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एक घुटने पर बैठकर, बैच लगाकर नस्लवाद का विरोध करना काफी नहीं : ब्राथवेट

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Carlos-Brathwaite

वेस्टइंडीज के हरफनमौला खिलाड़ी कार्लोस ब्राथवेट ने कहा है कि नस्लवाद के खिलाफ लड़ाई में एक घुटने पर बैठकर विरोध प्रदर्शन करना, या बैच लगाना काफी नहीं है बल्कि इसके लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है।

अमेरिका में पुलिस हिरासत में हुई अश्वेत शख्स जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ नाम के आंदोलन ने पूरे विश्व में जोर पकड़ा है।

ब्राथवेट को लगता है कि वक्त की जरूरत कानून में बदलाव की है।

ब्राथवेट ने बीबीसी से कहा, “अकेले में एक घुटने पर बैठकर विरोध करना, बैच पहनना काफी नहीं है। जरूरत है मानसिकता में बदलाव की। मेरे लिए यह सिर्फ उबटन की तरह है, जो शायद कुछ चीजें बदल सकता है।”

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ा बदलाव कानूनी रूप से करना है और पूरे समाज को दोबारा से बदलना है।”

उन्होंने कहा, “ऐसा क्यों है कि जब हम प्लेन में जाते हैं तो किसी को बहुत घनी दाढ़ी में देखते हैं तो लगता है कि वह आतंकवादी है? जब हम सुपरमार्केट में कोई अश्वेत लड़के को देखते हैं तो क्यों लगता है कि वह कर्मचारी है। यह बड़ी चर्चा है। हम किस तरह से अपनी मानसिकता को बदलेंगे यह बड़ी चर्चा है एक घुटने पर बैठने से कई ज्यादा।”

राजनीति

‘दो-चार दिनों में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे पर फैसला’, जदयू नेताओं ने नए मुख्यमंत्री को लेकर दिया बड़ा बयान

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नई दिल्ली/पटना, 10 अप्रैल : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में सदस्यता ग्रहण करेंगे। इसी बीच, उनके इस्तीफे और बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर हलचल तेज हो गई है। जदयू नेताओं ने दावा किया है कि दो चार-दिनों में इस्तीफे को लेकर फैसला लिया जाएगा।

बिहार सरकार में मंत्री और जदयू नेता विजय चौधरी ने शुक्रवार को दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया था और जीते थे। इसके बाद वे आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।”

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा को लेकर विजय चौधरी ने कहा, “नीतीश कुमार शपथ लेने के बाद वापस पटना जाएंगे। वहां पर बैठक होगी और दो-चार दिनों में इस्तीफे को लेकर फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अगला मुख्यमंत्री वही होगा, जिसे एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। चंद दिनों में इस बारे में फैसला होगा।

वहीं, जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा, “राज्यसभा के सदस्य के तौर पर नई पारी को लेकर नीतीश कुमार पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने संकेत दे दिया है कि तीन चार दिनों में बड़े फैसले ले लिए जाएंगे। यह तय है कि आने वाले दिनों में एनडीए विधायी दल की बैठक और नए नेता के चयन के बाद बिहार में सभी फैसले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति से ही लिए जाएंगे।”

बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता राम कृपाल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे और देश की सेवा करेंगे। उन्होंने अब तक राज्य और देश, दोनों की सेवा की है। उनके मार्गदर्शन में बिहार में नई एनडीए की सरकार बनेगी और चलेगी।”

बिहार में अगले मुख्यमंत्री को लेकर राम कृपाल यादव ने कहा, “हमारे नेता तय करेंगे कि चेहरा कौन होगा और अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस बारे में जल्द सबको पता चल जाएगा।”

जदयू विधायक जयंत राज कुशवाहा ने कहा, “वे पहले ही राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं और आज यह बस एक औपचारिकता है। वे आज शपथ लेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “आप देख सकते हैं कि पिछले 20 सालों में बिहार ने कितनी प्रगति की है। आने वाले 20-25 सालों में भी मुख्यमंत्री का कार्यकाल याद किया जाता रहेगा।

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अंतरराष्ट्रीय

‘इजरायल के विनाश की बात बर्दाश्त नहीं’, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के पीएम नेतन्याहू; दी चेतावनी

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तेल अवीव, 10 अप्रैल : ईरान के साथ अमेरिका के सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर बड़ा हमला कर दिया। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई। वहीं दोनों पक्षों के बीच सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के इस हमले को लेकर कुछ ऐसा कहा जिससे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भड़क उठे।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल के विनाश की बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजरायल को खत्म करने का आह्वान बहुत बुरा है। यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए न्यूट्रल आर्बिटर होने का दावा करती है।”

दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा “इजरायल बुरा है और इंसानियत के लिए श्राप है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इजरायल बेगुनाह नागरिकों को मार रहा है, पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान, खून-खराबा लगातार जारी है।”

इजरायल के खिलाफ आग उगलते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, “मैं उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने फिलिस्तीनी धरती पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया है, वे यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाएं और उन्हें नरक में जलाएं।”

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते दिन इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि इजरायल के हमले के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से फोन पर बातचीत की।

पीएम शहबाज ने एक्स पर लिखा, “मैंने आज शाम लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात की। मैंने लेबनान के खिलाफ इजरायल के लगातार हमले की कड़ी निंदा की और इन दुश्मनी की वजह से लेबनान में हजारों लोगों की जान जाने पर दुख जताया। मैंने इस्लामाबाद में होने वाली ईरान-अमेरिका बातचीत के जरिए बातचीत को आसान बनाने समेत शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का शुक्रिया जिन्होंने पाकिस्तान की शांति की कोशिशों की सराहना की और लेबनान और उसके लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों को तुरंत खत्म करने के लिए हमारे लगातार समर्थन की जरूरत पर जोर दिया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय इजरायली कार्रवाई इस इलाके में शांति और स्थिरता बनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को कमजोर करती है और अंतरराष्ट्रीय कानून और बुनियादी मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लेबनान के खिलाफ इजरायल के हमलों को खत्म करने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की अपील करता है।

बता दें, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद, इजरायल ने लेबनान पर एक दिन का सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए और 1,100 से ज्यादा घायल हुए।

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अंतरराष्ट्रीय

विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका

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वॉशिंगटन, 10 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने वाणिज्यिक कूटनीति को अमेरिकी विदेश नीति की “मुख्य आधारशिला” बताया।

आर्थिक जुड़ाव को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक वैश्विक स्थिरता दोनों के केंद्र में रखते हुए लैंडाउ ने तर्क दिया कि वाशिंगटन को अपने व्यवसायों को विदेशों में प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से सक्रिय करना होगा।

उन्होंने अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी फोरम में अपने संबोधन में कहा, “हर दिन मैं जिस एक सवाल के साथ उठता हूँ…वह यह है कि हम कैसे सुनिश्चित करें कि अमेरिकी निजी क्षेत्र दुनिया के हर कोने में चीनी संस्थाओं को पछाड़ रहा हो?”

लैंडाउ ने स्वीकार किया कि कई देश अमेरिकी कंपनियों को पसंद करते हैं, लेकिन चीन की निरंतर मौजूदगी और वित्तीय सहायता के कारण अक्सर उसकी ओर रुख करते हैं। उन्होंने कहा, “आप किसी चीज़ को ‘कुछ नहीं’ से नहीं हरा सकते। चीनी यहाँ मौजूद हैं… अमेरिकी निजी क्षेत्र कहाँ है?”

उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन को उन बाधाओं को दूर करना होगा-जैसे जोखिम की धारणा, जानकारी की कमी और जटिल नियम जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में निवेश से रोकती हैं। उन्होंने कहा, “हम कुछ जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर आंक सकते हैं,” और जोड़ा कि सरकार को कंपनियों की मदद करनी चाहिए ताकि वे “जोखिमों का सही आकलन” कर सकें और “उन्हें कम कर सकें।”

उनके दृष्टिकोण के केंद्र में “तीन स्तंभों” वाली वाणिज्यिक कूटनीति है: निर्यात बाजारों का विस्तार, अमेरिकी निवेश को विदेशों में बढ़ावा देना और अमेरिका में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करना।

लैंडाउ ने कहा, “समग्र उद्देश्य यह है कि हम अपने देश को अधिक समृद्ध बनाएं” और जोर दिया कि आर्थिक जुड़ाव शून्य-योग खेल नहीं है। पूरी बात यह है कि ऐसे ‘विन-विन’ समाधान खोजे जाएं जो दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएं।

उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि मजबूत वाणिज्यिक फोकस से अमेरिकी विदेश नीति अत्यधिक लेनदेन आधारित हो जाती है। उन्होंने कहा, “सभी संबंध किसी न किसी पारस्परिक लाभ की भावना पर आधारित होते हैं।”

लैंडाउ ने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका की भागीदारी का “स्वाभाविक केंद्र” बना हुआ है, जिसका कारण निकटता और आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण है।

उन्होंने वेनेजुएला को दीर्घकालिक अवसर के रूप में बताया, इसे “बहुत, बहुत समृद्ध देश” कहा, जिसकी अर्थव्यवस्था में तेज गिरावट आई है।

विस्तृत रूप से उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “आर्थिक समृद्धि लगभग सभी संघर्षों का प्रमुख तत्व है,” और उदाहरण दिए जहाँ निवेश परियोजनाओं ने राजनीतिक विभाजन को कम करने में मदद की।

वैश्विक संघर्षों पर लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में “स्थायी और प्रभावी युद्धविराम” की दिशा में काम कर रहा है और जोड़ा कि वाशिंगटन ने विरोधियों की क्षमताओं को कम करने के अपने सैन्य उद्देश्यों को “प्रभावी रूप से हासिल” कर लिया है।

उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया, इसे “पूरे तंत्र की जीवनरेखा” बताया।

उन्होंने सरकार और व्यवसायों के बीच बेहतर समन्वय की अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट नेताओं के लिए अपने संदेश का वर्णन करते हुए कहा, “मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ जिससे आपका काम आसान हो?”

इस फोरम में नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के बीच यह बढ़ती सहमति भी सामने आई कि वैश्विक विकास के लिए निजी पूंजी बेहद महत्वपूर्ण होगी। वक्ताओं ने कहा कि उभरते बाजारों में अधिकांश नई नौकरियां सरकारों से नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है।

हाल के वर्षों में अमेरिका ने पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक रणनीति पर अधिक जोर दिया है, खासकर चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के जवाब में। वाशिंगटन ने विदेशी निवेश को समर्थन देने और जोखिम प्रबंधन के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन जैसे साधनों का विस्तार किया है।

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