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Friday,27-March-2026
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कंपनियों द्वारा निदेशकों को किया जाने वाला भुगतान अब जीएसटी के दायरे में

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कंपनियों के निदेशकों को पेशेवर शुल्क और पारिश्रमिक के तौर पर किया जाने वाला भुगतान अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में होगा। सरकार संग्रह बढ़ाने के लिए कराधान प्रणाली की खामियों को दूर करने में जुटी हुई है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक सर्कुलर में स्पष्ट किया है कि कंपनियों द्वारा स्वतंत्र निदेशकों या गैर कार्यकारी निदेशकों (कंपनी के कर्मचारी नहीं) को किया जाने वाला भुगतान जीएसटी की लागू दर के अधीन होगा।

सीबीआईसी ने कहा है कि इस तरह के निदेशकों को उनकी सेवा के एवज में किए जाने वाले भुगतान पर कंपनियां रिवर्स चार्ज के आधार पर टैक्स काटेंगी।

इसके अलावा पूर्णकालिक निदेशकों या जो निदेशक कंपनी के कर्मचारी भी हैं, उन्हें वेतन के अलावा दिया जाने वाला पारिश्रमिक भी जीएसटी के सशर्त अधीन होगा।

इसका मतलब यह कि निदेशक, पूर्णकालिक निदेशक, प्रबंध निदेशक, जो किसी कंपनी के रोल पर भी हैं और वेतन लेते हैं, वे यदि किसी तरह ्र का ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करते हैं जो वेतन की प्रकृति का नहीं है तो वह जीएसटी के अधीन होगा। हालांकि इस तरह के निदेशकों को भुगतान किए जाने वाले वेतन पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।

सिरिल अमरचंद मंगलदास की पार्टनर, मेखला आनंद ने कहा, “विभिन्न कानूनों के तहत निदेशकों को किए जाने वाले पारिश्रमिक भुगतान की प्रकृति को बताने वाले इस स्पष्टीकरण से, विविध एएआर रूलिंग्स के बीच उलझी कंपनियों को एक अभूतपूर्व स्पष्टता प्राप्त होगी। इस मुद्दे के समाधान से उद्योग को सही संकेत जाएगा, जो कोविड-19 संकट के बाद अपनी रफ्तार वापस हासिल करने पर ध्यान दे रहा है।”

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व्यापार

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला शेयर बाजार

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मुंबई, 27 मार्च : कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत शुक्रवार के सत्र में लाल निशान में हुई। सुबह 9:18 पर सेंसेक्स 808 अंक या 1.07 प्रतिशत की गिरावट 74,435 और निफ्ट 274 अंक या 1.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,033 पर था।

बाजार में चौतरफा गिरावट देखी जा रही है। शुरुआती कारोबार पीएसयू बैंक और ऑटो गिरावट का नेतृत्व कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑटो टॉप लूजर्स थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी मेटल और निफ्टी इन्फ्रा गेनर्स थे। केवल निफ्टी आईटी ही हरे निशान में था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट थी। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 561 अंक या 1.02 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54,769 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 130 अंक या 0.82 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,766 पर था।

सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, सन फार्मा और ट्रेंट गेनर्स थे। इटरनल, बजाज फिनसर्व,एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एचयूएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड लूजर्स थे।

एशियाई बाजारों में टोक्यो, सोल और जकार्ता हरे निशान में खुले थे, जबकि शंघाई, हांगकांग लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुए थे।

पीएल कैपिटल के एडवाइजरी हेड, विक्रम कसाट ने कहा कि अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता के लिए शुक्रवार की समय सीमा नजदीक आ रही थी। हालांकि,फिर समय सीमा बढ़ा दी गई।

बाजार बंद होने के 11 मिनट बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सोमवार, 6 अप्रैल को शाम 8 बजे (पूर्वी समय) तक ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह नई समय सीमा ईरानी सरकार के अनुरोध पर तय की गई है।

उन्होंने आगे कहा कि खबरों के आधार पर बाजार में होने वाले अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए, निवेशकों के पास सीमित मौके हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) विक्रेता बने हुए हैं और बुधवार को 1,805.37 करोड़ रुपए की इक्विटी में बिकवाली की। घेरलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,429.78 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

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राजनीति

भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार

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नई दिल्ली, 26 मार्च : सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ‘जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान’ से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि ‘हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं’। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।

इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।

दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।

सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।

एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।

इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।

तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।

सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।

देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।

सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।

मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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व्यापार

मध्य पूर्व तनाव का असर: निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 3 रुपए महंगा

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नई दिल्ली, 26 मार्च : निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए हैं।

इस फैसले के साथ नायरा एनर्जी उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करके वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया है।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (वीएटी) जैसे स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा फर्क हो सकता है। कुछ जगहों पर पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। फरवरी के आखिर से अब तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

इस दौरान इजरायल द्वारा ईरान पर हमले और उसके जवाबी कदमों के चलते तेल सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई थी। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है।

ये सरकारी कंपनियां देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट को नियंत्रित करती हैं और अप्रैल 2022 से कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आता है। इसमें से बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो इस समय तनाव के कारण प्रभावित हो रहा है।

इस बीच सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि देश भर में पीएनजी कनेक्शन तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं और सभी रिफाइनरी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं।

कुछ क्षेत्रों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि किसी तरह की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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