राजनीति
पीएम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी, यति नरसिंहानंद गिरि के खिलाफ एफआईआर दर्ज
गाजियाबाद डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि के खिलाफ मंगलवार को एक एफआईआर दर्ज हुई है। एसपी ईरज राजा ने बताया है कि सोशल मीडिया में एक वीडियो सामने आया है। इसमें यति नरसिंहानंद गिरि प्रधानमंत्री व अन्य महापुरुषों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आपको बता दें कि यति नरसिंहानंद गिरि 2 दिन पहले एक ऑनलाइन कार्यक्रम में देशभर से जुड़े लोगों के सवालों के जवाब दे रहे थे।
दरअसल एक ऑनलाइन प्रोग्राम में यति नरसिंहानंद से सवाल पूछे जा रहे थे। जिसमें उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा ”मैं जयचंद की दोस्ती को चुनूंगा। पृथ्वीराज चौहान ने गद्दारी की है, जयचंद की कोई गलती नहीं है। पृथ्वीराज चौहान और जयचंद मौसेरे भाई थे। पृथ्वीराज चौहान कहीं भी लड़ने के लिए जाता था तो वो जयचंद को बुला लेता था। बाद में जयचंद की बेटी का ही पृथ्वीराज चौहान ने अपहरण कर लिया। जयचंद ने कहीं भी मुहम्मद गौरी की सहायता नहीं की। सारी गलती पृथ्वीराज चौहान की थी। अपने सारे राजपूतों को मार दिया। मुहम्मद गौरी को नहीं मारा, उसे बार-बार छोड़ता रहा। जयचंद की दोस्ती बेमिसाल दोस्ती है। जयचंद की गलती है कि वो हिंदुओं में पैदा हुआ। मानवीय गुणों के आधार पर जिस दिन फैसला करोगे, उस दिन पता चलेगा कि जयचंद कितना महान व्यक्ति था। इतिहास ने उसके साथ अन्याय किया है। ये गुलामों का देश है।”
एक और ऑनलाइन सवाल के जवाब में यति नरसिंहानंद गिरि ने कहा, ”जो आज मोदीजी कर रहे हैं, अपने समय में यही पृथ्वीराज चौहान ने किया था। किसी भी हिन्दू को जीवित नहीं छोड़ा था। किसी भी राजा की लड़की नहीं छोड़ी थी। सबकी लड़की उठा रहा था। यहां तक की भाई की लड़की उठा ली। राजपूतों के सारे योद्धाओं को मार दिया। लेकिन मुसलमान को मारा नहीं। इसे (गौरी को) बार-बार महान बनने के लिए छोड़ता रहा। आखिर में उसको मुसलमान ने ही मारा। यही गांधीजी ने किया। आज यही काम मोदी जी कर रहे हैं। और आज हम पृथ्वीराज चौहान और मोदीजी का गुणगान कर रहे हैं। जयचंद कितना महान व्यक्ति था, ये बाद में पता चलेगा। हिंदुओं को गुलामी की आदत है। ये वो देश है, जहां पर पृथ्वीराज चौहान, गांधी महान हो जाते हैं। नाथूराम गोडसे, वीर सावरकर को यहां पर गाली दी जाती है। व्यक्तिगत रूप से मैं जयचंद के साथ था और रहूंगा।”
ऑल्ट न्यूज के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर ने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को ट्वीट किया। इसके बाद सोशल मीडिया में यति नरसिंहानंद के इस विवादित बयान का वीडियो वायरल हो गया। गाजियाबाद के मसूरी थाने में इस संबंध में यति नरसिंहानंद गिरि के विरुद्ध मंगलवार को एक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
यति नरसिंहानंद गिरि ने इस बयान और वीडियो पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा, ‘मोहम्मद जुबैर नाम का जिहादी अपनी टीम के साथ उनके वीडियो को काट छांटकर इसलिए वायरल करता है कि लोग उत्तेजित होकर मेरी हत्या कर दें। मैं बहुत स्पष्ट करना चाहता हूं कि एक योद्धा के रूप में पृथ्वीराज चौहान का बहुत सम्मान करता हूं। पर बार-बार मोहम्मद गोरी जैसे दुर्दांत हत्यारे और लुटेरे को जीवित छोड़ने और अपने सगे छोटे मौसेरे भाई जयचंद की बेटी के अपहरण जैसे कार्यों का मैं कभी समर्थन नहीं कर सकता।
राष्ट्रीय समाचार
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने से गोरखा समाज को मिले नौकरी और उच्च शिक्षा के अवसर

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर गोरखा समुदाय ने जश्न मनाया और एक-दूसरे को केक खिलाकर बधाई दी। इसके साथ ही आर्टिकल 370 हटने के बाद हुए बदलावों पर बात की और अधिकारों के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया।
गोरखा समुदाय के लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह पक्का किया कि अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद उन्हें वे अधिकार मिलें जिनसे वे लंबे समय से वंचित थे। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था, उनके बच्चे डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं बनवा पाते थे और उन्हें सरकारी नौकरी पाने में भी मुश्किल होती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उन्हें आठ फीसदी आरक्षण दिया है।
समुदाय के लोगों ने कहा कि भले ही कुछ राजनीतिक पार्टियां 5 अगस्त को “काला दिवस” के तौर पर मना रही हैं, लेकिन उनका मानना है कि ये पार्टियां उनके जैसे समुदायों को भेदभाव के अंधेरे में वापस धकेलना चाहती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा कभी नहीं होगा और कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी पीएम पद पर हैं, वे उनका समर्थन करते रहेंगे और उन्हें भरोसा है कि वे ऐसी स्थिति को दोबारा नहीं आने देंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे यह पक्का करें कि ऐसी ताकतें जम्मू-कश्मीर में कभी वापस न आ पाएं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार भी जताया और कहा कि इस दिन लिए गए फैसलों ने उन्हें आजादी और बराबरी के अधिकार दिए हैं।
गोरखा समुदाय की करुणा क्षेत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद सबका साथ-सबका विकास के तहत काम किए जा रहे हैं। इसी पहल के तहत जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर हमें मुख्य धारा में लाया। विभिन्न राजनीतिक दलों ने गोरखा समुदाय के लिए पिछले 70 सालों में कुछ नहीं किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले 370 हटाया और हमारे समुदाय को स्थानीय निवासी बनाया और ओबीसी में 8 फीसदी आरक्षण दिया। डोमिसाइल मिलने के कारण हमें लोन मिल रहे हैं, जिससे युवा स्वरोजगार कर पा रहे हैं।”
गोरखा समुदाय के एक व्यक्ति ने कहा, “5 अगस्त 2019 हमेशा याद रहेगा। इस दिन हमें दोहरी खुशी मिली थी। 5 अगस्त को 2019 को धारा 370 हटने से हमें अधिकार मिला। वहीं, 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ।”
एक अन्य युवा मनीष अधिकारी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया है। धारा 370 हटने से गोरखा समाज को एक नई पहचान मिली है। इससे पहले करीब 70 सालों से हमें कोई पहचान नहीं मिली थी। जब हम नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते थे, तो हमारे समाज को नजरअंदाज किया जाता था। हमें बाहरी कहा जाता था जबकि हमारे पूर्वज 200 सालों से यहां रह रहे हैं लेकिन धारा 370 हटने के बाद हमारे समाज को अधिकार और पहचान मिली।”
मोनिका ने कहा, “धारा 370 हटने से काफी बदलाव हुआ है। अब हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित और अच्छा होगा क्योंकि हमें पहचान मिल गई है। अब हमारे बच्चों को उच्च शिक्षा और नौकरी के अवसर मिलेंगे।”
राजनीति
गृहमंत्री अमित शाह सदन का सम्मान करें और सवालों का जवाब दें : सुखदेव भगत

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी सरकार और आरएसएस को घेरा। सांसद ने गृहमंत्री से अपील की कि वे सदन का सम्मान करते हुए हाल ही हुए प्रमुख मुद्दों पर जनता को जवाब दें।
भाजपा द्वारा संसद की कार्यवाही न चलने देने का आरोप लगाए जाने पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत सिंह ने बातचीत में कहा, “देश जानना चाहता है कि अमित शाह सदन में कब आएंगे और जवाब देंगे। गृह मंत्री सदन का सम्मान करें और सवालों का समाधान करें। महत्वपूर्ण सदन चल रहा है लेकिन गृह मंत्री सदन से गायब हैं और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। अमित शाह अपनी पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होते हैं लेकिन देश की जनता को जवाब देने के लिए सदन में नहीं आ रहे हैं। इसलिए भारतीय जनता पार्टी को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि आरएसएस इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। इस पर सुखदेव भगत ने कहा, “मेरा मानना है कि आरएसएस आज भी हीनभावना से ग्रस्त है। आजादी की लड़ाई में पूरे देश ने हिस्सा लिया था और समाज के हर वर्ग के लोगों ने अपने-अपने तरीके से ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। हालांकि, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान आरएसएस अंग्रेजों के साथ खड़ा था। जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या हुई, तो आरएसएस से जुड़े लोग सीधे तौर पर उसमें शामिल पाए गए थे। उन्होंने हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, कभी भी अपने मुख्यालय पर इसे नहीं फहराया और कभी भी संविधान को सच्चे मन से स्वीकार नहीं किया।”
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बयान पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “निश्चित रूप से उदयनिधि स्टालिन के कद को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि वे शब्दों के चयन में संयम बरतेंगे। दूसरी बात, उन्हें नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए। खासकर महिलाओं पर अनुचित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए क्योंकि ये राजनीतिक मर्यादा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में नकली पनीर पर एक साल का प्रतिबंध, एफडीए ने शुरू की सख्त कार्रवाई

खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एनालॉग या नकली (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएस एक्ट), 2006 की धारा 30(2)(ए) के साथ धारा 18 और 29 के तहत जारी किया गया है।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में जारी आदेश का असर होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सर्विस और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। यह कदम महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा विधायक विक्रम पचपुते द्वारा राज्य में बढ़ते सिंथेटिक पनीर के कारोबार का मुद्दा बार-बार उठाने के बाद उठाया गया है।
विधायक विक्रम पचपुते ने इस फैसले का स्वागत करते हुए एफडीए आयुक्त की सराहना की और कहा, ”यह कदम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र भर में एफडीए की निरीक्षण टीमें खाद्य कारोबारियों, आपूर्तिकर्ताओं और कैटरिंग कंपनियों पर अचानक छापेमारी करेंगी। नकली या एनालॉग पनीर रखने या परोसने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना, सामान जब्ती और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
आदेश के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में किसी भी प्रकार के नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, पैकिंग, थोक बिक्री, खुदरा बिक्री और बिक्री के लिए प्रदर्शित करने पर रोक लगा दी गई है। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान अब एनालॉग पनीर का उपयोग, तैयारी, भंडारण या किसी भी व्यंजन में परोस नहीं सकेंगे।
दूध से बने असली पनीर/छेना के निर्माताओं को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और डिस्प्ले) विनियम, 2020 का सख्ती से पालन करना होगा। बिना बैच नंबर, बिल या उचित पैकेजिंग के खुले पनीर की बिक्री पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इससे उत्पाद के स्रोत की पहचान करना मुश्किल होता है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफएसएस एक्ट की धाराओं 50, 51, 52, 55 और 59 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, उत्पाद जब्ती और गैर-अनुपालन वाले स्टॉक को नष्ट करने की कार्रवाई शामिल है।
एफडीए की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पनीर और डेयरी एनालॉग के 308 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 109 नमूने (35.4 प्रतिशत) राज्य के मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 79 नमूने घटिया गुणवत्ता वाले पाए गए, जबकि 30 नमूने असुरक्षित घोषित किए गए।
जांच में पाया गया कि कई मामलों में प्राकृतिक दूध वसा की जगह सस्ते वनस्पति तेल और गैर-दुग्ध वसा का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रयोगशाला जांच में ब्यूटायरो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग और आयोडीन वैल्यू जैसे मानकों में गड़बड़ी सामने आई।
एफडीए के अनुसार, एनालॉग पनीर में वह पोषण मूल्य नहीं होता जो असली दूध से बने पनीर में पाया जाता है, खासकर प्रोटीन की मात्रा कम होती है। इससे उन उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है जो शाकाहारी आहार में पनीर को प्रोटीन के प्रमुख स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
राज्य में एक साल तक निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद मिलावट और भ्रामक बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी। इसी कारण उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।
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