राष्ट्रीय
वित्त वर्ष 2021 में रिलायंस इंडस्ट्रीज का प्रदर्शन उम्मीदों से बेहतर : मुकेश अंबानी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और एमडी मुकेश अंबानी ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा महामारी के बावजूद वित्त वर्ष 2021 में कंपनी का प्रदर्शन उम्मीदों से बेहतर रहा।
ऑयल-टू-टेलीकॉम दिग्गज की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) को संबोधित करते हुए, अंबानी ने महामारी के दौरान मानवीय प्रयासों के लिए कंपनी और उसके कर्मचारियों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, ” मुझे आपके साथ यह साझा करते हुए गर्व और नम्रता महसूस हो रही है कि पूरे कोविड संकट के दौरान, हमारा रिलायंस परिवार उद्देश्य और राष्ट्रीय कर्तव्य की भावना के साथ इस अवसर पर आगे बढ़ा है।”
अंबानी ने कहा, ” हमारा पूरा संगठन सेवा की भावना से सक्रिय हो गया है। हर एक कर्मचारी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोविड के खिलाफ लड़ाई में भाग लिया है और रिलायंस का सद्भावना राजदूत बन गया है।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में कंपनी के प्रयासों ने हमारे संस्थापक अध्यक्ष धीरूभाई अंबानी को गौरवान्वित किया होगा।
इसका अलावा रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए, महामारी के बीच फाउंडेशन द्वारा उठाए गए कदमों की रूपरेखा तैयार की।
उन्होंने कहा कि रिलायंस अब भारत के कुल मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का 11 फीसदी उत्पादन करती है।
राजनीति
‘बलिदान के लिए देश सदैव ऋणी रहेगा’, राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने पुलवामा हमले के शहीदों को याद किया

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा हमले की 7वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने शहीदों को याद किया है। राहुल गांधी ने कहा कि भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पुलवामा में 2019 के दुस्साहसी आतंकी हमले में शहीद हुए हमारे वीर जवानों को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। भारत माता की रक्षा में उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।” राहुल गांधी ने अपने जम्मू-कश्मीर दौरे की तस्वीर भी शेयर की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी पुलवामा आतंकी हमले में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “हम सब अपने शहीदों और उनके परिवारजनों के सदैव ऋणी रहेंगे। हमारे जांबाज सैनिकों का साहस, समर्पण, सेवा और शहादत हम सबके लिए अनुकरणीय है।”
इससे पहले, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी। बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
वहीं, एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिखा, “मैं 2019 में आज ही के दिन पुलवामा हमले में शहीद हुए बहादुर सीआरपीएफ जवानों को सलाम करती हूं।”
राजनीति
पुलवामा हमले की बरसी: पीएम मोदी ने किया शहीद जवानों को याद, खड़गे-शरद पवार ने भी दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 14 फरवरी : पुलवामा आतंकी हमले को सात साल हो गए हैं। यह भारत के इतिहास का एक दुखद अध्याय था जब देश ने आतंकी हमले में 40 बहादुर जवानों को खो दिया। पूरा देश उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दे रहा है। पुलवामा हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति सेवा हमारी सामूहिक चेतना में सदा अमिट रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “2019 में आज के दिन पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर नायकों को याद कर रहा हूं। उनकी निष्ठा, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति सेवा हमारी सामूहिक चेतना में सदा अमिट रहेंगे। हर भारतीय को उनके अटूट साहस से शक्ति मिलती है।”
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलवामा के आतंकी हमले में शहीद हुए सभी अमर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “मां भारती के वीर सपूतों का अमर बलिदान हमें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने की प्रेरणा देता है। आज भारत आतंकवाद के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस की नीति’ के साथ एकजुटता एवं मजबूती से खड़ा है और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है।”
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “मैं साल 2019 में आज ही के दिन पुलवामा में हुए कायराना आतंकी हमले में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और राष्ट्र के प्रति उनकी अभूतपूर्व सेवा का स्मरण करता हूं। हमारे अमर जवानों का बलिदान भारतीय शौर्य और पराक्रम के उस अजेय संकल्प का उद्घोष है, जो हमें आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्र आपके सर्वोच्च बलिदान के लिए सदैव ऋणी रहेगा।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर जवानों को याद किया। उन्होंने लिखा, “हमारे अमर जवानों का बलिदान भारतीय शौर्य के उस अजेय संकल्प का उद्घोष है, जो हमें आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने हेतु सदैव प्रेरित करता है।”
विपक्ष के भी कई नेताओं ने पुलवामा हमले में शहीद हुए वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लिखा, “हम भारत माता के उन वीर शहीदों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने पुलवामा में अपने प्राणों की आहुति दी।”
खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “बहादुर जवानों का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति अटल समर्पण हमेशा हमारी यादों में रहेगा। उनका सर्वोच्च बलिदान चिरकाल तक अमर रहेगा। हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे।”
एनसीपी-एसपी के प्रमुख शरद पवार ने लिखा, “भारतीय सैनिकों ने हमेशा अपने साहस, बहादुरी, त्याग और बलिदान से देश की सुरक्षा व संप्रभुता को बनाए रखा है। उनकी अटूट राष्ट्र निष्ठा और देशभक्ति को हमेशा याद रखा जाएगा। पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी शहीद सैनिकों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।”
अंतरराष्ट्रीय
बांग्लादेश में बीएनपी की सरकार, भारत समेत दक्षिण एशिया पर क्या हो सकता है असर?

नई दिल्ली, 13 फरवरी : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराए जाने के लगभग 18 महीनों के बाद गुरुवार को संसदीय चुनाव हुए। शुक्रवार को सामने आए परिणामों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) गठबंधन ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की। इससे साफ हो गया है कि बांग्लादेश में बीएनपी की बहुमत की सरकार बन रही है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बीएनपी की सरकार आने के बाद बांग्लादेश के भारत और दक्षिण एशिया के साथ रिश्तों पर कैसा असर पड़ेगा।
बांग्लादेश की कमान बीएनपी के हाथों में आने के बाद दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच क्या संबंध रहेंगे। शेख हसीना की सरकार गिराए जाने के बाद से बांग्लादेश में यूनुस की अंतरिम सरकार के शासन में भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव देखने को मिला।
इसके साथ ही बांग्लादेश में पाकिस्तान को एंट्री मिल गई। इतना ही नहीं, बांग्लादेश में आईएसआई की सक्रियता भी बढ़ी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसका मकसद भारत के खिलाफ इन युवाओं का इस्तेमाल करना है।
जिस तरह से यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान के साथ दोस्ती में गहराई आई है, बीएनपी के आने से इसमें कुछ बदलाव देखने को जरूर मिलेगा। बीएनपी भारत के साथ अपने राजनयिक और कूटनीतिक संबंध बेहतर करने का प्रयास करेगी। बीएनपी की वापसी से दोनों देशों के बीच सीमा, अवैध आव्रजन और जल बंटवारे (जैसे तीस्ता) जैसे मुद्दे फिर प्रमुख बन सकते हैं।
इससे पहले पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी अच्छे थे। हालांकि, अवामी लीग से पूर्व जब खालिदा जिया के नेतृत्व में बीएनपी का शासन था, तब भारत और बांग्लादेश के बीच कड़वाहट देखने को मिली थी। लेकिन, तारिक रहमान के हाथ में सत्ता की कमान होने के बाद इसमें थोड़ा बदलाव जरूर हो सकता है।
चीन की अगर बात करें, तो उसकी हमेशा से ही चटगांव पोर्ट पर नजर रही है। यूनुस के शासन में यह खबरें भी सामने आ रही थी कि बांग्लादेश के सभी बड़े पोर्ट का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया जाएगा। अगर ऐसा हो जाता, तो चीन भविष्य में भारत के लिए मुसीबतें खड़ी कर सकता था।
बीएनपी सरकार चीन के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग को और बढ़ा सकती है। इससे दक्षिण एशिया, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है।
उम्मीद की जा रही है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के संबंधों में कुछ नरमी आ सकती है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक संतुलन प्रभावित होगा। भारत के लिए यह सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। यदि आंतरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो अस्थिरता का असर पड़ोसी देशों तक महसूस हो सकता है।
भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सतर्कता बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को पुनर्जीवित करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर इसकी सफलता निर्भर करेगी।
भारत के लिए बांग्लादेश एक बड़ा निर्यात बाजार है। नीतिगत बदलाव से कारोबारी माहौल प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की वापसी के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच हालात में सुधार की संभावनाएं हैं, लेकिन अगर जमात-ए-इस्लामी की वापसी होती तो यह भारत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता था।
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