राष्ट्रीय
बढ़ेगा आलू का रकबा, अच्छा भाव मिलने से किसान उत्साहित
बी आलू की बुवाई जल्द शुरू होने वाली है और आलू का दाम इस समय आसमान चढ़ा है। ऐसे में बेहतर दाम मिलने की उम्मीदों से उत्तर भारत के किसान आलू की खेती में ज्यादा दिलचस्पी ले सकते हैं। उद्यान व बागवानी विशेषज्ञ बताते हैं कि किसान इस बार काफी उत्साहित हैं और रबी सीजन की अगैती फसल का अच्छा भाव मिलने की आशा से वे आलू की खेती में ज्यादा दिलचस्पी ले सकते हैं। रबी सीजन में उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, मध्यप्रदेश, पंजाब, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड और हरियाणा में आलू की खेती होती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के तहत आने वाले और हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि उत्तर भारत में किसानों ने आलू की खेती की तैयारी शुरू कर दी है और कुछ दिनों में बुवाई शुरू हो जाएगी, रबी सीजन में आमतौर पर आलू की बुवाई सितंबर के आखिर में शुरू होती है और नवंबर तक चलती है, जबकि हार्वेस्टिंग दिसंबर से मार्च तक चलती है।
डॉ. कुमार ने बताया कि बताया कि इसमें कहीं दो राय नहीं कि इस समय आलू का दाम ऊंचा होने से इसकी खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ेगी जिससे खासतौर से उत्तर भारत में आलू की अगैती फसल का रकबा जरूर बढेगा। डॉ. कुमार ने कहा कि आलू की ऐसी कई वेरायटी अब आ गई है जो पहले से ज्यादा पैदावार देती है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी दूसरे अग्रिम उत्पादन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 के दौरान देश में आलू का उत्पादन 513 लाख टन हुआ, जबकि एक साल पहले 2018-19 में देश में आलू का उत्पादन 501.90 लाख टन हुआ था। उत्पादन ज्यादा होने के बावजूद इस साल इसके दाम में काफी इजाफा हुआ है। कारोबारी बताते हैं रबी सीजन के आखिर में जहां आलू पांच रुपये किलो था वहां आज 40 रुपये प्रति किलो के ऊपर बिक रहा है। कारोबारी बताते हैं कि कोरोना काल में इस साल आलू की खपत ज्यादा हुई और इस सयम मंडियों में आवक कम हो रही है।
उत्तर प्रदेश में उद्यान विभाग के अधिकारी डॉ. धर्मपाल यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बीते रबी सीजन में फसल तैयार होने के दौरान बारिश से फसल को कुछ नुकसान हुआ था जिससे उत्पादन थोड़ा कम हुआ था। उत्तर प्रदेश देश में आलू का सबसे बड़ा उत्पादक है। आलू के कुल उत्पादन का करीब 30 फीसदी उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आलू की खेती व्यापक पैमाने पर होती है।
डॉ. यादव ने भी बताया कि आलू का दाम उंचा होने से इसकी खेती में किसानों की रुचि बढ़ेगी जिससे पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा रकबा हो सकता है।
भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र यादव कहते हैं कि भाव बढ़ने से किसान निस्संदेह आलू की अगली फसल लगाने को लेकर उत्साहित हैं, साथ ही बीज महंगा होने की चिंता भी उनको सता रही है। यादव ने कहा कि अक्सर ऐसा होता है कि सब्जी के लिए इस्तेमाल होने वाले आलू का भाव जब उंचा होता है तो बीज का भाव भी बढ़ जाता है।
खरीफ व ग्रीष्मकालीन सीजन के दौरान आलू की खेती महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में होती है। खरीफ आलू बुवाई का सीजन मई से जुलाई, जबकि हार्वेस्टिंग सीजन सितंबर से नवंबर के बीच रहता है। खरीफ आलू का उत्पादन बहुत कम होता है इसलिए इस सीजन के आलू का किसानों को अच्छा भाव मिलता है जबकि रबी सीजन में ज्यादा उत्पादन होने के कारण हार्वेस्टिंग सीजन में भाव काफी नीेचे आ जाता है।
कारोबारियों ने बताया कि इस समय देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत की मंडियों में कोल्ड स्टोरेज के आलू के साथ-साथ ताजा पहाड़ी आलू की आवक हो रही है। पहाड़ी आलू उंचे भाव पर बिक रहे हैं जबकि कोल्ड स्टोरेज से आने वाला आलू अपेक्षाकृत कम भाव पर बिकता है।
राजनीति
कांग्रेस ने ममता बनर्जी के धरने को अधिकार बताया तो भाजपा ने ‘जनता के गुस्से का आईना’

नई दिल्ली, 2 जून: कांग्रेस ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी के धरने का समर्थन किया। यह धरना उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों और रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने वाले फेरीवालों को हटाए जाने के विरोध में था।
कांग्रेस ने इसे ममता बनर्जी का ‘संवैधानिक अधिकार’ बताया। वहीं, भाजपा ने कहा कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन का पश्चिम बंगाल के लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जो टीएमसी से नाराज हो चुके हैं।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने समाचार एजेंसी मिडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अगर लोकतंत्र में कहीं भी अन्याय होता है तो संविधान उसके खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है और ममता बनर्जी भी यही कर रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सबने देखा है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमला किया गया। वह टीएमसी में दूसरे नंबर के नेता हैं और सांसद हैं। अगर वह भाजपा सरकार के राज में सुरक्षित नहीं हैं तो मैं कहूंगा कि यह भाजपा द्वारा सोची-समझी साजिश के तहत उनके खिलाफ किया गया हमला है।
प्रमोद तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस के एक और सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि वह पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन इस हमले में उनके सिर पर चोट लगी। तृणमूल कांग्रेस के दर्जनों दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि आजाद भारत में अब तक ऐसी घटनाएं कभी नहीं हुई थीं। यह भारतीय जनता पार्टी का तानाशाही वाला चेहरा है।
उन्होंने सभी विपक्षी पार्टियों से अपील की कि वे एक साथ आएं और भाजपा की कथित गुंडागर्दी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करें।
दूसरी ओर, भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है।
उन्होंने कहा कि वह हताश, परेशान और निराश हैं। तृणमूल के सदस्य, चाहे वह सांसद कल्याण बनर्जी हों या सांसद अभिषेक बनर्जी, सब के सब राजनीतिक नौटंकी में लगे हुए हैं। ममता बनर्जी आज जिस विरोध प्रदर्शन की योजना बना रही हैं, उसका कोई असर नहीं होगा। उन्हें अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता राज्य में तृणमूल कांग्रेस के कुशासन के लिए उनसे जवाब मांग रही है।
भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा कि एक महीने के अंदर ही हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। ममता बनर्जी ने कभी नहीं सोचा था कि लोगों के लिए उन्होंने जो मुश्किलें खड़ी की थीं, वे इतनी जल्दी जनता के गुस्से के रूप में उनकी पार्टी के सामने वापस आ जाएंगी। आज, वह एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं। अगर उनकी पार्टी ने इतने सालों तक लोगों के लिए काम किया होता तो शायद आज ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।
उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। अब उनके पास ज्यादा कार्यकर्ता भी नहीं बचे हैं।
अपराध
कोलकाता में युवक-युवती की ड्रग्स ओवरडोज से हुई थी मौत, फ्लैट में रेव पार्टियां होने का खुलासा

कोलकाता, 2 जून: दक्षिण कोलकाता के गोल्फ ग्रीन इलाके में स्थित एक बिल्डिंग के फ्लैट में युवक और युवती की मौत का खुलासा हो गया है। पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि मौत ड्रग्स के ओवरडोज के कारण हुई थी।
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच में पता चला है कि मोहम्मद दिलशाद द्वारा किराए पर लिया गया फ्लैट अक्सर युवा पुरुषों और महिलाओं की हाउस पार्टियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। फ्लैट में नशीले पदार्थों और शराब का सेवन किया जाता था और कथित तौर पर अश्लील रीलें फिल्माई जाती थीं।
मोहम्मद दिलशाद और उसकी प्रेमिका मेहुली सान्याल के शव रविवार को गोल्फ ग्रीन स्थित एक फ्लैट से बरामद हुए थे। दक्षिण कोलकाता के रामगढ़ निवासी मेहुली की मां ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या की गई थी।
उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने रविवार को मुश्ताक अली मोल्लाह उर्फ रोहित और अंजली बंगिरो नाम के एक कपल को गिरफ्तार कर लिया। मुश्ताक का घर दक्षिणी उपनगर हरिदेवपुर में है।
झारखंड निवासी अंजली कोलकाता में कॉलेज की छात्रा है। पुलिस ने चंदन पासवान नाम के एक युवक को भी गिरफ्तार किया है। मुश्ताक, अंजली और चंदन ने शनिवार रात भर ‘हाउस पार्टी’ की थी। दिलशाद और मेहुली भी उनके साथ शामिल हुए थे।
पुलिस को पता चला है कि मेहुली 2023 में शाहबाज नाम के एक युवक के साथ घर छोड़कर चली गई थी, तब से वह कई लिव-इन पार्टनर के साथ रही। आखिरी बार उसे मुश्ताक के साथ लिव-इन पार्टनर के रूप में देखा गया था। मेहुली दक्षिण कोलकाता में हाउस और रेव पार्टियों में नियमित रूप से जाती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात कॉलेज छात्रा अंजली से हुई। मुश्ताक ज्यादातर समय दिलशाद के साथ उसी फ्लैट में रहता था।
पुलिस ने बताया कि ये युवक-युवतियां एक या दो रात साथ रहते थे। इस दौरान वे खुलकर शराब और ड्रग्स का सेवन करते थे। इसके बदले में उन्हें दिलशाद को एक मोटी रकम ‘पैकेज’ के रूप में देनी पड़ती थी। पुलिस ने आगे की जानकारी जुटाने के लिए जांच जारी रखी है।
अपराध
फेमा उल्लंघन मामला: दिल्ली-मुंबई में वेदांता से जुड़े परिसरों पर ईडी ने मारा छापा

नई दिल्ली, 2 जून: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत चल रही जांच के सिलसिले में दिल्ली और मुंबई में वेदांता समूह से जुड़े दो ठिकानों पर तलाशी ली है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, ये तलाशी अभियान कथित तौर पर समूह की कंपनियों द्वारा अपनी मूल कंपनी को किए गए ‘ब्रांड फीस भुगतान’ से जुड़े हैं।
उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने उन कथित लेन-देन से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड एकत्र किए हैं, जिनकी जांच फेमा के प्रावधानों के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने दिल्ली और मुंबई में एक-एक स्थान पर तलाशी ली। यह अभियान सोमवार को शुरू हुआ था और अब पूरा हो चुका है।
अधिकारी इन भुगतानों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और समझौतों की समीक्षा कर रहे हैं।
जांचकर्ता कथित तौर पर ब्रांड के उपयोग के लिए किए गए भुगतानों की जांच कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि क्या ये लेन-देन विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप थे।
वेदांता के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी हो चुकी है और अधिकारी अब इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करने से पहले अभियान के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण करेंगे। जांचकर्ता एकत्र की गई सामग्री की समीक्षा कर रहे हैं, इसलिए आगे की जानकारी का इंतजार है।
ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इस बीच, वेदांता लिमिटेड ने पिछले महीने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया था कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बिजली की उपलब्धता के बारे में कथित गलत जानकारी देने से जुड़े एक मामले में उसकी सहायक कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के खिलाफ फैसला सुनाया है। इसके परिणामस्वरूप कंपनी को लगभग 127 करोड़ रुपये का जुर्माना और लागू विलंब भुगतान अधिभार (लेट पेमेंट सरचार्ज) देना होगा।
एक रेगुलेटरी फाइलिंग में वेदांता ने कहा कि उसे टीएसपीएल से 20 मई के एक फैसले के संबंध में जानकारी मिली है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) और पंजाब स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (पीएसएलडीसी) की ओर से दायर अपीलों पर सुनाया था।
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