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2500 करोड़ रुपये के निवेश का प्लेटफार्म तैयार, 5200 लोगों को मिलेगा रोजगार

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दशकों तक उद्योगों की बाट जोहता रहा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के दिन अब संवरने लगे हैं। यह अब औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए निवेशकों का पसंदीदा क्षेत्र बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी के दूसरे कार्यकाल के छह माह का आकलन करें तो गीडा ने औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए 88.5 एकड़ (करीब 358000 वर्गमीटर) भूमि का आवंटन कर 2500 करोड़ रुपये के निवेश का प्लेटफार्म तैयार कर दिया है। इस भारी भरकम निवेश से करीब 5200 लोगों को रोजगार मिलने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।

बीते छह माह में गीडा ने जिन निवेशकों को भूमि का आवंटन किया है, उनमें सबसे प्रमुख पैकेज्ड पेय पदार्थ बनाने वाली विश्व प्रसिद्ध कंपनी पेप्सिको की बाटलिंग यूनिट लगाने वाली फ्रेंचाइजी मेसर्स वरुण वेबरेजेस लिमिटेड है। इस कंपनी को गीडा की तरफ से सेक्टर 27 में 177310 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया है। पेप्सिको की फ्रेंचाइजी की तरफ से बाटलिंग प्लांट के लिए 1071.28 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और इस प्लांट में करीब 1500 लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसी तरह गीडा के सेक्टर 26 में मेसर्स केयान डिस्टलरीज को 79441 वर्गमीटर भूमि का आवंटन किया गया है। केयान की तरफ से 702 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है और उसकी इकाई में 1000 लोग रोजगाररत होंगे। इसी सेक्टर में मेसर्स सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लिमिटेड को 118.3 करोड़ रुपये के निवेश के लिए 20067.37 वर्गमीटर जमीन का आवंटन किया गया है। सीपी मिल्क की इकाई में भी 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा। गीडा सेक्टर 26 में ही मेसर्स तत्वा प्लास्टिक्स पाइप्स प्रा. लिमिटेड को 22000.62 वर्गमीटर तथा मेसर्स क्वाट्र्ज ओवलवेयर प्रा. लिमिटेड को 20067.37 व मेसर्स आदित्या मोटर प्रा. लिमिटेड को भी 20067.37 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई है। इन तीनों उद्योगों में क्रमश: 102.3 करोड़ रुपये, 50 करोड़ तथा 20 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। इनके जरिए क्रमश: 110, 410 और 400 लोगों को रोजगार मिलना सुनिश्चित होगा।

गीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पवन अग्रवाल बताते हैं कि इन निवेशकों के अतिरिक्त गीडा की तरफ से रेडीमेड गारमेंट उद्योग के लिए 40 भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है। इन भूखंडों का कुल क्षेत्रफल 32500 वर्गमीटर है। यही नहीं उद्योगों के लिए बढ़ती हुई मांग को देखते हुए गीडा ने बुधवार (28 सितंबर) को पुन: कुल 35 एकड़ क्षेत्रफल वाले 64 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन हेतु विज्ञापन जारी किया है। अलग-अलग सेक्टर में 510 वर्गमीटर से लेकर 17500 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल वाले अलग-अलग इन भूखंडों के लिए 21 अक्टूबर तक आवेदन किया जा सकेगा। गीडा की मंशा है कि इसी वर्ष के अंत तक इन भूखंडों का भी आवंटन कर दिया जाए ताकि औद्योगिक विकास की गति तीव्रतम हो सके।

गीडा द्वारा गारमेंट पार्क को सम्मिलित करते हुए भीटी रावत औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर 26 के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना तैयार की गई है। इसके लिए पीएम गति शक्ति से वित्तीय वर्ष 2022-23 में 70 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी मिली है। इसी तरह 100 करोड़ रुपये की परियोजना लागत वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (भगवानपुर-नरकटहा) के लिए 80 करोड़ रुपये तथा 69.58 करोड़ रुपये के प्लास्टिक पार्क प्रोजेक्ट हेतु 12 करोड़ रुपये की सहायता चालू वित्तीय वर्ष में स्वीकृत हुई है। रेडीमेड गारमेंट का हब बनाने के लिए बनने जा रही फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स के लिए 10 करोड़ तथा गीडा में कामन इंफ्लूएट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के लिए वित्तीय वर्ष 2022-23 में 5 करोड़ रुपये को सहायता पीएम गति शक्ति से मिलेगी।

राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय

राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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राजनीति

बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

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पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

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