राष्ट्रीय
पीएम मोदी 14 फरवरी को असम में इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का करेंगे उद्घाटन, राफेल-सुखोई दिखाएंगे ताकत
New Delhi : Prime Minister Narednra Modi addresses a programme marking 20 years of completion of SWAGAT initiative in Gujarat through video conferencing onThursday, April 27, 2023. (Photo:IANS/Video Grab)
नई दिल्ली, 9 फरवरी : भविष्य में दो-फ्रंट युद्ध की संभावनाओं को देखते हुए भारत अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने में जुटा है। इसी कड़ी में देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान इलाके में ऐसी ही एक अत्याधुनिक इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड बनकर तैयार हो चुकी है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, डिब्रूगढ़ के मोरान से गुजरने वाले नेशनल हाईवे नंबर-2 पर 4.2 किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रिप तैयार की गई है। यह उत्तर-पूर्व भारत में एक्सप्रेसवे पर बनी पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। उद्घाटन के मौके पर भारतीय वायुसेना की ताकत का प्रदर्शन भी किया जाएगा। राफेल और सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट इस एयर स्ट्रिप पर टच एंड गो ड्रिल को अंजाम देंगे। वहीं, फिक्स्ड विंग ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस और एएन-32 इसी स्ट्रिप पर लैंडिंग और टेकऑफ ड्रिल करेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले 16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बने एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री स्वयं सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे थे।
भारतीय वायुसेना जहां नए फाइटर जेट, हथियार, एयरबेस, हेलिपैड और आधुनिक उपकरणों के जरिए अपनी क्षमता बढ़ा रही है, वहीं केंद्र सरकार का सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड विकसित करने पर जोर दे रहा है।
संसद में दिए गए एक सवाल के जवाब में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने देशभर में 28 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड को चिन्हित किया है। इनमें असम में 5, पश्चिम बंगाल में 4, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 3-3, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में 2-2, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1-1 ईएलएफ शामिल हैं।
इनमें से कई इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड बनकर तैयार हो चुकी हैं और उनका आधिकारिक उद्घाटन भी किया जा चुका है। नेशनल हाईवे के साथ-साथ राज्य सरकारें स्टेट हाईवे पर भी ऐसी सुविधाओं का निर्माण कर रही हैं।
पिछले साल आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के अड्डंकी में नेशनल हाईवे नंबर-16 पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड को सक्रिय किया गया था। इससे पहले 2016 में दिल्ली–आगरा और 2017 में लखनऊ–आगरा एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के पास वायुसेना ने ऐसी ड्रिल को अंजाम दिया था। राजस्थान में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास भी नेशनल हाईवे पर इमरजेंसी एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया जा चुका है।
दरअसल, युद्ध की स्थिति में दुश्मन की पहली कोशिश एयरबेस को निशाना बनाने की होती है। ऐसे में वैकल्पिक रनवे के रूप में ये हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप बेहद अहम साबित होती हैं। इसके अलावा, हवाई युद्ध के दौरान यदि किसी फाइटर जेट का ईंधन कम हो जाए और वह एयरबेस तक न पहुंच सके, तो वह सुरक्षित रूप से ऐसी स्ट्रिप पर उतर सकता है। साथ ही, आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी इन रनवे का उपयोग किया जा सकता है।
राजनीति
तेलंगाना निकाय चुनावों में जीत पर राहुल गांधी ने जताई खुशी, बोले- ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन अटल

नई दिल्ली, 14 फरवरी : तेलंगाना के स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की जीत पर पार्टी सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि हमारा ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन अटल है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनावों में जीत कांग्रेस सरकार की ‘पीपल-फर्स्ट’ यानी जनता को प्राथमिकता देने वाली नीतियों की पुष्टि है, जो सामाजिक न्याय, सम्मान और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास पर आधारित हैं।”
राहुल गांधी ने आगे लिखा, “हर कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता को दिल से धन्यवाद। यह जीत आपकी और तेलंगाना के लोगों की है। हमारा ‘प्रजाला तेलंगाना’ का विजन, जहां विकास हर परिवार तक पहुंचे, अटल है।”
सभी नगर पालिकाओं में कांग्रेस ने अब तक 2,582 वार्ड में से 1,347 जीते, जबकि बीआरएस को 717 मिले। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शहरी निकाय चुनावों में करीब 60 प्रतिशत वोट हासिल किए, जिसमें 116 नगर पालिकाओं में से 64 और सात नगर निगमों में से तीन में जीत हासिल की।
कांग्रेस को मंचेरियल, रामागुंडम और नलगोंडा नगर निगमों में जीत मिली है। 60 सदस्यीय वाली कोठागुडेम निगम में कांग्रेस और सीपीआई ने 22-22 सीटें जीतीं। यहां दोनों दलों के नेताओं के बीच ‘फ्रेंडली-फाइट’ देखी गई। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्टी लगभग तीन-चौथाई नगर पालिकाओं पर जीत हासिल करने की स्थिति में है।
मुख्य विपक्षी पार्टी बीआरएस ने 13 नगर पालिकाओं और तीन निगमों में जीत हासिल की, जबकि 38 नगर पालिकाओं में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। 2020 के पिछले नगरपालिका चुनावों में बीआरएस ने 100 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों में जीत हासिल की थी।
भाजपा को एक भी निगम में जीत नहीं मिली, लेकिन 66 सदस्यीय वाली बॉडी में 30 सीटों के साथ करीमनगर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। भाजपा निजामाबाद कॉर्पोरेशन में भी सबसे बड़ी पार्टी बनी।
राजनीति
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी

नई दिल्ली, 14 फरवरी : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। ये सिर्फ स्थान परिवर्तन का क्षण नहीं है, यह इतिहास और भविष्य के संगम के भी पल हैं। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है।
मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, “पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के लिए किया था। 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन इन भवनों को तत्कालीन सरकार की ओर से अपने कार्यों के निष्पादन के लिए बनाए रखा गया। स्वतंत्रता के बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।”
उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बनी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह हैं। इस भवन की सीढ़ियों पर चढ़ते कदमों ने देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “बीते दशकों में यहां कैबिनेट की बैठकों में, संविधान के आदर्शों, जनता से मिले जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। यहां भारत की सफलताओं का उत्सव भी मनाया गया, असफलताओं का आंकलन भी हुआ और साथ ही संकटों और चुनौतियों से निपटने के लिए कड़े और बड़े फैसले भी लिए गए।”
मीडिया को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है। यहां बैठकर अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने भारत को आजादी के तुरंत बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया। सबके प्रयासों का परिणाम है कि आर्थिक चुनौतियों और संकटों से निकलकर, आज भारत एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनकर खड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा, “बीते एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में साउथ ब्लॉक राष्ट्र के अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। ये स्थान मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस की प्रेरणा स्थली बना। यहां से रिफॉर्म एक्सप्रेस को पूरे देश में प्रोत्साहन मिला है। यहीं से डीबीटी, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, गरीब कल्याण से जुड़े अभियान, ‘डिजिटल इंडिया’ और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को आकार मिला। यहां से ही आर्टिकल-370 की दीवार गिराने और तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने जैसे सामाजिक न्याय के साहसिक और संवेदनशील निर्णय लिए गए। यहीं लिए गए ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘एयर स्ट्राइक’ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के निर्णयों के माध्यम से भारत ने अपनी दृढ़ और आत्मविश्वासी सुरक्षा नीति का स्पष्ट संदेश विश्व को दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और वैश्विक मंचों पर अपनी स्पष्ट और प्रभावशाली आवाज रख रहा है। आज देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। एक ऐसा कार्यक्षेत्र, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता को बढ़ाए, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के करीब 95 साल के बाद शुक्रवार को भारत सरकार ने इन भवनों को खाली किया है और ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हुई है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में देश में ‘सत्ता भाव’ के बजाय ‘सेवा भाव’ की संस्कृति सशक्त हुई है। आज का ये स्थानांतरण, इन संस्कारों को और मजबूती देगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “शनिवार को कैबिनेट ने यह संकल्प भी लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाए, जो हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ये संग्रहालय, हमारी कालातीत और शाश्वत सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।
दुर्घटना
‘क्या लोगों की जान इतनी सस्ती हो गई है’, मुंबई में मेट्रो पिलर गिरने की घटना पर बोलीं कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़

मुंबई, 14 फरवरी : कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुंबई के मुलुंड वेस्ट इलाके में हुई मेट्रो पिलर करने की घटना पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि विकास चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं जिससे कि मुंबईकरों की जान को खतरा हो।
वर्षा गायकवाड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घटना का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुलुंड वेस्ट, एलबीएस रोड पर जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के पास बन रहे मेट्रो पिलर का एक हिस्सा गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। एक बेगुनाह नागरिक की मौत हो गई और कई दूसरे गंभीर रूप से घायल हो गए। क्या सरकार और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) का इससे कोई लेना-देना है?”
कांग्रेस सांसद ने पूछा, “सिर्फ इंफ्रा मैन बनकर पीआर और मार्केटिंग कर रहे हैं, लेकिन मुंबईकरों की जान अधर में लटकी हुई है, इसका क्या मतलब है? जब मेट्रो का काम चल रहा था, तो सेफ्टी नियम सिर्फ कागजों पर क्यों थे? जब व्यस्त रोड पर काम चल रहा था, तो नीचे से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए सुरक्षा इंतेजाम क्यों नहीं थे?”
उन्होंने आगे कहा, “यह दिखाने के नाम पर कि मेट्रो का काम तेजी से हो रहा है, क्या इसकी क्वालिटी और टेक्निकल सेफ्टी को नजरअंदाज किया जा रहा है? कौन जिम्मेदार है?” वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि हर बार जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो सिर्फ ‘जांच’ का ड्रामा होता है। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
शनिवार दोपहर को मुलुंड पुलिस स्टेशन के इलाके में एलबीएस रोड पर मेट्रो पुल का एक हिस्सा चलते ऑटो रिक्शा पर गिर गया। इस दौरान एक कार भी चपेट में आई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
मृतक की पहचान रामधन यादव के रूप में हुई है, जबकि घायलों में राजकुमार इंद्रजीत यादव, महेंद्र प्रताप यादव और दीपा रूहिया शामिल हैं। राजकुमार इंद्रजीत यादव की स्थिति गंभीर बताई गई है।
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने शुरुआती बयान में कहा कि दोपहर करीब 12:15 बजे मुलुंड फायर स्टेशन के पास एक घटना हुई, जहां पैरापेट सेगमेंट का एक हिस्सा ऊंचाई से गिरकर एक गुजरते हुए ऑटो रिक्शा से टकरा गया।
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