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पेटीएम का वित्त वर्ष 2022 परिणाम : राजस्व 77 फीसदी बढ़कर 4,974 करोड़ रुपये

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भारत की अग्रणी मोबाइल भुगतान और वित्तीय सेवा कंपनी पेटीएम ब्रांड के स्वामित्व वाली वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (ओसीएल) ने मार्च 2022 को समाप्त होने वाली तिमाही और वित्तीय वित्त वर्ष 2022 के परिणामों की घोषणा की है। कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2022 में 77 प्रतिशत बढ़कर 4,974 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 2,802 करोड़ रुपये था। अकेले चौथी तिमाही में, कंपनी का राजस्व साल-दर-साल आधार पर 89 फीसदी बढ़कर 1,541 करोड़ रुपये हो गया, जबकि तिमाही के लिए ईबीआईटीडीए (ईएसओपीएस से पहले) में साल-दर-साल 12 प्रतिशत का सुधार हुआ।

राजस्व में वृद्धि का नेतृत्व पेटीएम पर अपने भागीदारों के माध्यम से उपभोक्ता और व्यापारी भुगतान और ऋण के वितरण में वृद्धि के कारण हुआ।

वित्त वर्ष 2022 के लिए कंपनी का ईबीआईटीडीए नुकसान (ईएसओपी से पहले) पिछले साल के 1,655 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़कर 1,518 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, कंपनी के पास गैर-नकद ईएसओपी खर्च के 809 करोड़ रुपये थे।

पेटीएम ने यूजर ग्रोथ, मर्चेंट डिवाइस डिप्लॉयमेंट और टेक्नोलॉजी में निवेश करने के बावजूद ईबीआईटीडीए (ईएसओपी कॉस्ट से पहले) नुकसान कम किया है। वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में कंपनी की लागत संरचना वित्त वर्ष 2023 में अपनी विकास योजनाओं का समर्थन करने के लिए काफी हद तक पर्याप्त है। इसके परिणामस्वरूप, कंपनी का मानना है कि यह ईबीआईटीडीए घाटे में त्वरित कमी दिखाएगा और सितंबर 2023 तिमाही तक लाभप्रदता (ईएसओपी से पहले) हासिल करने के लिए अच्छी तरह से ट्रैक पर है।

पेटीएम के पास उपभोक्ताओं और व्यापारियों का एक मजबूत दो-तरफा पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां यह मुद्रीकरण रणनीति को परिणाम देने में लगा हुआ है। उपभोक्ता भुगतान पक्ष पर, कंपनी पेटीएम ऐप और पेटीएम भुगतान उपकरणों के बढ़ते उपयोग को रिकॉर्ड कर रही है। व्यापारी भुगतान पक्ष पर, कंपनी व्यापारियों के पूरे आधार को सेवा प्रदान करती है, (1) भुगतान के लिए क्यूआर (आमतौर पर मु़फ्त), (2) साउंडबॉक्स (जो सदस्यता राजस्व उत्पन्न करते हैं), (3) कार्ड मशीन (जो सदस्यता और एमडीआर राजस्व उत्पन्न करती हैं), और (4) ऑनलाइन व्यापारियों के लिए भुगतान गेटवे (जो एमडीआर राजस्व और प्लेटफॉर्म शुल्क उत्पन्न करता है)। इस वितरण और समृद्ध अंतर्²ष्टि का लाभ उठाते हुए, पेटीएम अपने उपभोक्ताओं और व्यापारियों को वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी में वित्तीय प्रोडक्टस प्रदान करता है।

उपभोक्ता जुड़ाव और व्यापारी आधार में वृद्धि से भुगतान सेवाओं से उच्च राजस्व प्राप्त होता है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2012 में अपने औसत मासिक लेन-देन करने वाले यूजर्स में 60.8 मिलियन की छलांग दर्ज की है, पिछली तिमाही के लिए औसत बढ़कर 70.9 मिलियन हो गया है। पेटीएम का मर्चेंट बेस भी अब बढ़कर 26.7 मिलियन मर्चेट पार्टनर हो गया है, जिसमें 2.9 मिलियन डिवाइस वित्त वर्ष 2022 तक तैनात हैं।

उपभोक्ता जुड़ाव और व्यापारी आधार में वृद्धि से भुगतान सेवाओं (उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों के लिए) से राजस्व में वृद्धि हुई है। भुगतान सेवाओं से उपभोक्ताओं तक पेटीएम का राजस्व वित्त वर्ष 2022 में 58 प्रतिशत बढ़कर 1,529 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2021 के 969 करोड़ रुपये था। पूरे वर्ष के लिए, भुगतान सेवाओं से व्यापारियों को राजस्व वित्त वर्ष 2022 में 87 प्रतिशत बढ़कर 1,892 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2021 के लिए 1,012 करोड़ रुपये था।

वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2022 के मुख्य आकर्षण में से एक पेटीएम के ऋण वितरण व्यवसाय का तेजी से पैमाना बढ़ा है, जहां यह पेटीएम पोस्टपेड (अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें), व्यक्तिगत ऋण और व्यापारी ऋण प्रदान करता है। अप्रैल 2022 में, कंपनी अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 20,000 करोड़ रुपये के वितरण के वार्षिक रन रेट पर पहुंच गई।

पूरे वर्ष के लिए, पेटीएम प्लेटफॉर्म के माध्यम से वितरित ऋणों की संख्या वित्त वर्ष 2022 में सालाना आधार पर 478 प्रतिशत बढ़कर 15.2 मिलियन हो गई, जो वित्त वर्ष 2021 में 2.6 मिलियन थी। वितरित किए गए ऋणों का मूल्य वित्त वर्ष 2021 में 1,409 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 441 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 7,623 करोड़ रुपये हो गया है।

वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में वितरित किए गए पोस्टपेड ऋणों की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष 373 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पोस्टपेड ऋणों का मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 425 प्रतिशत बढ़ा, इस प्रकार ग्राहकों द्वारा उपयोग में वृद्धि को उजागर किया गया।

पेटीएम पर भागीदारों के माध्यम से वितरित व्यक्तिगत ऋण वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष 948 प्रतिशत बढ़ा, जबकि व्यक्तिगत ऋण का मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 1,082 प्रतिशत बढ़ा। वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में वितरित किए गए मर्चेंट लोन की संख्या में साल-दर-साल 123 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मर्चेट लोन का मूल्य साल-दर-साल 178 प्रतिशत बढ़ा। वित्त वर्ष 2022 में औसत टिकट साइज में भी वृद्धि हुई है, जिसमें व्यक्तिगत ऋण 85,000 रुपये से 95,000 रुपये तक और व्यापारी ऋण 1,30,000 रुपये से 1,50,000 रुपये तक हैं।

व्यापार

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”

जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।

इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।

राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।

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व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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व्यापार

भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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