राजनीति
ऑपरेशन सिंदूर: सर्वदलीय डेलिगेशन में सांसद थरूर भी शामिल, कांग्रेस की लिस्ट से नदारद नाम
नई दिल्ली, 17 मई। ऑपरेशन सिंदूर की जरूरत और बारीकी समझाने के लिए सरकार 7 डेलिगेशन की टीम प्रमुख साझेदार देशों में भेजेगी। हर टीम को एक सांसद लीड करेगा। शनिवार को टीम लीडर्स के नाम सामने आए। इनमें भाजपा के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा के साथ ही कांग्रेस के शशि थरूर भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पोस्ट के जरिए डेलिगेशन में शामिल लोगों के नाम बताए लेकिन इसके ठीक बाद कांग्रेस की ओर से एक लिस्ट जारी की गई। खास बात यह है कि इस सूची में शशि थरूर का नाम नहीं था।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तुरंत अपना पक्ष रख दिया। उन्होंने लिखा- कल (शुक्रवार) सुबह संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता से बात की। कांग्रेस से पाकिस्तान से आतंकवाद पर भारत के रुख को स्पष्ट करने के लिए विदेश भेजे जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के लिए 4 सांसदों के नाम प्रस्तुत करने को कहा गया।
उन्होंने फिर आगे उन नामों का खुलासा किया है जिन्हें कांग्रेस भेजना चाहती थी। लिखा- कल 16 मई को दोपहर तक लोकसभा में विपक्ष के नेता ने संसदीय कार्य मंत्री को कांग्रेस की ओर से निम्नलिखित नाम देते हुए पत्र लिखा। ये नाम थे- आनंद शर्मा (पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री), गौरव गोगोई (उपनेता, लोकसभा), डॉ. सैयद नसीर हुसैन (राज्यसभा सांसद) और राजा बरार (लोकसभा सांसद)।
स्पष्ट है कि कांग्रेस शशि थरूर को भेजने की ख्वाहिश नहीं रखती जो इन दिनों लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों को देशहित में करार दे रहे हैं। थरूर ने 8 मई को केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और दुनिया के लिए मजबूत संदेश है। भारत ने 26 बेकसूर नागरिकों की मौत का बदला लेने के लिए सटीक कार्रवाई की।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने एक्स पोस्ट में प्रतिनिधिमंडल के लीडर्स के नाम जाहिर किए। सूची जारी करते हुए उन्होंने लिखा- सबसे अहम समय में भारत एकजुट है। सात सर्वदलीय डेलिगेशन जल्द ही प्रमुख साझेदार देशों में आतंकवाद के प्रति भारत के जीरो टॉलरेंस का मैसेज लेकर जाएंगे। यह राजनीति से ऊपर, मतभेदों से परे राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली प्रतिबिंब है।
लिस्ट में भाजपा के रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा और कांग्रेस के शशि थरूर शामिल हैं। इसके अलावा जदयू के संजय कुमार झा, डीएमके की कनिमोझी करुणानिधि, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले और शिवसेना के श्रीकांत एकनाथ शिंदे का नाम है। सांसदों का डेलिगेशन इस महीने के अंत में दुनिया के बड़े देशों, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्य देशों का दौरा करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल में अपना नाम शामिल होते देख थरूर ने एक्स पर खुशी का इजहार किया। उन्होंने लिखा- “मैं हाल की घटनाओं पर हमारे राष्ट्र का दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए पांच प्रमुख राजधानियों में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहा हूं। जब राष्ट्रीय हित शामिल हो, और मेरी सेवाओं की आवश्यकता हो, तो मैं पीछे नहीं रहूंगा। जय हिंद!”
बता दें, 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 6-7 मई की दरमियानी रात को भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक कर तबाह कर दिया था। इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम दिया गया था। दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच 10 मई को चर्चा हुई थी, जिसमें शाम 5 बजे से सीजफायर पर सहमति बनी थी।
अब भारत दुनिया को ऑपरेशन सिंदूर के पीछे का उद्देश्य और जरूरत समझाना चाहती है, यही कारण है कि प्रमुख साझेदारों के बीच डेलिगेशन भेजा जा रहा है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के बजट में माइनॉरिटीज़ को नज़रअंदाज़ किया गया: मनोज जमसटकर

मुंबई: मुंबई शिवसेना लीडर और विधायक मनोज जमसटकर ने महाराष्ट्र लेजिस्लेटिव असेंबली में बजट पर कमेंट करते हुए इसे कॉन्ट्रैक्टर्स का बजट बताया और कहा कि जिस तरह से बजट में बड़े प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है। उससे शक होता है कि यह बजट आम जनता के बजाय कॉन्ट्रैक्टर्स का बजट है। किसानों की लोन माफी पर भी शक बना हुआ है। हालांकि 2 लाख रुपये की लोन माफी का ऐलान किया गया है, लेकिन इसके लागू होने पर अभी भी शक है। क्या राज्य सरकार की लागू की गई स्कीम्स का फायदा किसानों को मिलेगा? उन्होंने कहा कि बजट में माइनॉरिटीज़ को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है। उनके लिए कोई नई स्कीम नहीं लाई गई है। बजट में नंदुरबार के किसानों की दिक्कतों का कोई ज़िक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि तेज़ी से डेवलप हो रहे महाराष्ट्र में बड़ा बजट मंज़ूर किया गया है, लेकिन हेल्थ समेत दूसरे पब्लिक इशूज़ पर कोई खास ध्यान नहीं दिया गया है, इसलिए इस पर खास ध्यान देने की ज़रूरत है। जमसटकर ने यह भी मांग की है कि माइनॉरिटीज़ को बजट में हिस्सा दिया जाए।
महाराष्ट्र
धर्मांतरण विरोधी और धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को राज्य विधानमंडल की संयुक्त चयन समिति को भेजा जाना चाहिए और विधेयक पर जन सुनवाई होनी चाहिए: रईस शेख

मुंबई: राज्य सरकार के शुक्रवार को विधानसभा में एंटी-कनवर्जन रिलीजियस फ्रीडम बिल 2026 पेश करने के एक दिन बाद, भिवंडी ईस्ट से समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने मांग की। कि बिल को रिव्यू के लिए राज्य विधानसभा की जॉइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि एक पब्लिक हियरिंग होनी चाहिए ताकि बिल के खिलाफ ऑब्जेक्शन उठाए जा सकें, जो फंडामेंटल राइट्स का वायलेशन है।
इस मुद्दे पर बोलते हुए, विधायक रईस शेख ने कहा कि आम आदमी को अभी गैस नहीं मिल रही है, होटल बंद हो रहे हैं, और कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं। इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय, विधानसभा फ्रीडम ऑफ रिलीजियस बिल जैसे बिलों पर चर्चा कर रही है, जिससे समाज में बंटवारा होगा। विधायक रईस शेख ने कहा, “मौजूदा कानून पहले से ही ज़बरदस्ती धर्म बदलने से जुड़े हैं, और यह बिल माइनॉरिटी कम्युनिटी को टारगेट करने के लिए लाया गया है।” विधायक रईस शेख ने आगे कहा कि बिल बिना चर्चा के पास नहीं होना चाहिए और इस पर डिटेल में चर्चा की ज़रूरत है। इसलिए, बिल को राज्य विधानसभा की एक जॉइंट सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए जिसमें दोनों सदनों के सदस्य हों। कमेटी में माइनॉरिटी कम्युनिटी के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि बिल पास होने से पहले पूरी चर्चा ज़रूरी है। यह कहते हुए कि विधानसभा में माइनॉरिटी का रिप्रेजेंटेशन काफ़ी नहीं है, विधायक रईस शेख ने कहा कि सिविल सोसाइटी ग्रुप और माइनॉरिटी ऑर्गनाइज़ेशन को बिल पर अपने विचार रखने की इजाज़त दी जानी चाहिए। इसके लिए, एक पब्लिक हियरिंग होनी चाहिए। विधायक रईस शेख ने कहा कि सरकार को एक पब्लिक नोटिस जारी करके ऑब्जेक्शन और सुझाव मंगाने चाहिए और उन पर हियरिंग करनी चाहिए, उन्होंने कहा कि वह इस बारे में सोमवार को लेजिस्लेटिव असेंबली के स्पीकर को एक लेटर लिखेंगे। कुल 35 सिविल और माइनॉरिटी ऑर्गनाइज़ेशन ने बिल का विरोध किया है। एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ ने बिल की आलोचना करते हुए कहा कि यह प्राइवेसी, धर्म की आज़ादी और फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन करता है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ ने कहा कि धार्मिक आज़ादी का अधिकार इसमें धर्म बदलने का अधिकार भी शामिल है। बिल का ड्राफ्ट बनाने के लिए पिछले साल पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी। प्रस्तावित कानून के अनुसार, धर्म बदलने से पहले 60 दिन का नोटिस देना ज़रूरी होगा, इस दौरान आपत्ति जताई जा सकती है और पुलिस जांच भी की जा सकती है। धर्म बदलने के मकसद से की गई शादियों को गैर-कानूनी माना जाएगा। बिल में गैर-कानूनी धर्म बदलने में शामिल संस्थाओं या लोगों के लिए सात साल की जेल और 5 लाख रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है।
राजनीति
प्रधानमंत्री देश की जनता को लेकर चिंतित, तेल-गैस की नहीं होगी किल्लतः संजय सरावगी

पटना, 14 मार्च : बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने ईरान द्वारा संघर्ष के बीच दो भारतीय एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने और राज्यसभा चुनाव के लिए हुई बैठक पर टिप्पणी की।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “प्रधानमंत्री यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि आम लोगों को गैस या तेल की कमी का सामना न करना पड़े। युद्ध शुरू होने के लगभग 15 दिन बाद भी प्रधानमंत्री देश की जनता के बारे में चिंतित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपदा को अवसर में बदलना चाहते हैं, इसलिए देशवासियों को दिक्कत नहीं होगी।”
इसके पहले 13 मार्च को संजय सरावगी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बातचीत की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत आने वाले तेल और अन्य जरूरी सामान से भरे जहाजों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। विपक्ष जिस तरह से लोगों के बीच पैनिक पैदा करने की कोशिश कर रहा है, वह सही नहीं है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी कदम उठा रहा है। पिछले 5–6 दिनों में घरेलू गैस सिलेंडरों की मांग में बढ़ोतरी देखी गई है, लेकिन प्रशासन इस स्थिति को भी संभाल रहा है और लगातार कार्रवाई कर रहा है। देश में गैस की कोई कमी नहीं है और आम लोगों को एलपीजी की सुविधा मिलती रहेगी।”
राज्यसभा चुनाव को लेकर संजय सरावगी ने कहा, “कांग्रेस को अपने ही सदस्यों पर भरोसा नहीं है। एनडीए देश में सत्ता में है और विभिन्न दलों के विधायक एनडीए में शामिल होना और उसका समर्थन करना चाहते हैं।”
सड़क पर होली और नमाज के सवाल पर सरावगी ने कहा, “होली में लोग रंग-गुलाल खेलते हैं, इससे सड़क नहीं बंद होती है, जबकि सड़क पर नमाज अदा करने से मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। इस्लाम धर्म में ये कहीं भी यह जिक्र नहीं है कि सड़क जाम कर धर्म की इबादत करें।
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