरामद कर लिया गया।”
उन्होंने बताया कि जेल में मोबाइल फोन रखना गंभीर अपराध है। नारायण साईं के सेल से फोन, सिम और बैटरी बरामद हुई है। हमने जेल प्रशासन की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले की गहन जांच की जा रही है।
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